Sunday, May 31, 2020



 सुनो
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दर्द पराये भी देते हैं जो देर सवेर सहन हो जाते हैं किंतु अपनों द्वारा दिये गये दर्द एक काले नाग की भांति डसते हैं।
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--होशियार सिंह यादव, कनीना

मुक्तक
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1.(मात्राभार-19)
बैठे मायूस यादों में खोये।
लगते हो जैसे गमों में रोये।
बिछुड़े गये हैं जीवन में लाखो।
उन्हीं की यादों में नैन भिगोये।।

2.(मात्राभार-17)
कभी यादें बहुत सताती हैं।
यादें दर्द कोई दे जाती।।
यादों के सहारे गम कटता।
यादें निज बीती बताती हैं।।
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*होशियार सिंह यादव





दोहा कुंडलियां प्रतियोगिता
विषय-चित्राधारित
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सोने की चिडिय़ा देश, आज हुआ बदहाल।
दर्द दिलों में लिये हैं,     कोरोना का काल।
कोरोना का काल,    बड़ा मुश्किल है जीना
पी रहे थे बीड़ी शराब,आज बंद हुआ पीना।
सब्जी बिके न आज,     भाव हैं औने पौने।
अमीर खाये माल,       गरीब जा रहे सोने।।
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*होशियार सिंह यादव




शब्द-हठ
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बाल, त्रिया, भूपाल हठ, सृष्टि हुये विख्यात।
जब तीनों जिद पर अडिग, नहीं बनेगी बात।।
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*होशियार सिंह यादव




दुल्हन/वधु
विधा-कविता
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बहुत अरमान होते हैं
जब दुल्हन बनती है,
खुशी और गमों कई
फुलझड़ी चलती हैं।
मां बाप  देते विदाई
मन ही  मन रोती है,
जुदाई की घड़ी आई
छुपके नैन भिगोती है।
घर में बेटी  होती है
दुल्हन वो बन जाती,
कभी रो रो बीते उम्र
कभी खुशी वो पाती।
जुदाई अपनों की वो
जीवनभर  वो सहती,
कभी मायके में खुश
पीहर में  दुख सहती।
दुल्हन की जुदाई तो
एक दुल्हन है जानती
अपने-अपने क्या हैं
दुल्हन ही पहचानती।।
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समय




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समय समय की बात है, राजा बने फकीर।
सत्यवादी नृप बनकर , झेली जग की पीर।।
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Saturday, May 30, 2020

बिटिया नहीं पराया धन
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अर्पित करती तन और मन, कैसे बिटिया पराया धन,
कभी सास-ससुर की सेवा, कभी रहता मायके मन,
धर्म निभाती दो परिवारों में, प्रसन्न रहता उसका मन,
इन हालातों को देखकर, बिटिया नहीं पराया धन।।
बच्चों को पाल पोस कर  ,परिवार आगे बढ़ाती है
कभी ससुराल में बिताए,  तो फिर मायके आती है,
मात पिता की सेवा तो,  पति सेवा में जुट जाती है,
देखकर समर्पण भाव को, बिटिया नहीं पराया धन।।
गया जमाना जब होती थी, बिटिया एक पराया धन
वर्तमान हालातों में, बिटिया दहेज, बिटिया ही धन,
कितना कष्ट उठाती है, प्रभु देखो कभी बिटिया बन,
यूं दिल बार बार कहता, बिटिया नहीं पराया धन।।
सीता भी एक बिटिया थी, द्रौपदी का सुंदर था तन,
अनुसुइया,द्रोपती कितने नाम, सुन कायल होगा जन,
इंदिरा,सरोजिनी,कल्पना ने,अर्पित किया देश को तन,
मां-बाप की प्रिय होती है, कैसे बिटिया पराया धन।।




 शेर

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दिल किसी यूं लगाते जाइये
रो रोकर हंसाते जाइये
दूर बैठे हैं दोस्त कितने
उनको पास बुलाते जाइये
दिल की तमन्ना दिल में रहती
तमन्ना को भुनाते जाइये।
तंबाकू निषेध दिवस
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विज्ञान प्रगति की खूब,नहीं सुधरा मानव।
पी पी बीड़ी सिगरेट,  बन रहा है दानव।।
बन रहा है दानव,     आनंद देता हुक्का।
पीकर दारू चिलम, फिर होते डुकमडूका।।
छोड़ दो मद्यपान,     बुजुर्ग यह देते ज्ञान।
सेहत बन जाये खूब,  बतलाता विज्ञान।।
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*होशियार सिंह यादव

आधुनिकता
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आधुनिकता है ऐसी, कर रहे आज द्वंद्व।
कभी लोकडाउन होय, कभी देश हो बंद।
कभी देश हो बंद,   कोरोना अति सताये।
श्रमिक काम छोड़ के,अपने घरों  को जाये।
बहुत दुखी पा लिये, कोरोना से झिझकता।
नहीं ़िमली है दवा, कहते हैं आधुनिकता।।
*होशियार सिंह यादव


तंबाकू निषेध दिवस
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विज्ञान प्रगति की खूब,नहीं सुधरा मानव।
पी पी बीड़ी सिगरेट,  बन रहा है दानव।।
बन रहा है दानव,     आनंद देता हुक्का।
पीकर दारू चिलम, फिर होते डुकमडूका।।
छोड़ दो मद्यपान,     बुजुर्ग यह देते ज्ञान।
सेहत बन जाये खूब,  बतलाता विज्ञान।।
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दोहें***
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 1.
जब जब आते युगपुरुष, खूब रचे इतिहास।
दुष्ट कभी देते दखल,   जग ना आया रास।।

2.
प्रकृति हुई जब तब कुपित, भीषण हुआ विनाश।
कहर ढ़हाया देखकर, मन हो बड़ा उदास।।

3.
चक्रवात के जाल में, ताकत मिले अपार।
ंफॅसते जन बचना कठिन, निश्चित मानों हार।।
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*होशियार सिंह यादव

शब्द-चक्रवात
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चक्रवात के जाल में, ताकत मिले अपार।
फॅसते जन बचना कठिन, निश्चित मानों हार।।
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*होशियार सिंह यादव

कहर
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 प्रकृति हुई जब तब कुपित, भीषण हुआ विनाश।
कहर ढ़हाया देखकर,        मन हो बड़ा उदास।।
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*होशियार सिंह यादव


गर्मी सता रही, करे नौकायान।
पल में गर्मी दूर हो, जब हो स्नान।।


जरा सुनों
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प्रभु ने इंसान बनाया है किंतु इस जहां में इंसान अपने को प्रभु समझ बैठने की भूल कर बैठता है। यही भूल तो पाप है




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--होशियार सिंह यादव, कनीना,हरियाणा--

