तेल
....इस बार कैरोसीन नहीं आया। अगली बार आना। राशन डिपो होल्डर ने गरीब बूढ़ी से जवाब दिया।
...लेकिन विगत माह भी आपका यही उत्तर था। तब भी आपने अगली बार आने को कहा था। दो माह से घर में खाना पकाने के लिए इधर उधर से लकड़ी इक_ी करनी पड़ रही है। सर्दी का मौसम है। मैं कहा जाऊं? बुजुर्ग महिला ने निराशा भरे शब्दों में कहा।
...तो फिर कहीं भी जाइये। चलो यहां से फूटो। आ जाते हैं सुबह सुबह समय बर्बाद करने। डिपो होल्डर ने क्रोधपूर्ण कहा।
महिला ने फिर हिम्मत करके कहा-लेकिन रामू तो तेल...
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....इस बार कैरोसीन नहीं आया। अगली बार आना। राशन डिपो होल्डर ने गरीब बूढ़ी से जवाब दिया।
...लेकिन विगत माह भी आपका यही उत्तर था। तब भी आपने अगली बार आने को कहा था। दो माह से घर में खाना पकाने के लिए इधर उधर से लकड़ी इक_ी करनी पड़ रही है। सर्दी का मौसम है। मैं कहा जाऊं? बुजुर्ग महिला ने निराशा भरे शब्दों में कहा।
...तो फिर कहीं भी जाइये। चलो यहां से फूटो। आ जाते हैं सुबह सुबह समय बर्बाद करने। डिपो होल्डर ने क्रोधपूर्ण कहा।
महिला ने फिर हिम्मत करके कहा-लेकिन रामू तो तेल...
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दुष्कर्म
सेठ जी कुछ खाने को मिलेगा। मैं दो दिनों से भूखी हूं। हाथ फैलाते हुए एक युवती ने खाने को मांगा।
युवती के फटे पुराने कपड़ों से उनका बदन नजर आ रहा था। जिस पर नजर पड़ते ही सेठ ने कहा-लो, बेहतर खाना और गर्मागर्म खाना तैयार है। मैं तो आप जैसी गरीबों की सेवा में लगा रहता हूं। आओ अंदर आओ।
ज्योंही गरीब युवती कमरे के अंदर प्रवेश किया, भूखे भेडिय़े की भांति सेठ युवती पर टूट पड़ा। गरीब, भूखी युवती चिल्लाने लगी किंतु दरिंदे ने एक झटके के साथ दुष्कर्म कर दिया। युवती रोते हुए कह रही थी-तू नीच और पापी है। रोटी मांगने वालों को हवस का शिकार बनाते हो। तेरा सत्यानाश होगा। रोती हुई युवती की कोई सुनने वाला नहीं था।
**होशियार सिंह, लेखक, कनीना, हरियाणा**
सेठ जी कुछ खाने को मिलेगा। मैं दो दिनों से भूखी हूं। हाथ फैलाते हुए एक युवती ने खाने को मांगा।
युवती के फटे पुराने कपड़ों से उनका बदन नजर आ रहा था। जिस पर नजर पड़ते ही सेठ ने कहा-लो, बेहतर खाना और गर्मागर्म खाना तैयार है। मैं तो आप जैसी गरीबों की सेवा में लगा रहता हूं। आओ अंदर आओ।
ज्योंही गरीब युवती कमरे के अंदर प्रवेश किया, भूखे भेडिय़े की भांति सेठ युवती पर टूट पड़ा। गरीब, भूखी युवती चिल्लाने लगी किंतु दरिंदे ने एक झटके के साथ दुष्कर्म कर दिया। युवती रोते हुए कह रही थी-तू नीच और पापी है। रोटी मांगने वालों को हवस का शिकार बनाते हो। तेरा सत्यानाश होगा। रोती हुई युवती की कोई सुनने वाला नहीं था।
**होशियार सिंह, लेखक, कनीना, हरियाणा**
कबड्डी
अंकल, अंकल। कल रविवार हैं आप हमें कबड्डी खिलाने आओगे ना? हम इंतजार करेंगे। बच्चों ने अंकल प्रेम से कहा।
प्रेम ने प्यार से कहा-जब आपमें इतनी लग्न है तो मैं जरूर आऊंगा। तुम सभी समय पर खेल के मैदान में मिलना।
अगले दिन
....लेकिन अंकल अभी तक नहीं आए, बच्चे खेल के मैदान में खड़े बाट जोह रहे थे। तभी वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने कहा-अब किसकी राह तक रहे हो? जिसका इंतजार है वो रात को स्वर्ग सिधार गए। आप घर जाओ। इतना सुनकर बच्चे धरा पर बैठ गए मानो उनका कोई अपना बिछुड़ गया ह...
