Monday, September 29, 2025

 


     ठोकर
अपनों को ठोकर मारकर,



गैरों को गले लगाते लोग।
अपनी पत्नी से बैर रखते,
गैरों की तकने का है रोग।।
ताजा फल,खाद्य छोड़कर,
मीट मांस का लगाते भोग।
दुष्टजनों को अपना समझे,
अपनों को देेते छुरा घोंप।।
धर्म कर्म की बात भुलते,
पाप अहित का लगा रोग।
मां बाप को खाना न देते,
पत्नी संग लगे जमके भोग।।
देव जन को पागल कहते,
राक्षस को समझते दोस्त।
ओछे कर्म में लीन मिले,
शुभ कर्मों का ना संयोग।।
**डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

          रावण
रावण तो मरते नहीं सीता हरण है जारी,
केंद्र बिंदु बना हुआ युद्ध-शांति में नारी।
अपनों में ही अच्छी लगती दुश्मनी यारी,
वरन कर्ण सी किस्मत हर कदम लाचारी।।
अपनों में बंधुता मिलती अपनों में ही बैर,
दगा करे अपनों से तो नहीं कुटुंब की खैर।
विभीषण को देख लो कहलाया कुलघाती,
प्रेम भला जग में जैसे दीया तेल और बाती।।
***डा. होशियार सिंह यादव कनीना
विश्व रिकार्डधारक,महेंद्रगढ़,हरियाणा****




Saturday, September 27, 2025

 
 रामलीला-04
रामलीला कनीना की, आकर्षित करें लोग,
राम चरित्र सुनकर के, मिट जाते सभी रोग।
राम ने तोड़ा धनुष जब, पहुंच गये


परशुराम,
लक्ष्मण और परशुराम का हुआ बड़ा संवाद।।
एक तरफ सचिन शर्मा लक्ष्मण बनकर अड़े,
महेंद्र शर्मा दूसरी ओर, बनके परशुराम बड़े।
संवाद चला जमके दोनों में हक्का बक्का लोग,
दोनों युद्ध उतारू हुये, राम बीच में आ खड़े।।
***होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा

       किस्मत
रातोंरात बदल जाए किस्मत,
गम भी खुशियां बन जाते है।
खुशियों में कभी विध्र पड़ता,
खुशी के पल गम बन जाते हैं।।
समय भी ऐसा आता है कभी,
साया भी साथ छोड़ जाता है।
कभी कभी तो दुश्मनों में भी,
अपना ही कोई नजर आता है।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,जिला-महेंद्रगढ़,हरियाणा

Thursday, September 25, 2025

          रामलीला-02
कनीना में चल रही रामलीला,
पात्र दिखा रहे हैं अपना रंग।
दर्शक ऐसे मदहोश हुये अब,
जैसे पी ली राम नाम की भंग।।
सचिन मंच संचालन कर रहे,
शेर सिंह की पीढ़ी बाल राम।
अभिषेक शर्मा श्रवण बने हैं,
शंतनू रोल सत्यप्रकाश नाम।।
दशरथ बने राहुल शर्मा देखो,
मुकेश कपूर ज्ञानवती किरदार।
राम नाम को रटते ही रहना है,
बस वहीं जीवन का आधार।।
**डा. होशियार सिंह यादव
विश्व रिकार्डधारक,कनीना
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा

     रामलीला-03
ताड़का वध का हुआ मंचन,
जन की भीड़ जुटी हजारों में।
कनीना मंडी चलो देखने को,
क्या रखा घर की दीवारों में।।
नितिन गुप्ता ने बनके ताड़का,
जमकर हाहाकार मचाया था।
साहिल शर्मा बाल राम बनके,
एक तीर से मार गिराया था।।
महेंद्र शर्मा दशरथ के रोल में,
यश शर्मा लक्ष्मण बनआये थे।
सचिन शर्मा प्रवक्ता ने मंच पर,
वाणी में चार चांद लगाये थे।।
उमेश वर्मा, विनय एडवोकेट,
सूबे अतिथि रूप में आये थे।
वीरेंद्र जांगड़ा मुख्याध्यापक ने,
शब्दों के खूब बाण चलाये थे।।
कितने ही और गणमान्य जन,
बुला रहे अब तो चले आओ।
विभिन्न पात्रों के जीवंत संवाद,
राम चरित्र के भी दर्शन पाओ।।
डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
महेंद्रगढ़,   हरियाणा