Friday, May 29, 2020

स्वातंत्र्य     वीर     सावरकर
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विधा-कविता
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राष्ट्रवादी विचारधारा
लेखक, कवि में उनका नाम,
मुंबई में पैदा हुये थे
वीर सावरकर शत शत प्रणाम।
दामोदर पंत पिता थे
राधाबाई उनकी मां का नाम,
युवा हुए मां बाप गये
पढऩे से बस उनको काम।
लंदन से ला करने पर
अभिनव भारत संगठन बनाया,
दो बार करावास हुआ
उनका बस तन-मन हर्षाया।
बम बनाना सिखलाया
उनकी क्रांतिकारी विचारधारा
झुका नहीं नहीं झुकेगा 
ऐसा था वह भारत का प्यारा।
सेल्यूलर जेल भेजा था
कोल्हू के बैल सा किया काम,
भरपेट खाना नहीं
ऐसे वीर को शत-शत सलाम।
जेल से छुड़वाया उन्हें
करते रहे बस देशहित का काम,
नहीं भुला सकते कार्य
वो कहलाते है भारत की शान।
गांधी की हत्या के
लगाये गए उन पर भी आरोप,
वो सिद्ध ना हो पाए
इसलिए हो कहलाए थे निर्दोष।
अनेकों कृतियां रची
उनके नाम डाक टिकट जारी,
ऐसे थी वीर सावरकर
नहीं जग में, रोती दुनिया सारी।
धरा पर जीवन रहेगा
तब तक रहेगा उनका बस नाम,
देशभक्ति और यादें ही
बतलाती रहेंगी उनका ही काम।
मिली काला पानी सजा
जिस पर भी एक फिल्म बनाई
मनाते आज जन्मदिन
जन्म दिन की जग में खुशी छाई।
वीरों की इस श्रेणी में
उनका नाम रहे बड़ा ही प्यारा,
सदा सदा पूजनीय
वीर सावरकर देशभक्त हमारा।
कट्टर हिंदू कहलाते,
देशहित सदा दिल से चाहते थे,
देशभक्ति की बात चले
स्वातंत्र्य
वीर सावरकर कहलाते ।।
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*होशियार सिंह यादव


जरा सुनों
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प्रभु ने इंसान बनाया है किंतु इस जहां में इंसान अपने को प्रभु समझ बैठने की भूल कर बैठता है। यही भूल तो पाप है।
*****
--होशियार सिंह यादव, कनीना,हरियाणा--


बादल/मेघ
विधा -कविता
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लो आये आकाश में
काले पीले बादल,
घुप अंधेरा छा गया
बरस रहा है जल।

जब उमड़ेंगे नभ पर
होगी तब बरसात,
किसान चले ले हल
बने बीजाई बात।

बादल राग सुनाते हैं
कवि हो प्रसन्न,
जब होगी बरसात तो
भीगेगा तन मन।
****************

*होशियार सिंह यादव


दोहें
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1.
सूर्य, धरती बंधकर,    नियम से करे काम।
दिन की होती जब सुबह, चलकर आती रात।।
2.
नियम सभी के ही बने, विघ्र बुरी है बात।
धरा अगर तोड़े नियम,    कैसे होगी रात।।
3.
नियम सभी अपनाइये, जग के हैं आधार।
जगत नियम को तोड़कर, जन बनता बेकार।।

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*होशियार सिंह यादव


इतिहास
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जब जब आते युगपुरुष, खूब रचे इतिहास।
दुष्ट कभी देते दखल,   जग ना आया रास।।
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*होशियार सिंह यादव




शब्द-कैरी/कैरियांं
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कैरी ला बाजार से,  डालो मधुर अचार।
खाते हैं जब साथ में, बढ़ जायेगा प्यार।।
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*होशियार सिंह यादव

Thursday, May 28, 2020

नवतपा(नौतपा)
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सूरज गर्मी वेग पर,    नहीं मिले आराम।
तप रही नौतपा धरा, करे नहीं दिल काम।।
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*होशियार सिंह यादव




जीवन
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 प्रभु के आधीन रहकर, समझ रहा धनवान।
उसकी महिमा जान ले, जीवन बने श्मशान।।

देवता
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सूरज होता देवता,  देता जगत प्रकाश।
जीवन की रक्षा करे,करता रोग विनाश।।
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*होशियार सिंह यादव



व्यथा....मध्यम वर्ग की
विधा -पद्य
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अमीरों को के पास धन,गरीबों के सरकार साथ ,
मध्यम वर्ग बुरा पिटा है,कट गये दोनों ही हाथ।
कोरोना की मार पड़ी जब,रोजगार तक हुये बंद,
हाथ पर हाथ धरे बैठा है,कैसे हो आवाज बुलंद।
गरीबों को मिली सहायता,अमीर के पास है धन,
मध्यम वर्ग करे काम धंधा, दर्द से कराहाता मन।
उद्योग धंधे हो चुके हैं,मध्यम वर्ग का नहीं कसूर,
मध्यम वर्ग का छिना सहारा,सपने हुये चकनाचूर।
सबसे ज्यादा परेशान आज,कहलाता वो मध्यम वर्ग,
व्यथा मध्यम वर्ग की जानों,बना उसका जीवन नरक।
भीख मांगता हिचकिचाए, अपनी व्यथा किसे बताये,
यूं ही कोरोना चलता रहा,लॉकडाउन से राम बचाये,
जल्दी से कोरोना मिट जा,वरना मध्यम वर्ग हो विलुप्त,
सरकार प्रभु भरोसे चलती,जागे नहीं बस रहे सुप्त।।
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*होशियार सिंह यादव


विरासत का हौसला
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धरती, अंबर और पानी
मिली हमें एक जिंदगानी,
हौसला मिला है उपहार
प्रकृति से हमको है प्यार।
विरासत के हैं वायु जल
इन्हें कभी न करो खराब
जब तक जीये प्रयोग करे
सुनों हे साथी,सुनो जनाब।
प्रकृति है अनमोल उपहार
करो सदा प्रकृति  से प्यार,
विरासत में मिली आजादी
कुर्बानी के लिए रहो तैयार।
विरासत का मिला हौसला
होने न पाये कभी यह कम,
भरों कूट-कूट कर देशभक्ति
दुश्मन घबरा जाये देख दम।
धरती, अंबर और सभी तारे
प्रकृति के कहलाते हैं नजारे,
इनकी सुरक्षा निज अधिकार
इन्हें बचाने को रहना तैयार।। 

दिल
 ***
दिल ना दुखाओ किसी का,
बसता है जन भगवान,
हर जन को ले साथ चले,
वो देव तुल्य है महान।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना**

