दुर्घटना
बस स्टैंड पर भीड़ भरा क्षेत्र था। एक युवक अपनी एक बैल वाली गाड़ी को ले जा रहा था। वाहनों का भारी शोर सुनकर बैल ने दौड़ लगानी शुरू कर दी। बैल गाड़ी को लेकर बैल एक सौ की स्पीड से सड़क पर दौडऩे लगा। देखते ही देखते शोर मच गया-बचो, बचो,बचो। तभी आगे से आ रहे एक बाइक पर अधेड़ को चपेट में ले लिया और बाइक को रौंदते हुए बैलगाड़ी आगे बढ़ी। एक अन्य बाइक पर आगे से आ रहे दो सवारों को चपेट में लिया और उनकी बाइक को भी रौंद डाला। यद्यपि तीनों ही जन चोटिल हो गए किंतु सौभाग्यवश अधिक चोट नहीं आई। बेचारे घायल कभी बैलगाड़ी को देखते तो कभी अपनी टूटी बाइक को किंतु करे क्या बिना नंबर की बैलगाड़ी थी। ऐसे में किसके विरुद्ध मामला दर्ज करवाए। परंतु लोगों की हंसी का का ठिकाना नहीं रहा। लोग हंसे जा रहे थे और बैल अपनी उसी रफ्तार से दौड़ते हुए सड़क के किनारे खेतों में जा घुसा। इस दुर्घटना की हर किसी की जुबान पर चर्चा थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बस स्टैंड पर भीड़ भरा क्षेत्र था। एक युवक अपनी एक बैल वाली गाड़ी को ले जा रहा था। वाहनों का भारी शोर सुनकर बैल ने दौड़ लगानी शुरू कर दी। बैल गाड़ी को लेकर बैल एक सौ की स्पीड से सड़क पर दौडऩे लगा। देखते ही देखते शोर मच गया-बचो, बचो,बचो। तभी आगे से आ रहे एक बाइक पर अधेड़ को चपेट में ले लिया और बाइक को रौंदते हुए बैलगाड़ी आगे बढ़ी। एक अन्य बाइक पर आगे से आ रहे दो सवारों को चपेट में लिया और उनकी बाइक को भी रौंद डाला। यद्यपि तीनों ही जन चोटिल हो गए किंतु सौभाग्यवश अधिक चोट नहीं आई। बेचारे घायल कभी बैलगाड़ी को देखते तो कभी अपनी टूटी बाइक को किंतु करे क्या बिना नंबर की बैलगाड़ी थी। ऐसे में किसके विरुद्ध मामला दर्ज करवाए। परंतु लोगों की हंसी का का ठिकाना नहीं रहा। लोग हंसे जा रहे थे और बैल अपनी उसी रफ्तार से दौड़ते हुए सड़क के किनारे खेतों में जा घुसा। इस दुर्घटना की हर किसी की जुबान पर चर्चा थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
केला
केला मूसा बलबिसियाना नाम से जाना जाता है। यह दुनिया का सबसे अधिक पेट भरने वाला फल है। कच्चा एवं पक्का दोनों रूपों में प्रयोग में लाया जाता है। घास जाति का पौधा होता है जो गलती पेड़ माना जाता है। यह एक झाड़ी होती है जिसका घास जाति में सबसे बड़ा फूल लगता है। भारत केले के उत्पादन में नंबर एक पर है।
इसमें 75 फीसदी पानी, 23 फीसदी कार्बोहाइड्रेट, तत्पश्चात प्रोटीन, वसा, पोटाशियम, विटामिन बी-6, विटामिन-सी, मैंगनीज इत्यादि पाए जाते हैं। कच्चा केला जहां सब्जी बनाने के काम आता ह...
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केला मूसा बलबिसियाना नाम से जाना जाता है। यह दुनिया का सबसे अधिक पेट भरने वाला फल है। कच्चा एवं पक्का दोनों रूपों में प्रयोग में लाया जाता है। घास जाति का पौधा होता है जो गलती पेड़ माना जाता है। यह एक झाड़ी होती है जिसका घास जाति में सबसे बड़ा फूल लगता है। भारत केले के उत्पादन में नंबर एक पर है।
इसमें 75 फीसदी पानी, 23 फीसदी कार्बोहाइड्रेट, तत्पश्चात प्रोटीन, वसा, पोटाशियम, विटामिन बी-6, विटामिन-सी, मैंगनीज इत्यादि पाए जाते हैं। कच्चा केला जहां सब्जी बनाने के काम आता ह...
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प्याज
होटल पर खाने में सलाद में मूली, सेब, खीरा परोसी जा रही थी। बड़े स्वाद से लोग खाना खा रहे थे। खाना खा रहे एक व्यक्ति ने वेटर से कहा-थोड़ी प्याज का सलाद लाना। वेटर झट से सेब काटकर सलाद के लिए लाया तो ग्राहक ने चकित होकर पूछा-भाई प्याज मांगी तो तुम सेब दे रहे हो? वेटर ने सामने लगे पोस्टर की ओर इशारा करते हुए कहा-देखो, होटल के बाहर पोस्टर पर स्पष्ट लिखा है कि होटल में प्याज सलाद में खाने वाले भोजन न करे। अदब से सेब का सलाद परोसा जाएगा।
वेटर ने कहा-एक किलो प्याज में तीन किलो सेब आ सकते हैं तो फिर प्याज खाकर क्या अधिक बलवान बनना है? सेब खाने से मुंह से बदबू भी नहीं आएगी और सम्मान भी बढ़ेगा, ऐसे में सलाद मेें सेब खाओ। कहो तो ओर ला दू?
