Saturday, December 21, 2019

                            भूख
नन्हें नन्हें दो बच्चे गोद में लिए एक युवती लंबी लाइन में खाने का इंतजार कर रही थी। कढ़ी चावल बांटे जा रहे थे। बच्चे भूख के मारे युवती का जीना हराम कर रहे थे। लाइन में खाने के आने का इंतजार कर रहे सभी लोगों की नजरें उस युवती पर टिकी हुई थी। सेठ अपने हाथों से खाना बांटते हुए महिला के पास आया तो खाना डालते ही बच्चे ऐसे टूट पड़े जैसे कई दिनों से भूखों हो। जो खाना मिला वो बच्चों ने साफ कर दिया किंतु युवती को एक दाना भी नसीब नहीं हुआ। लाइन में आगे पीछे बैठे लोगों को तरस आ गई और अपने खाने का हिस्सा महिला को देते हुए पूछ ही लिया-बच्चों के पिता क्या काम करते हैं? आंसू भरे नेत्रों से महिला ने उत्तर दिया-वो शराबी है। खाने के लिए अन्न का प्रबंध करती है तो उसे भी बेचकर शराब की बोतल ले आता है। इस शराब के नशे ने घर बर्बाद कर रखा है। इतना कहकर महिला जोर जोर से रोने लगी। सभी की नजरें उसी पर टिकी थी और सभी के मुख से एक शब्द निकला-शराब, शराबी, समस्या विकराल होती है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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