Saturday, December 21, 2019

                                                     प्रदूषण
रमन, तुम बहुत उदास नजर आ रहे हो। घर में सब खैरियत तो है? राजू ने पूछा।
हां, मैं बहुत परेशान हूं। दीपावली का पर्व सिर पर किंतु अभी तक वेतन नहीं मिला है। ऐसे में दीपावली के पर्व पर बच्चों के लिए पटाखे खरीद पाना कठिन हो जाएगा। बच्चे मानते ही नहीं। घरवाली जवाब मांगती है, जवाब नहीं दे पा रहा हूं। जब से न्यायालय से बदली वापस हुई है, वेतन की समस्या बन गई है। रमन ने जवाब दिया।
राजू ने खुश होकर कहा-यह तो कुछ अच्छा ही हुआ है।
...अच्छा, वो कैसे?
राजू ने जवाब दिया -प्रदूषण से बचाव होगा।
रमन की आंखों में आंसू आ गए? मन ही मन सोच रहा था कि तुम्हें प्रदूषण से बचने की सूझ रही है और मुझे एक एक पैसे का मोहताज होना पड़ रहा है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा***

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