दानी
चारों ओर शोर मचा था कि दानी महाराज आ गए। लोग उनसे मिल रहे थे कि उन्हें कुछ देकर जाएंगे। सभी को दानी महाराज कुछ न कुछ दे रहे थे कि तभी एक ठंड में कांपते हुए बूढ़ी आई और दानी महाराज के पास जाकर चाय पिलाने की प्रार्थना की। पास खड़े लोगों ने बूढ़ी को धक्के देने शुरू कर दिए। दानी महाराज उस बुढिय़ा को देख रहा था किंतु मुख से एक शब्द भी नहीं निकला। बुढिय़ा को धक्के दे देकर दूर भेज दिया। बुढिय़ा सर्दी में कांपते हुए कहने लगी-वाह दानी महाराज! आप तो सचमुच दानी हो जो एक चाय का कप तक नहीं पिला सकते। कांपती हुई बुढिय़ा आगे बढ़ गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
चारों ओर शोर मचा था कि दानी महाराज आ गए। लोग उनसे मिल रहे थे कि उन्हें कुछ देकर जाएंगे। सभी को दानी महाराज कुछ न कुछ दे रहे थे कि तभी एक ठंड में कांपते हुए बूढ़ी आई और दानी महाराज के पास जाकर चाय पिलाने की प्रार्थना की। पास खड़े लोगों ने बूढ़ी को धक्के देने शुरू कर दिए। दानी महाराज उस बुढिय़ा को देख रहा था किंतु मुख से एक शब्द भी नहीं निकला। बुढिय़ा को धक्के दे देकर दूर भेज दिया। बुढिय़ा सर्दी में कांपते हुए कहने लगी-वाह दानी महाराज! आप तो सचमुच दानी हो जो एक चाय का कप तक नहीं पिला सकते। कांपती हुई बुढिय़ा आगे बढ़ गई।
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फैशन
बुजुर्ग की नजर एक युवक पर पड़ी जिसकी पेंट फटी पुरानी सी नजर आई। पेंट पर थेगली सी लगी हुई थी। यही नहीं शर्ट भी कटी फटी सी थी। बुजुर्ग ने पूछा-बेटा, कुछ गरीब परिवार के लगते हो? तुम्हारे कपड़ों को देखकर कुत्ते भी पीछे लग जाएंगे।
युवक ने उत्तर दिया-बाबा, मेरे पिता जी, प्रतिमाह दो लाख रुपये जक कमा लेते हैं और मां भी एक लाख रुपये कमा लेती है। मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है।
...तो फिर, बुजुर्ग ने बात को बीच में काटते हुए कहा-ये कपड़े थेगली लगे हुए, कटे फटे क्यों पहन रहा ह...
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बुजुर्ग की नजर एक युवक पर पड़ी जिसकी पेंट फटी पुरानी सी नजर आई। पेंट पर थेगली सी लगी हुई थी। यही नहीं शर्ट भी कटी फटी सी थी। बुजुर्ग ने पूछा-बेटा, कुछ गरीब परिवार के लगते हो? तुम्हारे कपड़ों को देखकर कुत्ते भी पीछे लग जाएंगे।
युवक ने उत्तर दिया-बाबा, मेरे पिता जी, प्रतिमाह दो लाख रुपये जक कमा लेते हैं और मां भी एक लाख रुपये कमा लेती है। मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है।
...तो फिर, बुजुर्ग ने बात को बीच में काटते हुए कहा-ये कपड़े थेगली लगे हुए, कटे फटे क्यों पहन रहा ह...
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चापलूस
गली बन रही थी। गली में कुछ लोग खड़े नाली को बनाने के निर्देश दे रहे थे जैसे कि वे ठेकेदार हो लेकिन पता चला कि ठेकेदार अभी आएंगे। ज्योंही ठेकेदार आए तो दो तीन लोग उसकी चापलूसी करने लगे। ये लोग दिखावा तो कर रहे थे जैसे वे गांव की गली के निर्माण में हितैषी की भूमिका निभा रहे हैं। वे चापलूसी करके कभी ठेकेदार को अपने घर ले जाते चाय पिलाते तो कभी नाली बनाने वालों को चाय पिलाते। इधर-उधर की बातों में उलझाए रखते। देखते ही देखते ठेकेदार द्वारा बनवाया हुआ मसाला अपने घर में टूट ...
