Saturday, December 21, 2019

                           शादी की सालगिरह
प्रसन्नचित होकर सुनीता ने कहा-जल्दी से बीमारी ठीक हो जाए तो घर चलेंगे। आज 17 नवंबर है और 21 नवंबर को हमारी शादी की सालगिरह है। धीरज ने कहा-क्यों नहीं, मेरी भी यही इच्छा है। शायद भगवान हम दोनों की इच्छा अवश्य पूर्ति करेंगे। कुछ ही देर बीती थी कि सुनीता ने लंबी लंबी सांस लेनी शुरू कर दी। धीरज डाक्टर को बुलाकर लाया। डाक्टर ने आंखें व नब्ज देखते हुए कहा-हे भगवान, लगता है हालात बिगड़ती ही जा रही है। प्रयास करता हूं।
धीरज अभी प्रभु से प्रार्थना कर रहे थे कि डाक्टर का प्रयास विफल हो गया और वो चल बसी। धीरज की आंखों से अश्रु धार बह निकली। .....अब तो देवलोक में ही मिलना हो सकता है। सब कुछ तबाह हो गया। आशाएं निराशा में बदल गई।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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