Friday, September 30, 2022

                                    नारी

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विधा- कविता
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अधरों पर लालिमा, सिर पर घट का वास,
देखे कोई सुंदर मूर्त तो, रुक जाएगी सांस।
देव मुनि,दानव सभी, रहे हैं नारी के दास,
उनकी संगति हर जन को, आती है रास।।

घट को रखके चल पड़ी, करे अति शृंगार,
अपने दिल में रखती,चाहत का इक संसार।
सम्मुख कोई आन पड़े, मानों निश्चित हार,
उसका जग में रहता, इस सुंदर सा प्यार।।

कभी जहां में राज था, आज वक्त की मार,
नारी को चाहिए , पूरे जगत का इक प्यार।
सुंदर नयन नारी के, हर जन पर हैं उधार,
पर नारी कहलाती है, चलना तलवार धार।।

धर्म कर्म में आगे है, नहीं किसी से कम,
करो मुकाबला देख लो, अजमाकर दम।
पर दुर्दशा नारी देख, आंखें होती हैं नम,
यूं ही बर्बरता चली, निकलेगा जन दम।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा





Saturday, September 24, 2022

 
               सागर
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हाइकु
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सागर उठे
ऊंची जब तरंग
छिड़ती जंग

गहरा सिंधु
जीव जंतु हैं बंधु
खुशी संसार

तरंग उठे
सागर जब मिले
मन भी खिले

सागर रचा
संसार जब बसा
जन भी हँसा।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरिया
णा

Wednesday, September 21, 2022

 अन्तर्राष्ट्रीय शांति दिवस
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 विधा- छंदमुक्त कविता
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शांति जग में चाहिए, करना है एक काम,
एकता और भाईचारे का, देना बस पैगाम।
जब जग में हो शांति, पूरा जगत हमारा हो,
बापू के सपनों का ये, भारत देश प्यारा हो।।

पंचशील का सिद्धांत, पूरे जग में फैला दो,
शांति के दूत हैं कबूतर,हवा में अब उड़ा दो।
आपस में जब प्रीत हो, बन जाए जन अपने,
भाईचारे का वो पैगाम, जन जन में फैला दो।।

वर्ष 2002 से ही, शांति का दिवस मनाते हैं,
देते हैं पैगाम जगत को,जन को गले लगाते हैं।
कभी नहीं यह भूलना,सब जन होते हैं अपने,
आओ खुशियां बांट दे,जन को अब हँसाते हैं।।

परस्पर लाभ नीति को, देना होगा यह पैगाम,
आक्रामक नीति भूलकर, करना है जग नाम।
अखंडता का पाठ पढ़ा,ऐसा है जन का काम,
धर्म कर्म के बल पर सदा,बनता तन भी धाम।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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*  होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


Monday, September 19, 2022

                  कुछ तो है

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विधा-कविता   
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कुछ न कुछ होता है, जगत आधार,
दूर से आकर बढ़ जाता है जन प्यार।
बसा हुआ यहां वहां, सुनहरा संसार,
आपसी प्रेम नहीं हो तो जीना बेकार।।

कुछ तो है,जो खिंच लेता है इंसान,
कोई तो बदनाम हो,कोई बने महान।
हर मानव की जग में,होती पहचान,
जीने की अदा हो, अपनी हो शान।।

कुछ तो है अदृश्य शक्ति,देती प्रमाण,
यह जगत भरा है, गुणों की है खान।
आगे बढ़कर देख, बन नहीं अज्ञान,
बुराई का मन कर लेता पूर्व में भान।।

कुछ तो है, जो चलाता सारा संसार,
साधु, संत सब खोज खोजकर हारे,
जप-तप करते देखे कभी दिन रात,
कभी खोज में पहुंचते मंदिर के द्वारे।

कुछ तो है, अदृश्य रूप में दे साथ,
कैसे मौसम बदले, कैसे  दिन रात,
कभी बने सुख दुख के ही हालात,
ज्ञान विज्ञान के चर्म की चले बात।

कुछ तो है,जो यादों में आ जाते हैं,
कुछ बेबात ही गले में पड़ जाते हैं,
कुछ तो यादों में सारी रात सताते हैं,
कुछ अनजाने हमें गले से लगाते हैं।

कुछ तो है,जो मातृभूमि पर दे जान,
शहीद होते हैं तो बनती है पहचान,
वीर सपूत देश में कहलाते हैं महान,
देशभक्त देश पर हो जाते हैं कुर्बान।

कुछ तो है, जो प्रेरणा देते हैं इंसान,
कितने ही लोग, दे जाते बड़ा दान,
गुरुजनों के पास बैठ, पाते हैं ज्ञान,
उन्नति करता जाये, देश का विज्ञान।

कुछ तो है,जो मिले मात पिता गुरु,
लंबी कहानी अचानक होती शुरू,
निराशा भी क्षण में बन जाती आशा,
देखा नजारा तो बढ़ जाएगी पिपासा।

कुछ तो है, खिंचा चला जाए मानव,
कब दिमाग बदले, बन जाता दानव,
पल में खुशियां बदल जाती हैं गम,
नहीं पता चलते चलते निकले दम।

कुछ तो है, जो देता अंदरूनी शक्ति,
दुष्ट के दिल में जाएगी कभी भक्ति।
रोते रोते जन शुरू कर देता है हँसना,
ख्वाबों में आते हैं वो सांसों में बसना।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400