और का ही मचा है शोर।
पूरा न हो बेशक हो भोर।।

Wednesday, May 27, 2020


नवल काव्य
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धरती से आकाश
बस गर्मी तपिश,
नौतपा ने तपाया
कोरोना आया
कैसा समय है,
सभी परेशान।
न कोरोना खत्म
नहीं गर्मी मिटी
बारिश जब आये
किसान हो खुश,
गर्मी मिटेगी
राहत मिलेगी।
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 प्रेम
विधा -कविता

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प्रेम के रूप हजार हैं
कहते प्रेम,प्रीत,प्यार,
यह अमूल्य चीज है
ना मिले कभी उधार।

ज्ञानी,साधू और संत
बता न पाये परिभाषा,
प्रेम के कारण ही रहे
मन अंदर अभिलासा।

प्रेम फूल सामान हो
पल में  ही मुरझाए,
प्रेम हीरे जैसा कठोर
तोड़ा भी नहीं जाए।

प्रेम बहुत  अगम है
प्रेम होता बड़ी पास,
प्रेम के चलते जग में
पत्नी का पति खास।

प्रेमिका- प्रेमी बीच
पलता दिलों में प्यार,
हजारों बंधनों में बंधे
ऐसा होता है इकरार।

प्रेम सुख-दुख सागर
पूरे जगत का आधार,
सृष्टि आगे जब चले
दिलों में पलेगा प्यार।।

जरा सुनो
***

दिल ना दुखाओ किसी का,
बसता है जन भगवान,
हर जन को ले साथ चले,
वो देव तुल्य है महान।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना**

और का ही मचा है शोर।
पूरा न हो बेशक हो भोर।।


जरा सुनो
***

 जब सूरज बरसे आग,
झूलस जाये शाक।
शिकंजी पीओ जमकर,
बचाओ मुंह नाक।।।


शब्द-तपन
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तपन बढ़े जब लू चले, सूरज बरसे आग।
जेठ माह मुश्किल डगर, राही जल्दी जाग।।
**
--होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा

 





कलियुग
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त्रेता में श्रीराम बन,       द्वापर में  गोपाल।
कलियुग मेें अवतार लो, देखों जग का हाल। ।

Tuesday, May 26, 2020


मुक्तक
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कोरोना की मार पड़ी है, बेघर हुये कितने मजदूर,
रोटी रोजी को भूल गये, अपनों से हो गये वो दूर।
सौ सालों में इससे बढ़कर,कोई नहीं त्रासदी देखी,
सोचा नहीं यूं सतायेगा, इतना होगा यह रोग क्रूर।।
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*होशियार सिंह यादव


  कविता
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वक्त बदलता रहता है
इंसान बदलते रहते हैं,
समझौता होता है जब
इंसान नयन भिगोते है।
समझौता जो कर लेता
वह कहलाता है महान,
समझौता चुक जाये तो
मूर्ख कहलाएगा इंसान।
इंसान कत्ल हो जाते हैं
फिर होता है समझौता,
समझौता  दबाव में हो
जन दिल ही दिल रोता।
समझौते की घडिय़ा भी
कर देती है दिल बेचैन,
समझौता करने से कभी
मिलता नहीं कहीं चैन।
समझौता नहीं है मौका
वक्त की होती है पुकार,
जो समझौता कर लेता
उसे मिलता जगत प्यार।
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*होशियार सिंह यादव





सुगंध/सौरभ/खुशबू (त्रिपदी)
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दर्दे दिल का घर बना लिया यह शरीर।
दर्द में क्यों रोते हो यह गा रहा फकीर।
दर्द किसी को दे दे मांगता नहीं जमीर।
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बहुत छुपाते हैं दिल के भेंद।
दोस्त थाली में खा कर देते हैं छेद।
जीवन भर का दर्द दे जाता है खेद।
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बाग महकते हैं खुशबू बहुत आती।
बाग उजड़ते हैं खुशबू चली जाती।
बाग में है बैठ कोयल कभी गाती।
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बागों में आती रहती है सुगंध।
मन मुस्कुराता गाता है मंद मंद।
सूखे बाग चली जाती है सुगंध।
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*होशियार सिंह यादव



 

दाता *******
दाता का उपहार है,  जन्म मिला इंसान।
मात पिता सेवा बड़ी,फर्ज इसे बस मान।।
***
*होशियार सिंह यादव

परिवार
विधा-छंद  कुडलियां

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प्रीत प्यार के तार से,  बना हुआ परिवार,
सुख और दुख का साथी, होता है आधार।
होता है आधार,     जगत का सुंदर नाता,
जुड़े हुये मां बाप,   साथ बहन और भ्राता।
जुड़े हुये डोर में,    जग गाये उसका गीत,
मधुर जग में नाता,    बंधे एक बंधन प्रीत।
     2
सुंदर बंधन जगत में, हो रिश्तों की डोर,
कष्टों को सब पूछते,  जब होती है भोर।
जब होती है भोर, चले तब पवन सुहानी,
एक रिश्ते में जुड़े,    नहीं होती मनमानी।
करते रहते सहयोग, जैसे हो एक समंदर,
सदा रहे मुस्कान,    परिवार बनता सुंदर।।
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Monday, May 25, 2020



सुनो
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बुरी बात होती धोखा,
कुछ लोग देखते मौका।
जगत में आये सोच ले,
वरन करो किसने रोका।।





मुलाकात
विधा- कविता
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मिलते किसी मोड़ पर
बन जाती है एक बात
दो दिलों  की दास्तान
कहलाती है मुलाकात।
कैदी को भी वक्त मिले
करने को  बस दो बात,
रो-रो गुजरती है कभी
सुंदर सुहानी एक  रात।
अजनबी से हो मुलाकात
दिल में एक घबराहट हो,
कभी-कभी मन करता है
दर्द मिला है आओ ले सो।
पति-पत्नी की हो मुलाकात
खिल सकता है कोई  गुल
सुनहरी  बातें चलती रहती
दिल फिर भी नहीं हो फुल।
कभी-कभी मन करता रहे
मुलाकात अभी अधूरी  है
मिलते रहते किसी मोड़ पर
तब मुलाकात होती पूरी है।।
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*होशियार सिंह यादव


 गुलशन/उद्यान/बाग
विधा- कविता
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मन प्रसन्न होता है
जहां लगे हो बाग,
पेड़ ना काटे कोई
अलाप रहे हैं राग।
बाग जहां लगे हो
आती बसंत बहार,
तितली भंवरे,जन
करते उनसे प्यार।
गुलशन जब उजड़े
रूठ जाती है बहार,
लोग पास ना आते
कर ले लाख पुकार।
मन हर्षित  करते हैं
फूल कली मुसकाय,
पेड़ कभी  ना काटो
आओ उद्यान लगाये।
*******************

