Saturday, December 21, 2019

                                        दोस्ती
दोनों गहरे दोस्त थे जिनकी चर्चाएं दूर दराज तक थी। नातू अपने दोस्त राजू से इसलिए दोस्ती कर रखी थी कि राजू हर स्थान पर नातू की मदद करता था। नातू अपने दोस्त को नहीं समझ सका और चरित्रवान समझते हुए अपनी पुत्री का ट्यूशन लगा रखा था। राजू दोस्ती की आड़ में अपने दोस्त की पुत्री पर बुरी नजर रखता था। एक दिन जब नातू की पुत्री ट्यूशन करने गई तो मौका देख राजू ने मुंह काला कर दिया। घटना का भांडा फूटते ही राजू की थू-थू होने ली। राजू के चरित्र का उस वक्त पता चला जब उसने अपने बाप की धुनाई कर डाली थी। राजू की गांव में यह इमेज थी कि कोई उससे मिलना तो दूर उसके घर किसी सुख दुख में भी नहीं जाता था। लोग दोस्तों की बात चलती तो बस यही कहते हैं वो कभी राजू और नातू जैसे दोस्त तो नहीं हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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