Thursday, October 06, 2022

 लंकापति दहन और प्रदूषण

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विधा-छंदमुक्त कविता
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लंकापति का दहन हुआ,
उड़ता है धूआं चहुं ओर।
बुराई का अंत निश्चित है,
लाख मना लेना जग शोर।।
 
धूआं का प्रदूषण बढ़ा है,
मचा हुआ है हा-हाकार।
जीवनदायिनी आक्सीजन,
मिलती नहीं कभी उधार।।
 
हर वर्ष जलाते यूं आ रहे,
मिटा नहीं पाये अहंकार।
तन में लाख बुराइयां भरी,
मिटा दो बुराइयों से प्यार।।
 
जब जब प्रदूषण बढ़ गया,
जीना हो गया जन बेकार।
प्रदूषण वो बदहाल करता,
मच जाता जग हाहाकार।।

 
लंकापति का दहन होता,
पर कितने रावण भरे पड़े।
एक रावण को जब फूंकते,
कितने ही रावण पीछे खड़े।।
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* डा होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला महेंद्रगढ़, हरियाणा

Friday, September 30, 2022

                                    नारी

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विधा- कविता
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अधरों पर लालिमा, सिर पर घट का वास,
देखे कोई सुंदर मूर्त तो, रुक जाएगी सांस।
देव मुनि,दानव सभी, रहे हैं नारी के दास,
उनकी संगति हर जन को, आती है रास।।

घट को रखके चल पड़ी, करे अति शृंगार,
अपने दिल में रखती,चाहत का इक संसार।
सम्मुख कोई आन पड़े, मानों निश्चित हार,
उसका जग में रहता, इस सुंदर सा प्यार।।

कभी जहां में राज था, आज वक्त की मार,
नारी को चाहिए , पूरे जगत का इक प्यार।
सुंदर नयन नारी के, हर जन पर हैं उधार,
पर नारी कहलाती है, चलना तलवार धार।।

धर्म कर्म में आगे है, नहीं किसी से कम,
करो मुकाबला देख लो, अजमाकर दम।
पर दुर्दशा नारी देख, आंखें होती हैं नम,
यूं ही बर्बरता चली, निकलेगा जन दम।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा





Saturday, September 24, 2022

 
               सागर
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हाइकु
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सागर उठे
ऊंची जब तरंग
छिड़ती जंग

गहरा सिंधु
जीव जंतु हैं बंधु
खुशी संसार

तरंग उठे
सागर जब मिले
मन भी खिले

सागर रचा
संसार जब बसा
जन भी हँसा।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरिया
णा

Wednesday, September 21, 2022

 अन्तर्राष्ट्रीय शांति दिवस
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 विधा- छंदमुक्त कविता
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शांति जग में चाहिए, करना है एक काम,
एकता और भाईचारे का, देना बस पैगाम।
जब जग में हो शांति, पूरा जगत हमारा हो,
बापू के सपनों का ये, भारत देश प्यारा हो।।

पंचशील का सिद्धांत, पूरे जग में फैला दो,
शांति के दूत हैं कबूतर,हवा में अब उड़ा दो।
आपस में जब प्रीत हो, बन जाए जन अपने,
भाईचारे का वो पैगाम, जन जन में फैला दो।।

वर्ष 2002 से ही, शांति का दिवस मनाते हैं,
देते हैं पैगाम जगत को,जन को गले लगाते हैं।
कभी नहीं यह भूलना,सब जन होते हैं अपने,
आओ खुशियां बांट दे,जन को अब हँसाते हैं।।

परस्पर लाभ नीति को, देना होगा यह पैगाम,
आक्रामक नीति भूलकर, करना है जग नाम।
अखंडता का पाठ पढ़ा,ऐसा है जन का काम,
धर्म कर्म के बल पर सदा,बनता तन भी धाम।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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*  होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


Monday, September 19, 2022

                  कुछ तो है

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विधा-कविता   
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कुछ न कुछ होता है, जगत आधार,
दूर से आकर बढ़ जाता है जन प्यार।
बसा हुआ यहां वहां, सुनहरा संसार,
आपसी प्रेम नहीं हो तो जीना बेकार।।

कुछ तो है,जो खिंच लेता है इंसान,
कोई तो बदनाम हो,कोई बने महान।
हर मानव की जग में,होती पहचान,
जीने की अदा हो, अपनी हो शान।।

कुछ तो है अदृश्य शक्ति,देती प्रमाण,
यह जगत भरा है, गुणों की है खान।
आगे बढ़कर देख, बन नहीं अज्ञान,
बुराई का मन कर लेता पूर्व में भान।।

कुछ तो है, जो चलाता सारा संसार,
साधु, संत सब खोज खोजकर हारे,
जप-तप करते देखे कभी दिन रात,
कभी खोज में पहुंचते मंदिर के द्वारे।

कुछ तो है, अदृश्य रूप में दे साथ,
कैसे मौसम बदले, कैसे  दिन रात,
कभी बने सुख दुख के ही हालात,
ज्ञान विज्ञान के चर्म की चले बात।

कुछ तो है,जो यादों में आ जाते हैं,
कुछ बेबात ही गले में पड़ जाते हैं,
कुछ तो यादों में सारी रात सताते हैं,
कुछ अनजाने हमें गले से लगाते हैं।

कुछ तो है,जो मातृभूमि पर दे जान,
शहीद होते हैं तो बनती है पहचान,
वीर सपूत देश में कहलाते हैं महान,
देशभक्त देश पर हो जाते हैं कुर्बान।

कुछ तो है, जो प्रेरणा देते हैं इंसान,
कितने ही लोग, दे जाते बड़ा दान,
गुरुजनों के पास बैठ, पाते हैं ज्ञान,
उन्नति करता जाये, देश का विज्ञान।