वेटर की बात सुनकर ग्राहक मौन हो गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
होटल पर खाने में सलाद में मूली, सेब, खीरा परोसी जा रही थी। बड़े स्वाद से लोग खाना खा रहे थे। खाना खा रहे एक व्यक्ति ने वेटर से कहा-थोड़ी प्याज का सलाद लाना। वेटर झट से सेब काटकर सलाद के लिए लाया तो ग्राहक ने चकित होकर पूछा-भाई प्याज मांगी तो तुम सेब दे रहे हो? वेटर ने सामने लगे पोस्टर की ओर इशारा करते हुए कहा-देखो, होटल के बाहर पोस्टर पर स्पष्ट लिखा है कि होटल में प्याज सलाद में खाने वाले भोजन न करे। अदब से सेब का सलाद परोसा जाएगा।
वेटर ने कहा-एक किलो प्याज में तीन किलो सेब आ सकते हैं तो फिर प्याज खाकर क्या अधिक बलवान बनना है? सेब खाने से मुंह से बदबू भी नहीं आएगी और सम्मान भी बढ़ेगा, ऐसे में सलाद मेें सेब खाओ। कहो तो ओर ला दू?
वेटर की बात सुनकर ग्राहक मौन हो गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
दानी
चारों ओर शोर मचा था कि दानी महाराज आ गए। लोग उनसे मिल रहे थे कि उन्हें कुछ देकर जाएंगे। सभी को दानी महाराज कुछ न कुछ दे रहे थे कि तभी एक ठंड में कांपते हुए बूढ़ी आई और दानी महाराज के पास जाकर चाय पिलाने की प्रार्थना की। पास खड़े लोगों ने बूढ़ी को धक्के देने शुरू कर दिए। दानी महाराज उस बुढिय़ा को देख रहा था किंतु मुख से एक शब्द भी नहीं निकला। बुढिय़ा को धक्के दे देकर दूर भेज दिया। बुढिय़ा सर्दी में कांपते हुए कहने लगी-वाह दानी महाराज! आप तो सचमुच दानी हो जो एक चाय का कप तक नहीं पिला सकते। कांपती हुई बुढिय़ा आगे बढ़ गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
चारों ओर शोर मचा था कि दानी महाराज आ गए। लोग उनसे मिल रहे थे कि उन्हें कुछ देकर जाएंगे। सभी को दानी महाराज कुछ न कुछ दे रहे थे कि तभी एक ठंड में कांपते हुए बूढ़ी आई और दानी महाराज के पास जाकर चाय पिलाने की प्रार्थना की। पास खड़े लोगों ने बूढ़ी को धक्के देने शुरू कर दिए। दानी महाराज उस बुढिय़ा को देख रहा था किंतु मुख से एक शब्द भी नहीं निकला। बुढिय़ा को धक्के दे देकर दूर भेज दिया। बुढिय़ा सर्दी में कांपते हुए कहने लगी-वाह दानी महाराज! आप तो सचमुच दानी हो जो एक चाय का कप तक नहीं पिला सकते। कांपती हुई बुढिय़ा आगे बढ़ गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
फैशन
बुजुर्ग की नजर एक युवक पर पड़ी जिसकी पेंट फटी पुरानी सी नजर आई। पेंट पर थेगली सी लगी हुई थी। यही नहीं शर्ट भी कटी फटी सी थी। बुजुर्ग ने पूछा-बेटा, कुछ गरीब परिवार के लगते हो? तुम्हारे कपड़ों को देखकर कुत्ते भी पीछे लग जाएंगे।
युवक ने उत्तर दिया-बाबा, मेरे पिता जी, प्रतिमाह दो लाख रुपये जक कमा लेते हैं और मां भी एक लाख रुपये कमा लेती है। मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है।
...तो फिर, बुजुर्ग ने बात को बीच में काटते हुए कहा-ये कपड़े थेगली लगे हुए, कटे फटे क्यों पहन रहा ह...
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बुजुर्ग की नजर एक युवक पर पड़ी जिसकी पेंट फटी पुरानी सी नजर आई। पेंट पर थेगली सी लगी हुई थी। यही नहीं शर्ट भी कटी फटी सी थी। बुजुर्ग ने पूछा-बेटा, कुछ गरीब परिवार के लगते हो? तुम्हारे कपड़ों को देखकर कुत्ते भी पीछे लग जाएंगे।
युवक ने उत्तर दिया-बाबा, मेरे पिता जी, प्रतिमाह दो लाख रुपये जक कमा लेते हैं और मां भी एक लाख रुपये कमा लेती है। मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है।
...तो फिर, बुजुर्ग ने बात को बीच में काटते हुए कहा-ये कपड़े थेगली लगे हुए, कटे फटे क्यों पहन रहा ह...