Monday, September 22, 2025

 
  मां दुर्गा
दुर्गा मां कर दे भला,



कितने खड़े तेरे द्वार।
भर दे झोली सब की,
जमकर दो जन प्यार।।
नौ रूपों में पूजा करते,
जप और व्रत के साथ।
आशीर्वाद दे दो अपना,
सिर पर रख दो हाथ।।
**डा. होशियार सिंह
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़

          मरना मुश्किल
निर्धन के लिए मरना भी,
मुश्किल भरा बना काम।
काज और खातिरपानी के,
लग जाते लाखों ही दाम।।
रोटी के लिए तरस जाता,
मरने पर करते लोग काज।
कर्जों में डूब जाते कितने,
फिर भी नहीं आते बाज।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

Saturday, September 20, 2025

 




       सोच
कुछ किस्मत का रोना रोते,
कुछ चादर तानकर यूं सोते।
कुछ समय बीते बीज बोते,
कुछ जिंदगी व्यसन में खोते।।
किस्मत बदले मेहनत करके,
कभी प्रभु गीत गा जी भरके।
जो वक्त पर सही बीज बोते,
जीवन जीते नहीं डर डरके।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

 नवरात्रे
फसल कटाई हो चुकी,
शारदीय नवरात्रे आये।
मां की नौ रूपों में पूजा,
बस मन मंदिर बसाये।।
सर्दियोंं ने दस्तक दे दी,
गर्म कपड़ों की तैयारी।
गर्मी को दे दो विदाई,
सर्दी लगती जन प्यारी।।
***होशियार सिंह कनीना
महेंद्रगढ़,हरियाणा


Thursday, September 18, 2025

 कविताएं
  कलियुग

मात पिता का गला घोट दे,
ये कैसा कलियुग आया है।
जहां भी देखे देश विदेश में,
आतंक ही आतंक छाया है।।
किस पर अब विश्वास करे,
अपना भी लगता पराया है।
धन दौलत की खातिर देखो,
कितना बड़ा जुल्म ढहाया है।।
पहले ही बुजुर्ग दर्द मेें होते,
उस पे अब उनकी खैर नहीं।
सोच समझकर कदम बढ़ाना,
दुश्मन बैठा हो घर में कहीं?
**डा. होशियार सिंह यादव,
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**


                 नाम
चोरी,झूठ,कपट भरा दिल पाते जग में नाम,
ईमानदारी पर चलके देखो मिले नहीं काम।
अमीर,लफंगों पर करते जन धन की बौछार,
पर दो रुपये मांगकर देखो मिले नहीं उधार।।
धन दौलत तिजोरी भरी, उनकी बड़ी है मांग,
बीड़ी,सिगरेट,भांग, धतूरा, पीते शराबी भांग।
परस्त्री को तकते रहते कहलाते है चरित्रवान,
इसलिये प्यार से बोलो, जय हो भारत महान।।
***डा. होशियार सिंह यादव, कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़, हरियाणा







Tuesday, September 16, 2025

 कविताएं



               आरोप
बिन देखे, बिन सोचे लगा देते हैं आरोप,
ऐसे भी साथी होते पीठ में देते छुरा घोप।
कलियुग में नहीं मिलेंगे अपने और पराये,
दर्द में डूबे वृद्ध जन, उनको कौन हंसाये?
दुष्ट से बचकर रहते,अपनो से कौन बचाये,
वो ही धोखा देते आये,जिसने गले लगाये।
कब लेंगे अवतार प्रभु,कर रहे लोग पुकार,
पाप और अधर्म का कितने कर रहे व्यापार।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, जिला महेंद्रगढ़,हरियाणा