*होशियार सिंह यादव



चंद्र
अंबर पर तारे खिले, सर्द सुहानी रात।
चंद्र किरण रोशन करे, जैसे हो बारात।।

शरीर
धर्म-कर्म करते रहो,  सुंदर मिला शरीर।
हो जाये जीवन सफल, मिटे जगत की पीर।।

Sunday, May 24, 2020


गरीब
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***********************************
गरीब का साथी नहीं
गरीब का रहते दुखी,
रोटी रोजी मिल जाए
हो जाए जीवन सुखी।
रोजी रोटी कमाने को
फिरते  रहते मारे मारे,
उनकी बदकिस्मत को
दाता कभी तो विचारे।
हाथ जोड़ते देखें जाते
अमीर करे बुरा बर्ताव,
दो पैसे की खातिर वो
पड़ जाते हैं उनके पांव।
कभी मार पड़े रोग की
कभी होते बच्चे बर्बाद,
बस मामूली काम मिले
करते रहते बस फरियाद।
गरीबी दर्द देती रहती है
लोग ताना उन पर कसते,
दुष्टों के शब्द गरीबों  को 
काले नाग की भांति डसते।
*******************

दोहागजल, 

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***********************************
समय वक्त के अनुसार,बीते जब एक रात,
सभी कष्ट तब दूर हो, मन मोह ले प्रभात,
कभी दुख में बीते दिन, कभी जन मिले साथ,
जब मार्ग ना सूझता,     दाता पकड़े हाथ।।

***************

लगे लाटरी हाथ जब ,मन गाता है गीत।
घर में मनेेगा उत्सव,  बढ़ जायेगी प्रीत।
खुशियों की बरसात हो, जनों का मिले साथ
कहीं खुशी कहीं गम हो, मिलती घर में जीत।
**
 सुनो
******

दुर्जन मौके का लाभ उठाते हैं
सज्जन मौके पर काम आते हैं।
दुर्जन कदम कदम पे सताते हैं,
सज्जन दुख दर्द से  बचाते हैं।।
***
-होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा


कुंडली 


**********************
रोग दर्द एक दे गया,  दुखी हुये हैं लोग,
दौड़ चले अब बसों मेें, सता रहा है रोग।
सता रहा है रोग, अब नहीं मिले आराम,
रोटी नहीं मिलती,मिलता नहीं अगर काम।
भाग दौड़ करते हुये  मौत पा गये लोग,
मार करता कोरोना, बचो बुरा है रोग।।
****************

*होशियार सिंह यादव


दोहें.....
******
गुलशन...

गुलशन जाये उजड़ जब, होता है आघात।
मात पिता साया उठे, बच्चा होय अनाथ।।
बाग...
जब कभी आये चुनाव, दिखाते सब्जबाग।
जन से हो नेता दूर, तब दिखती औकात।।
उद्यान....
फूल कली महके जहॉं, कहलाता उद्यान।
कोयल की सुनों सरगम,भ्रमर छेड़ते तान ।।
**
*होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

प्रभात
*********


समय चक्र की बात है,बीते जब एक रात।
सोये जन तब जागते, मन मोह ले प्रभात।।


उत्सव
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लगे लाटरी हाथ जब ,मन गाता है गीत।
घर में मनेेगा उत्सव,  बढ़ जायेगी प्रीत।

Saturday, May 23, 2020



छंद 

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कोरोना का देख डर, छुपे घरों में लोग,

नहीं मिलता चैन वहां, कैसा है संजोग।

कैसा है संजोग, रोग यह रोज सताता,

धन दौलत से डरे ,नहीं वो हाथ लगाता।

कहे सिंह कविराय, सुनो काहे अब रोना,

आये जल्द वो दिन, मिटे जग से कोरोना।

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********************

*होशियार सिंह यादव



मुक्तक
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1
वाह रे,वाह! कोरोना,
तेरा है  जग में रोना।
आये रोटी रोजी को,
लाशों का लगा बिछोना।।
2.
भूले फास्ट फूड भोग,
ऐसा फैला जगत रोग।
आजाद जन घर में छुपे
कैसा हुआ है संजोग।।
****************
स्वरचित मौलिक रचना।
********************
*होशियार सिंह यादव

दिल की आरजू
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**********************************
आंखें नहीं मिलती, हो जाती है गुफ्तगू,
हर जीव छुपाये रखता,दिल की आरजू।

फूल के दिल में होती,सुंदर एक आरजू,
पूजा में प्रयोग करे, लेते रहे मेरी खूशबू।

पत्नी के दिल में होती,पति दिल में बसे,
पाकर मुझको फूल जैसा,दिनभर वो हंॅंसे।

चंदन की है आरजू,हर जन माथे लगाये,
ठंडक प्रदान करूं, खुद हॅंसे और हॅंसाये।

देशभक्त की आरजूं, देश पर मिट जाऊं,
जगवाले याद करे,तिरंगे में लिपटा आऊं।

विद्यार्थी कहे गुरु से,पढ़कर नाम कमाऊं,
माता,पिता,गुरु का, सारा ऋण मैं चुकाऊं।

कहे कवि जग को,ऐसी कविता मैं बनाऊं,
हित करूं जन का, भूले को राह दिखाऊं।

आरजू हर दिल में है,किसका हाल सुनाऊं,
गुरु को नमन करूं,निज दिल में लौ जलाऊ।



सत्ता
*****

नेता को सत्ता मिली, करें नहीं जन काम।
लोग उन्हें यूं पूजते, जैसे शिव का धाम।।

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आंसू, मजदूर,गांव
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आंसू
होता जब गरीब दुखी, ऑंसू देेते साथ।
जब मार्ग ना सूझता, दाता पकड़े हाथ।।
मजदूर
करे कमाई दिन रात, होता है मजबूर।
बच्चे भी भूखे मिले, कहलाता मजदूर।।
गांव
जाना होता जब शहर, याद आते हैं गॉंव।
साफ हवा मिलती नहीं, होती ना तरु छॉंव।
****************

*होशियार सिंह यादव

गंजा
दोहा...
चमके गंजी खोपड़ी, आता है भूचाल।
टोला मारे जोर का, पूछे जनाब हाल।।


सत्ता
नेता को सत्ता मिली, करें नहीं जन काम।
लोग उन्हें यूं पूजते, जैसे कोई धाम।।

ऋतुराज

खिल उठे धरती अंबर, बजते दिल के साज।
ओढ़ फूलों की चुनरी, आता है ऋतुराज।।

खामोश
फूलों ने बांहें फैलाई,आओ ले लू आगोश।
हंसी खुशी से रहना सीखो,मत रहो खामोश।।

बस तबाही के सिवा और मयस्सर क्या है।

मुशायरे का ज्ञान कम यूं खुश्क हवा है।

Friday, May 22, 2020

मजबूर
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1.
जग का इंसान मजबूर,
फिर भी करता है गरूर।
जब तक घमंड नहीं त्यागे
दिलों से हो जाता दूर।।
2.
कोरोना की मार पड़ी,
दर्द की आई एक घड़ी।
मजबूर हो गए अब सभी
समस्या जस की तस खड़ी।।