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चापलूस
गली बन रही थी। गली में कुछ लोग खड़े नाली को बनाने के निर्देश दे रहे थे जैसे कि वे ठेकेदार हो लेकिन पता चला कि ठेकेदार अभी आएंगे। ज्योंही ठेकेदार आए तो दो तीन लोग उसकी चापलूसी करने लगे। ये लोग दिखावा तो कर रहे थे जैसे वे गांव की गली के निर्माण में हितैषी की भूमिका निभा रहे हैं। वे चापलूसी करके कभी ठेकेदार को अपने घर ले जाते चाय पिलाते तो कभी नाली बनाने वालों को चाय पिलाते। इधर-उधर की बातों में उलझाए रखते। देखते ही देखते ठेकेदार द्वारा बनवाया हुआ मसाला अपने घर में टूट ...
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गली बन रही थी। गली में कुछ लोग खड़े नाली को बनाने के निर्देश दे रहे थे जैसे कि वे ठेकेदार हो लेकिन पता चला कि ठेकेदार अभी आएंगे। ज्योंही ठेकेदार आए तो दो तीन लोग उसकी चापलूसी करने लगे। ये लोग दिखावा तो कर रहे थे जैसे वे गांव की गली के निर्माण में हितैषी की भूमिका निभा रहे हैं। वे चापलूसी करके कभी ठेकेदार को अपने घर ले जाते चाय पिलाते तो कभी नाली बनाने वालों को चाय पिलाते। इधर-उधर की बातों में उलझाए रखते। देखते ही देखते ठेकेदार द्वारा बनवाया हुआ मसाला अपने घर में टूट ...
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आंसू और मुस्कान
घर में बुजुर्ग अंतिम सांसे गिन रहा था। उसे कैंसर ने घेर लिया था। डाक्टरों ने उनके परिजनों ने घर ले जाकर सेवा करने की बात कही थी। बुजुर्ग को शोर नहीं सुहा रहा था किंतु पड़ोस में लड़का क्या हुआ मारे खुशी के कहीं डीजे का शोर तो कहीं थाल बजाकर लोगों को सुनाया जा रहा था। मरीज बार बार शोर से कराह रहा था। उनके परिजन पड़ोसी से माइक धीरे चलाने की बात कह रहे थे किंतु वो कब मानने वाले थे। एक ओर आंसू तो दूसरी ओर खुशी का माहौल था। माइक के शोर से तंग आया बुजुर्ग कराह रहा था। कोई उसकी सुनने वाला नहीं था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
घर में बुजुर्ग अंतिम सांसे गिन रहा था। उसे कैंसर ने घेर लिया था। डाक्टरों ने उनके परिजनों ने घर ले जाकर सेवा करने की बात कही थी। बुजुर्ग को शोर नहीं सुहा रहा था किंतु पड़ोस में लड़का क्या हुआ मारे खुशी के कहीं डीजे का शोर तो कहीं थाल बजाकर लोगों को सुनाया जा रहा था। मरीज बार बार शोर से कराह रहा था। उनके परिजन पड़ोसी से माइक धीरे चलाने की बात कह रहे थे किंतु वो कब मानने वाले थे। एक ओर आंसू तो दूसरी ओर खुशी का माहौल था। माइक के शोर से तंग आया बुजुर्ग कराह रहा था। कोई उसकी सुनने वाला नहीं था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
आंवला
आंवला अमृतमय फल देने वाला एक पेड़ है जिसे फिलांथस एंब्लिका कहते हैं। इसे भारतीय गुजबेरी नाम से भी जाना जाता है। अमृतफल अमलकी आदि नामों से भी से पुकारते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम एमबीए ऑफिसिनालिस है। आयुर्वेद में इसे सर्वोत्कृष्ट औषधि माना गया है। आमला स्मरण शक्ति बढ़ाने, कांति, तेज, बल दायक औषधि है। जहां इसके पत्ते भी मुंह के छाले आदि के रोग दूर करने के काम आते हैं वही सूखे फलों से आंखें धोई जाती है। सूखे फल खूनी अतिसार, बवासीर आदि रोगों में काम आता है। यह खांसी, श्वास र...
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आंवला अमृतमय फल देने वाला एक पेड़ है जिसे फिलांथस एंब्लिका कहते हैं। इसे भारतीय गुजबेरी नाम से भी जाना जाता है। अमृतफल अमलकी आदि नामों से भी से पुकारते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम एमबीए ऑफिसिनालिस है। आयुर्वेद में इसे सर्वोत्कृष्ट औषधि माना गया है। आमला स्मरण शक्ति बढ़ाने, कांति, तेज, बल दायक औषधि है। जहां इसके पत्ते भी मुंह के छाले आदि के रोग दूर करने के काम आते हैं वही सूखे फलों से आंखें धोई जाती है। सूखे फल खूनी अतिसार, बवासीर आदि रोगों में काम आता है। यह खांसी, श्वास र...
