Saturday, December 21, 2019

                         जीता दो
बजरंगबली के मंदिर में एक नेता हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहा था कि मेरी जीत पक्की करा दो। मैं आपका 51 लाख रुपये का प्रसाद चढ़ाऊंगा? कोई गलती हो गई हो तो माफ कर देना। मंदिर में एक गरीब व्यक्ति भी पूजा कर रहा था जिसने नेता के शब्द सुने और उससे रुका नहीं गया। उसने कहा-नेता जी, यदि इतनी राशि लोगों को विशेषकर गरीबों को दी होती, जनहित के कार्य किए होते, विकास करवाया होता तो वोटर स्वयं ही वोट दे देते और आज गिड़गिड़ाने की नौबत नहीं आती। तुम्हें वोटर भी माफ नहीं करेगा। जनता ही जनार्दन होती है। प्रभु तुम्हें कैसे माफ करेगा जब उसके अनन्य भक्तों के लिए आपके दिल में पांच वर्षों तक कोई रहम नहीं आया। नेता ने जब ये शब्द सुने तो होश ठिकाने लग गए। अब तो उसे अपनी गलती का अहसास हो गया था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

No comments: