भगवान
क्षीण शरीर,चेहरे पर झुरियां, कांपते हुए हाथ, डबडबाई आंखें, हाथ में बेंत लेकर आगे बढ़ रही थी। बुड़बुड़ा रही थी कि अपने पूरे जीवन में मेहनत कर जिस पुत्र को पाला उसी ने घर से निकाल दिया। यह तो ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे एक गाय का मीठा दूध तब तक पीते रहे जब तक कि वो दूध देती हो और ज्योंही दूध देना बंद किया, उसे घर से निकाल दिया जाए। अब मैं कहां जाऊं? भगवान मुझ पर तरस खा। बुजुर्ग महिला अभी सोच ही रही थी कि पास खड़े एक भद्र जन की दृष्टि उस पर पड़ी और हाथ पकड़कर कहा-माता जी, आपने मुझे नहीं पहचाना? मैं उन लोगों का सहारा हूं जिनका कोई सहारा नहीं होता। आओ, मेरे घर चलो। मेरा अनाथ आश्रम आपकी राहे तक रहा है। जिस देश में सीता को पवित्रता के लिए अग्रि परीक्षा देनी पड़े, जीवनभर कांटों पर चलना पड़े किंतु किसी के मुख से आह तक नहीं निकले। उस स्थान को छोड़ देना चाहिए। युवक को पाकर बुजुर्ग महिला के मुख से निकला-तुम तो भगवान हो। मेरे भगवान तुमने मेरी सुन ली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
क्षीण शरीर,चेहरे पर झुरियां, कांपते हुए हाथ, डबडबाई आंखें, हाथ में बेंत लेकर आगे बढ़ रही थी। बुड़बुड़ा रही थी कि अपने पूरे जीवन में मेहनत कर जिस पुत्र को पाला उसी ने घर से निकाल दिया। यह तो ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे एक गाय का मीठा दूध तब तक पीते रहे जब तक कि वो दूध देती हो और ज्योंही दूध देना बंद किया, उसे घर से निकाल दिया जाए। अब मैं कहां जाऊं? भगवान मुझ पर तरस खा। बुजुर्ग महिला अभी सोच ही रही थी कि पास खड़े एक भद्र जन की दृष्टि उस पर पड़ी और हाथ पकड़कर कहा-माता जी, आपने मुझे नहीं पहचाना? मैं उन लोगों का सहारा हूं जिनका कोई सहारा नहीं होता। आओ, मेरे घर चलो। मेरा अनाथ आश्रम आपकी राहे तक रहा है। जिस देश में सीता को पवित्रता के लिए अग्रि परीक्षा देनी पड़े, जीवनभर कांटों पर चलना पड़े किंतु किसी के मुख से आह तक नहीं निकले। उस स्थान को छोड़ देना चाहिए। युवक को पाकर बुजुर्ग महिला के मुख से निकला-तुम तो भगवान हो। मेरे भगवान तुमने मेरी सुन ली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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