कुछ तो है,जो मिले मात पिता गुरु,
लंबी कहानी अचानक होती शुरू,
निराशा भी क्षण में बन जाती आशा,
देखा नजारा तो बढ़ जाएगी पिपासा।

कुछ तो है, खिंचा चला जाए मानव,
कब दिमाग बदले, बन जाता दानव,
पल में खुशियां बदल जाती हैं गम,
नहीं पता चलते चलते निकले दम।

कुछ तो है, जो देता अंदरूनी शक्ति,
दुष्ट के दिल में जाएगी कभी भक्ति।
रोते रोते जन शुरू कर देता है हँसना,
ख्वाबों में आते हैं वो सांसों में बसना।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

 





Friday, August 26, 2022

                       कैफियत

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विधा-कविता   
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कैफियत के लिए गये, वो मिला भला चंगा,
चाहे कोई काम करो, पर लेना कभी न पंगा।
जाना होता इस जग से, जगत हो एक सराय,
जीवन ऐसा हो इंसान, जैसे पवित्र होती गंगा।।

कैफियत गये अस्पताल,मिला अति परेशान,
रोग दूर नहीं हो रहा, निकल रही थी जान।
एक दिन ऐसा आता है, साथ कोई न देता,
हंसते गाते सो जाये, चादर एक लंबी तान।।

चार दिनों की जिंदगानी, पूछो सबका हाल,
पता नहीं किस दिन,बदले जमाने की चाल।
आज हम लो हँस रहे, कहल होंगे बदहाल,
पता नहीं किस घड़ी, होता जन मालामाल।।

जितना हंसना होता है,उतना ही रोना पड़ता,
धन दौलत पास मिले,पर फिर पड़ता सडऩा।
मात पिता और गुरुदेव समक्ष,कभी न अडऩा,
कपोल कल्पित बातें जग,कभी नहीं है घडऩा।।

कैफियत जानों मात पिता, जिन्हें तुमको पाला,
ऐसे कष्ट बताएंगे वो, मुंह पर लग जाये ताला।
सदा समदृष्टि रखो,हटा लेना आंखों का जाला,
संशय की बात चले जब,कहते दाल में काला।।

दर्द में डूबा मिलता है जन,किसको क्या कहेंगे,
जब तक यह दुनियादारी है, सुख दुख यूं रहेंगे।
दोस्त बना अपनों को, पराया कोई नहीं होता है,
एक दिन जब वो बिछुड़ जाये,नयन यूं ही बहेंगे।

राजा हो या रंक सभी को, जाना होता है जरूर,
फिर किस बात पर है, किस चीज का हो गरूर।
मिल जाये जैसा चाहा, खुशनसीबी कहलाती है,
अच्छे दिन जब आ जाये, मुख पर आता है नूर।।

कैफियत की बात सुनी, आया मन एक विचार,
जहां में कितने लोग हैं, देते हर जन को प्यार।
मुंह फुलाये घूम रहे जन, कैसी होती जिंदगानी,
प्रेम प्रीत इस जहां में कहलाती है जन आधार।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400




 

Wednesday, August 24, 2022

 कोमलता
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विधा-कविता   
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कोमलता वो गुण जहां,
समक्ष खुश होत इंसान।
सच्चे,साधु जन की यह,
बन जाती बड़ी पहचान।।

कोमलता देख सुकुमार,
भ्रमर आते हैं बड़े पास।
बस एक इस गुण कारण,
बन जाते हैं कितने दास।।

कोमलता सर्वोच्च गुण है,
पत्थर का कर देता मोम।
वाह वाह मुख से निकले,
पुलकित होता रोम रोम।।

कोमलता जिस दिल बसे,
पूर्ण कर लेता जग काम।
बस इक सुंदर गुण से ही,
हो जाता है जगत में नाम।।

कोमलता के नाम पर जन,
लेते नाम जग के ही फूल।
कोमलता को कम आंकना,
जन की होती है बड़ी भूल।।

कोमल होता जब मन जन,
दया, रहम के करता काम।
जिसके दिल में रहम मिले,
वो जाता है बस स्वर्ग धाम।।

कोमल हृदय जब हो नहीं,
पाप,अधर्म के करता काम।
अहित, अत्याचार दिनरात,
हो जाता है जगत बदनाम।।

कभी नहीं मुख मोडऩा है,
कोमलता गुण के सामने।
देवत्व गुण के समान हो,
हर जन लगे इसे जानने।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव



मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


Tuesday, August 23, 2022

 सांवला रंग
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विधा-कविता   
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सांवला रंग मन को लुभाये,
कभी हँसे कभी मुस्कुराये।
श्रीकृष्ण सी बांसुरी अधर पे,
कितनी गोपियों को लुभाये।।

सांवला रंग पक्का होता जन,
सांवले की हो अजब अदायें।
सांवला मोहन हर दिल बसे,
हर जन के मन को भा जाये।।

सांवला रंग जगत में प्रसिद्ध,
कहकर गये कितने ही कवि।
और चमक आ जाती है जब,
चमके दमके नभ पर वो रवि।।

सांवला रंग हर दिल अजीज,
सांवले पर कर लेना विचार।
सांवली मूरत जब भी मिलती,
मन में उभरेगा अनहद प्यार।।

सांवला रंग देव जग रखवाला,
विष्णु और मनमोहन हैं एक।
अटल इरादे हर जन के खातिर,
दूर कर देते जब कष्ट हो अनेक।।

राधा प्रसन्न देखकर मनमोहन,
होती है प्रसन्न मन ही वो मन।
विष्णु के आठवें अवतार वो,
प्यारे लगते जग के जन जन।।

देवकी, वासुदेव के हैं प्रिय,
यशोदा और नंद के हैं प्यारे।
गीता का उपदेश दे दिया वो,
पापी जन को भी पार उतारे।।

सांवला रंग द्योतक जग देव,
नहीं कोई उनसे महान होगा।
जिसने उनकी महिमा सुन ली,
उसने ही स्वर्ग का सुख भोगा।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01



कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Sunday, August 14, 2022

 घर से थे चले

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विधा-कविता   
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घर से चले थे, दोस्त के घर तक,
मिले थे कितने,लोग इस राह में।
कितनों ने पूछा, हाल अपना तो,
बहुत से मिले मित्रवत, चाह में।।

घर से चले थे, मिलने किसी से,
पहुंच गये तब,शिवभोले के द्वार।
प्रभु भजन में लीन हो गये इतने,
साधु संत संगति से हुआ प्यार।।

घर से चले थे,स्कूल की खातिर,
मिल गये पुराने मेरे गुरु भी वहां।
ज्ञान विज्ञान से भर दिया मुझको,
मुझको तो याद आया पूरा जहां।।

घर से चले थे,सिनेमा देखने को,
फिल्म लगी थी शहर में शहीद।
वीरों की कुर्बानी याद रहेगी हमें,
सेवा करते हैं दीपावली और ईद।।

घर से चले थे,वीरों से तब मिलने,
आयी देश के शहीदों की तब याद।
सोचा कि आजादी मिली मुश्किल,
अंग्रेज भी इंसां नहीं थे वो जल्लाद।।

घर से चले थे, वन गमन को तो,
मिले अनेकों पेड़,जीव और फूल।
मन में उमंग भर दी चहुं हरियाली,
याद आई हमको वो पुरानी धूल।।

घर से चले थे, यादों के बस सहारे,
कहीं लोग मिले थे साथी सम प्यारे।
मन में आया कि इनसे करूं यूं बात,
बहुत प्रिय होते थे कभी बुजुर्ग हमारे।।

घर से चले थे, आजादी जश्र मनाने,
तिरंगा लिये मिले लोग जाने पहचाने।
खो गये हम वीर,शहीदों की यादों में
कैसे दिन बीताये होंगे उन्हें प्रभु जाने।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400




Friday, August 12, 2022

राखी

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विधा-कविता   
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यम यमी का नाम, लेते लोग हर बार,
रक्षासूत्र यमी बांधा,मिला एक वरदान।
बहन भाई को राखी बांधे,बनूंगा रक्षक,
पूरे जहां में उसकी ही,बनी रहेगी शान।।

शीशुपाल वध किया, द्रोपदी बांधा चीर,
कृष्ण जी ने चीर हरण,हर ली थी पीर।
तब से रक्षा बंधन चला,आज भी चलता,
बहन भाई के दिल में, अनहद प्रेम पलता।

खुशियां लेकर आता, राखी का त्योहार,
भाई बहना हँस रहे, बढ़े सदा यूं प्यार।
जब तक भाई रहेगा,तब तक रहे बहना,
भाई की खातिर करें, बहना जग हजार।।

अटूट बंधन प्रेम का, राखी का त्योहार,
इस राखी में बंधा है, भाई बहना प्यार,
ऐसा पर्व कभी नहीं,आता ले लो हजार,
बेहना की रक्षा खातिर,भाई खड़ा तैयार।

एक वर्ष में आता है, बेसब्री से इंतजार,
राखी के पर्व में,यम यमी सा बंधा प्यार,
बहन जाती या भाई जाए, जाएगा जरूर,
मन खुशी से भरा हाता, नहीं होता गरूर।

एक एक धागे में, लाखों भरे आशीर्वाद,
इस राखी, इस बंधन को, रखते हैं याद,
यमराज भी देखकर प्यार,झुकता एकबार,
बहना के प्यार पर, कुर्बान जीवन हजार।

रक्षा पर्व यह कह रहा, उम्र हो वर्ष हजार,
हर वर्ष यह पर्व आये, बढ़ाये जन में प्यार,
बहन भाई को दे कहे, जीओ सालों साल,
जिंदगी में जीत मिले, कभी मिले नहीं हार।।

मेवाड़ की कर्णवती, भेजी हुमायू को राखी,
हुमायू ने लाज की खातिर,पहुंचा था मेवाड़।
रानी कर्णवती जौहर हुई, पूरे जगत में नाम,
रक्षा बंधन जब आये, आती याद यह शाम।।

सिकंदर पत्नी ने, पोरस को भेकजी थी राखी,
महाभारत युद्ध में, सैनिकों को बांधी राखी।
गुरुकुल में रक्षासूत्र, राखी का होता है रूप,
राखी वचन निभाते, चाहे प्रजा या हो भूप।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Thursday, August 11, 2022

 सोने की चिडिय़ां

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विधा-कविता   
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चहुं ओर खुशहाली थी, हर घर में दीवाली थी,
स्त्री पुरुष नित हँसते जाये,रातें काली काली थी।
शिक्षा का प्रचार चहुं ओर, विदेशों तक था नाम,
धर्म कर्म में लीन सभी हो, दूध भरी थाली थी।।

विदेशों तक नाम देश का,तक्षशिला और नालंदा,
विदेशी जन पढऩे आये, ऐसा भारत देश महान।
शान और शौकत भरी हुई,हँसते मिलते हैं लोग,
कत्र्तव्यनिष्ठ हाली व पाली,जगत अनोखी शान।।

जयकारे गूंजते निस दिन,तिरंगा ऊंची रखे शान,
बच्चा बच्चा सुसभ्य लगता,कोई नहीं है अज्ञान।
देख देखकर यौवन जन का, माथे आये पसीना,
पेड़ और पौधे यूं लहराते, लगते नहीं हैं अंजान।।

