Sunday, July 31, 2022

 तितली के संग
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विधा-कविता   
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तितली के संग गीत सुनाऊं,
नृत्य करूं, संग में हर्षाऊं।
कभी अंबर,बागों में फिरती,
उनके संग नभ उड़ता जाऊं।।

तितली बागों में उड़ती है,
फूल फूल रस पीती रहती।
सुंदर उसकी पंख देखकर,
आंखें जन कहानी कहती।।

तितली के संग उड़ूं हवा,
मिल जा मन को आराम।
उड़ते रहना दिनभर यहां,
और नहीं कुछ भी काम।।

तितली के संग मिले चैन,
नहीं मिले तो रहता बेचैन।
एक डाल से दूजे ही जाती,
मिल जाये तन मन को चैन।।

तितली रानी बड़ी स्यानी,
कभी नहीं मांगे वो पानी।
उसका घर पूरा ही संसार,
होती नहीं कभी अज्ञानी।।

वो तितली घर में मिलती,
ये तितली मिलती जंगल।
खुश रहना इसकी आदत,
जंगल में भी कर दे मंगल।।

तितली के संग डाली पाऊं,
खुद हंसूं उसको भी हँसाऊं।
काम देख तितली प्यारी के,
अपने दिल के पास बुलाऊं।।

तितली कहती रहना है संग,
यह दुनिया है बड़ी ही जंग।
स्वार्थ भरा तन कूट कूटकर,
बदले पल ही पल में रंग।।

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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव




मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Friday, July 29, 2022

           आंखों की आंखों से बातें

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विधा-कविता
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आंखों की आंखों से बातें,
जब कभी जन कहता है।
मन मंदिर में बस जाता है,
बस प्यार दिलों में रहता है।।

आंखों की आंखों से बातें,
चुपचाप चले ज्यों तीर चले।
कभी तलवार का सामना हो,
कभी दिलों में यूं प्यार पले।।

आंखों की आंखों से बातें,
मुमकिन है कुछ कर पाये।
दिल तो बेचारा खो बैठे हैं,
अब करते रहते हाय-हाये।।

आंखों की आंखों से बातें,
गूढ लगे और होती न्यारी।
समझने वाले समझ जाते,
जो समझे उसे लगे प्यारी।।

आंखों की आंखों से बातें,
कहती है एक मन कहानी।
दो दिल जब मिलते हैं तो,
करने लग जाते मनमानी।।

आंखों की आंखों से बातें,
नहीं कोई मुख कह पाता।
जब किसी वो मोड़ मिले,
तब वो सुनहरा दिन आता।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा




  फोन 09416348400

Thursday, July 28, 2022

               बरसते नैन

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विधा-छंदमुक्त कविता

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भीगी भीगी रात हो,
बरस रहे हो नैन,
दिल में एक आहट सुने,
कहीं मिले न चैन।

दूर गगन बरसात हो,
रिमझिम रिमझिम करे शोर,
दिल में एक दर्द पनपे,
वन जंगल में नाचे जब मोर।।

परदेश गये जिनके पीया,
सावन बैरी सताता है,
पीया मिले जब आन के,
दिल में चैन आता है।

सांझ सवेरे आहट हो,
बार बार मन झांके बाहर,
खुशी मिले जब मन को,
दीप जले तब घर घर।

बरसते नैन सदा कह रहे,
सावन सूखा न जाये,
नसीब मिले जिनके खुशी,
वो जन उतना पाय।।
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स्वरचित एवं नितांत मौलिक
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-डा होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा




फोन 09416348400

Saturday, July 16, 2022

 
       महज सांसों का रुक जाना

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विधा-कविता
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महज सांसों का रुक जाना,
मौत कभी नहीं जन मानते,
अहित करें इस जग में जो,
उसको ही मौत जन जानते।

महज सांसों का रुक जाना,
डर का देता है जन आभास,
जीना उसका  असली जीना,
जो पाप, बुराई का करे नाश।

महज सांसों का रुक जाना,
नहीं होता है बुराई का अंत,
पाप कर्मों जगत से मिटा दो,
कह गये जग से कितने संत।

महज सांसों का रुक जाना,
मिट सकता नहीं जन नाम,
सत्य धर्म का नाश नहीं हो,
मधुर सुगंध फैलाना काम।