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शानदार मौत
बुजुर्ग मन बहलाने के लिए ताश खेल रहा था कि उनकी पत्नी भैंस का दूध दोह रही थी। भैंस को घरेलू मक्खी ने क्या काटा भैंस ने लात जड़़ दी जिसके चलते दूध बिखर गया। औरत मालती ने क्रोध आया और अपने पत्नी पर गरजते हुए कहा-तुम घर आना, तेरी वो मंजाई की जाएगी कि जीवनभर याद रहेगा। बुजुर्ग परेशान हो उठा। ताश पीटना बंद हो गया। बुजुर्ग डर के मारे घर की ओर बढ़ रहा था कि रास्ते में ठोकर खाकर गिर पड़ा। गिरते ही उसके प्राण पखेरू उड़ गए। जिसने भी उनकी मौत के बारे में सुना बस यही कहा कि ऐसी शानदार मौत किसी को भी नहीं मिलती। वाह! रामू तुमने तो कमाल कर दिया। जब उसकी पत्नी ने मृत्यु की बात सुनी तो एक आंसू तक आंख में नहीं आया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बुजुर्ग मन बहलाने के लिए ताश खेल रहा था कि उनकी पत्नी भैंस का दूध दोह रही थी। भैंस को घरेलू मक्खी ने क्या काटा भैंस ने लात जड़़ दी जिसके चलते दूध बिखर गया। औरत मालती ने क्रोध आया और अपने पत्नी पर गरजते हुए कहा-तुम घर आना, तेरी वो मंजाई की जाएगी कि जीवनभर याद रहेगा। बुजुर्ग परेशान हो उठा। ताश पीटना बंद हो गया। बुजुर्ग डर के मारे घर की ओर बढ़ रहा था कि रास्ते में ठोकर खाकर गिर पड़ा। गिरते ही उसके प्राण पखेरू उड़ गए। जिसने भी उनकी मौत के बारे में सुना बस यही कहा कि ऐसी शानदार मौत किसी को भी नहीं मिलती। वाह! रामू तुमने तो कमाल कर दिया। जब उसकी पत्नी ने मृत्यु की बात सुनी तो एक आंसू तक आंख में नहीं आया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
प्यार
आज रमेश की आंखें डबडबा गई जब उसकी नजर अपनी मां की तस्वीर पर पड़ी जो बचपन में उन्हें छोड़कर स्वर्गवासी बन गई थी। आज रमेश के पास धन दौलत की कमी नहीं थी बस कमी थी तो मां की जो उन्हें प्यार एवं आशीर्वाद दे सके। आज जब उसकी नजर उन बच्चों पर पड़ी जो उधर से अपनी मां के साथ गुजर रहे थे तो उसे सब धन दौलत बेकार नजर आ रही थी। बस मां की याद आ रही थी। काश! उनकी मां आकर उन्हें गले से लगा ले तो रमेश सारा धन दौलत न्यौछावर करने को तैयार था। किंतु आज वो अकेला एक नदी के किनारे सोच रहा था कि उनकी किस्मत में मां का आशीर्वाद एवं प्यार नहीं है। मां की कमी सता रही थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
आज रमेश की आंखें डबडबा गई जब उसकी नजर अपनी मां की तस्वीर पर पड़ी जो बचपन में उन्हें छोड़कर स्वर्गवासी बन गई थी। आज रमेश के पास धन दौलत की कमी नहीं थी बस कमी थी तो मां की जो उन्हें प्यार एवं आशीर्वाद दे सके। आज जब उसकी नजर उन बच्चों पर पड़ी जो उधर से अपनी मां के साथ गुजर रहे थे तो उसे सब धन दौलत बेकार नजर आ रही थी। बस मां की याद आ रही थी। काश! उनकी मां आकर उन्हें गले से लगा ले तो रमेश सारा धन दौलत न्यौछावर करने को तैयार था। किंतु आज वो अकेला एक नदी के किनारे सोच रहा था कि उनकी किस्मत में मां का आशीर्वाद एवं प्यार नहीं है। मां की कमी सता रही थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
मिर्च
मिर्च को कैप्सिकम एनम नाम से जाना जाता है। एनम का अर्थ होता है वार्षिक अर्थात मिर्च का पौधा प्राय एक साल तक जीवित रहता है किंतु सर्दी से बच जाए तो यह कई वर्षों तक जीवित रह सकती है। मिर्च हरी,काली,लाल, पीली कई रंगों के कारण होता है। वास्तव में कैरोटीन पदार्थ के रंग बदल लेने से मिर्च का रंग लाल,पीला,हरा आदि मिलता है। मिर्च प्राय शिमला, लंबी मिर्च, ठिगनी, मोटी मिर्च आदि कई प्रकार की होती हैं। शिमला मिर्च खाने से वजन घटता है वही गठिया, कैंसर रोग समाप्त हो जाता है। यह आयरन...