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अंकल, अंकल। कल रविवार हैं आप हमें कबड्डी खिलाने आओगे ना? हम इंतजार करेंगे। बच्चों ने अंकल प्रेम से कहा।
प्रेम ने प्यार से कहा-जब आपमें इतनी लग्न है तो मैं जरूर आऊंगा। तुम सभी समय पर खेल के मैदान में मिलना।
अगले दिन
....लेकिन अंकल अभी तक नहीं आए, बच्चे खेल के मैदान में खड़े बाट जोह रहे थे। तभी वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने कहा-अब किसकी राह तक रहे हो? जिसका इंतजार है वो रात को स्वर्ग सिधार गए। आप घर जाओ। इतना सुनकर बच्चे धरा पर बैठ गए मानो उनका कोई अपना बिछुड़ गया ह...
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गरीबी
शरीर के अति कृश शरीर पर फटे पुराने कपड़े सर्दी में कांपती हुई बालिका ने बर्तन साफ करते हुए अपनी मां से कहा-मो, मैं भूखी हूं। दो दिनों से मैंने कुछ नहीं खाया है। कुछ खाने का प्रबंध हो सके तो कर दो। अश्रुपूरित नेत्रों से मां ने अपनी बच्ची की ओर देखा और कहा-बेटी, यह हमारी बदकिस्मत है। जिस मालिक के घर नौकरी कर रहे हैं वो क्रूर है और हमें दिनभर काम पर लगाए रखता है और सर्दी में एक कप चाय तक नहीं देता। जब से तुम्हारे पिता का देहांत हुआ है तब से बुरे दिन चल रहे हैं। अगर किसी के आगे हाथ फैलाते हैं तो वो हमारे जोबन पर अधिक नजर रखता है और तरस नहीं खाता। इस भेडिय़ों के राज में मेमना कब तक जान बचा सकता है। जी चाहत है मैं जान दे दूं।
...नहीं मां, नहीं। मुझे कोई भूख प्यास नहीं है परंतु ऐसे शब्द तो कम से कम मत बोला। इतना कहकर बच्ची ने अपनी मां के मुंह पर हाथ रख दिया और मां बेटी सुबक सुबक रो रही थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
शरीर के अति कृश शरीर पर फटे पुराने कपड़े सर्दी में कांपती हुई बालिका ने बर्तन साफ करते हुए अपनी मां से कहा-मो, मैं भूखी हूं। दो दिनों से मैंने कुछ नहीं खाया है। कुछ खाने का प्रबंध हो सके तो कर दो। अश्रुपूरित नेत्रों से मां ने अपनी बच्ची की ओर देखा और कहा-बेटी, यह हमारी बदकिस्मत है। जिस मालिक के घर नौकरी कर रहे हैं वो क्रूर है और हमें दिनभर काम पर लगाए रखता है और सर्दी में एक कप चाय तक नहीं देता। जब से तुम्हारे पिता का देहांत हुआ है तब से बुरे दिन चल रहे हैं। अगर किसी के आगे हाथ फैलाते हैं तो वो हमारे जोबन पर अधिक नजर रखता है और तरस नहीं खाता। इस भेडिय़ों के राज में मेमना कब तक जान बचा सकता है। जी चाहत है मैं जान दे दूं।
...नहीं मां, नहीं। मुझे कोई भूख प्यास नहीं है परंतु ऐसे शब्द तो कम से कम मत बोला। इतना कहकर बच्ची ने अपनी मां के मुंह पर हाथ रख दिया और मां बेटी सुबक सुबक रो रही थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
राज