सांसे कभी भी बंद हो जाये,
राह में चलते चलते गिरता,
उसका अंत कभी नहीं जग,
जो असत्य से हरदम डरता।

सांसे जीवन भर चलती रहे,
दुख दर्द इंसान पर ना आये,
हर इंसान सुख भोगता मिले,
आपदाएं जन को ना रुलाये।

साहस भी आगे नहीं बढ़ता,
जब हिम्मत इंसान की घटे,
आगे इंसान यूं  बढ़ता जाये,
ख्वाब हिलोरे यूं लेते रहेंगे,
बस सांसों की डोर ना बटे।

महज सांसों का रुक जाना,
लोग मानते है जिंदगी अंत,
पर मरकर जो नाम कमा ले,
आशाएं उभर आएंगी अनंत।





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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400








Friday, July 15, 2022


                     सावन
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विधा-कविता
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रिमझिम रिमझिम बूंदे गिरे,
लग रही सावन की झड़ी,
मनभावन मौसम हो गया,
क्या सुंदर लग रही घड़ी।

नृत्य कर रहे वन में मोर,
दादुर करते संगीतमय शोर,
पपीहा नभ पर शोर मचाये,
कलरव करते पक्षी लुभाये।

सुबह की बेला मन मोहती,
सांझ मन को करती विभोर,
ऐसा सुंदर नजारा मिल रहा,
बादल गरज रहे चहुं ओर।

शिव आराधना का सावन,
जप,तप,व्रत कर रहे भक्त,
सावन की झड़ी लगी रहे,
साधु संत हो रहे हैं विरक्त।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400









बरसो मेघा
विधा-छंदमुक्त कविता
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उमड़ घुमड़कर आये बादल,
पूरे जगत में छाये ये बादल,
मेघा बरसो यूं जोर लगाकर,
किसान समस्या होती हल।।

चाह रहे हैं तुमको मतवाले,
प्रेमी युगल  जन भोलेभाले,
जीवन तुझ से ही बन जाता,
करते हैं यह अब तेरे हवाले।

सावन की ठंडी पड़े फुहार,
बिन साजन है जीवन बेकार,
मघा बरसे धरती हो प्रसन्न,
लो आज खड़े हैं हम तैयार।।

मेघा बरसों पूरे ही सावन,
आएगी चहुं ओर हरियाली,
वो दाता है  देख रहा सब,
वो ही होता जग का माली।।
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स्वरचित एवं नितांत मौलिक
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-डा होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा



फोन 09416348400

Wednesday, July 13, 2022

  वो चेहरा
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विधा-कविता   
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प्यारा बाल घर पे आया, जन को लुभाया,
रोता तो रोते थे, कभी उसने बहुत हँसाया।
चला गया वो भी एक दिन, भुला न पाते,
जब बच्चों को देखते, वो बच्चा याद आता।।


फूल सा चेहरा कभी कभी मन को लुभाए,
आओ अपनी दिनचर्या, सबको बड़ा बनाये
मिला नहीं बिछुड़ गया, याद आता है भारी,
वो चेहरा मासूम था, सभी उसे गले लगाये।

चेहरे से होती पहचान, चेहरा बढ़ाये शान,
चेहरे के सामने तो, फीका लगता है जहां।
कभी कभी चेहरा, भूल नहीं पाता इंसान,
कभी कभी सुंदर चेहरा, देता वो भगवान।।

दोस्त हमारा प्यारा था, चेहरा था सजीला,
बातें उसकी प्यारी लगे,नेत्र उसका गीला।
बिछुड़ गया एक दिन,याद आता वो चेहरा,
कैसे भूले उस चेहरे को, अजब नखरीला।।

हसीन सूरत प्यारी थी,वो राज दुलारी थी,
गरीबी ने साथ दिया,वो वक्त की मारी थी।
भूखी मरती चली गई, क्या हसीन चेहरा,
लगता थी कि देवता भी, देते आये पहरा।।

नेता का वो चेहरा,मोह लेता था जन को,
जीत चहुं ओर होती,घूमे जब अगहन को।
बुजुर्ग हो गया और चला गया,याद आए,
लाख भुलाना चाहते,भुला नहीं हम पाये।।

