दीपावली
दस रुपये देना बेटा,बाबानुमा शख्स ने हाथ पसारते हुए आवाज लगाई।
सब्जी पूड़ी बेचने वाले ने कहा-बाबा, आओ। अभी बोहनी बट्टा भी नहीं हुआ है किंतु बाबा आज दीपावली है, आपको भरपेट खाना खिलाऊंगा।
नहीं, नहीं, मुझे तो दस रुपये ही चाहिए-बाबानुमा शख्स ने कहा।
तो फिर आपको पैसे से क्या करना है? आखिरकार हम कमाते हैं तो बस रोटी के लिए। अगर बच्चे भूखे हैं तो उन्हें भी ले आओ, मैं आज उन्हें भी भरपेट खाना खिलाऊंगा। कपड़े नहीं है तो पुराने वस्त्र मेरे बच्चों के हैं जो तुम्हें दे दिए जाएंगे। सब्जी पूड़ी बेचने वाले का जवाब था।
बाबानुमा शख्स ने तपाक से कहा-मैं तो दीपावली मनाऊंगा?
क्या? मतलब, तुम्हें तो दारू के पैसे चाहिए। अपने बच्चों से तू भीख मंगवाकर उनकी दारू पी जाता है। भग जा वरना इतना पीटूंगा कि नानी याद आ जाएगी-सब्जी पूड़ी विक्रेता ने कहा।
इतना सुनकर बाबानुमा शख्स त्वरित गति से आगे बढ़ गया किंतु जाते जाते बार बार पीछे मुड़कर देख रहा था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
दस रुपये देना बेटा,बाबानुमा शख्स ने हाथ पसारते हुए आवाज लगाई।
सब्जी पूड़ी बेचने वाले ने कहा-बाबा, आओ। अभी बोहनी बट्टा भी नहीं हुआ है किंतु बाबा आज दीपावली है, आपको भरपेट खाना खिलाऊंगा।
नहीं, नहीं, मुझे तो दस रुपये ही चाहिए-बाबानुमा शख्स ने कहा।
तो फिर आपको पैसे से क्या करना है? आखिरकार हम कमाते हैं तो बस रोटी के लिए। अगर बच्चे भूखे हैं तो उन्हें भी ले आओ, मैं आज उन्हें भी भरपेट खाना खिलाऊंगा। कपड़े नहीं है तो पुराने वस्त्र मेरे बच्चों के हैं जो तुम्हें दे दिए जाएंगे। सब्जी पूड़ी बेचने वाले का जवाब था।
बाबानुमा शख्स ने तपाक से कहा-मैं तो दीपावली मनाऊंगा?
क्या? मतलब, तुम्हें तो दारू के पैसे चाहिए। अपने बच्चों से तू भीख मंगवाकर उनकी दारू पी जाता है। भग जा वरना इतना पीटूंगा कि नानी याद आ जाएगी-सब्जी पूड़ी विक्रेता ने कहा।
इतना सुनकर बाबानुमा शख्स त्वरित गति से आगे बढ़ गया किंतु जाते जाते बार बार पीछे मुड़कर देख रहा था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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