देश के दुश्मन
सर्प सम धुआं निकलते हारे को देखकर राम से रुका नहीं गया और रमन से कहा-तुम देश के दुश्मन हो। जिस आक्सीजन की कमी होती जा रही है उसे इस धुआं से और घटा रहे हो। जिन हरे पेड़ों को काटकर सूखा रहे हो वो तो जीवन बचाने वाले होते हैं। धरती पर गंदगी फैलाकर इसे प्रदूषित कर रहे हो तो भविष्य कैसा होगा?
रमन तमतमा कर बोला-ये हरे पेड़ मेरे खेत के हैं और हारा मेरे घर में चल रहा है। धुआं दे रहा है तो मेरे घर में? तुम क्यों क्रोध में आ रहे हो?
राम ने अश्रु पूर्ण नेत्रों से कहा-तुम जैसे लोगों की तुच्छ सोच ने पर्यावरण को इतना बिगाड़ा है कि कैंसर, हृदयघात, दमा, खांसी, मिर्गी और न जाने कितने रोग घेर रहे हैं। असामयिक मौत, जवानी में बुढ़ापा आना, बाढ़, आपदाएं आने लगी हैं। तुम नहीं सुधरोगे तो प्रकृति एक दिन तुम्हें सुधार देगी। वक्त है अभी भी संभल जा। इतना कहकर राम रोते हुए आगे बढ़ गया। मन ही मन बुड़बुड़ाया इस जैसे जन देश और प्राणी के दुश्मन हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
सर्प सम धुआं निकलते हारे को देखकर राम से रुका नहीं गया और रमन से कहा-तुम देश के दुश्मन हो। जिस आक्सीजन की कमी होती जा रही है उसे इस धुआं से और घटा रहे हो। जिन हरे पेड़ों को काटकर सूखा रहे हो वो तो जीवन बचाने वाले होते हैं। धरती पर गंदगी फैलाकर इसे प्रदूषित कर रहे हो तो भविष्य कैसा होगा?
रमन तमतमा कर बोला-ये हरे पेड़ मेरे खेत के हैं और हारा मेरे घर में चल रहा है। धुआं दे रहा है तो मेरे घर में? तुम क्यों क्रोध में आ रहे हो?
राम ने अश्रु पूर्ण नेत्रों से कहा-तुम जैसे लोगों की तुच्छ सोच ने पर्यावरण को इतना बिगाड़ा है कि कैंसर, हृदयघात, दमा, खांसी, मिर्गी और न जाने कितने रोग घेर रहे हैं। असामयिक मौत, जवानी में बुढ़ापा आना, बाढ़, आपदाएं आने लगी हैं। तुम नहीं सुधरोगे तो प्रकृति एक दिन तुम्हें सुधार देगी। वक्त है अभी भी संभल जा। इतना कहकर राम रोते हुए आगे बढ़ गया। मन ही मन बुड़बुड़ाया इस जैसे जन देश और प्राणी के दुश्मन हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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