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गली बन रही थी। गली में कुछ लोग खड़े नाली को बनाने के निर्देश दे रहे थे जैसे कि वे ठेकेदार हो लेकिन पता चला कि ठेकेदार अभी आएंगे। ज्योंही ठेकेदार आए तो दो तीन लोग उसकी चापलूसी करने लगे। ये लोग दिखावा तो कर रहे थे जैसे वे गांव की गली के निर्माण में हितैषी की भूमिका निभा रहे हैं। वे चापलूसी करके कभी ठेकेदार को अपने घर ले जाते चाय पिलाते तो कभी नाली बनाने वालों को चाय पिलाते। इधर-उधर की बातों में उलझाए रखते। देखते ही देखते ठेकेदार द्वारा बनवाया हुआ मसाला अपने घर में टूट ...
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आंसू और मुस्कान
घर में बुजुर्ग अंतिम सांसे गिन रहा था। उसे कैंसर ने घेर लिया था। डाक्टरों ने उनके परिजनों ने घर ले जाकर सेवा करने की बात कही थी। बुजुर्ग को शोर नहीं सुहा रहा था किंतु पड़ोस में लड़का क्या हुआ मारे खुशी के कहीं डीजे का शोर तो कहीं थाल बजाकर लोगों को सुनाया जा रहा था। मरीज बार बार शोर से कराह रहा था। उनके परिजन पड़ोसी से माइक धीरे चलाने की बात कह रहे थे किंतु वो कब मानने वाले थे। एक ओर आंसू तो दूसरी ओर खुशी का माहौल था। माइक के शोर से तंग आया बुजुर्ग कराह रहा था। कोई उसकी सुनने वाला नहीं था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
घर में बुजुर्ग अंतिम सांसे गिन रहा था। उसे कैंसर ने घेर लिया था। डाक्टरों ने उनके परिजनों ने घर ले जाकर सेवा करने की बात कही थी। बुजुर्ग को शोर नहीं सुहा रहा था किंतु पड़ोस में लड़का क्या हुआ मारे खुशी के कहीं डीजे का शोर तो कहीं थाल बजाकर लोगों को सुनाया जा रहा था। मरीज बार बार शोर से कराह रहा था। उनके परिजन पड़ोसी से माइक धीरे चलाने की बात कह रहे थे किंतु वो कब मानने वाले थे। एक ओर आंसू तो दूसरी ओर खुशी का माहौल था। माइक के शोर से तंग आया बुजुर्ग कराह रहा था। कोई उसकी सुनने वाला नहीं था।
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आंवला आंवला अमृतमय फल देने वाला एक पेड़ है जिसे फिलांथस एंब्लिका कहते हैं। इसे…
आंवला आंवला अमृतमय फल देने वाला एक पेड़ है जिसे फिलांथस एंब्लिका कहते हैं। इसे भारतीय ग...
आंवला
आंवला अमृतमय फल देने वाला एक पेड़ है जिसे फिलांथस एंब्लिका कहते हैं। इसे भारतीय गुजबेरी नाम से भी जाना जाता है। अमृतफल अमलकी आदि नामों से भी से पुकारते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम एमबीए ऑफिसिनालिस है। आयुर्वेद में इसे सर्वोत्कृष्ट औषधि माना गया है। आमला स्मरण शक्ति बढ़ाने, कांति, तेज, बल दायक औषधि है। जहां इसके पत्ते भी मुंह के छाले आदि के रोग दूर करने के काम आते हैं वही सूखे फलों से आंखें धोई जाती है। सूखे फल खूनी अतिसार, बवासीर आदि रोगों में काम आता है। यह खांसी, श्वास र...
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आंवला अमृतमय फल देने वाला एक पेड़ है जिसे फिलांथस एंब्लिका कहते हैं। इसे भारतीय गुजबेरी नाम से भी जाना जाता है। अमृतफल अमलकी आदि नामों से भी से पुकारते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम एमबीए ऑफिसिनालिस है। आयुर्वेद में इसे सर्वोत्कृष्ट औषधि माना गया है। आमला स्मरण शक्ति बढ़ाने, कांति, तेज, बल दायक औषधि है। जहां इसके पत्ते भी मुंह के छाले आदि के रोग दूर करने के काम आते हैं वही सूखे फलों से आंखें धोई जाती है। सूखे फल खूनी अतिसार, बवासीर आदि रोगों में काम आता है। यह खांसी, श्वास र...