नेता, वेत्ता, हर मुख पर,रामायण और महाभारत,
युवा, बेटियां देश मेरे की, ज्ञान विज्ञान में हैं रत।
श्रवण जैसे सुसंकारी, लगता देश मेरा है महान,
मेरे देश की खुशियों से,नहीं रहा है अब अज्ञान।।

सोने की चिडिय़ां होता था, आज भी हैं प्रमाण,
राम और सीता के उदाहरण, लक्ष्मण होता भाई।
धन-दौलत के भरे खजाने, ऐसा  मेरा होता देश,
देख देखकर जन की सुरक्षा, कुछ भी नहीं शेष।

शाम हुई तो चोरी ना डर, खुले पड़े सब दरवाजे,
कहीं भी देखो सुर बजते,बज रहे हैं ढोल व ताशे,
हर इंसान के दिल में रहता,एक बड़ा सा खटका,
देख ले भारत की सुंदरता,उसका ही दिल अटका

पतिव्रता अनगिनत नारी, भरा हुआ है भारत देश,
साधु संतों का लगे अखाड़ा,ज्ञान की बहती गंगा।
हर घर पर नक्काशी कही है,फहरे जहां पे तिरंगा,
चुस्त दुरुस्त हर इंसान,बुजुर्ग भी लगे भला चंगा

सोने की चिडिय़ां था सचमुच, मिलते हैं प्रमाण,
विदेशी ताकत झांक के न देखे,बहुत बड़ा नाम।
हर घर में मंदिर होता, लगता है बड़ा यह धाम,
सुनहरी भोर यहां आती, सुनहरी होती है शाम।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Wednesday, August 10, 2022

 जहां तक हो



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विधा-कविता   
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जहां तक हो, कर लो गरीब की सेवा,
जिंदगी भर दुआ देंगे, वो काम आएगी।
पता नहीं पल भर का, क्यों इतराते हो,
एक बुलबुले सम,यह यूं चली जाएगी।।

जहां तक हो सके, बना प्यार की राह,
दुश्मनी जीवन भर, जन को सताएगी।
प्यार मुहब्बत में लुट जा, है काम की,
कमा ले धन दौलत,ये धरी रह जाएगी।।

जहां तक हो सके,कर ले जन का हित,
पाप,अधर्म बस तेरा नाश कर कर देंगे।
ये दोस्त तेरा छोड़ देंगे साथ, जरा सोच,
मौका मिला तो झट से धन छीन लेंगे।।

जहां तक हो सके तो, इंसान बनना है,
दुनिया में हजारों तो बन हैवान रहते हैं।
अच्छाई का फल मिलता मरने के बाद,
जग के लाखों साधु संत यही कहते हैं।।

जहां तक हो सके,भज ले नाम ईश्वर का,
यही वो सच्चा मित्र है, जो साथ देता है।
जहान में जिस पर घमंड, तुझे मिलता है,
वहीं जन एक तुझे पल में लूट लेता है।।

जहां तक हो सके,दुखा न दिल जन का,
बांट दे यह धन, बस आशीर्वाद पा लेना।
जिंदगी छोड़के जाना है,उस प्रभु के पास,
वहां कुछ साथ न जाये,हिसाब सब देना।।

जहां तक हो सके, सम्मान करना सीखो,
अपमान से दूर रहो,यूं नहीं कभी झीखो।
दर्द होता है कभी,खुद पर आन पड़ती है,
कभी ऐसी ही दास्तान,खुद की ही लिखो।।

जहां तक हो सके, खुशियां से घर भरो,
अगर कहीं हो सके,उस दाता से ही डरो।
एक दिन सब कुछ यहीं पड़ा रह जायेगा,
मौत भी गर आ जाए तो शान से तुम मरो।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400






Tuesday, August 09, 2022

                   चिट्ठी
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विधा-कविता   
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कागज का एक टुकड़ा, लाता है जब संदेश,
चिट्ठी जिसका नाम पड़ा,बदले पल में भेष।
अच्छे बुरे शब्दों से भरी, स्वर्णअक्षर भरे हुये,
हजारों किमी जाए, भारत हो या हो विदेश।।

अब नहीं आती चि_ियां, अब आते हैं संदेश,
चिट्ठियों ने बदला अब, मोबाइल का भेष।
युवा,बुजुर्ग,औरत हर इंसान, बन गया हैं फैन,
कहते सुना गया है, युवाओं ने बिगाड़ा है देश।।

कभी आती थी चिट्ठियां, गम और खुशी साथ,
पढ़ते रहते थे उसे घंटों, एक और दूजे के हाथ।
वीर गये मां की सेवा में, हो गये जाकर शहीद,
कभी कभी तो बच्चे भी हो जाते थे तब अनाथ।।

डाकिया लाकर देता था, करते घर घर इंतजार,
पढऩे की खातिर बुलाते, लिखा पढ़ा जो इंसान।
गम और खुशी शब्दों में भरी, कभी आता प्यार,
परदेश गये पतिदेव का, नारी करती रहे इंतजार।।

खत,चिट्ठी या लिफाफा, पूरे लबालब होते भरे,
एक एक शब्द में जान डाल दे, होते शब्द खरे।
कभी सुनने वाले प्रसन्न हो, कभी लगे डरे डरे,
कभी युद्ध की बात मिले, कितने साथी यूं मरे।।

क्या अजब जमाना था, फोन नहीं कभी होते,
कभी फौजी को गम में देख, दिल से ही रोते।
तीन चार दिन लग जाते, चिट्ठी आने जाने में,
पाक चिट्ठी मन प्रसन्न,छाती से लगाकर सोते।।

बदल गया है अब युग, चिट्ठी गधे का सींग,
जैसे खत्म कर दी जन, सावन की अब पींग।
पर वो जमाना बेहतर था, बुजुर्गों ने भी झेला,
अब तो हर जन को बस,देखा फोन झमेला।।

