नया साल
राम ने पूछा शाम से
आज है नया साल
तबियत कैसी आज
कैसा आपका हाल,
स्कूल की हैं छुट्टियां
पहनेंगे सुंदर जर्सी
खुशियां मनाएंगे हम
खाएंगे मिलकर बर्फी,
नई सुबह, नया दिन
नए नए दोस्त बनाए
आसमान से बात करे
खुद हंसे और हंसाए,
दोस्त जो बिछुड़ गए
उनको नहीं भुलाएंगे
कोई गरीब जन मिले
उसको गले लगाएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बचाएंगे
नए साल में प्रसन्न सभी
सपने अपने महकाएंगे
जल की किल्लत मची है
जल को अब बचाएंगे,
पक्षी प्यासे कह रहे सारे
कुछ हम पर रहम करो
जल को मत ना बहाओ
कुछ तो वक्त से भी डरो,
प्यासे वन्य जीव पुकारे
अब तो जान बख्श देना
पानी नहीं मर जाएंगे यूं
अब तो मानो ये कहना,
वक्त है जल को बचाओ
खुद हंसो और हंसाओ
पानी की बचत कर लो
यह वक्त है जल बचाओ।
**होशियार सिंह, लेखक, कनीना, हरियाणा**
नया साल
जैसा बीता गया साल
अब आया नया साल
पूछ रहे जन का हाल
बदली जग की चाल,
नहीं कोई प्रसन्न आज
मची हुई भगदड़ आज
पैसे की भूख कहलाए
कहता जमाना ये राज,
कोई ठंड में कांप रहा
कोई मना रहा खुशिया
ठंड करती जीना हराम
हाल पूछों इस दुखिया,
जब सभी जन प्रसन्न हो
वो दिन जब भी आएगा
जन की कोई इच्छा नहीं
वो नव वर्ष कहलाएगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
ताई बोली ताऊ से--
एक साल बीत गया है
नया साल यह आया है
खूब ठंड, कोहरा छाया
जन जन बड़ा हर्षाया है।
ताऊ बोला ताई से.......
बेशक खुशियां मना रहे हैं
निज घर में तो मनाते रोज
खाने पीने की कमी नहीं
दोनों मिलकर मनाते मौज,
किसी चीज की कमी हो
आज बोल मुंह से अपने
मांगेगी चीज मिल जाएगी
मत नहीं देखों कोई सपना।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**
नया साल
राम अपने घर के पास से गुजरने वाले हर बुजुर्ग की दुआएं ले रहा था और हर बुजुर्ग को एक एक पेन दे रहा था। बुजुर्ग आशीर्वाद देकर राम से पूछते कि आपने पैन क्यों दिया और आशीर्वाद क्यों मांगा तो राम प्रत्येक से कहता-नए साल पर मेरा जन्म दिन होता है और इस दिन मैं बुजुर्गों से दुआएं मांगता हूं। रही बात पेन की वो इसलिए कि बुजुर्ग बेशक अपने जीवन में बेहतर पढ़ाई नहीं कर पाए किंतु वे अपने बच्चों को पेन देकर पढऩे के लिए प्रेरित करेंगे। उनकी बात सुनकर बुजुर्ग अवाक आगे बढ़ रहे थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**
राम ने पूछा शाम से
आज है नया साल
तबियत कैसी आज
कैसा आपका हाल,
स्कूल की हैं छुट्टियां
पहनेंगे सुंदर जर्सी
खुशियां मनाएंगे हम
खाएंगे मिलकर बर्फी,
नई सुबह, नया दिन
नए नए दोस्त बनाए
आसमान से बात करे
खुद हंसे और हंसाए,
दोस्त जो बिछुड़ गए
उनको नहीं भुलाएंगे
कोई गरीब जन मिले
उसको गले लगाएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बचाएंगे
नए साल में प्रसन्न सभी
सपने अपने महकाएंगे
जल की किल्लत मची है
जल को अब बचाएंगे,
पक्षी प्यासे कह रहे सारे
कुछ हम पर रहम करो
जल को मत ना बहाओ
कुछ तो वक्त से भी डरो,
प्यासे वन्य जीव पुकारे
अब तो जान बख्श देना
पानी नहीं मर जाएंगे यूं
अब तो मानो ये कहना,
वक्त है जल को बचाओ
खुद हंसो और हंसाओ
पानी की बचत कर लो
यह वक्त है जल बचाओ।
**होशियार सिंह, लेखक, कनीना, हरियाणा**
नया साल
जैसा बीता गया साल
अब आया नया साल
पूछ रहे जन का हाल
बदली जग की चाल,
नहीं कोई प्रसन्न आज
मची हुई भगदड़ आज
पैसे की भूख कहलाए
कहता जमाना ये राज,
कोई ठंड में कांप रहा
कोई मना रहा खुशिया
ठंड करती जीना हराम
हाल पूछों इस दुखिया,
जब सभी जन प्रसन्न हो
वो दिन जब भी आएगा
जन की कोई इच्छा नहीं
वो नव वर्ष कहलाएगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**
ताई ताऊ संवाद
ताई बोली ताऊ से--
एक साल बीत गया है
नया साल यह आया है
खूब ठंड, कोहरा छाया
जन जन बड़ा हर्षाया है।
ताऊ बोला ताई से.......
बेशक खुशियां मना रहे हैं
निज घर में तो मनाते रोज
खाने पीने की कमी नहीं
दोनों मिलकर मनाते मौज,
किसी चीज की कमी हो
आज बोल मुंह से अपने
मांगेगी चीज मिल जाएगी
मत नहीं देखों कोई सपना।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**
नया साल
राम अपने घर के पास से गुजरने वाले हर बुजुर्ग की दुआएं ले रहा था और हर बुजुर्ग को एक एक पेन दे रहा था। बुजुर्ग आशीर्वाद देकर राम से पूछते कि आपने पैन क्यों दिया और आशीर्वाद क्यों मांगा तो राम प्रत्येक से कहता-नए साल पर मेरा जन्म दिन होता है और इस दिन मैं बुजुर्गों से दुआएं मांगता हूं। रही बात पेन की वो इसलिए कि बुजुर्ग बेशक अपने जीवन में बेहतर पढ़ाई नहीं कर पाए किंतु वे अपने बच्चों को पेन देकर पढऩे के लिए प्रेरित करेंगे। उनकी बात सुनकर बुजुर्ग अवाक आगे बढ़ रहे थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**






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