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मिर्च को कैप्सिकम एनम नाम से जाना जाता है। एनम का अर्थ होता है वार्षिक अर्थात मिर्च का पौधा प्राय एक साल तक जीवित रहता है किंतु सर्दी से बच जाए तो यह कई वर्षों तक जीवित रह सकती है। मिर्च हरी,काली,लाल, पीली कई रंगों के कारण होता है। वास्तव में कैरोटीन पदार्थ के रंग बदल लेने से मिर्च का रंग लाल,पीला,हरा आदि मिलता है। मिर्च प्राय शिमला, लंबी मिर्च, ठिगनी, मोटी मिर्च आदि कई प्रकार की होती हैं। शिमला मिर्च खाने से वजन घटता है वही गठिया, कैंसर रोग समाप्त हो जाता है। यह आयरन...
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भगवान
क्षीण शरीर,चेहरे पर झुरियां, कांपते हुए हाथ, डबडबाई आंखें, हाथ में बेंत लेकर आगे बढ़ रही थी। बुड़बुड़ा रही थी कि अपने पूरे जीवन में मेहनत कर जिस पुत्र को पाला उसी ने घर से निकाल दिया। यह तो ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे एक गाय का मीठा दूध तब तक पीते रहे जब तक कि वो दूध देती हो और ज्योंही दूध देना बंद किया, उसे घर से निकाल दिया जाए। अब मैं कहां जाऊं? भगवान मुझ पर तरस खा। बुजुर्ग महिला अभी सोच ही रही थी कि पास खड़े एक भद्र जन की दृष्टि उस पर पड़ी और हाथ पकड़कर कहा-माता जी, ...
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क्षीण शरीर,चेहरे पर झुरियां, कांपते हुए हाथ, डबडबाई आंखें, हाथ में बेंत लेकर आगे बढ़ रही थी। बुड़बुड़ा रही थी कि अपने पूरे जीवन में मेहनत कर जिस पुत्र को पाला उसी ने घर से निकाल दिया। यह तो ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे एक गाय का मीठा दूध तब तक पीते रहे जब तक कि वो दूध देती हो और ज्योंही दूध देना बंद किया, उसे घर से निकाल दिया जाए। अब मैं कहां जाऊं? भगवान मुझ पर तरस खा। बुजुर्ग महिला अभी सोच ही रही थी कि पास खड़े एक भद्र जन की दृष्टि उस पर पड़ी और हाथ पकड़कर कहा-माता जी, ...
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गोखरू
गोखरू एक शाक के रूप में असिंचित भूमि पर पर्याप्त मात्रा में मिलता है। यह दो रूपों में पाया जाता है बड़ा गोखरू तथा छोटा गोखरू। छोटा गोखरू गांवो में भाखरी, भाखड़ी नामों से जाना जाता है। यह पशुओं विशेषक ऊंट को खिलाने के काम आता है किंतु जब पक जाता है तो फल पर कांटे आ जाते है।
वहीं बड़ा गोखरू अति उपयोगी माना जाता है किंतु छोटा गोखरू भी किसी प्रकार से बड़े गोखरू से कम नहीं है। गोखरू का वैज्ञानिक रूट्रायबलर ट्रिब्यूलस टेरेस्ट्रिस नाम से जाना जाता है। गोक्षुर नाम से भी जाना ...
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गोखरू एक शाक के रूप में असिंचित भूमि पर पर्याप्त मात्रा में मिलता है। यह दो रूपों में पाया जाता है बड़ा गोखरू तथा छोटा गोखरू। छोटा गोखरू गांवो में भाखरी, भाखड़ी नामों से जाना जाता है। यह पशुओं विशेषक ऊंट को खिलाने के काम आता है किंतु जब पक जाता है तो फल पर कांटे आ जाते है।
वहीं बड़ा गोखरू अति उपयोगी माना जाता है किंतु छोटा गोखरू भी किसी प्रकार से बड़े गोखरू से कम नहीं है। गोखरू का वैज्ञानिक रूट्रायबलर ट्रिब्यूलस टेरेस्ट्रिस नाम से जाना जाता है। गोक्षुर नाम से भी जाना ...