आने वाली पीढ़ी, चिट्ठी सुनकर हँसा करेगी,
कागज पर कलम चलाने से, वो हरदम डरेगी।
पर बुजुर्ग भुला नहीं सकते, चिट्ठी का संदेश,
सदियों तक याद रहेगा, मेरा सुंदर भारत देश।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Sunday, August 07, 2022

 हरा रंग
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विधा-कविता   
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हरा रंग हरियाली का द्योतक,
सस्य धरती पर हो हरी भरी।
सब रंगों में नेक है यह रंग,
घस, दूध, फसल हरी हरी।।

सुग्राही रंग कहलाता हरदम,
घास पर चलो आंखों में दम।
खेत क्यार अगर पीले पड़ते,
जन को होता जमकर ही गम।।

हरियाणा में पार्टी की पगड़ी,
हरे रंग की धारण वे करते।
हरे रंग मेुं प्रकाश संश£ेषण,
हर प्राणी के कष्ट वो हरते।।

हरित क्रांति नाम पड़ा जब,
ई-बोरलोंग व नार्मन आये।
इतनी हरियाली धरा कर दी,
हरित क्रांति वो नाम कहाये।।

हरी पत्तेदार बाजार में मिले,
सब्जियां मन को लुभाती हैं।
वन्य जीव भी हरियाली ढूंढे,
हरियाली मन को तड़पाती है।।

सावन की जब बारिश होती,
चहुं ओर हरियाली छा जाये।
कृषक चले हल उठाके देखो,
हर इंसान के मन को हर्षाये।।

हरियाली हरे रंग का प्रतीक,
हर प्राणी के मन को लुभाये।
हरी डाल पर बैठकर पक्षी भी,
कितने ही सुरीले गीत सुनाये।

हरियाली से प्रेम जो करते हैं,
प्रकृति प्रेमी जग में कहलाते।
नहीं कभी घटने हरा रंग पाये,
हरे रंग जन जन को बहलाते।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


Thursday, August 04, 2022


अब नहीं आती चिट्ठियां
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कविता
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अब नहीं आती चिट्ठियां, अब आते हैं संदेश,
चिट्ठियों ने बदला अब, मोबाइल का भेष।
युवा,बुजुर्ग,औरत हर इंसान, बन गया हैं फैन,
कहते सुना गया है, युवाओं ने बिगाड़ा है देश।।
कभी आती थी चिट्ठियां, गम और खुशी साथ,
पढ़ते रहते थे उसे घंटों, एक और दूजे के हाथ।
वीर गये मां की सेवा में, हो गये जाकर शहीद,
कभी कभी तो बच्चे भी हो जाते थे तब अनाथ।।
डाकिया लाकर देता था, करते घर घर इंतजार,
पढऩे की खातिर बुलाते, लिखा पढ़ा जो इंसान।
गम और खुशी शब्दों में भरी, कभी आता प्यार,
परदेश गये पतिदेव का, नारी करती रहे इंतजार।।
खत, चिट्ठी या लिफाफा, पूरे लबालब होते भरे,
एक एक शब्द में जान डाल दे, होते शब्द खरे।
कभी सुनने वाले प्रसन्न हो, कभी लगे डरे डरे,
कभी युद्ध की बात मिले, कितने साथी यूं मरे।।
क्या अजब जमाना था, फोन नहीं कभी होते,
कभी फौजी को गम में देख, दिल से ही रोते।
तीन चार दिन लग जाते, चिट्ठी आने जाने में,
पाक चिट्ठी मन प्रसन्न,छाती से लगाकर सोते।।
बदल गया है अब युग, चिट्ठी गधे का सींग,
जैसे खत्म कर दी जन, सावन की अब पींग।
पर वो जमाना बेहतर था, बुजुर्गों ने भी झेला,
अब तो हर जन को बस,देखा फोन झमेला।।
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स्वरचित एवं नितांत मौलिक
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-डा होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा

फोन 09416348400

Wednesday, August 03, 2022

 घर घर तिरंगा
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विधा-कविता
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रामराज का सपना दिल में है,
क्या अजब राज होगा वो चंगा।
आजादी की खशियां दिल में,
फहराएगा अब घर घर तिरंगा।।

वीरों ने कुर्बानी झेली हैं जब,
मिली तिरंगे की बड़ी सौगात।
घर घर में तिरंगा अब फहरेगा,
मदभावन बन गई यह हालात।।

अंग्रेजी सितम कितने सहे हैं,
अब भारतवासी आजाद हुये।
तिरंगा खुशी से फहराएंगे यूं,
कितने ही आंसू जन के बहे।।

घर घर तिरंगा फहरा देना,
आजादी का जश्र मनाएंगे।
वीरों की गाथा सुन सुनकर,
हर जन को यह सुनाएंगे।।

काश वो आकर देखे वीर,
मिट जाए उनकी तन पीर।
तिरंगा घर घर देखकर वो,
बनके नाचेंगे यूं रांझा हीर।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400





Tuesday, August 02, 2022

 

तोल

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विधा-कविता
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गजब तमाशा देखते, कैसे कैसे लोग,
जिगर,दिमाग को तोलते,कैसा है रोग।
जिगर,दिमाग का संबंध मिलता बड़ा,
कहते हैं जगवाले इसको ही संजोग।।

जब तक दिमाग नहीं चलता कभी,
जिगर में नहीं बैठती जब कोई बात।
दोनों की जोड़ी बेहतर नहीं बनती है,
तब तक बनी रहती है बुरी हालात।।

