प्यार
आज रमेश की आंखें डबडबा गई जब उसकी नजर अपनी मां की तस्वीर पर पड़ी जो बचपन में उन्हें छोड़कर स्वर्गवासी बन गई थी। आज रमेश के पास धन दौलत की कमी नहीं थी बस कमी थी तो मां की जो उन्हें प्यार एवं आशीर्वाद दे सके। आज जब उसकी नजर उन बच्चों पर पड़ी जो उधर से अपनी मां के साथ गुजर रहे थे तो उसे सब धन दौलत बेकार नजर आ रही थी। बस मां की याद आ रही थी। काश! उनकी मां आकर उन्हें गले से लगा ले तो रमेश सारा धन दौलत न्यौछावर करने को तैयार था। किंतु आज वो अकेला एक नदी के किनारे सोच रहा था कि उनकी किस्मत में मां का आशीर्वाद एवं प्यार नहीं है। मां की कमी सता रही थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
आज रमेश की आंखें डबडबा गई जब उसकी नजर अपनी मां की तस्वीर पर पड़ी जो बचपन में उन्हें छोड़कर स्वर्गवासी बन गई थी। आज रमेश के पास धन दौलत की कमी नहीं थी बस कमी थी तो मां की जो उन्हें प्यार एवं आशीर्वाद दे सके। आज जब उसकी नजर उन बच्चों पर पड़ी जो उधर से अपनी मां के साथ गुजर रहे थे तो उसे सब धन दौलत बेकार नजर आ रही थी। बस मां की याद आ रही थी। काश! उनकी मां आकर उन्हें गले से लगा ले तो रमेश सारा धन दौलत न्यौछावर करने को तैयार था। किंतु आज वो अकेला एक नदी के किनारे सोच रहा था कि उनकी किस्मत में मां का आशीर्वाद एवं प्यार नहीं है। मां की कमी सता रही थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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