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सौतेली मां
बच्चा जोर जोर से खाने के लिए चिल्ला रहा था किंतु उसके सामने खड़ी महिला उसे सता रही थी। कभी पीटती तो कभी डांटती। बेचारा भूखो बालक सो गया। सारे नजारे को देख रहे रामू ने अपनी पत्नी से पूछा-यह औरत अपने बच्चे को बहुत पीट रही थी। अक्सर पीटती रहती है। आखिर इतनी बेरहम क्यों बनी हुई है? रामू की पत्नी ने अश्रुपूरित नेत्रों से जवाब दिया-भगवान, किसी को सौतेली मां न दे। भगवान श्रीराम ने भी सौतेली मां द्वारा दिया वनवास झेला था। रामू की पत्नी ने उसे बताया कि यह बच्चा जब तीन वर्ष का था तब इसकी मां छोड़कर मर गई। इसके पिता धर्मा ने अपनी खुशी के लिए शादी तो कर ली किंतु बच्चे के लिए एक विपत्ति मोल ले ली। यह औरत तो क्या कोई भी जग की सौतेली मां इस प्रकार का ही व्यवहार करती है। अपनी पत्नी की बातें सुनकर रामू कभी बच्चे को देखता तो कभी उसकी सौतेली मां को।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**
बच्चा जोर जोर से खाने के लिए चिल्ला रहा था किंतु उसके सामने खड़ी महिला उसे सता रही थी। कभी पीटती तो कभी डांटती। बेचारा भूखो बालक सो गया। सारे नजारे को देख रहे रामू ने अपनी पत्नी से पूछा-यह औरत अपने बच्चे को बहुत पीट रही थी। अक्सर पीटती रहती है। आखिर इतनी बेरहम क्यों बनी हुई है? रामू की पत्नी ने अश्रुपूरित नेत्रों से जवाब दिया-भगवान, किसी को सौतेली मां न दे। भगवान श्रीराम ने भी सौतेली मां द्वारा दिया वनवास झेला था। रामू की पत्नी ने उसे बताया कि यह बच्चा जब तीन वर्ष का था तब इसकी मां छोड़कर मर गई। इसके पिता धर्मा ने अपनी खुशी के लिए शादी तो कर ली किंतु बच्चे के लिए एक विपत्ति मोल ले ली। यह औरत तो क्या कोई भी जग की सौतेली मां इस प्रकार का ही व्यवहार करती है। अपनी पत्नी की बातें सुनकर रामू कभी बच्चे को देखता तो कभी उसकी सौतेली मां को।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**
प्याज(एलियम सेपा)
प्याज एक ऐसी सब्जी है जिसका कंद प्रयोग किया जाता है। साल में दो बार उगाई जाती है। प्याज बहुत पुराने समय से उगाई जा रही है। पूरे संसार के करीब 150 देश इसको प्रयोग करते हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में एलियम सेपा नाम से जाना जाता है। 1998 में भारत में सरकार गिराने में भी इसका अहम रोल था। प्याज के अंदर पत्ते भोजन इक_ा करते और फूल जाते हैं इसलिए प्याज का जो भाग खाया जाता है वे पत्ते होते हैं। प्याज एक शल्ककंद हैं। इसका स्वाद तीखा होता है।
प्याज में उसको कच्चा, सब्जी ...
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प्याज एक ऐसी सब्जी है जिसका कंद प्रयोग किया जाता है। साल में दो बार उगाई जाती है। प्याज बहुत पुराने समय से उगाई जा रही है। पूरे संसार के करीब 150 देश इसको प्रयोग करते हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में एलियम सेपा नाम से जाना जाता है। 1998 में भारत में सरकार गिराने में भी इसका अहम रोल था। प्याज के अंदर पत्ते भोजन इक_ा करते और फूल जाते हैं इसलिए प्याज का जो भाग खाया जाता है वे पत्ते होते हैं। प्याज एक शल्ककंद हैं। इसका स्वाद तीखा होता है।
प्याज में उसको कच्चा, सब्जी ...
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दोस्ती
दोनों गहरे दोस्त थे जिनकी चर्चाएं दूर दराज तक थी। नातू अपने दोस्त राजू से इसलिए दोस्ती कर रखी थी कि राजू हर स्थान पर नातू की मदद करता था। नातू अपने दोस्त को नहीं समझ सका और चरित्रवान समझते हुए अपनी पुत्री का ट्यूशन लगा रखा था। राजू दोस्ती की आड़ में अपने दोस्त की पुत्री पर बुरी नजर रखता था। एक दिन जब नातू की पुत्री ट्यूशन करने गई तो मौका देख राजू ने मुंह काला कर दिया। घटना का भांडा फूटते ही राजू की थू-थू होने ली। राजू के चरित्र का उस वक्त पता चला जब उसने अपने बाप की धुनाई कर डाली थी। राजू की गांव में यह इमेज थी कि कोई उससे मिलना तो दूर उसके घर किसी सुख दुख में भी नहीं जाता था। लोग दोस्तों की बात चलती तो बस यही कहते हैं वो कभी राजू और नातू जैसे दोस्त तो नहीं हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
दोनों गहरे दोस्त थे जिनकी चर्चाएं दूर दराज तक थी। नातू अपने दोस्त राजू से इसलिए दोस्ती कर रखी थी कि राजू हर स्थान पर नातू की मदद करता था। नातू अपने दोस्त को नहीं समझ सका और चरित्रवान समझते हुए अपनी पुत्री का ट्यूशन लगा रखा था। राजू दोस्ती की आड़ में अपने दोस्त की पुत्री पर बुरी नजर रखता था। एक दिन जब नातू की पुत्री ट्यूशन करने गई तो मौका देख राजू ने मुंह काला कर दिया। घटना का भांडा फूटते ही राजू की थू-थू होने ली। राजू के चरित्र का उस वक्त पता चला जब उसने अपने बाप की धुनाई कर डाली थी। राजू की गांव में यह इमेज थी कि कोई उससे मिलना तो दूर उसके घर किसी सुख दुख में भी नहीं जाता था। लोग दोस्तों की बात चलती तो बस यही कहते हैं वो कभी राजू और नातू जैसे दोस्त तो नहीं हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
कचरी
कचरी एक जंगली बेल होती है जिसके पत्ते कड़वे होते हैं वहीं पीले फूल लगते हैं। प्रारंभ में फल का स्वाद कड़वा होता हैं किंतु बाद में मधुर हो जाता है। इसे इंद्रायण, मृगाक्षी, काचरी आदि नामों से लोग पुकारते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम कुकुमिस प्यूबिसेंस हैं। यह बिगड़े हुए जुकाम, पित्त,कफ, कब्ज, प्रमेह आदि रोगों में लाभकारी है। पेट के रोगों के लिए इसका नाम सर्वोपरि है। लोगों कई प्रकार की पेट की बीमारियां पाई जाती है जिनको ठीक करने के लिए कचरी का प्रयोग किया जाता है। वास्तव में य...