प्रेमिका का चेहरा देख, आवेश में प्रेमी,
गलियों के चक्कर काटे,बनकर वो बहमी।
उसको तो याद आए,बस वह इक चेहरा,
प्रेमिका का चेहरा देखने,करे गहमागहमी।

बिछुड़ गई वो भार्या, चेहरा आता याद,
कोई मिला दे उससे, यही है फरियाद।
वो चेहरा बड़ा निराला लगता था प्यारा,
चली गई छोड़कर, आती उसकी याद।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जि




ला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400








Monday, July 11, 2022

                      नाराजगी
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विधा-कविता   
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नाराजगी जग में बुरी,
करना सभी जन प्रीत।
प्रेम प्रीत से जो रहता,
दुनिया गाती है गीत।।

छोटी सी है जिंदगानी,
नहीं ले नाराजगी मोल।
कड़वी बातें बुरी लगे,
मुख पे हो सुंदर बोल।।

जाना है भाव से पार,
सजग सदा रहो तैयार।
लाख प्रयास जन करे,
प्रभु समक्ष होती हार।।

नाराजगी स्वजन कभी,
पापी, अधम कहलाए।
दोस्ती अपनों के संग,
खुद हँसे और हँसाये।

नाराजगी उचित ना हो,
बैर भाव को बढ़ाती है,
सादगी,नम्रता जन की,
सागर पार लगाती है।।

गैरों से जब नाराजगी,
कहते बुरी उसको संत।
लंबे समय नाराज रहे,
हो जाएगा जल्दी अंत।।

नाराजगी दर्द दे जाती,
प्यार दिल में जोश दे।
हर वक्त सम रहना हो,
कभी नहीं कोई पंगा ले।।

नाराजगी जन की देख,
कितने जाते लोग दूर।
उस दाता से सदा डरो,
करना नहीं कोई गरूर।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Sunday, July 10, 2022

 


                 







बच्चों का संसार/   कविता
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बच्चों का संसार निराला,
हर बाल लगे भोलाभाला।
हँसते गाते मारे किलकारी,
उनकी हँसी लगती प्यारी।

बच्चे रोयेंगे तो आये कहर,
हँसते मिले बच्चे आठ पहर।
बच्चे मिलते गली मोहल्ले तो,
बच्चे मिलती हैं गली शहर।।

बच्चों का अपना हो संसार,
वो भी चाहते जन का प्यार।
उठा लो उनको चूम लेना,
इंसान के लिए हो उपहार।।
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-होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला महेंद्रगढ़, हरियाणा




                       कविता
             दुष्ट से व्यवहार
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माना दुष्ट हजार जग, पर तू बन जा हीरो,
गर्दन पर फिर वार कर,बन जाए वो जीरो।
लाख प्रयास करे दुश्मन,पर दिखला जोश,
सही वार गर भूलता,होगा फिर अफसोस।।

दुश्मन भी कुछ कम नहीं, करते लाखों वार,
पर अपनी बुद्धि चला, होगी दुश्मन ही हार।
जकड़ेंगे, पकड़ेंगे पर कर दे उनको भी फेल,
ऐसा करिश्मा कर दिखला, बन जाएगी रेल।।

जीना है अगर जगत, कर लो हौसले बुलंद,
वाकपटुता के बल सदा, अगले की तूती बंद।
हिम्मत जिसने हार दी,वो एक दिन हो बर्बाद,
आगे बढऩे की ठानी जिसने, जग करता याद।।

दिल और दिमाग मिल चले,होगी सदा जीत,
मुट्ठी में दुश्मन किया, हर जन करेगा प्रीत।
हौसले जिसके बुलंद हो,मिलते जन भी साथ,
अपनी कीर्ति इस जहान, बस अपने ही हाथ।।

देख दुष्ट धराशाई हो, रास्ता मिलेगा तब साफ,
पर एक ोच बना ले, दुश्मन को करना न माफ।
सदा वक्त के संग चले,शक्ति व्यर्थ नहीं प्रहार,
निर्धन,अबला,कमजोर संग,करना सदा इंसाफ।।
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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400

Friday, July 08, 2022

                                मुझे देखने दो

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विधा-कविता   
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भारत का इतिहास पुराना,
सबने जाना सबने माना।
मुझे देखने दो क्या-क्या,
लोगों ने इसको पहचाना।।