राजू को मोबाइल मिलने पर खाना पीना भी भूल जाता था। देर रात तक फोन में लगा रहता। पूछने पर एक ही जवाब मिलता-पापा, मैं अपने विज्ञान के चेप्टर की पढ़ाई कर रहा हूं। जब फोन मिल जाता तो आधी रात तक पढऩे का बहाना करता किंतु फोन न मिलने पर महज एक घंटे बाद नींद में पागल हो जाता। एक दिन जब राजू फोन का प्रयोग कर रहा था तो उसके पापा ने धीरे धीरे पीछे से आकर फोन में देखा तो दंग रह गया। राजू तो गाने बजाने,विडियो, चैटिंग आदि में मस्त था। राजू के पिता ने फिर राजू का राज खोला तो राजू के होश ठिकाने आ गए। राजू ने आइंदा ऐसा न करने की कसम खाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
राजू को मोबाइल मिलने पर खाना पीना भी भूल जाता था। देर रात तक फोन में लगा रहता। पूछने पर एक ही जवाब मिलता-पापा, मैं अपने विज्ञान के चेप्टर की पढ़ाई कर रहा हूं। जब फोन मिल जाता तो आधी रात तक पढऩे का बहाना करता किंतु फोन न मिलने पर महज एक घंटे बाद नींद में पागल हो जाता। एक दिन जब राजू फोन का प्रयोग कर रहा था तो उसके पापा ने धीरे धीरे पीछे से आकर फोन में देखा तो दंग रह गया। राजू तो गाने बजाने,विडियो, चैटिंग आदि में मस्त था। राजू के पिता ने फिर राजू का राज खोला तो राजू के होश ठिकाने आ गए। राजू ने आइंदा ऐसा न करने की कसम खाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
प्रभाव
संभवत: यूपी या बिहार का रहने वाला हाथ में चाकू लिए करीब सात-आठ वर्ष का बालक अपने साथियों से बीच रास्ते में कह रहा-हट जाओ वरना तुम्हारी गर्दन काट दी जाएगी। किराए के मकान में रह रहे इस बच्चे की हरकत गांव के बच्चे भी देख रहे थे। उधर से साइकिल पर गुजर रहे जन की नजर उस बच्चे के हाथ में लिए चाकू पर पड़ी और उसकी जुबान से निकले एक विशेष अंदाज में कहे गए शब्द सुनकर अवाक रह गया और फिर बुड़बुड़ाया-ये बच्चे गांव के बच्चों को भी यह भाषा सीखने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस प्रकार की बातें इन बच्चों को किसने सिखाया अभिभावकों ने या फिर उनके प्रदेश में ऐसा ही घटित होता है? इन अनुत्तरित प्रश्रों में उलझा जन आगे बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
संभवत: यूपी या बिहार का रहने वाला हाथ में चाकू लिए करीब सात-आठ वर्ष का बालक अपने साथियों से बीच रास्ते में कह रहा-हट जाओ वरना तुम्हारी गर्दन काट दी जाएगी। किराए के मकान में रह रहे इस बच्चे की हरकत गांव के बच्चे भी देख रहे थे। उधर से साइकिल पर गुजर रहे जन की नजर उस बच्चे के हाथ में लिए चाकू पर पड़ी और उसकी जुबान से निकले एक विशेष अंदाज में कहे गए शब्द सुनकर अवाक रह गया और फिर बुड़बुड़ाया-ये बच्चे गांव के बच्चों को भी यह भाषा सीखने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस प्रकार की बातें इन बच्चों को किसने सिखाया अभिभावकों ने या फिर उनके प्रदेश में ऐसा ही घटित होता है? इन अनुत्तरित प्रश्रों में उलझा जन आगे बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
छठ मैया
छठ मैया की पूजा कर रही नव विवाहित महिला से राधा ने पूछा-तुम्हें इस पूजा की कैसे याद आ गई?
