सहनशक्ति
एक कमर से झुके हाथ में बेंत लेकर चले जा रहे बुजुर्ग ने रास्ते में एक अच्छे कपड़ों में सजे संवरे युवक से पूछा-बेटा, रामपुर गांव को कौन सा रास्ता जाएगा?
युवक ने बुजुर्ग से आंखें फेरते हुए जवाब दिया-सामने वाला। बुजुर्ग ने फिर से पूछा-सामने तो एक नहीं दो रास्ते हैं? कौन सा गांव को जाएगा? जवाब फिर मिला सामने वाला।
बुजुर्ग को तसल्ली नहीं हुई तो पूछा-बेटा सामने का रास्ता गांव को ही जाएगा?
युवक क्रोध में आ गया और कहा-मैं ही रास्ता बताने वाला एकमात्र युवक हूं। जाइये और किसी से पूछ ले। आ जाते हैं बूढ़े खूंसट समय बर्बाद करने के लिए। बुजुर्ग मुस्कुराया और कहा-वाह बेटे, सहनशीलता ही गायब है। कपड़ों में इत्र लगाकर बन ठन कर दिखावे के लिए घूमते हो किंतु आंखों में शर्म लिहाज नहीं है। आजकल के युवा बात बात पर मानसिक संतुलन खो बैठते हैं। इतना कहकर बुजुर्ग असहाय चल दिया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
एक कमर से झुके हाथ में बेंत लेकर चले जा रहे बुजुर्ग ने रास्ते में एक अच्छे कपड़ों में सजे संवरे युवक से पूछा-बेटा, रामपुर गांव को कौन सा रास्ता जाएगा?
युवक ने बुजुर्ग से आंखें फेरते हुए जवाब दिया-सामने वाला। बुजुर्ग ने फिर से पूछा-सामने तो एक नहीं दो रास्ते हैं? कौन सा गांव को जाएगा? जवाब फिर मिला सामने वाला।
बुजुर्ग को तसल्ली नहीं हुई तो पूछा-बेटा सामने का रास्ता गांव को ही जाएगा?
युवक क्रोध में आ गया और कहा-मैं ही रास्ता बताने वाला एकमात्र युवक हूं। जाइये और किसी से पूछ ले। आ जाते हैं बूढ़े खूंसट समय बर्बाद करने के लिए। बुजुर्ग मुस्कुराया और कहा-वाह बेटे, सहनशीलता ही गायब है। कपड़ों में इत्र लगाकर बन ठन कर दिखावे के लिए घूमते हो किंतु आंखों में शर्म लिहाज नहीं है। आजकल के युवा बात बात पर मानसिक संतुलन खो बैठते हैं। इतना कहकर बुजुर्ग असहाय चल दिया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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