बेचारा
बुजुर्ग की पत्नी एक पुत्र को छोड़कर चल बसी। 20 वर्ष हो चुके अकेला अनपढ़ बुजुर्ग दिनभर मजदूरी करता और अनाज की बोरी पीठ पर लादकर दूर डालने के लिए जाता। शाम को थका हारा घर पहुंचता और अपने इकलौते पुत्र के लिए खाना बनाकर उसे पढऩे के लिए कहता। देर रात तक अपने पुत्र के पास बैठा रहता। देर रात तक जागने के कारण दिन में उसे नींद आती किंतु मजबूरन बच्चे के लिए पैसे कमाता ताकि वो पढ़ लिखकर महान बन सके। अगले दिन अभी उसने बोरी उठाई थी कि पैर फिसल गया और बुजुर्ग गिर गया, बोरी उसके ऊपर गिर गई। बुजुर्ग ने सुधबुध खो दी। अस्पताल ले जाया गया तो मौत हो गई। आज उनका पुत्र बेचारा बन गया। बच्चे की रो रोकर बुरी हालात हो गई। आज उसका जगत में कोई नहीं था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बुजुर्ग की पत्नी एक पुत्र को छोड़कर चल बसी। 20 वर्ष हो चुके अकेला अनपढ़ बुजुर्ग दिनभर मजदूरी करता और अनाज की बोरी पीठ पर लादकर दूर डालने के लिए जाता। शाम को थका हारा घर पहुंचता और अपने इकलौते पुत्र के लिए खाना बनाकर उसे पढऩे के लिए कहता। देर रात तक अपने पुत्र के पास बैठा रहता। देर रात तक जागने के कारण दिन में उसे नींद आती किंतु मजबूरन बच्चे के लिए पैसे कमाता ताकि वो पढ़ लिखकर महान बन सके। अगले दिन अभी उसने बोरी उठाई थी कि पैर फिसल गया और बुजुर्ग गिर गया, बोरी उसके ऊपर गिर गई। बुजुर्ग ने सुधबुध खो दी। अस्पताल ले जाया गया तो मौत हो गई। आज उनका पुत्र बेचारा बन गया। बच्चे की रो रोकर बुरी हालात हो गई। आज उसका जगत में कोई नहीं था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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