रानी ने झटपट जवाब दिया-मेरे परिवार में सदा कलह रहता था तथा मेरे पति को नौकरी नहीं मिल रही थी। मैं परेशान थी कि एक दिन एक संत ने मुझे छठ मैया की पूजा विधि विधान से करने को कहा। पूजा करते ही घर का कलह समाप्त हो गया तथा मेरे पति को नौकरी मिल गई तभी से लेकर आज तक गहन आस्था से छठ की पूजा करती आ रही हूं। मैया सभी का कल्याण करती है।
नव विवाहित युवती की बात सुनकर राधा भी छठ मैया को नमन करने लगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
छठ मैया की पूजा कर रही नव विवाहित महिला से राधा ने पूछा-तुम्हें इस पूजा की कैसे याद आ गई?
रानी ने झटपट जवाब दिया-मेरे परिवार में सदा कलह रहता था तथा मेरे पति को नौकरी नहीं मिल रही थी। मैं परेशान थी कि एक दिन एक संत ने मुझे छठ मैया की पूजा विधि विधान से करने को कहा। पूजा करते ही घर का कलह समाप्त हो गया तथा मेरे पति को नौकरी मिल गई तभी से लेकर आज तक गहन आस्था से छठ की पूजा करती आ रही हूं। मैया सभी का कल्याण करती है।
नव विवाहित युवती की बात सुनकर राधा भी छठ मैया को नमन करने लगी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
इच्छा
अन्नू ने अपने पिता से कहा-मैंने दसवीं तक की सभी परीक्षाएं अव्वल रहकर पास की है। मेरी एक इच्छा है और वह इच्छा बारहवीं में बेहतर अंक आने पर पूरी कर देना।
....क्यों नहीं बेटे। जरूर पूरी करूंगा। पर यह तो बताओ कि इच्छा क्या है? नरेश ने पूछा।
अन्नू ने हंसकर टाल दिया और कहा-मुझे पढऩे दो। अव्वल रहना है तभी मैं अपनी इच्छा आपके सामने रख पाऊंगा। परीक्षा के बाद जब परिणाम आया तो अन्नू ने अपने पिता से कहा-अब वो समय आ गया है जब मेरी इच्छा आप पूरी करे!
अन्नू ने धीरे से कहा-पिताजी, मु...
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अन्नू ने अपने पिता से कहा-मैंने दसवीं तक की सभी परीक्षाएं अव्वल रहकर पास की है। मेरी एक इच्छा है और वह इच्छा बारहवीं में बेहतर अंक आने पर पूरी कर देना।
....क्यों नहीं बेटे। जरूर पूरी करूंगा। पर यह तो बताओ कि इच्छा क्या है? नरेश ने पूछा।
अन्नू ने हंसकर टाल दिया और कहा-मुझे पढऩे दो। अव्वल रहना है तभी मैं अपनी इच्छा आपके सामने रख पाऊंगा। परीक्षा के बाद जब परिणाम आया तो अन्नू ने अपने पिता से कहा-अब वो समय आ गया है जब मेरी इच्छा आप पूरी करे!
अन्नू ने धीरे से कहा-पिताजी, मु...