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शानदार मौत
बुजुर्ग मन बहलाने के लिए ताश खेल रहा था कि उनकी पत्नी भैंस का दूध दोह रही थी। भैंस को घरेलू मक्खी ने क्या काटा भैंस ने लात जड़़ दी जिसके चलते दूध बिखर गया। औरत मालती ने क्रोध आया और अपने पत्नी पर गरजते हुए कहा-तुम घर आना, तेरी वो मंजाई की जाएगी कि जीवनभर याद रहेगा। बुजुर्ग परेशान हो उठा। ताश पीटना बंद हो गया। बुजुर्ग डर के मारे घर की ओर बढ़ रहा था कि रास्ते में ठोकर खाकर गिर पड़ा। गिरते ही उसके प्राण पखेरू उड़ गए। जिसने भी उनकी मौत के बारे में सुना बस यही कहा कि ऐसी शानदार मौत किसी को भी नहीं मिलती। वाह! रामू तुमने तो कमाल कर दिया। जब उसकी पत्नी ने मृत्यु की बात सुनी तो एक आंसू तक आंख में नहीं आया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बुजुर्ग मन बहलाने के लिए ताश खेल रहा था कि उनकी पत्नी भैंस का दूध दोह रही थी। भैंस को घरेलू मक्खी ने क्या काटा भैंस ने लात जड़़ दी जिसके चलते दूध बिखर गया। औरत मालती ने क्रोध आया और अपने पत्नी पर गरजते हुए कहा-तुम घर आना, तेरी वो मंजाई की जाएगी कि जीवनभर याद रहेगा। बुजुर्ग परेशान हो उठा। ताश पीटना बंद हो गया। बुजुर्ग डर के मारे घर की ओर बढ़ रहा था कि रास्ते में ठोकर खाकर गिर पड़ा। गिरते ही उसके प्राण पखेरू उड़ गए। जिसने भी उनकी मौत के बारे में सुना बस यही कहा कि ऐसी शानदार मौत किसी को भी नहीं मिलती। वाह! रामू तुमने तो कमाल कर दिया। जब उसकी पत्नी ने मृत्यु की बात सुनी तो एक आंसू तक आंख में नहीं आया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
प्यार
आज रमेश की आंखें डबडबा गई जब उसकी नजर अपनी मां की तस्वीर पर पड़ी जो बचपन में उन्हें छोड़कर स्वर्गवासी बन गई थी। आज रमेश के पास धन दौलत की कमी नहीं थी बस कमी थी तो मां की जो उन्हें प्यार एवं आशीर्वाद दे सके। आज जब उसकी नजर उन बच्चों पर पड़ी जो उधर से अपनी मां के साथ गुजर रहे थे तो उसे सब धन दौलत बेकार नजर आ रही थी। बस मां की याद आ रही थी। काश! उनकी मां आकर उन्हें गले से लगा ले तो रमेश सारा धन दौलत न्यौछावर करने को तैयार था। किंतु आज वो अकेला एक नदी के किनारे सोच रहा था कि उनकी किस्मत में मां का आशीर्वाद एवं प्यार नहीं है। मां की कमी सता रही थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
आज रमेश की आंखें डबडबा गई जब उसकी नजर अपनी मां की तस्वीर पर पड़ी जो बचपन में उन्हें छोड़कर स्वर्गवासी बन गई थी। आज रमेश के पास धन दौलत की कमी नहीं थी बस कमी थी तो मां की जो उन्हें प्यार एवं आशीर्वाद दे सके। आज जब उसकी नजर उन बच्चों पर पड़ी जो उधर से अपनी मां के साथ गुजर रहे थे तो उसे सब धन दौलत बेकार नजर आ रही थी। बस मां की याद आ रही थी। काश! उनकी मां आकर उन्हें गले से लगा ले तो रमेश सारा धन दौलत न्यौछावर करने को तैयार था। किंतु आज वो अकेला एक नदी के किनारे सोच रहा था कि उनकी किस्मत में मां का आशीर्वाद एवं प्यार नहीं है। मां की कमी सता रही थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
मिर्च
मिर्च को कैप्सिकम एनम नाम से जाना जाता है। एनम का अर्थ होता है वार्षिक अर्थात मिर्च का पौधा प्राय एक साल तक जीवित रहता है किंतु सर्दी से बच जाए तो यह कई वर्षों तक जीवित रह सकती है। मिर्च हरी,काली,लाल, पीली कई रंगों के कारण होता है। वास्तव में कैरोटीन पदार्थ के रंग बदल लेने से मिर्च का रंग लाल,पीला,हरा आदि मिलता है। मिर्च प्राय शिमला, लंबी मिर्च, ठिगनी, मोटी मिर्च आदि कई प्रकार की होती हैं। शिमला मिर्च खाने से वजन घटता है वही गठिया, कैंसर रोग समाप्त हो जाता है। यह आयरन...