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वटवृक्ष
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सौभाग्य  को देने वाला
वट सावित्री व्रत कहाये,
वटवृक्ष की करलो पूजा
मनोंवांछित फल है पाये।

ज्येष्ठ माह की अमावस्या
वट, बरगद, पीपल पूजा,
करती रहे जीवन में नारी
इससे बड़ा ना काम दूजा।

सत्यवान सवित्री नमन है
जिनका नाम जगत अमर,
सावित्री ने करके वटपूजा
पति को छुड़ा लाई थी घर।

ब्रह्मा, विष्णु, महेश बसते
वही वटवृक्ष कहलाता है,
पूजा इस दिन करने से ही
पति दीर्घायु फल पाता है।

गरीब स्त्री को करके दान
विधि विधान से व्रत करो,
साक्षात यम फिर आ जाये
मृत्यु भय से कभी ना डरो।
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जरा सुनो
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इंसान को उस वटवृक्ष की भांति जो जन जीवन के हितार्थ अपना पूरा जीवन बीता देता है। इसे कहते हैं काम भी बड़ा और नाम भी।
**होशियार सिंह यादव कनीना।

तूफान
 घिर जाये तूफान में, सूझे नहीं उपाय।
मरते दम लड़ते रहो, दाता बने सहाय।।
**
*होशियार सिंह यादव

तूफान
***
घिर जाये तूफान में, सूझे नहीं उपाय।
आखिरी दम प्रयास से , दाता बने सहाय।।
**




*होशियार सिंह यादव



दूत
***
कोरोना फैला हुआ, बना मौत का दूत।
जूझ भयानक रोग से,देश बना मजबूत।।




Thursday, May 21, 2020

तेरा देश पुकारे
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विद्या-छंद
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     1
सुन ले पुकार देश की,वीर धीर दे ध्यान,
कुर्बानी दे देश को,  होगा जग में नाम।
होगा जग में नाम,  तिरंगा लिपटा आये,
भीड़ हो नेता की,  जमके सलामी पाये।
कहे सिंह कविराय, बजेगी मातम की धुन।
सदा ही रहे नाम,  ले ध्यान लगाकर सुन।।
2
पुकार तेरे देश की, मातृभूमि करो रक्षा,
मार गिरा दुश्मनों को,कर तिरंगा सुरक्षा।
कर तिरंगा सुरक्षा, होगा देश भर नाम,
छाती दुश्मन चीर, कर दे काम तमाम।
कहे सिंह कविराय, दुश्मन जायेगा हार,
देश माटी प्यारी, सुन तिरंगे की पुकार।
************

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*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
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 कोरोना की मार
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कोरोना की मार पड़ी है, बच्चे नहीं आजाद,
लुक्का छिपी करते हैं, आते खेल बड़े याद।
पत्थर रखकर गेंद खेलते,कभी करे फरियाद,
मां बाप समझा रहे है, खेलना कोरोना बाद।
अगर खेलना बंद कर दे, बालक,बंदर, मोर,
समझो वो बीमार पड़े हैं, करेंगे नहीं ये शोर।
फैल रहा अभी कोरोना, कैसे खेलेेंगे बालक,
अभी तो घर में रहना, हृदय धड़के धक धक।
पढ़ाई चौपट, खेल भी चौपट, बंद हुई है सैर,
न जाने कब कोरोना पकड़े, नहीं अब है खैर।।

*****************

*होशियार सिंह यादव






जरा सुनो
******

गरीब बेचारा,कोरोना का मारा, काम धंधा नहीं,नहीं पैसा। मिले दुख ही दुख, नहीं सुख,जीना है कैसा?
**
  होशियार सिंह यादव, कनीना।


बुरे हैं तुमने कैसे माना, सता रहा है यह जमाना।
बहुत दूर चले जाएंगे तो, रो रोकर दिन बिताना।।

*होशियार सिंह यादव



कोप
***

कोरोना फैला हुआ, शांत ना हो कोप।
सोच रहे जल्दी मिटे, रोग कोविड प्रकोप।।।
**




कोप
***
कोरोना फैला गया , बढ़ा हुआ जन कोप।
सोच रहे जल्दी मिटे, रोग कोविड प्रकोप।।
**



भाला
***

राणा का भाला उठे, दुश्मन हो भयभीत।
चेतक उतरे जंग में,  निश्चित होती जीत।।



Wednesday, May 20, 2020

कविता
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दुश्मन ने घेरा है
चलों वीर हमारे,
कुर्बानी राह तके
तेरा देश पुकारे।
  **
गोली खा सीने
आंखों के तारे,
खूब तू बहाना
तेरा देश पुकारे।
   **
कायरता है बुरी
लो सोच विचारे,
तिरंगे की खातिर
तेरा देश पुकारे।
      **
देशों में देश मेरा
देशभक्त हैं प्यारे,
नाम पूरे विश्व में
तेरा देश पुकारे।
   

********************
*होशियार सिंह यादव

मेहरबानी
 गीत लेखन
*******
 तू मेहरबान ह,ै तू मेहरबान ह
ै तेरी शक्ति हमारे प्राण है तू  मेहरबान......
बच्चे थे बड़े हुए हैं, तू ने दिया सहारा
तेरे ही दम पर हममे जान है, तू मेहरबान....
सदा झुके थे सदा झुकेंगे, तू कद्रदान है
नीचे तेरे कदमों में झुके रहेंगे, तू मेहरबान....
प्राण भी तू हैं, धड़कन भी तू, तू निगेहबान है
दे दो सहारा हमको प्रभु तू मेहरबान....
*************

*होशियार सिंह यादव









 नवल काव्य

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आग
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बरस रही
आग
आसमान है
लाल।
पंछी हुए
निराश
कठिन लेना
सांस।
कब आये
सावन
धरती होजा
पावन।
पानी की
कमी
झलक रही
प्यासे
जीव कहीं।
जिस दिन
ताड़ाग
भर जाये,
खुशी
जन जन पाये।
*************




जरा सुनो
*****

कमजोर, लोभी एवं रोगी की मन की स्थिति स्थिर नहीं होती। वे पल पल में बदलते रहते हैं।
***
होशियार सिंह यादव, कनीना

छल
******
छल की चादर ओढ़ के, मन में रखता पाप।
छलिया वो नर रूप में, उससे अच्छा सॉँप।।

*होशियार सिंह यादव
 


मुसीबत
*****
मुसीबतों से खेलता, मिलते कष्ट हजार।
दुख नाम से दूर हटे,वो जीवन बेकार।।
**
*होशियार सिंह यादव

