Friday, December 27, 2019

लघुकथा हाथों की धुलाई
बार बार बीमार पड़ रहे रामू को देखकर उसकी मां ने पुकारा-तुम जरूर कोई गलती करते हो जिसके चलते बार बार बीमार पड़ रहे हो। तुम्हारे कपड़े प्रतिदिन धोए जाते हैं और तुम नियमित स्नान करते हो।
बहुत सोच विचार कर मां ने कहा-तुम नियमित रूप से अपने हाथों की सफाई नहीं करते। शौच आदि के बाद तुम हैंड वाश प्रयोग नहीं करते जिसके चलते बीमार होते हो? रामू की गलती पकड़ते हुए मां ने उन्हें शिक्षा दी कि नियमित रूप से अपने हाथों की सफाई किया करे। रामू ने फिर तो नियमित रूप से हाथों की सफाई बेहतर तरल साबुन से शुरू कर दी। अब तो रामू बहुत कम बीमार होने लगे। मां ने उनको बीमार होने का कारण स्पष्ट किया। रामू के बात समझ क्या आई उसने तो दूसरों को भी हाथों की सफाई करने की शिक्षा देनी शुरू कर दी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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लघुकथा आस्था
संत लालदास महाराज ने अपने भक्तों को शरद पूर्णिमा की विभिन्न मेवे एवं औषधियों वाली खीर अपने हाथों से परोस दी। अब कोई खीर शेष नहीं बची थी। अभी मंत्र जाप करके खीर का स्वाद चखने ही वाले थे कि अति व्यथिथ कुष्ठ रोग से पीडि़त एक व्यक्ति ने हाथ पसारते हुए कहा-मुझे भी कुछ खीर दो। सुना है कि आपके हाथों से बनी शरद पूर्णिमा की खीर खाकर कुष्ठ रोग भी दूर हो जाते हैं। प्रसाद चखने वालों ने रोगी को देखा तो उनकी आंखें भर आई और झटपट सभी ने अपने अपने हिस्से की खीर में से एक एक अंश दिया। रोगी ने त्वरित गति से खीर को चखा और पूरे जोश से खुश होकर पुकारा-अब मैं ईश्वर और बाबा लालदास की कृपा से स्वस्थ हो जाऊंगा। रोगी प्रसन्नचित मुद्रा में अपने गंतव्य मार्ग पर बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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लघुकथा कुर्सी
'सर, आप रोजाना हमें चावल में एक घिया, पाव टमाटर, मिर्च डालकर मिड डे मील के नाम पर खिला रहे हो। कभी तो पौष्टिक खाना खिलाओ। पिछले मिड डे मील इंचार्ज बहुत कुछ पकवान बनाकर खिलाया करते थे।Ó विद्यार्थियों ने मुख्याध्यापक से कहा।
मुख्याध्यापक ने रोषपूर्ण लहजे में कहा-सरकार एक बच्चे के प्रतिदिन छह रुपये 71 पैसे खाने के देती है। उसमें मैं क्या तुम्हें दूध जलेबी खिला दूं। रही बात बेहतर खाने की, मैं बेहतर खाना खिला रहूं। उस पर देखों मैंने एक आरामदायक बढिय़ा अपने लिए कुर्सी भी खरीदनी थी। जब एक नेता को कुर्सी पसंद हैं तो मुझे अपने आफिस में बैठने के लिए कुर्सी नहीं चाहिए?
....तो इसका मतलब हमारे खाने के पैसों से अपने लिए कुर्सी खरीदी है। कुछ जेब भर ली और कुछ पैसों की कुर्सी खरीदकर बच्चों के साथ क्या न्याय किया-बच्चे आपस में खुसर फुसर कर रहे थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
खुशियां
राम खुशी से उछल पड़ा क्योंकि आज उन्हें सरकारी नौकरी मिल गई थी। आज ही घर में एक बच्ची ने भी जन्म लिया था। घर में खुशियां छा गई। राम आज बहुत खुश था कि तीन वर्ष पूर्व आज ही के दिन उनकी शादी हुई थी। शादी की सालगिरह भी मनाई जा रही थी। तभी राजू ने आकर पूछा-राम, तुमने कौन सा ऐसा कर्म किया था जिसके चलते घर खुशियों से भरा हुआ है। राम ने उत्तर दिया-भाई, मेरे घर में कन्या के जन्म के बाद खुशियां ही खुशियां छा गई। मुझे नौकरी मिल गई, इसी दिन शादी हुई थी। सब कन्या के घर में आगमन से हुआ है। राम की बात सुनकर राजू अति प्रसन्न हुआ और कहा-सचमुच लड़की का जन्म घर की दरिद्रता को दूर करता है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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