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मिर्च को कैप्सिकम एनम नाम से जाना जाता है। एनम का अर्थ होता है वार्षिक अर्थात मिर्च का पौधा प्राय एक साल तक जीवित रहता है किंतु सर्दी से बच जाए तो यह कई वर्षों तक जीवित रह सकती है। मिर्च हरी,काली,लाल, पीली कई रंगों के कारण होता है। वास्तव में कैरोटीन पदार्थ के रंग बदल लेने से मिर्च का रंग लाल,पीला,हरा आदि मिलता है। मिर्च प्राय शिमला, लंबी मिर्च, ठिगनी, मोटी मिर्च आदि कई प्रकार की होती हैं। शिमला मिर्च खाने से वजन घटता है वही गठिया, कैंसर रोग समाप्त हो जाता है। यह आयरन...
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मिर्च मिर्च को कैप्सिकम एनम नाम से जाना जाता है। एनम का अर्थ होता है वार्षिक अर्थात मिर्च का प...
मिर्च मिर्च को कैप्सिकम एनम नाम से जाना जाता है। एनम का अर्थ होता है वार्षिक अर्थात मिर्च का प...
भगवान
क्षीण शरीर,चेहरे पर झुरियां, कांपते हुए हाथ, डबडबाई आंखें, हाथ में बेंत लेकर आगे बढ़ रही थी। बुड़बुड़ा रही थी कि अपने पूरे जीवन में मेहनत कर जिस पुत्र को पाला उसी ने घर से निकाल दिया। यह तो ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे एक गाय का मीठा दूध तब तक पीते रहे जब तक कि वो दूध देती हो और ज्योंही दूध देना बंद किया, उसे घर से निकाल दिया जाए। अब मैं कहां जाऊं? भगवान मुझ पर तरस खा। बुजुर्ग महिला अभी सोच ही रही थी कि पास खड़े एक भद्र जन की दृष्टि उस पर पड़ी और हाथ पकड़कर कहा-माता जी, ...
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क्षीण शरीर,चेहरे पर झुरियां, कांपते हुए हाथ, डबडबाई आंखें, हाथ में बेंत लेकर आगे बढ़ रही थी। बुड़बुड़ा रही थी कि अपने पूरे जीवन में मेहनत कर जिस पुत्र को पाला उसी ने घर से निकाल दिया। यह तो ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे एक गाय का मीठा दूध तब तक पीते रहे जब तक कि वो दूध देती हो और ज्योंही दूध देना बंद किया, उसे घर से निकाल दिया जाए। अब मैं कहां जाऊं? भगवान मुझ पर तरस खा। बुजुर्ग महिला अभी सोच ही रही थी कि पास खड़े एक भद्र जन की दृष्टि उस पर पड़ी और हाथ पकड़कर कहा-माता जी, ...