मुझे देखने दो आगे बढ़के,
कौन दोस्त है कौन बेगाना।
किसे दिल के पास बुलाना,
किसको दिल से दूर भगाना।।

शिक्षा की बयार बह रही है,
नालंदा तक्षशिला नाम पुराना,
मुझे देखने दो, उस वक्त को,
क्या सुंदर हसीन था जमाना।।

भाव विभोर कर दे खुशियां,
गम को यूं ना पास बुलाना।
जब अंबर से बरसता पानी,
दिल बुनता नये ताना बाना।।

मुझे देखने दो नव युग को,
जिसके ठोकर में है जमाना।
खुशियों को अब कैद करो,
दुखों का बीता है मयखाना।।

सुबह शाम अंबर पे नजारा,
मन को लगता सूरज प्यारा।
इंद्रधनुषी रंग उपवन में हैं,
मुझे देखने दो,जग उजारा।।

नभ पर रात्रि चांद लुभाये,
तारे झिलमिल गीत सुनाये।
मुझे देखने दो, सुंदर नजारा,
दिल बाग बाग हो हषाये।।

बारिश हुई है आज सुहानी,
दादुर करते जाये मनमानी।
मुझे देखने दो ,भंवरों को,
टिड्डा गाये गीत जवानी।।

चहुं ओर फसल लहलहाये,
कृषक के वो मन को हर्षाये।
मुझे देखने दो, छवि निराली,
उस भव्यता को दिल बसाये।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400















Thursday, July 07, 2022

    तू मुझ में ही तो है
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विधा-कविता   
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वक्त की बंदिशों ने बनाया कुछ ऐसा,
पहले जो आलम था नहीं अब वैसा।
एक दूजे के होते थे, अब लगते जुदा,
तू मुझ में ही तो है, देखों हूं मैं कैसा।।

पहुंचा प्रभु की चौखट दर्शन भी पाया,
ऐसा लगा आज दाता बड़ा मुस्कराया।
बोला प्रभु सुन ले, तू मुझ में ही तो है,
फिर क्यों न याद किया,यहां पर आया।।

माटी को जब लोंदा, समझ में यूं आया,
माटी ने हँसकर मुझको पास में बुलाया।
बोली माटी पुचकार के मुझे,सुन ले बात,
तू मुझ में ही मिलेगा,अंतिम दिन आया।।

हवा से करनी चाही जब मैंने हँसके बात,
सपनों की दिल से चल पड़ी मधुर बारात।
हवा ने कहा सुन तू भी अंश होता है मेरा,
तू मुझ में ही तो होगा,जब आएगी वो रात।।

झांका समुद्र में लगा चहुं ओर भरा है पानी,
आता है बुढ़ापा भी जब चली जाये जवानी।
कहा पानी ने पास बिठाकर,गर्व कभी न कर,
तू मुझ में ही तो होगा,कर ले चाहे मनमानी।।

एक रोज भार्या मुस्कराई और सामने आई,
पूछा क्या राज है मन में इतना जो मुस्कराई।
मत इतराओ इतना सुन ले आज यह पैगाम,
तू मुझ में ही तो बसती हो,छवि दिल बसाई।।

सर्दी के दिन थे जलाए बैठा था घर पे आग,
धुन निकली आग से, सुना डाला एक राग।
कहा अग्रि ने आज तू तप ले ले ले सहारा,
तू मुझ में ही तो होगा, तेरा शरीर मुझे प्यारा।।

देखा आकाश पर झिलमिल कर रहे थे तारे,
कितने ही चमक रहे थे जो कभी हुये हमारे।
आई एक रश्मि बोली सुन ले सुंदर सी बात,
तू मुझ में ही तो होगा, जब आये अंतिम रात।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400





















Wednesday, July 06, 2022

                       जितने निभाये जा सके
विधा-कविता   
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वादे करो बेशक हजार, खरा उतरना चाहिए,
जितने निभाये जा सके, उतने निभाने चाहिए।
दुनिया पास बुलाती है,चाहे पास नहीं जाइये,
धोखा देती है पल में वो,धोखा मत न खाइये।।

रस्में होती जीवन में,संख्या मिलती कई हजार,
पर वो इंसान कहलाता, जो करें इनसे ही प्यार।।
सदा निभानी चाहिए, जितनी निभाई जा सके,
रस्मों से जो दूर रहे, जीवन हो जाता है बेकार।।

