चौलाई
अक्सर दो प्रकार की चौलाई देखने को मिलती है। देसी चौलाई जो जंगलों में बारिश के समय पैदा होती थी जिससे कढ़ी, खाटा का साग, भाजी बनाकर खाते थे। पर्याप्त मात्रा में जंगल में मिलती थी,इसलिए इसे जंगली चौलाई भी कहते थे। वर्तमान में बीज की दुकानों पर जो चौलाई मिलती है वह बड़े बड़े शहरों के लोग खा रहे हैं। यह बार बार काटी जा सकती है। रक्त संबंधित बीमारियों में रामबाण होती हैं। चौलाई अभाव में लोग कंटीला चौलाई को भी खा रहे हैं जो सड़क किनारे या खेतों में भारी मात्रा में मिलती है। देसी एवं शहरी दोनों प्रकार की चौलाई देख सकते हैं। ** होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
अक्सर दो प्रकार की चौलाई देखने को मिलती है। देसी चौलाई जो जंगलों में बारिश के समय पैदा होती थी जिससे कढ़ी, खाटा का साग, भाजी बनाकर खाते थे। पर्याप्त मात्रा में जंगल में मिलती थी,इसलिए इसे जंगली चौलाई भी कहते थे। वर्तमान में बीज की दुकानों पर जो चौलाई मिलती है वह बड़े बड़े शहरों के लोग खा रहे हैं। यह बार बार काटी जा सकती है। रक्त संबंधित बीमारियों में रामबाण होती हैं। चौलाई अभाव में लोग कंटीला चौलाई को भी खा रहे हैं जो सड़क किनारे या खेतों में भारी मात्रा में मिलती है। देसी एवं शहरी दोनों प्रकार की चौलाई देख सकते हैं। ** होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**





















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