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गोखरू
गोखरू एक शाक के रूप में असिंचित भूमि पर पर्याप्त मात्रा में मिलता है। यह दो रूपों में पाया जाता है बड़ा गोखरू तथा छोटा गोखरू। छोटा गोखरू गांवो में भाखरी, भाखड़ी नामों से जाना जाता है। यह पशुओं विशेषक ऊंट को खिलाने के काम आता है किंतु जब पक जाता है तो फल पर कांटे आ जाते है।
वहीं बड़ा गोखरू अति उपयोगी माना जाता है किंतु छोटा गोखरू भी किसी प्रकार से बड़े गोखरू से कम नहीं है। गोखरू का वैज्ञानिक रूट्रायबलर ट्रिब्यूलस टेरेस्ट्रिस नाम से जाना जाता है। गोक्षुर नाम से भी जाना ...
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गोखरू एक शाक के रूप में असिंचित भूमि पर पर्याप्त मात्रा में मिलता है। यह दो रूपों में पाया जाता है बड़ा गोखरू तथा छोटा गोखरू। छोटा गोखरू गांवो में भाखरी, भाखड़ी नामों से जाना जाता है। यह पशुओं विशेषक ऊंट को खिलाने के काम आता है किंतु जब पक जाता है तो फल पर कांटे आ जाते है।
वहीं बड़ा गोखरू अति उपयोगी माना जाता है किंतु छोटा गोखरू भी किसी प्रकार से बड़े गोखरू से कम नहीं है। गोखरू का वैज्ञानिक रूट्रायबलर ट्रिब्यूलस टेरेस्ट्रिस नाम से जाना जाता है। गोक्षुर नाम से भी जाना ...
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गोखरू गोखरू एक शाक के रूप में असिंचित भूमि पर पर्याप्त मात्रा में मिलता है। यह दो…
गोखरू गोखरू एक शाक के रूप में असिंचित भूमि पर पर्याप्त मात्रा में मिलता है। यह दो रूपों में...
सौतेली मां
बच्चा जोर जोर से खाने के लिए चिल्ला रहा था किंतु उसके सामने खड़ी महिला उसे सता रही थी। कभी पीटती तो कभी डांटती। बेचारा भूखो बालक सो गया। सारे नजारे को देख रहे रामू ने अपनी पत्नी से पूछा-यह औरत अपने बच्चे को बहुत पीट रही थी। अक्सर पीटती रहती है। आखिर इतनी बेरहम क्यों बनी हुई है? रामू की पत्नी ने अश्रुपूरित नेत्रों से जवाब दिया-भगवान, किसी को सौतेली मां न दे। भगवान श्रीराम ने भी सौतेली मां द्वारा दिया वनवास झेला था। रामू की पत्नी ने उसे बताया कि यह बच्चा जब तीन वर्ष का था तब इसकी मां छोड़कर मर गई। इसके पिता धर्मा ने अपनी खुशी के लिए शादी तो कर ली किंतु बच्चे के लिए एक विपत्ति मोल ले ली। यह औरत तो क्या कोई भी जग की सौतेली मां इस प्रकार का ही व्यवहार करती है। अपनी पत्नी की बातें सुनकर रामू कभी बच्चे को देखता तो कभी उसकी सौतेली मां को।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**
बच्चा जोर जोर से खाने के लिए चिल्ला रहा था किंतु उसके सामने खड़ी महिला उसे सता रही थी। कभी पीटती तो कभी डांटती। बेचारा भूखो बालक सो गया। सारे नजारे को देख रहे रामू ने अपनी पत्नी से पूछा-यह औरत अपने बच्चे को बहुत पीट रही थी। अक्सर पीटती रहती है। आखिर इतनी बेरहम क्यों बनी हुई है? रामू की पत्नी ने अश्रुपूरित नेत्रों से जवाब दिया-भगवान, किसी को सौतेली मां न दे। भगवान श्रीराम ने भी सौतेली मां द्वारा दिया वनवास झेला था। रामू की पत्नी ने उसे बताया कि यह बच्चा जब तीन वर्ष का था तब इसकी मां छोड़कर मर गई। इसके पिता धर्मा ने अपनी खुशी के लिए शादी तो कर ली किंतु बच्चे के लिए एक विपत्ति मोल ले ली। यह औरत तो क्या कोई भी जग की सौतेली मां इस प्रकार का ही व्यवहार करती है। अपनी पत्नी की बातें सुनकर रामू कभी बच्चे को देखता तो कभी उसकी सौतेली मां को।
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