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कचरी एक जंगली बेल होती है जिसके पत्ते कड़वे होते हैं वहीं पीले फूल लगते हैं। प्रारंभ में फल का स्वाद कड़वा होता हैं किंतु बाद में मधुर हो जाता है। इसे इंद्रायण, मृगाक्षी, काचरी आदि नामों से लोग पुकारते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम कुकुमिस प्यूबिसेंस हैं। यह बिगड़े हुए जुकाम, पित्त,कफ, कब्ज, प्रमेह आदि रोगों में लाभकारी है। पेट के रोगों के लिए इसका नाम सर्वोपरि है। लोगों कई प्रकार की पेट की बीमारियां पाई जाती है जिनको ठीक करने के लिए कचरी का प्रयोग किया जाता है। वास्तव में य...
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न्यौता
शक्ल सूरत से बिहार या उत्तर प्रदेश के लगने वाले दो युवक शादी समारोह के पंडाल में घुसने लगे तो द्वार पर खड़े मालिक ने पूछा- तुम कहां के हो और कौन हो? दोनों ने अपना परिचय बताया और कहा कि वे गांव के ही रहने वाले हैं। गेट पर खड़े बेहतरीन कपड़ों में सजे जन ने पूछा- क्या तुम्हें न्यौता दिया गया है? दोनों का एक साथ उत्तर दिया कि न्यौता तो नहीं मिला लेकिन खाने का जी करता है। इसलिए हम दोनों चल कर आ गए। गेट पर खड़े जन ने कड़ककर कहा-जब तुम्हें न्यौता ही नहीं मिला तो आए तो माल च...
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शक्ल सूरत से बिहार या उत्तर प्रदेश के लगने वाले दो युवक शादी समारोह के पंडाल में घुसने लगे तो द्वार पर खड़े मालिक ने पूछा- तुम कहां के हो और कौन हो? दोनों ने अपना परिचय बताया और कहा कि वे गांव के ही रहने वाले हैं। गेट पर खड़े बेहतरीन कपड़ों में सजे जन ने पूछा- क्या तुम्हें न्यौता दिया गया है? दोनों का एक साथ उत्तर दिया कि न्यौता तो नहीं मिला लेकिन खाने का जी करता है। इसलिए हम दोनों चल कर आ गए। गेट पर खड़े जन ने कड़ककर कहा-जब तुम्हें न्यौता ही नहीं मिला तो आए तो माल च...
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बथुआ
बथुआ एक शाक है जिसमें विटामिन ए की अत्यधिक मात्रा पाई जाती है। बथुआ एक रबी फसल के साथ उगने वाला शाक है जिसे चिनोपोडियम एल्बम नाम से जाना जाता है। यह देखने में एक छोटा हरा पौधा दिखता है किंतु अति लाभकारी और बीमारियों को दूर करता है। इसे चील भी का कहते हैं। बथुआ साग एवं सब्जी दोनों रूपों में प्रयोग किया जाता है। इसकी पत्तियों में सुगंधित तेल, पोटाश तथा उपयोगी पदार्थ पाए जाते जो वात, पित्त और कफ रोगों को शांत करते हैं। पेट के कीड़ों का नाश करता है। आंखों की रोशनी बढ़ाता ...
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बथुआ एक शाक है जिसमें विटामिन ए की अत्यधिक मात्रा पाई जाती है। बथुआ एक रबी फसल के साथ उगने वाला शाक है जिसे चिनोपोडियम एल्बम नाम से जाना जाता है। यह देखने में एक छोटा हरा पौधा दिखता है किंतु अति लाभकारी और बीमारियों को दूर करता है। इसे चील भी का कहते हैं। बथुआ साग एवं सब्जी दोनों रूपों में प्रयोग किया जाता है। इसकी पत्तियों में सुगंधित तेल, पोटाश तथा उपयोगी पदार्थ पाए जाते जो वात, पित्त और कफ रोगों को शांत करते हैं। पेट के कीड़ों का नाश करता है। आंखों की रोशनी बढ़ाता ...
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फीस
भीड़ में बच्ची हर इंसान से महज एक एक रुपया मांग रही थी। कोई दो देना चाहे तो नहीं लेती था। पास खड़े एक बुजुर्ग ने पूछा कि वो एक रुपया ही क्यों ले रही है?