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लघु कथा जल
बेटा रमेश, गला रुंध रहा है, सामने बोतल में पानी है, जल्दी से एक घूंट पानी पिला दो। मृत्यु शैया पर लेटे बलबीर ने धीमे स्वर में पुकारा।
...अभी लाता हूं, पिता जी। रमेश ने दौड़कर बोतल पानी की उठाकर एक गिलास में थोड़ा सा जल उड़ेला और अपने पिता को पकड़ाने की मुद्रा में कहा-लो पिता जी, ठंडा पानी। आप पानी पीओ तब तक मैं डाक्टर को बुलाता हूं। रमेश ने पुकारा।
...पिता जी, पिता जी, पिता..........इतना कहकर रमेश के हाथों से जल की बोतल छूट गई और रमेश फर्श पर सिर पकड़कर बैठ गया। अश्रु आंखों से बह निकले। हे भगवान! आपने यह क्या कर डाला। अब ही दिन सुख के आए थे और अब पिता जी को छीन लिया। जीवनभर संघर्ष करते करते पिता ने ये सुख के दिन दिए। जब सुख के दिन आए तो हमें असहाय छोड़ चिरनिद्रा में सो गए..... अब मैं क्या करूं, रमेश चिल्ला रहा था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा***
बेटा रमेश, गला रुंध रहा है, सामने बोतल में पानी है, जल्दी से एक घूंट पानी पिला दो। मृत्यु शैया पर लेटे बलबीर ने धीमे स्वर में पुकारा।
...अभी लाता हूं, पिता जी। रमेश ने दौड़कर बोतल पानी की उठाकर एक गिलास में थोड़ा सा जल उड़ेला और अपने पिता को पकड़ाने की मुद्रा में कहा-लो पिता जी, ठंडा पानी। आप पानी पीओ तब तक मैं डाक्टर को बुलाता हूं। रमेश ने पुकारा।
...पिता जी, पिता जी, पिता..........इतना कहकर रमेश के हाथों से जल की बोतल छूट गई और रमेश फर्श पर सिर पकड़कर बैठ गया। अश्रु आंखों से बह निकले। हे भगवान! आपने यह क्या कर डाला। अब ही दिन सुख के आए थे और अब पिता जी को छीन लिया। जीवनभर संघर्ष करते करते पिता ने ये सुख के दिन दिए। जब सुख के दिन आए तो हमें असहाय छोड़ चिरनिद्रा में सो गए..... अब मैं क्या करूं, रमेश चिल्ला रहा था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा***
रिश्ता
महंगे कपड़े पहने राजू एक महंगी कार में बैठकर आया और लड़कियों के पास आकर गाड़ी रोकी। बड़े रोब से राजू ने कार से नीचे कदम रखा तो सभी की नजरें टिक गई तभी सुरेश भी इस नजारे को देख रहा था। उससे रहा नहीं गया और कहा-देख तेरे बाप के पास खाने को दाने नहीं। खेत क्यार के नाम पर दो खूड़ तक नहीं है। तू बेरोजगार गलियों में चक्कर लगाता है फिर यह गाड़ी किसकी ले आया। राजू ने तमतमाते हुए कहा-महंगी कार, पोशाक, टोरे को देखकर मेरा रिश्ता अच्छे परिवार में हो जाएगा। इतना सुना तो सुरेश की आंखें खुली रह गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
महंगे कपड़े पहने राजू एक महंगी कार में बैठकर आया और लड़कियों के पास आकर गाड़ी रोकी। बड़े रोब से राजू ने कार से नीचे कदम रखा तो सभी की नजरें टिक गई तभी सुरेश भी इस नजारे को देख रहा था। उससे रहा नहीं गया और कहा-देख तेरे बाप के पास खाने को दाने नहीं। खेत क्यार के नाम पर दो खूड़ तक नहीं है। तू बेरोजगार गलियों में चक्कर लगाता है फिर यह गाड़ी किसकी ले आया। राजू ने तमतमाते हुए कहा-महंगी कार, पोशाक, टोरे को देखकर मेरा रिश्ता अच्छे परिवार में हो जाएगा। इतना सुना तो सुरेश की आंखें खुली रह गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

































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