 बेचारा किसान
वर्षा खूब हुई, फसल हुई बर्बाद,
बाढ़ देखकर 1995 की आई याद।
बाजरा,ग्वार, कपास नष्ट हो चुके,
अब किसान कर रहे हैं फरियाद।।
एक अक्टूबर से बाजरे की खरीद,
मंडियों में हो चुकी सब तैयारियां।
कैसे किसान पैदावार लेकर आए,
कितनी ही बढ़ चुकी हैं दुष्वारियां।।
***होशियार सिंह यादव*****
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा******


Monday, September 15, 2025

 कविताएं


        आरोप
बिन देखे, बिन सोचे लगा देते हैं आरोप,
ऐसे भी साथी होते पीठ में देते छुरा घोप।
कलियुग में नहीं मिलेंगे अपने और पराये,
दर्द में डूबे वृद्ध जन, उनको कौन हंसाये?
दुष्ट से बचकर रहते,अपनो से कौन बचाये,
वो ही धोखा देते आये,जिसने गले लगाये।
कब लेंगे अवतार प्रभु,कर रहे लोग पुकार,
पाप और अधर्म का कितने कर रहे व्यापार।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, जिला महेंद्रगढ़,हरियाणा



 सोमवार
शिवभोले को याद करे,
आया है दिन सोमवार।
नर नारी पूजा करते है,
झट से हो जाओ तैयार।
कालकूट को पी डाला,
परहित का किया काम।
देवी देवता याद करते हैं,
ऐसे में शिव का है नाम।।
**डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा





Friday, September 12, 2025

 



कविताएं
 करनी भरनी
करनी का फल मिलता है,
चाहे लगा ले कितना जोर,
आज वो गया,कल जाएगा,
मचा हुआ पूरे जग में शोर।
वक्त बदलता है पल में तो,
भिखारी भी बन जाए राजा,
धन दौलत और घमंड डूबे,
क्षण में बज जाएगा बाजा।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़,हरि

 मतलब का व्यवहार
कितने भूखो मर रहे, कितने भरे भंडार,
कितना दौलत भरी,नहीं देने को तैयार।
कितने ही अमीर है, धोखे का व्यापार,
गिरते पड़ते मिले, बस जीने का आधार।
अपने पराये हो गये, कलियुग की मार,
अन्न के तो भंडार भरे, नहीं मिले उधार।
कितने दोस्त बनते, मतलब का व्यवहार,
चोर साहब को देखिये, चोरी से ही प्यार।।
**डा. होशियार सिंह यादव पत्रकार
एवं लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


           इंसान
इंसान बनो, हैवान नहीं,
सत्कर्म करो, पाप नहीं,
परहित करो, लगे सही,
दाता से डरो, धर्म यही।
सत्य बोलों, बात तोलो,
कर्म करो, धर्म है यहीं,
मधुर बोलो,कड़वा नहीं,
मरेंगे सभी,विधान यही।।
**होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा

Monday, September 08, 2025


 कविताएं

               चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण चल रहा, देख लो जरा आज,
खगोलीये घटना है, नहीं छुपा कोई राज।
नंगी आंखों से देखो,सुंदर नजारा खिलेगा,
सूर्य ग्रहण न देखो,नुकसान बड़ा मिलेगा।
भोजन खराब नहीं हो,न कोई हो नुकसान,
विज्ञान तर्क देखो, बनो नहीं अब अज्ञान।
सूर्य पृथ्वी चंद्र हो सीध में, ग्रहण कहाये,
मिलके नभ को देखो,बड़ा मजा फिर आये।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़,हरियाणा

