रिक्षा चालक
वो शिक्षक के नाम पर कलंक था। कभी कक्षा में जाकर पढ़ाया नहीं। यहीं कारण था कि विद्यार्थियों की नजरों से गिरा हुआ था। एक दिन शिक्षक दिल्ली शहर में एक ट्रेन से उतरकर बाहर की ओर बढऩे लगा तो दौड़कर एक युवक ने शिक्षक के पैर छुए। शिक्षक फूलकर कुप्पा हो गया और पूछा-बेटे अपना परिचय दो और यहां दिल्ली में आप क्या कर रहे हो?
युवक ने उत्तर दिया कि आपके पास आमूक स्कूल में पढ़ता था किंतु आप कक्षा में आकर कभी पढ़ाते नहीं थे जिसके चलते मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई। कहीं नौकरी नहीं मिली और फिर रिक्षा चलाकर पेट भरने को मजबूर होना पड़ा है। आपकी मेहरबानी से मैं अब दिल्ली में दस वर्षों से रिक्षा चला रहा हूं। शिक्षक ने जब युवक की बात सुनी तो सिर शर्म से झुक गया। मन ही मन सोच रहा था कि सचमुच विद्यार्थियों के साथ घोर अन्याय किया है। अगर मेहनत से पढ़ाता तो आज यह युवक मुझे पलकों पर बिठा लेता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
वो शिक्षक के नाम पर कलंक था। कभी कक्षा में जाकर पढ़ाया नहीं। यहीं कारण था कि विद्यार्थियों की नजरों से गिरा हुआ था। एक दिन शिक्षक दिल्ली शहर में एक ट्रेन से उतरकर बाहर की ओर बढऩे लगा तो दौड़कर एक युवक ने शिक्षक के पैर छुए। शिक्षक फूलकर कुप्पा हो गया और पूछा-बेटे अपना परिचय दो और यहां दिल्ली में आप क्या कर रहे हो?
युवक ने उत्तर दिया कि आपके पास आमूक स्कूल में पढ़ता था किंतु आप कक्षा में आकर कभी पढ़ाते नहीं थे जिसके चलते मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई। कहीं नौकरी नहीं मिली और फिर रिक्षा चलाकर पेट भरने को मजबूर होना पड़ा है। आपकी मेहरबानी से मैं अब दिल्ली में दस वर्षों से रिक्षा चला रहा हूं। शिक्षक ने जब युवक की बात सुनी तो सिर शर्म से झुक गया। मन ही मन सोच रहा था कि सचमुच विद्यार्थियों के साथ घोर अन्याय किया है। अगर मेहनत से पढ़ाता तो आज यह युवक मुझे पलकों पर बिठा लेता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
No comments:
Post a Comment