तराजू के दो पलड़ों में कभी तोलो,
दिमाग और मस्तिष्क दोना बराबर।
दिल को बहुत सताता देखा गया है,
जब दिमाग में बैठ जाता कोई डर।।

विकसित देशों में अब तो चलता,
जिगर, मस्तिष्क का बड़ा व्यापार।
जिसके पास दोनों ही महान मिले,
उसे जहां में मिल जाता बड़ा प्यार।।

आओ स्वस्थ रखे जिगर, दिमाग,
दोनों बिना जीवन है जन अधूरा।
दोनों में अगर समन्वय मिल जाये,
जल्द से जल्द हो सब कुछ पूरा।।
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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400

Sunday, July 31, 2022

 तितली के संग
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विधा-कविता   
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तितली के संग गीत सुनाऊं,
नृत्य करूं, संग में हर्षाऊं।
कभी अंबर,बागों में फिरती,
उनके संग नभ उड़ता जाऊं।।

तितली बागों में उड़ती है,
फूल फूल रस पीती रहती।
सुंदर उसकी पंख देखकर,
आंखें जन कहानी कहती।।

तितली के संग उड़ूं हवा,
मिल जा मन को आराम।
उड़ते रहना दिनभर यहां,
और नहीं कुछ भी काम।।

तितली के संग मिले चैन,
नहीं मिले तो रहता बेचैन।
एक डाल से दूजे ही जाती,
मिल जाये तन मन को चैन।।

तितली रानी बड़ी स्यानी,
कभी नहीं मांगे वो पानी।
उसका घर पूरा ही संसार,
होती नहीं कभी अज्ञानी।।

वो तितली घर में मिलती,
ये तितली मिलती जंगल।
खुश रहना इसकी आदत,
जंगल में भी कर दे मंगल।।

तितली के संग डाली पाऊं,
खुद हंसूं उसको भी हँसाऊं।
काम देख तितली प्यारी के,
अपने दिल के पास बुलाऊं।।

तितली कहती रहना है संग,
यह दुनिया है बड़ी ही जंग।
स्वार्थ भरा तन कूट कूटकर,
बदले पल ही पल में रंग।।

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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव




मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Friday, July 29, 2022

           आंखों की आंखों से बातें

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विधा-कविता
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आंखों की आंखों से बातें,
जब कभी जन कहता है।
मन मंदिर में बस जाता है,
बस प्यार दिलों में रहता है।।

आंखों की आंखों से बातें,
चुपचाप चले ज्यों तीर चले।
कभी तलवार का सामना हो,
कभी दिलों में यूं प्यार पले।।

आंखों की आंखों से बातें,
मुमकिन है कुछ कर पाये।
दिल तो बेचारा खो बैठे हैं,
अब करते रहते हाय-हाये।।

आंखों की आंखों से बातें,
गूढ लगे और होती न्यारी।
समझने वाले समझ जाते,
जो समझे उसे लगे प्यारी।।

आंखों की आंखों से बातें,
कहती है एक मन कहानी।
दो दिल जब मिलते हैं तो,
करने लग जाते मनमानी।।

आंखों की आंखों से बातें,
नहीं कोई मुख कह पाता।
जब किसी वो मोड़ मिले,
तब वो सुनहरा दिन आता।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा




  फोन 09416348400

Thursday, July 28, 2022

               बरसते नैन

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विधा-छंदमुक्त कविता

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भीगी भीगी रात हो,
बरस रहे हो नैन,
दिल में एक आहट सुने,
कहीं मिले न चैन।

दूर गगन बरसात हो,
रिमझिम रिमझिम करे शोर,
दिल में एक दर्द पनपे,
वन जंगल में नाचे जब मोर।।

परदेश गये जिनके पीया,
सावन बैरी सताता है,
पीया मिले जब आन के,
दिल में चैन आता है।

सांझ सवेरे आहट हो,
बार बार मन झांके बाहर,
खुशी मिले जब मन को,
दीप जले तब घर घर।

बरसते नैन सदा कह रहे,
सावन सूखा न जाये,
नसीब मिले जिनके खुशी,
वो जन उतना पाय।।
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स्वरचित एवं नितांत मौलिक
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-डा होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा




फोन 09416348400

Saturday, July 16, 2022

 
       महज सांसों का रुक जाना

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विधा-कविता
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महज सांसों का रुक जाना,
मौत कभी नहीं जन मानते,
अहित करें इस जग में जो,
उसको ही मौत जन जानते।

महज सांसों का रुक जाना,
डर का देता है जन आभास,
जीना उसका  असली जीना,
जो पाप, बुराई का करे नाश।

महज सांसों का रुक जाना,
नहीं होता है बुराई का अंत,
पाप कर्मों जगत से मिटा दो,
कह गये जग से कितने संत।

महज सांसों का रुक जाना,
मिट सकता नहीं जन नाम,
सत्य धर्म का नाश नहीं हो,
मधुर सुगंध फैलाना काम।

सांसे कभी भी बंद हो जाये,
राह में चलते चलते गिरता,
उसका अंत कभी नहीं जग,
जो असत्य से हरदम डरता।

सांसे जीवन भर चलती रहे,
दुख दर्द इंसान पर ना आये,
हर इंसान सुख भोगता मिले,
आपदाएं जन को ना रुलाये।

साहस भी आगे नहीं बढ़ता,
जब हिम्मत इंसान की घटे,
आगे इंसान यूं  बढ़ता जाये,
ख्वाब हिलोरे यूं लेते रहेंगे,
बस सांसों की डोर ना बटे।

महज सांसों का रुक जाना,
लोग मानते है जिंदगी अंत,
पर मरकर जो नाम कमा ले,
आशाएं उभर आएंगी अनंत।





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स्वरचित/नितांत मौलिक
******************
* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400








