Saturday, December 21, 2019

                       कबड्डी
अंकल, अंकल। कल रविवार हैं आप हमें कबड्डी खिलाने आओगे ना? हम इंतजार करेंगे। बच्चों ने अंकल प्रेम से कहा।
प्रेम ने प्यार से कहा-जब आपमें इतनी लग्न है तो मैं जरूर आऊंगा। तुम सभी समय पर खेल के मैदान में मिलना।
अगले दिन
....लेकिन अंकल अभी तक नहीं आए, बच्चे खेल के मैदान में खड़े बाट जोह रहे थे। तभी वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने कहा-अब किसकी राह तक रहे हो? जिसका इंतजार है वो रात को स्वर्ग सिधार गए। आप घर जाओ। इतना सुनकर बच्चे धरा पर बैठ गए मानो उनका कोई अपना बिछुड़ गया हो। बच्चे यादों में खोए घर की ओर मुंह लटकाए सोचते जा रहे थे कि आखिरकार प्रभु ने क्या सोचा? हमें जो खेल खिलाता था वो ही हमसे छीन लिया
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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