Saturday, November 29, 2025

 
         कुत्ता



रखवाली करें घर, परिवार,
परिजन से वो करता प्यार।
एक टुकड़ा रोटी का मिले,
फिर संघर्ष को मिले तैयार।।
अब तो कुत्ते हो गये महंगे,
चलता है कुत्तों का व्यापार।
इंसान से कद्र अधिक मिले,
घातक होती है इसकी लार।।
*डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

  बैल
होती थी कद्र कभी बैल की,
आज नहीं कोई उन्हें पूछता।
ट्रैक्टर से करे किसान जुताई,
रास्ता कोई नहीं अब सूझता।।
दो बैलों की जोड़ी देखते तो,
प्रसन्नता मन चेहरे पर आती।
कृषक सिर गर्व से ऊंचा हो,
अन्न के भंडार माटी उपजाती।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**

Thursday, November 27, 2025

 



     बिल्ली
म्याऊं म्याऊं करती जाये,
चूहों को पकड़कर खाये।
शेर जैसी नजर यह आये,
शांत बैठकर सभी लुभाये।।
दूध इसका प्रमुख आहार,
करें लोग इससे भी प्यार।
पंजे इसके जीवन आधार,
दुश्मन होते कुत्ते-सियार।।
**होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

     गधा
मेहनत करे दिन रात वह,
मिलता नहीं जग में नाम।
करता रहता काम बेचारा,
सुबह देखो या फिर शाम।।
कितनी कहावत बनाई हैं,
उनमें भी गधा है बदनाम,
बेचारा वो बोझ का मारा,
जिंदगीभर काम ही काम।।
***होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

Tuesday, November 25, 2025

 
 मोर



राष्ट्रीय पक्षी देश का,
अद्भुत होती है छटा।
नृत्य करें ये उपवन,
आसमान छाए घटा।।
मोरपंख कृष्ण धारण,
सृपों का करता अंत।
मोरनी चाल प्रसिद्ध,
गुण गाये कवि, संत।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ,हरियाणा
         गाय
गाय पालना भूल गये अब,
कुत्ते पालने का शौक बढा।
गाय का मलमूत्र काम का,
कुत्ते का दबाते खोद गड्ढा।।
अमृतसम वो दूध, घी देती,
भूल गया क्यों इंसान भला।
गाय पालेंगे हर घर घर पर,
ऐसा कोई अभियान चला।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**

Sunday, November 23, 2025

 
   
     कामचोर
कभी नाम नहीं कमाते,
कामचोर जगत में सारे।
मेहनत से न जी चुराते,
हर जन को लगते प्यारे।।
काम कोई भी करते हो,
छोटा बड़ा नहीं समझते।
तन्मयता करते रहते जो,
वो ही जीवन में चमकते।।
***डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

   उपकार
भला कोई करता तुम्हारा,
मत भूलों उसका उपकार।
बुरा तुम्हारा करता है कोई,
बस झटपट करों बंटाधार।।
छोटा मिले गर तुम्हें कोई,
देना उसको जमकर प्यार।
दुष्ट अगर कोई मिले कहीं,




उससे ना करो आंखों चार।।
**होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


Thursday, November 20, 2025

 
    इच्छा रह गई अधूरी




17 नवंबर 2010 की घटना,
पत्नी की हालात हुआ सुधार।
बोली घर की अपनाएंगे राह,
21 नवंबर शादी सालगिराह।।
घर पर मनाएंगे अब खुशियां,
बीते गये दिन अब दुख दर्द।
प्राण त्याग दिये उसी रात को,
बारिश हवा के झोंके चले सर्द।।
इच्छा रही वो अधर और दफन,
चली गई सुमन छोड़कर हमको।
ऐसे दुखो को कोई कैसे सह ले,
सालगिरह से मौत 4 दिन पहले।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***

