हलाल
सड़क निर्माण के लिए ईंटें डलवाई गई थी। कुछ लोगों की नजरें
इन्हीं ईंटों पर टिकी थी। शाम ढलते ढलते कुछ लोग सक्रिय हो गए और ईंट उठा
उठाकर अपने घर में रखने लगे। कोई चारपाई के चारों पैरों के नीचे लगा रहा था
ताकि सफाई करते वक्त परेशानी न हो तो कोई अपने घर में डाल रहा था। रात
बीती और सुबह होते होते ठेकेदार की सैकड़ों ईंटों को लोगों ने अपने घर में
डाल लिया। सड़क निर्माण के समय जब ईंटें कम पड़ी तो हकीकत सामने आई कि
मुफ्त की शराब काजी को भी हलाल होती हैं। ठेकेदार की आंखें खुल गई किंतुु
वो किसे कहे? किस पर ईंट चोरी का इल्जाम लगाए? आखिरकार ठेकेदार भी चोर और
कुछ लोग भी चोर? इसे कहते हैं चोर के घर मोर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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