बच्ची ने जवाब दिया-उनकी एक दोस्त अति गरीब है किंतु पढऩे में अति चतुर है। उनके माता पिता फीस भरने में असमर्थ हैं किंतु मेरे माता पिता भी गरीब है। ऐसे में मैंने सोचा कि हर इंसान से एक एक रुपया लेकर दोस्त की फीस भरी जा सकती है। एक रुपये सभी ले सकते हैं किंतु दो रुपये या अधिक लेना असमानता को दर्शाता है। बच्ची का जवाब सुनकर बुजुर्ग की आंखों में आंसू आ गए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**
भीड़ में बच्ची हर इंसान से महज एक एक रुपया मांग रही थी। कोई दो देना चाहे तो नहीं लेती था। पास खड़े एक बुजुर्ग ने पूछा कि वो एक रुपया ही क्यों ले रही है?
बच्ची ने जवाब दिया-उनकी एक दोस्त अति गरीब है किंतु पढऩे में अति चतुर है। उनके माता पिता फीस भरने में असमर्थ हैं किंतु मेरे माता पिता भी गरीब है। ऐसे में मैंने सोचा कि हर इंसान से एक एक रुपया लेकर दोस्त की फीस भरी जा सकती है। एक रुपये सभी ले सकते हैं किंतु दो रुपये या अधिक लेना असमानता को दर्शाता है। बच्ची का जवाब सुनकर बुजुर्ग की आंखों में आंसू आ गए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**
बेशरम या बेहया पौधा
जग में इंसान ही बेहया या बेशरम नहीं कहलाते अपितु प्रकृति के कुछ पौधे विशिष्ट नामों से जाने जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाला विलायती आक जिसे बेहया या बेशरम पौधा कहते हैं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में जीवित रह सकता है। बड़े बड़े फूल होते हैं जो नदी, जोहड़, तालाब के किनारे मिल सकता है। यह पौधा बाड़ बनाने या जलाने के काम आता है बाकी किसी भी काम का नहीं है, लोग इसे काटना चाहते हैं किंतु अगर जड़ भी बच गई तो फिर से पौधा बन जाता है। इसलिए इसे बेशरम पौधा भी कहते हैं। होशियार सिंह,कनीना,हरियाणा**
जग में इंसान ही बेहया या बेशरम नहीं कहलाते अपितु प्रकृति के कुछ पौधे विशिष्ट नामों से जाने जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाला विलायती आक जिसे बेहया या बेशरम पौधा कहते हैं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में जीवित रह सकता है। बड़े बड़े फूल होते हैं जो नदी, जोहड़, तालाब के किनारे मिल सकता है। यह पौधा बाड़ बनाने या जलाने के काम आता है बाकी किसी भी काम का नहीं है, लोग इसे काटना चाहते हैं किंतु अगर जड़ भी बच गई तो फिर से पौधा बन जाता है। इसलिए इसे बेशरम पौधा भी कहते हैं। होशियार सिंह,कनीना,हरियाणा**
बेचारा
बुजुर्ग की पत्नी एक पुत्र को छोड़कर चल बसी। 20 वर्ष हो चुके अकेला अनपढ़ बुजुर्ग दिनभर मजदूरी करता और अनाज की बोरी पीठ पर लादकर दूर डालने के लिए जाता। शाम को थका हारा घर पहुंचता और अपने इकलौते पुत्र के लिए खाना बनाकर उसे पढऩे के लिए कहता। देर रात तक अपने पुत्र के पास बैठा रहता। देर रात तक जागने के कारण दिन में उसे नींद आती किंतु मजबूरन बच्चे के लिए पैसे कमाता ताकि वो पढ़ लिखकर महान बन सके। अगले दिन अभी उसने बोरी उठाई थी कि पैर फिसल गया और बुजुर्ग गिर गया, बोरी उसके ऊपर गिर गई। बुजुर्ग ने सुधबुध खो दी। अस्पताल ले जाया गया तो मौत हो गई। आज उनका पुत्र बेचारा बन गया। बच्चे की रो रोकर बुरी हालात हो गई। आज उसका जगत में कोई नहीं था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बुजुर्ग की पत्नी एक पुत्र को छोड़कर चल बसी। 20 वर्ष हो चुके अकेला अनपढ़ बुजुर्ग दिनभर मजदूरी करता और अनाज की बोरी पीठ पर लादकर दूर डालने के लिए जाता। शाम को थका हारा घर पहुंचता और अपने इकलौते पुत्र के लिए खाना बनाकर उसे पढऩे के लिए कहता। देर रात तक अपने पुत्र के पास बैठा रहता। देर रात तक जागने के कारण दिन में उसे नींद आती किंतु मजबूरन बच्चे के लिए पैसे कमाता ताकि वो पढ़ लिखकर महान बन सके। अगले दिन अभी उसने बोरी उठाई थी कि पैर फिसल गया और बुजुर्ग गिर गया, बोरी उसके ऊपर गिर गई। बुजुर्ग ने सुधबुध खो दी। अस्पताल ले जाया गया तो मौत हो गई। आज उनका पुत्र बेचारा बन गया। बच्चे की रो रोकर बुरी हालात हो गई। आज उसका जगत में कोई नहीं था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**





















































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