  होशियार के गुण
सीधा सादा जीवन जिनका,
साइकिल की करता सवारी।
कष्टों से वो नहीं जी चुराता,
ईमानदारी लगती सदा प्यारी।।
चौड़ी छाती चले सीना तान,
सादा जीवन बस ये पहचान।
जहां भी जाए यूं नाम कमाए,
चाहे लोग उनसे रहे अज्ञान।।
मेहनत कर कर नाम कमाया,
विश्व रिकार्ड बुक नाम पाया।
स्टेट अवार्डी शिक्षक है वो,
दुश्मन को भी गले लगाया।।
**डा. होशियार सिंह यादव
विश्व रिकार्डधारक, कनीना**

       सच-झूठ
सच को झूठ बताने वाले,
जग में मिलते कई हजार।
झूठ को सच मानने वाले,
नेता करते हैं चमचे तैयार।।
इंसान को इंसान मानते है,
सच्चे जन की हो पहचान।
इंसान को इज्जत नहीं करें,
धरा पर हैवान उसको मान।।
वक्त बदलता रहता जन का,
बुरे वक्त में देखे जाते लोग।
चंद लोग साथ खड़े मिलते,
कहलाता है जन का संयोग।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***


Tuesday, November 18, 2025

 
             साथ



जितने दिन का साथ लिखा था
बस उतना ही साथ निभाया था।
आठ साल जीवनसंगिनी बनके,
हंस-हंसकर समय बिताया था।।
कभी नहीं अनबन हुई दोनों में,
समय उड़ चला पंख लगाकर।
तीन साल गंभीर रोग चला था,
बीता था समय बस रो-रोकर।।
जयपुर,एम्स,जालंधर ली दवाएं,
नहीं बचा पाए तुम्हारी भी जान।
पानी की तरह बहाये गये पैसे,
फिर भी लोग बैठे बन अज्ञान।।
**डा. होशियार सिंह यादव,
कनीना, महेंद्रगढ़, हरियाणा


     बिछुडऩे का गम
कितने आये कितने ही गये,
यह कथनी बड़ी पुरानी है।
पर एक बात दिल से पूछो,
बिछुडऩे पर कोई हानि है?
प्रिय अपना कोई बिछुडग़ा,
दर्द हिये में उठता है अपार।
जीत गये चाहे जग को वो,
फिर भी निश्चित होती हार।।
कोई जल्दी जग से न रूठे,
बुद्धि और बल बड़ी हानि।
अपना तो अपना होता सदा,
संत महात्माओं ने भी मानी।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**


     सुमन
मन से सुमन कहलाती थी,
हर मन को बड़ा हर्षाती थी।
घर में खुशियां छा जाती थी,
जब सामने तुम आ जाती थी।।
मां को भी प्यारी लगती थी,
परिजन दिलों में बसती थी।
सास देखके प्रसन्न होती थी,
बिछुडऩे पर दर्द में रोती थी।।
जाने का दर्द दे गई जग में,
किसको अपनी बात सुनाये।
धोखा अब लगता जाने का,
दे गई लाखों दुख दर्द सजाएं।।
***डा. होशियार सिंह यादव
विश्व रिकार्डधारक,कनीना,हरि.


Sunday, November 16, 2025

      सुमन
मन से सुमन कहलाती थी,
हर मन को बड़ा हर्षाती थी।
घर में खुशियां छा जाती थी,
जब सामने तुम आ जाती थी।।
मां को भी प्यारी लगती थी,
परिजन दिलों में बसती थी।
सास देखके प्रसन्न होती थी,
बिछुडऩे पर दर्द में रोती थी।।
जाने का दर्द दे गई जग में,
किसको अपनी बात सुनाये।
धोखा अब लगता जाने का,
दे गई लाखों दुख दर्द सजाएं।।
***डा. होशियार सिंह यादव
विश्व रिकार्डधारक,कनीना,हरि.


