Saturday, December 21, 2019

                  लघु कथा नैतिक पतन
ओ हो, एक बैंक मैनेजर ने रिश्वत के एक लाख रुपये मांगे और वो भी भैंसों का लोन दिलाने के नाम पर। अरे यह क्या, एक प्रोफेसर ने थीसिस जमा करने के नाम के दस हजार रुपये रिश्वत मांगी। समाचार पढ़ते हुए राम ने अपनी मां से पूछा-मां, यह समाज में क्या बीमारी फैल रही है?
मां ने उत्तर दिया-बेटा, यह वो बीमारी है जिसका कोई धरा पर इलाज नहीं है। यह तो कैंसर और एड्स से भी घातक बीमारी होती है। इस बीमारी का नाम है नैतिक पतन। एक बार पतन शुरू हो गया वो जन को नष्ट करके ही दम लेता है। चाहे कितनी बड़ी डिग्री चिकित्सा के क्षेत्र में हासिल कर लो, इस रोग का इलाज नहीं मिलेगा। इस रोग की कोई दवा अभी तक ईजाद नहीं हो पाई है।
मां की बात सुनकर राम ने लंबी सांस ली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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