चरित्रहीन
शोर मचा हुआ था। मुझे बचाओ,मुझे बचाओ की आवाज सुनकर लोग गली में इक_े हो गए। एक शिक्षित माना जाने वाला पुत्र अपने पिता की धुनाई कर रहा था। कपड़े फाड़ डाले, खूनमखून कर डाला। भीड़ ने जब यह दृश्य देखा तो आंखें खुली की खुली रह गई।
जैसे तैसे छुड़वाने का प्रयास किया तो पुत्र चिल्लाने लगा कि इस हरामजादे का कहना है कि तुम अपने दोस्त के साथ मत रहा करो वो चरित्रहीन है। मेरे दोस्त को चरित्रहीन बता रहा है। वो कैसा भी है मेरा दोस्त है।
तभी एक आवाज आई वो एक दोस्त है और यह आपका पिता। पिता से ज्यादा विश्वास दोस्त पर कर रहा है।
भीड़ छटने लगी और आवाज आ रही थी -इसे लिखा पढ़ा कहते हैं? यह वही देश है जहां पिता की खुशी के लिए पितामह भीष्म आजीवन ब्रह्मचारी रहा, सारे सुख त्याग दिए। इसी देश में माता पिता की खुशी के लिए अंधे माता पिता को श्रवण कुमार ने तीर्थों की यात्रा करवाई और वो भी कंधे पर तराजू के पलड़ों में बैठाकर। इसी भारत में श्रीराम ने सौतेली मां के कहने पर 14 वर्ष का बनवास झेला वो भी हंसते हंसते। मां के आदेश पर गणेशजी ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे किंतु शिवभोले को अंदर नहीं आने दिया। यह वही देश है जहां परशुराम ने पिता का आदेश पाकर अपनी मां की गर्दन काट दी थी। सभी यही कह रहे थे कि यह तो कलियुगी पुत्र है इसे तो जीने का अधिकार ही नहीं है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
शोर मचा हुआ था। मुझे बचाओ,मुझे बचाओ की आवाज सुनकर लोग गली में इक_े हो गए। एक शिक्षित माना जाने वाला पुत्र अपने पिता की धुनाई कर रहा था। कपड़े फाड़ डाले, खूनमखून कर डाला। भीड़ ने जब यह दृश्य देखा तो आंखें खुली की खुली रह गई।
जैसे तैसे छुड़वाने का प्रयास किया तो पुत्र चिल्लाने लगा कि इस हरामजादे का कहना है कि तुम अपने दोस्त के साथ मत रहा करो वो चरित्रहीन है। मेरे दोस्त को चरित्रहीन बता रहा है। वो कैसा भी है मेरा दोस्त है।
तभी एक आवाज आई वो एक दोस्त है और यह आपका पिता। पिता से ज्यादा विश्वास दोस्त पर कर रहा है।
भीड़ छटने लगी और आवाज आ रही थी -इसे लिखा पढ़ा कहते हैं? यह वही देश है जहां पिता की खुशी के लिए पितामह भीष्म आजीवन ब्रह्मचारी रहा, सारे सुख त्याग दिए। इसी देश में माता पिता की खुशी के लिए अंधे माता पिता को श्रवण कुमार ने तीर्थों की यात्रा करवाई और वो भी कंधे पर तराजू के पलड़ों में बैठाकर। इसी भारत में श्रीराम ने सौतेली मां के कहने पर 14 वर्ष का बनवास झेला वो भी हंसते हंसते। मां के आदेश पर गणेशजी ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे किंतु शिवभोले को अंदर नहीं आने दिया। यह वही देश है जहां परशुराम ने पिता का आदेश पाकर अपनी मां की गर्दन काट दी थी। सभी यही कह रहे थे कि यह तो कलियुगी पुत्र है इसे तो जीने का अधिकार ही नहीं है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
गलती पर गलती
यही कोई 13-14 वर्ष की लड़की, मुंह पर चुन्नी बांधे हुए ,जींस की टाइट पेंट में टांगे लकड़ी जैसी नजर आ रही, स्कूटी पर एक युवक को पीछे बैठाकर काले चश्मे एवं टी-शर्ट में तेज गति से मस्ती में झूमती आ रही थी कि सिर पर पगड़ी बांधे यहीं कोई 54-55 वर्ष के बुजुर्ग जो सड़क के कच्चे मार्ग पर दूर किसी का इंतजार का रहा था कि छोकरी ने बुजुर्ग को टक्कर मारते निकल गई। स्कूटी का साइड मिरर बुजुर्ग से टकराने लगा तो लड़की जोर से चिल्लाई-भाई, भाई थोड़ा बचना। जब तक स्कूूटी का शीशा बुजुर...
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यही कोई 13-14 वर्ष की लड़की, मुंह पर चुन्नी बांधे हुए ,जींस की टाइट पेंट में टांगे लकड़ी जैसी नजर आ रही, स्कूटी पर एक युवक को पीछे बैठाकर काले चश्मे एवं टी-शर्ट में तेज गति से मस्ती में झूमती आ रही थी कि सिर पर पगड़ी बांधे यहीं कोई 54-55 वर्ष के बुजुर्ग जो सड़क के कच्चे मार्ग पर दूर किसी का इंतजार का रहा था कि छोकरी ने बुजुर्ग को टक्कर मारते निकल गई। स्कूटी का साइड मिरर बुजुर्ग से टकराने लगा तो लड़की जोर से चिल्लाई-भाई, भाई थोड़ा बचना। जब तक स्कूूटी का शीशा बुजुर...
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