नहीं भूला पाएंगे
यूं छोड़के जगत से जाना,
एक सपना सा लगता है।
15 साल बीत चुके अब,
खालीपन सा खलता है।।
आठ साल शादी को बीते,
मनहूस दिन वो आया था।
17 नवंबर 2019 को हमें,
जमकर तुमने रुलाया था।।
चले गये हमको छोड़कर,



पर हम नहीं तुम्हें भुलाएंगे।
जहां भी रहते हो स्वर्ग में,
एक दिन पास में आएंगे।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,जिला-महेंद्रगढ़,हरि.

Friday, November 14, 2025

 
                   याद
छोड़ गये अपने कभी,



                   आती है उनकी बड़ी याद।
अब वो मिल न सकते,
                  चाहे कर लो लाख फरियाद।।
याद आते वो दिन अब,
                    रहते थे जिनके कभी पास।
हवा चलती हैं सर्द तब,
                     उन्हें याद कर रुकती सांस।।
पर्व,खुशी जब आती हैं,
                     उनकी याद सताती रहती।
एक दिन पास आएंगे,
                   अन्तर आत्मा बस ये कहती।।
डा. होशियार सिंह यादव,  विश्व रिकार्डधारक
कनीना,जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा*******

                 अत्याचार
चार दिन की जिंदगी में,
                      करते लाखों अत्याचार,
खूब सताते दिलों को वे,
                     मौत के आगे होती हार।
कुछ खुद की खुशी हेतु,
                     कर देते जन जीना हराम,
पाप कर्म से भरा है दिल,
                      कैसे निकले जी हे राम।
परहित को चाहने वाले,
                      पा जाते हैं जग में नाम,
दुखों में दुखी मिलते हैं,
                      स्वर्ग मिलता उन्हें धाम।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा



Wednesday, November 12, 2025

 



                   याद
छोड़ गये अपने कभी,
                   आती है उनकी बड़ी याद।
अब वो मिल न सकते,
                  चाहे कर लो लाख फरियाद।।
याद आते वो दिन अब,
                    रहते थे जिनके कभी पास।
हवा चलती हैं सर्द तब,
                     उन्हें याद कर रुकती सांस।।
पर्व,खुशी जब आती हैं,
                     उनकी याद सताती रहती।
एक दिन पास आएंगे,
                   अन्तर आत्मा बस ये कहती।।
डा. होशियार सिंह यादव,  विश्व रिकार्डधारक
कनीना,जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा*******


           गम
चला जाता है कोई अपना
वो याद बहुत ही आता है।
कोई उसे अवगुण याद करें,
कोई गुणों को भूल जाता है।।
चले जाने पर पता लगता है,
गुण और अवगुण थे हजार।
कोई उनको बुरा कहता सुने,
कोई उसको करता है प्यार।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**

Monday, November 10, 2025

 

       कब जाना हो
पता नहीं कब जाना हो,
पूरे कर लो अपने काम।
धर्म, कर्म, परहित में जी,
वरना मिलेगा नरक धाम।।
बैरभाव लेकर जाता जब,
थू-थू करते देखे हैं लोग।
पर कुछ में गंदी आदतें हैं,
जो जगत का बुरा है रोग।।
***डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा*


       कितने चले जाएंगे
कितने आये कितने चले जाएंगे,
किसी के रोके नहीं रुक पाएंगे।
आये हैं वो जाएंगे,फर्ज निभाएंगे,
कुछ खुशी तो कुछ गम दे जाएंगे।।
दिल दुखा ले, फिर नहीं आना है,
कैसा घमंड यहां,तुम्हें भी जाना


है।
धन की गठड़ी बांध सिर रख लेना,
सब कुछ छोड़ के यहां से जाना है।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक,महेंद्रगढ़,हरियाणा


Saturday, November 08, 2025

  

           सर्दी
सर्दी बढऩे लगी है अब,
तैयार करवा लो रिजाई।
गर्म चाय, गर्म खाना खा,
गोंद के लड्डू खा मलाई।।
गजक, मूंगफली, छुआरा,
स्वेटर से ढक लेना शरीर।
सर्दी,जुकाम लग गया तो,
सहनी पड़ेगी ये लंबी पीर।।
***डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