छल
छल की चादर ओढ़ के, मन में रखता पाप।
छलिया वो नर रूप में, उससे अच्छा सॉँप।।

मुसीबत
मुसीबतों से खेलता, मिलती खुशी हजार।
वहीं जीवन होत सफल, करे दुखों से प्यार।।


मुझे बहकाना छोड़ दे,या दिल लगाना छोड़ दे।
प्यार करना सीख लिया है,तो शर्माना छोड़ दे।।

Tuesday, May 19, 2020


 हार कहां हमने मानी है
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हिम्मत कहां तुमने पहचानी है,
हार कहां हमने मानी है...........
लड़ती रहे मरते रहे, कोरोना को देंगे मात,
पीछे मत हटना तुम ,सभी देना हमारा साथ,
दाता भी कुछ दानी है,
हार कहां हमने मानी है....
चले गये वो दे गए दर्द बाकी हैं बस हमदर्र्द,
 बस चलना हमको है, हवाएं चले गर्म सर्द,
यह दुनिया हमने पहचानी है,
 हर कहां हमने मानी है........
हिम्मत मत हार जाना, मंजिल अभी बाकी है,
अभी खेल बहुत चलेगा, यह तो बस झांकी है,
कोरोना की यह मनमानी है,
हार कहां हमने मानी है...........
आएगा दिन सुनहरा, हट जाएगा जग से पहरा,
फिर आएंगे पुराने दिन, बंधेगा जीत का सेहरा,
लगता है दुश्मन जानी है,
हार कहा हमने मानी है.....
हौसले बुलंद हो ,जीत निश्चित होगी एक दिन,
भागेगा कोरोना अब, बाकी दिन ले अब गिन,
नई भोर हमने लानी है
हार कहां हमने मानी है..........

********************
*होशियार सिंह यादव

हाइकु
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     1.
देश पुकारे,
आओ युद्ध मैदान,
अभी ना हारे।

      2.
वीर हमारे,
चले रक्षा करने,
देश पुकारे।
        3.
चलके द्वारे,
तेरा देश पुकारे,
सैनिक प्यारे।। 
******

नमन साहित्यगंगा
शब्द-हरि
*******
हरि हरते संताप जन, जग में है विश्वास।
प्रेम भक्ति दिल में पले, कष्टों का हो नाश।।
****
   *होशियार सिंह यादव



संपदा
*******

शिक्षा है संपदा बड़ी, बाटों बढ़ता ज्ञान।
जग से खाली जाएगा,क्यों नर है अज्ञान।।
****
   *होशियार सिंह यादव





जरा सुनो
*******

मुंह मास्क, हाथ दस्ताने,
सोशल डिस्टेंस बनाएंगे,
कोरोना योद्धा बनकर के
लोगों की जान बचाएंगे।।
**
  -होशियार सिंह यादव,कनीना।
-प्रवासी
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गहरा दर्द छुपा रहे, बेचारे मजदूर।
कोरोना की मार से,प्रवासी नहीं दूर।।
***********
स्वरचित मौलिक रचना।
********************
*होशियार सिंह यादव


प्रवासी
*********

गहरा दर्द छुपा रहे, बेचारे मजदूर।
कोरोना की मार से,प्रवासी नहीं दूर।।
***********

*होशियार सिंह यादव





Monday, May 18, 2020


मुक्तक
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     1.
तेरा देश पुकार रहा,
छुप गये हो वीर कहां।
याद कर कुर्बानी को
प्रसन्न हो सारा जहां।।

      2.
दुश्मन ने धाना बोला,
देश ने मोर्चा खोला।
तेरा देश पुकार रहा
वीरों ने पहना चोला।
        3.
आगे बढ़ते जायेंगे
दुश्मन मार गिरायेंगे
तेरा देश पुकार रहा
कुर्बानी  दे जायेंगे।
************

*होशियार सिंह यादव

शृंगार
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रूप निखरता है औरत
तन का करती है शृंगार,
तभी तो मन प्रसन्न होये
प्रियतम का मिले प्यार।
शृंगार बगैर स्त्री अधूरी
करती वो सोलह शृंगार,
शृंगार के बल खुशियां
मिलती उसे कई हजार।
चांद जैसा यौवन खिले
चमक हो चांदनी जैसी,
शृंगारों से परिपूर्ण होयेे
स्त्री घर में सजती वैसी।
प्रकृति शृंगार करे  जब
बसंत बहार ले आती है,
शोभा निराली देख देख
मन को बड़ा लुभाती है।
************

*होशियार सिंह यादव

बचपन
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****************************

******************************
बचपन सुहाना याद आये
खेलते थे मिल गलियों में
कभी हंसते कूदते रहते थे
कभी नृत्य करे गलियों में।
     ***
चोरी-छिपे फल खाते थे 
लाते थे तोड़ तोड़ कर घर,
नहीं भूले हैं उन दिनों को
यादें रहे सदा सदा अमर।
    ***
स्कूल से जब घर आते थे
किसी बाग में घुस जाते थे,
पत्थर और डंडे  से तोड़के
मीठे मीठे फल यूं खाते थे।
         ****
मित्रगण कई साथ होते थे
वो भी करते थे सदा मदद,
नहीं भूले हैं उन दिनों को
याद करके हो जाते गदगद।
         ***
कभी शिक्षक की मार पड़े
कभी माता पिता सताते थे
फिर भी हम चोरी चुपके
इन बागों में छुप जाते थे।
         ***
लौट के आएंगे नहीं दिन
ले लो चाहे लाख बलाएं
बस भूली  यादों को अब
निज दिल पर खूब सजाये।
************

*होशियार सिंह यादव







 सुनो
*****

वक्त की नजरों से बचकर रहना चाहिए। न जाने यह कब राजा से रंक तो रंक से राजा बना दे।
***
होशियार सिंह यादव, कनीना



घास
*******

गर्मी खूब सता रही, लेना कठिन सांस।
पंछी जल ढूंढ रहे,   पशु ढूंढते घास।।
***
   *होशियार सिंह यादव


रास
*******

रोग की आंधी चली, नहीं मिले जन पास।
कैसे जन जीवन बढ़े,  नहीं आ रहा रास।।
   *होशियार सिंह यादव

Sunday, May 17, 2020


पाप और पुण्य
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धरती अंबर रो रहे
बढ़ गया धरा पाप,
जन को जन डसता
जैसे हो काला सांप।
माता-पिता को कूटे
उसका अपना  खून,
बूढ़ी ममता मांग रही
रो गलियारों में चुन।
नंगा नृत्य बच्चा करे
मात-पिता के समक्ष,
तालियां बजा रहे हैं
भाई बनकर अध्यक्ष।
पश्चिमीकरण में डूबा
आधुनिकता का दौर,
कैसे बच पाए पृथ्वी
जब पाप बढ़े हैं घोर।
पुण्य कमा रहे आज
परहित में कुछ लोग,
दुखियों को हंसा रहे 
यह कैसा है संजोग।
कुछ पुण्य बोलबाला
कर रहे धर्म के काम
जिनके बल पर धरा
कमा रही है ना नाम।
पाप और पुण्य बीच
मची हुई है एक दौड़,
पाप हारेगा जरूर ही
जल्द आएगा वो दौर।
*************