यारी दोस्ती है कठिन, करके देख लेना कभी,
दोस्ती करते हैं लाखों, खरे उतरते कभी कभी।
दोस्ती निभाना फर्ज है, दोस्ती निभानी चाहिए,
जितनी निभाई जा सके, बस आनंद ही पाइये।।

दर्द नहीं दो कभी किसी, प्यार से ही हँसाइये,
हर गिरने वाले जन को, प्यार से ही उठाइये।
नफरत भरा यह संसार है, नफरत से बचाइये,
तिरस्कृत जो हो चुके, प्यार से गले लगाइये।।

लाखों लोग मिलते जहां, कोई हँसे कोई रोता,
जब किसी दर्द सताता, नयनों को वो भिगोता।
दोस्ती में दगा मिले, वो जन छुप छुपकर रोता,
हानि कभी जब हो जाये, वो नींद नहीं सोता।।

कर्तव्यों से बना जीवन, इनको निभाना चाहिए,
हरेक कदम पर कर्तव्य नया, लो मिल जाइये।
कर्तव्य निभाना है कठिन,उन्हें निभाना चाहिए,
नई शिक्षा मिल जाये, नई शिक्षा अब पाइये।।

बहुत बुरा कभी जहां,किस्मत जगानी चाहिए,
प्यास तन की हो बुरी, उसको बूझाना चाहिए।
प्यारा बचपन होता सदा, इसमें तो मुस्कराइये,
मर भी जाये अगर कभी,नया जीवन ले पाइये।।

जितने निभाये जा सके, उतने वचन निभाइये,
वचनों में बंधा हुआ, हर इंसान जगत पाइये।
कभी कभी कठिन वचन,खरा उतरना चाहिए,
धर्म कर्म की राह चलो,धर्म सदा ही निभाइये।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव










मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


Monday, July 04, 2022

                   








भुला ही कब
विधा-कविता   
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भुला ही कब आपको, हरदम किया याद,
दूर गये जब भी तुम, दिल करता फरियाद।
चैन मिला नहीं दिल को,नहीं मिला करार,
क्या बतलाऊं आपको, कितना तुमसे प्यार।।

बेटा गया विदेश में,आती उसकी बड़ी याद,
कभी हँसते कभी रोते, सता रही सदा याद।
भुला ही कब उनको, हर वक्त करते हैं बात,
उनकी याद बहुत बुरी, बुरी हो गई हालात।।

शिक्षा पाई जिनके कदमों में,वो गुरु महाराज,
लंबा अरसा बीत गया, नहीं हुई है मुलाकात।
अब तो नौकरी लगी, आती बड़ी उनकी याद,
बेचैन हुआ गुरु खातिर, मिलने को फरियाद।।

पाला पोषा जिन्होंने ने, देकर सहारा यूं रोज,
खा पीकर खुश रहे, मन में रही हरदम मौज।
दूर हो गये मात पिता, याद आती है हर दिन,
रो रोकर बेचैन हुये हैं,दिन बीत रहे गिन गिन।।

दोस्त सखा मिले जिंदगी,मिलकर हँसते गाते,
आज बिछुड़ गये वो सभी, दिन यूं बीत जाते।
बहुत याद करते उनको, भुला ही कब पाएंगे,
समय मिला तो छुट्टी लेके,मिलने को जाएंगे।

बचपन के दिन हसीन थे,हँस हँसकर हैं बीते,
क्या अजब गतिविधियां, कितनों के मन जीते।
भुला ही कब उन दिनों को,आती उनकी याद,
याद करे कभी उन दिनों को, हो जाते उन्माद।।

साधु मिले थे जिंदगी, बैठे थे उनके जब पास,
ज्ञान मिला अनमिट सदा, मुलाकात थी खास।
उनकी याद बड़ी आती,जब साधु मिलते रोज,
पर उनको ढूंढ पाना कठिन,करते उनकी खोज।।

बहुत कुछ खोया जिंदगी, पत्नी ने छोड़ा साथ,
2010 का वर्ष नवंबर माह छुड़ा गई वो हाथ।
बहुत दर्द में जीते हैं, भुला ही कब उन्हें पाये,
उनके संग बीते दिनों को,याद कर हम लुभाये।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400