        हथियार
हिम्मत का हथियार पास में,
बस यूं आगे बढ़ते जाना है।
कृषक, धरा, मजदूर सम्मान,
मिलकर सबने दिलवाना है।
हिम्मत हार गया जो इंसान,
जीने का नहीं ठोर मिलेगा।
निज दम पे जो आगे बढ़ेगा,
बंजर धरा पर फूल खिलेगा।



***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़, हरि.

Thursday, November 06, 2025

                             

        चापलूस



चापलूस हो गये हैं लोग,
चढ़ा बड़ा चापलूसी रोग।
झूठी शान में जीते कितने,
पाप कर्म नित रहे हैं भोग।।
सच को कहना लगे बुरा,
मौका मिले घोंप देते छुरा।
सचाई की होती अब हार,
कल्कि करेंगे ये बेड़ा पार।।
**डा. होशियार सिंह यादव
विश्व रिकार्डधारक,कनीना
                 कीमत
झूठ बोल, चाहे धोखा दे ले,
जग कीमत चुकानी पड़ती है।
दिन बेचारा असहाय होता है,
जब रात कालिमा बढ़ती है।।
काले पर नहीं रंग चढ़ पाता,
चाहे कोई भी रंग चढ़ा लेना।
राख बने फिर हवा में उड़ती,
चाहे खूब जन को सता लेना।।
***होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा  
 

Tuesday, November 04, 2025

                      देव दीवाली
देवता भी देखने आते, दे


व दीवाली कहलाती,
कितनी प्राचीन परंपरा, हमको यही बतलाती।
पंचगंगाघाट पर 1915 में की गई ये शुरुआत,
हजारों दीये जलाये गये, दीवाली जैसे हालात।।
शिवभोले ने इस दिन,त्रिपुराराक्षक किया वध,
त्रिपुरारि कहलाये, समझ नहीं पाते लोग चंद।
देवों ने स्वर्गलोक में भी, जलाये थे दीप हजार,
काशी में लाखों दीप जले, गंगा स्नान से प्यार।।
***डा. होशियार सिंह यादव, कनीना***
जिला-महेंद्रगढ़,हरियाणा************* ***

               अंग्रेज आज भी हैं
कहते हैं अंग्रेज चले गये, जो सच्ची लगती बात है,
पर अंग्रेज आज भी हैं, लोगों को बांटने में हाथ है।
किसी की तारीफ करते हैं, किसी को बुरा कहते हैं,
ये कहीं दूर नहीं अपितु अपने समाज में ही रहते हैं।।
क,ख आता नहीं, व्यक्तित्व पर अंगुली उठाते देखे,
आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे, दूसरे पर कीचड़ वो फेंके।
आएगा वो दिन भी, समाज इक दिन जाग जाएगा,
बचकर नहीं जाने देगा, बोटी तक नोचकर खाएगा।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना, हरियाणा

Sunday, November 02, 2025

 
               पापी
बुरा सुने और बुरा कहे,वो पापी जन कहलाते,
उल्टी सीधी बात करें वो अपना मन बहलाते।
घृणित होते लोग वो जन में पैदा करे भेदभाव,
इन लोगों की मझधार में डूबके रहती है नांव।।
सदा साफ बात जो करते उनके बैरी हो हजार,
नफरत से जन देखते जो देते जन जन को प्यार।
आपस में प्रीत करे जो बोलते हैं जो सुंदर वाणी,
क्षणभर की जिंदगी उड़े राख मिले पानी में पानी।
**डा. होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़

   गूंज उठी शहनाई
देव उठावनी एकादशी आई,
गूंज उठी हैं शहनाइयां आज।
सड़कों पर चलना दूभर हुआ,
दूल्हा-दुल्हन पहन रहे ताज।।
जुलाई 2026 तक हैं शादियां,
भीड़ भड़क्का से बचकर रहना।



समय पर शादी करना अच्छा,
संत और बुजुर्गों का है कहना।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,जिला-म.गढ़, हरियाणा