*होशियार सिंह यादव



गीत सृजन
प्रदत्त पंक्ति- आप भी चल दिए
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सोचा था, बैठ करेंगे बात,
बैठे  नहीं, भूले मुलाकात,
प्रकृति ने सुनहरे पल दिए,
और आप भी चल दिए।
बुलाया था दूर से तुमको
आप आये, मुस्कुरा दिये,
खफा हुई, जो चल दिये
प्रश्र भी नहीं हल किये,
और आप भी चल दिए।
फिर  बैठेंगे, फिर आना, 
यह घर है जाना पहचाना
सब कुछ  हाजिर किया
और आप भी चल दिए।
और आप भी चल दिए।

*होशियार सिंह यादव








चिकित्सकों/ पुलिस/ शिक्षकों के सम्मान में अभिव्यक्ति
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भगवान से भी बढ़कर हो
जगत में डॉक्टर कहलाते
मौत से मरीज को छीनके
पृथ्वी लोक पर ले आते।
अन्याय कभी होता है तो
पुलिस करती उनका न्याय,
उनको करते हैं नमन सभी
रोते हुए को पुलिस हंसाय।
अंधेरे से निकाल प्रकाश में
जो जन शिष्य को ले जाए ,
हर समस्या का समाधान है
वो शिक्षक जग में कहलाए।
डॉक्टर, पुलिस और शिक्षक
सदा जगत में नाम कमाते हैं,
जब दिल से ये सेवा करते हैं
जन नहीं देव रूप कहलाते हैं।
*************

*होशियार सिंह यादव



सुनो
*******
कोई रोते जाता है, कोई रोते आता है।
जीवन की नैया में, दर्द बहुत सताता है।।
*  होशियार सिंह यादव,कनीना।



विषय-विश्वास
**********

टिका हुआ विश्वास पर, धरा और आकाश।
यौवन पर जब पाप हो, होगा जग का नाश।।
***
    *****
विषय-शोषण
**********

शोषण पूरे चरम पर,भोग रहे हैं लोग।
दीमक भांति खा रहा, नहीं मिटेगा रोग।।

Saturday, May 16, 2020


 हरियाली हो खुशहाली हो
छंदमुक्त कविता
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प्रकृति मतवाली हो
रातें काली-काली हो,
जग का रक्षक माली हो
हरियाली हो खुशहाली हो।
       ***
घनघोर घटाएं छाई हो
बूंदे जल की लाई हो,
फूलों की सजी थाली हो
हरियाली हो खुशहाली हो।
       ***
हरियाली जब बढ़ती जाए
गीत मिलन के वो सुनाएं,
अंबर पर कोई लाली हो        
हरियाली हो खुशहाली।
            ***
रिमझिम वर्षा तुम्हें पुकारे
आओ चलकर पास हमारे
पवन चले मतवाली हो
हरियाली हो खुशहाली हो।
*************

*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01


कोशिश
विधा-कविता
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कोशिश की जगत में
कुर्बानी को रहे तैयार,
प्यार मिला जगत का
नहीं छू पाई उसे हार।
कोशिश की जगत में
देर सवेर मिली जीत,
जग से न मिटे कभी
दुनिया गाती है गीत।
तुलसी बैठ गंगा तीर
रच डाली राम कथा
राम ने भी दर्शन दिये
पल में मिटाई व्यथा।
भागीरथ  तप करके
गंगा को लाया उतार
पितरों का उद्धार कर
जगत का पाया प्यार।
कितने उदाहरण भरे
दे हिम्मत का पैगाम
मिटा सका नहीं उन्हें
उनका हुआ उद्धार ।
*************

*होशियार सिंह यादव









 आत्मनिर्भरता
विधा- पद्य
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***********************
नहीं रुका है नहीं रुकेगा
कोरोना के इन घावों से,
आत्मनिर्भर रहता मानव
हिम्मत के हथियारों से।
खेतों में सुबह और शाम
करता रहे किसान काम,
आत्मनिर्भर रहता है वो
पूरे जग में कमाए नाम।
दुकानदार हो या ठठेरा
शिक्षक है या है सपेरा,
आत्मनिर्भरता से रहता
नहीं करे तेरा और मेरा।
हिम्मत करके कमाते हैं
दो जून की सूखी रोटी,
हाथ कभी नहीं पसारते
बेशक कटे तन से बोटी।
देश आत्मनिर्भर हुआ है
नहीं किसी पर वो निर्भर,
अमीर,गरीब,मध्यम वर्ग
निर्भर करे इन हाथों पर।
बच्चा बूढ़ा  और जवान
लेते जब उठकर अंगड़ाई,
हिम्मत उनकी देख देखके
सरा जगत ही करे बड़ाई।
देश का बच्चा-बच्चा ही
हिम्मत से लेता रहा काम,
सुबह उठकर काम में लगे
करता काम जब हो शाम।
मोची, सुनार और  सपेरा
हिम्मत करके कमाते रोटी
निज बच्चों का पेट पालते
चाहे किस्मत रह जा खोटी।
आत्मनिर्भरता अपनाने  से
चेहरों पर आई है मुस्कान,
सिलाई, कढ़ाई और गृहणी
भारत की कहलाती हैं शान।
*************

*होशियार सिंह यादव

कुंडलियां (स्वतंत्र)
************************************

********************************
कोरोना ने दी मार, हो गए जन बेचैन,
अपनों को तलाश रहे, कुछ बूढे से नैन।
कुछ बूढे से नैन, अब नहीं होते दर्शन,
दिल का टुकड़ा नहीं, होंगे कैसे प्रसन्न।
कहे सिंह कविराय, पूरी उम्र का रोना,
बुरी दे गया मार, जगत छाया कारोना।।
**
    *होशियार सिंह यादव


-बुनियाद
****************************

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धर्म-कर्म करते रहो, जग की हैं बुनियाद।
जग को जाये छोड़के, रहे सदा ही याद।।
***
    *होशियार सिंह यादव