Friday, July 15, 2022


                     सावन
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विधा-कविता
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रिमझिम रिमझिम बूंदे गिरे,
लग रही सावन की झड़ी,
मनभावन मौसम हो गया,
क्या सुंदर लग रही घड़ी।

नृत्य कर रहे वन में मोर,
दादुर करते संगीतमय शोर,
पपीहा नभ पर शोर मचाये,
कलरव करते पक्षी लुभाये।

सुबह की बेला मन मोहती,
सांझ मन को करती विभोर,
ऐसा सुंदर नजारा मिल रहा,
बादल गरज रहे चहुं ओर।

शिव आराधना का सावन,
जप,तप,व्रत कर रहे भक्त,
सावन की झड़ी लगी रहे,
साधु संत हो रहे हैं विरक्त।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400









बरसो मेघा
विधा-छंदमुक्त कविता
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उमड़ घुमड़कर आये बादल,
पूरे जगत में छाये ये बादल,
मेघा बरसो यूं जोर लगाकर,
किसान समस्या होती हल।।

चाह रहे हैं तुमको मतवाले,
प्रेमी युगल  जन भोलेभाले,
जीवन तुझ से ही बन जाता,
करते हैं यह अब तेरे हवाले।

सावन की ठंडी पड़े फुहार,
बिन साजन है जीवन बेकार,
मघा बरसे धरती हो प्रसन्न,
लो आज खड़े हैं हम तैयार।।

मेघा बरसों पूरे ही सावन,
आएगी चहुं ओर हरियाली,
वो दाता है  देख रहा सब,
वो ही होता जग का माली।।
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स्वरचित एवं नितांत मौलिक
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-डा होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा



फोन 09416348400

Wednesday, July 13, 2022

  वो चेहरा
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विधा-कविता   
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प्यारा बाल घर पे आया, जन को लुभाया,
रोता तो रोते थे, कभी उसने बहुत हँसाया।
चला गया वो भी एक दिन, भुला न पाते,
जब बच्चों को देखते, वो बच्चा याद आता।।


फूल सा चेहरा कभी कभी मन को लुभाए,
आओ अपनी दिनचर्या, सबको बड़ा बनाये
मिला नहीं बिछुड़ गया, याद आता है भारी,
वो चेहरा मासूम था, सभी उसे गले लगाये।

चेहरे से होती पहचान, चेहरा बढ़ाये शान,
चेहरे के सामने तो, फीका लगता है जहां।
कभी कभी चेहरा, भूल नहीं पाता इंसान,
कभी कभी सुंदर चेहरा, देता वो भगवान।।

दोस्त हमारा प्यारा था, चेहरा था सजीला,
बातें उसकी प्यारी लगे,नेत्र उसका गीला।
बिछुड़ गया एक दिन,याद आता वो चेहरा,
कैसे भूले उस चेहरे को, अजब नखरीला।।

हसीन सूरत प्यारी थी,वो राज दुलारी थी,
गरीबी ने साथ दिया,वो वक्त की मारी थी।
भूखी मरती चली गई, क्या हसीन चेहरा,
लगता थी कि देवता भी, देते आये पहरा।।

नेता का वो चेहरा,मोह लेता था जन को,
जीत चहुं ओर होती,घूमे जब अगहन को।
बुजुर्ग हो गया और चला गया,याद आए,
लाख भुलाना चाहते,भुला नहीं हम पाये।।

प्रेमिका का चेहरा देख, आवेश में प्रेमी,
गलियों के चक्कर काटे,बनकर वो बहमी।
उसको तो याद आए,बस वह इक चेहरा,
प्रेमिका का चेहरा देखने,करे गहमागहमी।

बिछुड़ गई वो भार्या, चेहरा आता याद,
कोई मिला दे उससे, यही है फरियाद।
वो चेहरा बड़ा निराला लगता था प्यारा,
चली गई छोड़कर, आती उसकी याद।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जि




ला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400








Monday, July 11, 2022

                      नाराजगी
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विधा-कविता   
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नाराजगी जग में बुरी,
करना सभी जन प्रीत।
प्रेम प्रीत से जो रहता,
दुनिया गाती है गीत।।

छोटी सी है जिंदगानी,
नहीं ले नाराजगी मोल।
कड़वी बातें बुरी लगे,
मुख पे हो सुंदर बोल।।

जाना है भाव से पार,
सजग सदा रहो तैयार।
लाख प्रयास जन करे,
प्रभु समक्ष होती हार।।

नाराजगी स्वजन कभी,
पापी, अधम कहलाए।
दोस्ती अपनों के संग,
खुद हँसे और हँसाये।

नाराजगी उचित ना हो,
बैर भाव को बढ़ाती है,
सादगी,नम्रता जन की,
सागर पार लगाती है।।

गैरों से जब नाराजगी,
कहते बुरी उसको संत।
लंबे समय नाराज रहे,
हो जाएगा जल्दी अंत।।

नाराजगी दर्द दे जाती,
प्यार दिल में जोश दे।
हर वक्त सम रहना हो,
कभी नहीं कोई पंगा ले।।

नाराजगी जन की देख,
कितने जाते लोग दूर।
उस दाता से सदा डरो,
करना नहीं कोई गरूर।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Sunday, July 10, 2022

 


                 







बच्चों का संसार/   कविता
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बच्चों का संसार निराला,
हर बाल लगे भोलाभाला।
हँसते गाते मारे किलकारी,
उनकी हँसी लगती प्यारी।

बच्चे रोयेंगे तो आये कहर,
हँसते मिले बच्चे आठ पहर।
बच्चे मिलते गली मोहल्ले तो,
बच्चे मिलती हैं गली शहर।।

बच्चों का अपना हो संसार,
वो भी चाहते जन का प्यार।
उठा लो उनको चूम लेना,
इंसान के लिए हो उपहार।।
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-होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला महेंद्रगढ़, हरियाणा




