Monday, December 30, 2019

चौलाई
अक्सर दो प्रकार की चौलाई देखने को मिलती है। देसी चौलाई जो जंगलों में बारिश के समय पैदा होती थी जिससे कढ़ी, खाटा का साग, भाजी बनाकर खाते थे। पर्याप्त मात्रा में जंगल में मिलती थी,इसलिए इसे जंगली चौलाई भी कहते थे। वर्तमान में बीज की दुकानों पर जो चौलाई मिलती है वह बड़े बड़े शहरों के लोग खा रहे हैं। यह बार बार काटी जा सकती है। रक्त संबंधित बीमारियों में रामबाण होती हैं। चौलाई अभाव में लोग कंटीला चौलाई को भी खा रहे हैं जो सड़क किनारे या खेतों में भारी मात्रा में मिलती है। देसी एवं शहरी दोनों प्रकार की चौलाई देख सकते हैं। ** होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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  • Virender Singh Jangra क्या शब्दों को अपनी शैली में समेटा है आप पर मां सरस्वती की असीम कृपा है शुभ रात्रि
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  • Virender Singh Jangra बहुत अच्छा संदेश दिया है सर जी हम आपके विचारों का स्वागत करते हैं और मां सरस्वती की कृपा आप पर बनी रहे इन्हीं शुभकामनाओं के साथ शुभ रात्रि धन्यवाद
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  • Ved Prkash हरियाणवी किसी कवि के गीत के बोल हैं एजी है जी जगत में बढ़ा बताया काम काम नहीं करने वालों की इज्जत नहीं 6 दाम
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  • Virender Singh Jangra अच्छा संदेश दिया है सर जी आपने देश की भविष्य पीढ़ी के लिए ताकि वह अतीत की स्मृतियों को याद रख सकें
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