             आदत
कुत्ते की आदत हैं टांग उठाकर मूतना,
राक्षस की आदत वैसी जैसी थी पूतना।
चोर साहब की आदत जन को दर्द देना,
संत की आदत दर्द अपने सिर पर लेना।
चोरी जिसने सीखी छोड़ ना वो पाएगा,
भरी भीड़ में देखो थपाथप वो खाएगा।
करनी का फल मिलता देर नहीं सवेर,
सोच समझ ले वक्त है मिले नहीं फेर।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक,महेंद्रगढ़,हरियाणा

Saturday, September 06, 2025

 कविताएं

  बाढ़

बाढ़ ने लील लिये कितने पशु और इंसान,
करोड़ों का नुकसान हुआ,बने लोग बेजान।
सहायता उनको चाहिए,बढ़ा सेवा के हाथ,
प्रकृति को रोद्र रूप, कितने हो गये अनाथ।
सेवा ऐसा उपकार है, देता जन मन आराम,
सेवा करो असहाय की, छोड़कर सब काम।
परोपकार की भावना,जिसके दिल में आज,
प्रभु एक दिन ऐसे जन को, देता देखा ताज।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़
विश्व रिकार्डधारक, हरियाणा




 चापलूस
हिंदी आये न अंग्रेजी, चमचा बना घूमता है,
ब्लैकमेलिंग की हद करें,दौलत को चूमता है।
कलंक बना शिक्षा क्षेत्र, गोबर का ज्ञान नहीं,
बचकर रहना लोगों उससे, मिलता गर कहीं।
उल्टे धंधे करता रहता, तेरी बैंगन मेरी छाय,
पैसे गर उधार दिये, करते रहो यूं हाय-हाय।
मारो डंडा ऐसे नीच को, तब समझ आएगी,
वरना दुष्ट की आदत, हर जन दिल दुखाएगी।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरि.


Thursday, September 04, 2025

 



 बर्बाद
जिस घर महिला की ऊंची आवाज,
वो घर इक दिन हो जाता है बर्बाद।
मात पिता की सेवा न करे औलाद,
आएगी तब-तब श्रवण कुमार याद।
महिला दूसरों की करती जब बड़ाई,
समझो चैन नहीं मिले होगी लड़ाई।
खूब मिले जब परिवार जन में प्यार,
जीत होगी सदा होगी कभी ना हार।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़,हरियाणा

       गुरुजन
नमन करूं गुरुजन को जिन्होंने दिया ज्ञान,
संपन्न हो गया आज में मिट गया अज्ञान।
जहां भी हो मेरे गुरु चरणस्पर्श बार-बार,
गुरु बनों तुम बार-बार जन्म लूं मैं हजार।
देते रहना शिक्षा मुझे,भुला नहीं पाऊं प्यार,
सफल हुआ जन्म मेरा,अब तक था बेकार।
जीओ तुम हजार वर्ष,करता हूं सदा कामना,
खुशियां अपार मिले,दुखों का न हो सामना।।
**डा. होशियार सिंह यादव, कनीना
विश्व रिकार्डधारक, जिला महेंद्रगढ़,हरियाणा

Tuesday, September 02, 2025

 कविताएं


           वर्षा
कहीं फसल बर्बाद न हो जाये,
बरसात का है दौर अभी जारी।
फसल पैदावार ले ले किसान,
तो फिर वर्षा भी लगेगी प्यारी।।
जोर नहीं चलता उस दाता पर,
होगा वहीं जो उसने रच डाला।
रुक जाये कैसे भी यह बरसात,



बस करो प्रार्थना लेके के माला।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़,हरियाणा

         स्वार्थ
धोखा दे रहे हैं जिनको मानते हैं खास,
स्वार्थ की दुनियां,किस पर हो विश्वास।
जरूरत हो पैसे की, बन जाते जन दास,
देने होते पैसे तो झट से बजा देते बांस।
मात पिता आज दिन मिलते बड़े उदास,
कराहते बुजुर्ग तो हंसते देखे बच्चे पास।
पैसे खातिर कत्ल करें, रिश्ता जाए भूल,
मोटा कर्ज लेकर के, जाते फांसी पे झूल।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
   विश्व रिकार्ड धारक, महेंद्रगढ़, हरि.