ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.....
पूरा दिन कोई काम नहीं
ला दो एक दुधारू गाय
दूध पीएंगे मिलकर दोनों
सेहत बनाने का है उपाय।
ताऊ बोला ताई से..........
दूध नहीं अगर देगी गाय
लात जड़ कर दे हिसाब
पड़ी खाट में सेकते रहना
पड़ी चारपाई करो पेशाब,
बेहतर होगा दूध मोल ले
गर्मागर्म पीएं हम मिलकर
सर्दी में बैठ धूप सेकते रहे
हंसेंगे दोनों खिल खिलकर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***
कभी न भुलाओ
जहां खली जगह हो
वहां पर पेड़ लगाओ
पेड़ों का हो उपकार
उपकार नहीं भुुलाओ,
फसल फूल देते रहेंगे
काट दो बेशक उनको
उपकार में मरते रहेंगे
मौन रहकर दर्द सहेंगे,
परोपकारी कहलाते हैं
करते बड़ा ही उपकार
ये भी सजीव होते हैं
इनसे कर लो तुम प्यार,
वर्षों से खड़े हुए पेड़
देखा है जग का नजारा
हंसना कभी नहीं सीखा
उपकार है बस उधारा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
असली खुशी
रामू को खुश देखकर राजली ने चाय का कप देते हुए पूछा-आज तो बहुत खुश नजर आ रहे हैं। आखिर इतनी सर्दी में भी आप इतने प्रसन्न क्यों हो?
रामू ने झटपट उत्तर दिया-मेरी खुशी का राज भी इतनी कड़ाके की सर्दी है। मैं अपनी गाड़ी में दस पुरानी स्वेटर, पांच शाल एवं चार जोड़ी पुराने जूते लेकर गया था वो बांट दिए हैं। जब मैं गाड़ी से घर आ रहा था तो रास्ते में कांपते हुए कुछ बच्चे नजर आए और उनको देखकर अविलंब गाड़ी के ब्रेक लगाए और सभी को जूते, स्वेटर एवं शाल बांट दिए। सभी बेहद प्रसन्न थे। उनको प्रसन्न देखकर मुझे असली खुशी मिली। इसलिए मैं खुश हूं। रामू की बात सुनकर राजली ने कहा-अरे, यह तो सचमुच बड़ी खुशी की बात है। आपने इंसानों की सेवा की जो सबसे बड़ी सेवा है। सचमुच यह तो खुशी का राज है।
**होशियार सिंह, लेखक, कनीना, हरियाणा**
किसान दिवस
कभी खेत की चिंता है
कभी बच्चों का फिक्र
कभी नीलगाय सताती
कभी बारिश का है डर,
कभी बीज नहीं उगते
कभी मार जाएगा पाला
कभी ओलावृष्टि आती
मुंह पर लग जाता ताला,
कभी भाव नहीं मिलते
कभी पैदावार न बिकती
कभी अच्छे भाव सोचते
सोच सोच आंखें थकती,
कभी बच्चों की फीस है
कभी अपने फटे कपड़े
फसल उगाना है कठिन
काम एक कई हैं लफड़े।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



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