                       कविता
             दुष्ट से व्यवहार
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माना दुष्ट हजार जग, पर तू बन जा हीरो,
गर्दन पर फिर वार कर,बन जाए वो जीरो।
लाख प्रयास करे दुश्मन,पर दिखला जोश,
सही वार गर भूलता,होगा फिर अफसोस।।

दुश्मन भी कुछ कम नहीं, करते लाखों वार,
पर अपनी बुद्धि चला, होगी दुश्मन ही हार।
जकड़ेंगे, पकड़ेंगे पर कर दे उनको भी फेल,
ऐसा करिश्मा कर दिखला, बन जाएगी रेल।।

जीना है अगर जगत, कर लो हौसले बुलंद,
वाकपटुता के बल सदा, अगले की तूती बंद।
हिम्मत जिसने हार दी,वो एक दिन हो बर्बाद,
आगे बढऩे की ठानी जिसने, जग करता याद।।

दिल और दिमाग मिल चले,होगी सदा जीत,
मुट्ठी में दुश्मन किया, हर जन करेगा प्रीत।
हौसले जिसके बुलंद हो,मिलते जन भी साथ,
अपनी कीर्ति इस जहान, बस अपने ही हाथ।।

देख दुष्ट धराशाई हो, रास्ता मिलेगा तब साफ,
पर एक ोच बना ले, दुश्मन को करना न माफ।
सदा वक्त के संग चले,शक्ति व्यर्थ नहीं प्रहार,
निर्धन,अबला,कमजोर संग,करना सदा इंसाफ।।
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मौलिक/स्वरचित
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*होशियार सिंह यादव
वार्ड नंबर 1, मोहल्ला मोदीका
कनीना -123027
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा
09416348400

Friday, July 08, 2022

                                मुझे देखने दो

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विधा-कविता   
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भारत का इतिहास पुराना,
सबने जाना सबने माना।
मुझे देखने दो क्या-क्या,
लोगों ने इसको पहचाना।।

मुझे देखने दो आगे बढ़के,
कौन दोस्त है कौन बेगाना।
किसे दिल के पास बुलाना,
किसको दिल से दूर भगाना।।

शिक्षा की बयार बह रही है,
नालंदा तक्षशिला नाम पुराना,
मुझे देखने दो, उस वक्त को,
क्या सुंदर हसीन था जमाना।।

भाव विभोर कर दे खुशियां,
गम को यूं ना पास बुलाना।
जब अंबर से बरसता पानी,
दिल बुनता नये ताना बाना।।

मुझे देखने दो नव युग को,
जिसके ठोकर में है जमाना।
खुशियों को अब कैद करो,
दुखों का बीता है मयखाना।।

सुबह शाम अंबर पे नजारा,
मन को लगता सूरज प्यारा।
इंद्रधनुषी रंग उपवन में हैं,
मुझे देखने दो,जग उजारा।।

नभ पर रात्रि चांद लुभाये,
तारे झिलमिल गीत सुनाये।
मुझे देखने दो, सुंदर नजारा,
दिल बाग बाग हो हषाये।।

बारिश हुई है आज सुहानी,
दादुर करते जाये मनमानी।
मुझे देखने दो ,भंवरों को,
टिड्डा गाये गीत जवानी।।

चहुं ओर फसल लहलहाये,
कृषक के वो मन को हर्षाये।
मुझे देखने दो, छवि निराली,
उस भव्यता को दिल बसाये।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400















Thursday, July 07, 2022

    तू मुझ में ही तो है
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विधा-कविता   
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वक्त की बंदिशों ने बनाया कुछ ऐसा,
पहले जो आलम था नहीं अब वैसा।
एक दूजे के होते थे, अब लगते जुदा,
तू मुझ में ही तो है, देखों हूं मैं कैसा।।

पहुंचा प्रभु की चौखट दर्शन भी पाया,
ऐसा लगा आज दाता बड़ा मुस्कराया।
बोला प्रभु सुन ले, तू मुझ में ही तो है,
फिर क्यों न याद किया,यहां पर आया।।

माटी को जब लोंदा, समझ में यूं आया,
माटी ने हँसकर मुझको पास में बुलाया।
बोली माटी पुचकार के मुझे,सुन ले बात,
तू मुझ में ही मिलेगा,अंतिम दिन आया।।

हवा से करनी चाही जब मैंने हँसके बात,
सपनों की दिल से चल पड़ी मधुर बारात।
हवा ने कहा सुन तू भी अंश होता है मेरा,
तू मुझ में ही तो होगा,जब आएगी वो रात।।

झांका समुद्र में लगा चहुं ओर भरा है पानी,
आता है बुढ़ापा भी जब चली जाये जवानी।
कहा पानी ने पास बिठाकर,गर्व कभी न कर,
तू मुझ में ही तो होगा,कर ले चाहे मनमानी।।

एक रोज भार्या मुस्कराई और सामने आई,
पूछा क्या राज है मन में इतना जो मुस्कराई।
मत इतराओ इतना सुन ले आज यह पैगाम,
तू मुझ में ही तो बसती हो,छवि दिल बसाई।।

सर्दी के दिन थे जलाए बैठा था घर पे आग,
धुन निकली आग से, सुना डाला एक राग।
कहा अग्रि ने आज तू तप ले ले ले सहारा,
तू मुझ में ही तो होगा, तेरा शरीर मुझे प्यारा।।

देखा आकाश पर झिलमिल कर रहे थे तारे,
कितने ही चमक रहे थे जो कभी हुये हमारे।
आई एक रश्मि बोली सुन ले सुंदर सी बात,
तू मुझ में ही तो होगा, जब आये अंतिम रात।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400