-बुनियाद
****************************

***************************
धर्म-कर्म करते रहो, जग की हैं बुनियाद।
जग से जाये छोड़ के, रहे सदा ही याद।।

Friday, May 15, 2020

मुक्तक
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***********************
*************************
     एक
वक्त पर साथ दे वो यारी
यारी सब को लगती प्यारी
घर पर दोस्ती निभाती जो
वो कहलाती सुंदर नारी।
     दो
दोस्ती वो जो दुनिया जाने
दोस्ती अपनों को पहचाने
वो मौकापरस्ती कहलाता
जो दोस्ती पर देता ताने।
     तीन
यारी दोस्ती एक हो बंधन
यारी दोस्ती होती चंदन
जब सच्ची यारी टूटती है
दोनों तरफ होती है क्रंदन।

*************

*होशियार सिंह यादव







 मुक्तक 

*****************
कितने ख्वाब सजाकर आयी, बैठी राह निहारे पिय की।

हर आहट पर धक धक करती,धड़कन बेकाबू है हिय की।

प्रणय मिलन का प्रथम सुअवसर जाने क्या होगा रब आगे,
बहुत तड़प रहे हैं मिलन को, कोई तो आकर सुने जिय की।
 


परिवार दिवस
कविता

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*********************
*****
मिलजुल कर बने
घर में परिवार
कभी खुशी,कभी गम
चलते हैं लगातार।
एक अकेले जन से
नहीं बनेगा परिवार
हम - तुम मिलते हैं
बढ़ जाता यह संसार।
छोटा है या बड़ा है
सभी होते परिवार
बड़े दिलवाला होता
करे जगत से प्यार।
टुकड़ों में बट गए
आज के परिवार
नहीं कोई सफलता
मिलती बस हार।
परिवार से बढ़कर
जग में नहीं नाता
परिवार में मां बाप
बहन और भ्राता।
एकल परिवार होते
अब हैं विघटित
आगे क्या होगा अब
वो जाने बस रब।
*************












 सुनो
*****

जगत में रोना सरल है किंतु हंसना बहुत कठिन है। यही कारण है कि लोग हंसते कम हैं और बात बात पर रोकर दिखाते हैं।
**
  होशियार सिंह यादव, कनीना, हरियाणा





*****
विषय-तीर
****

दशरथ की चिंता बढ़ी, श्रवण उर लगो तीर।
प्राण तजे सुन मॉं बाप, छोड़ दियो सब नीर।।
***
  









विषय-तीर
****

दशरथ की चिंता बढ़ी, श्रवण उर लगो तीर।
प्राण तजे झट मॉं बाप, छोड़ दियो सब नीर।।
***
    *होशियार सिंह यादव

विषय-तीर
****

दशरथ मन उदास खड़े, श्रवण उर लगो तीर।
मॉं बाप झट प्राण तजे, छोड़ दिया सब नीर।।
***
    विषय-भीड़
****

कोरोना को देखकर, छटती जाये भीड़।
जान बचे लाखों मिले, छूटे बेशक नीड़।।
***
   


*****
तीर

****
दशरथ मन उदास खड़े, श्रवण उर लगो तीर।
मॉं बाप झट प्राण तजे, छोड़ दिया सब नीर।।
***
    *

Thursday, May 14, 2020


मां, बेटी, नारी

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*************************
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विधा-पद्य(कविता)
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घर में होती एक बेटी
कहाती है राजदुलारी,
जब बड़ी हो जाती है
बन जाती है एक नारी।
नारी जब फल जाती
वो बन जाती एक मां,
निज वर्चस्व लुटाती है
ममता पास बुलाती है।
बेटी से नारी बनती है
 नारी से बनती वो मां,
ममता की मूरत  होती
उसका हो अपना जहां।

*होशियार सिंह यादव


    व्यथा

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******************************
****************************
कौन उठाएगा मुझको
कौन देगा अब सहारा,
किसके सहारे जीऊंगा
बतलाओ मुझे हे देवा।
बूढा अकेला रहता हूं
जग के कष्ट सहता हूं,
कौन कष्टों से जाएगा
नौका किनारे लाएगा।
एक दिन ऐसा आएगा
मैं जग से उठ जाऊंगा,
कोई सहारा नहीं मिले 
मैं जीते जी मर जाऊंगा।
उसके आंसू टपक टपक
धरती भी हो गई थी नम,
बुजुर्ग के आंसू नहीं मिटे
गम नहीं हो पाया कम।
***
*होशियार सिंह यादव



पद्य- क्षणिकाएं
***********
एकता में एक बल है,
समस्याओं का हल है।
सारा जहां एक होगा,
नजदीक ऐसा पल है।
           दो
एक से एक हाथ मिलते,
खुशियों के चेहरे खिलते।
एकता में वह ताकत होती
जिसे देख दुश्मन जलते।
        तीन
हाथ से हाथ मिलाओ,
कदम से कदम बढ़ाओ।
गरीबों पर तरस खाकर,
गिरते जन को उठाओ।
***
*होशियार सिंह यादव
कविता(क्षणिकाएं)
*******************


*********************
    एक
हम में होता है दम,
नहीं किसी से कम।
एक साथ युद्ध करे,
बन सकते हैं बम।।
    दो
हम से बने संसार,
बढ़े दिलों में प्यार।
मिलते जब कई तो
बातें होती हैं हजार।।
      तीन
हम हो शब्द बड़ा,
मिलकर देश खड़ा।
बापू गांधी के समय
अहिंसा से ही लड़ा।




जरा सुनो
******
जग में जो आता है
वो एक दिन जाता है,
अपने धन दौलत का
क्यों घमंड दिखाता है?
***
**होशियार सिंह यादव,कनीना


-भाग्य
****
गलती नर खुद ही करे,रहा भाग्य को कोस।
अपनी गलती दूर कर, नहीं किसी का दोष।।
***
    *होशियार सिंह यादव

-भाग्य
****
गलती पर गलती करे, भाग्य को रहा कोस।
अपनी गलती दूर कर, भाग्य का नहीं दोष।।
***
    *होशियार सिंह यादव







विषय-भाग्य
****
भाग्य मानव से कहे,कर ले सुंदर काम।
बुरे कर्र्म दिल में बसे, होता मैं बदनाम।
***
    *होशियार सिंह यादव

विषय-रुष्ट
****
मधुर वाणी बोल सदा, जन होते संतुष्ट।
कड़वे बोल विष समान, कर देते हैं रुष्ट।।
***
    *होशियार सिंह यादव







विषय-भाग्य
****
देता भाग्य साथ जब, गरीब के हो ठाठ। 
जब भाग्य मुॅँह फेर ले, बच्चा बने अनाथ।।
***

हिंदी लेखक परिवार
14 मई 2020
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खुश कर देते हैं चंदा- तारे,
अनोखे हैं कुदरत के नजारे।
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**होशियार सिंह यादव, कनीना, हरियाणा**

Wednesday, May 13, 2020


बादल
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झूम रहा सावन माह,बारिश करे विभोर।
बादल गरजे गगन में, वन में नाचे मोर।।
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    *होशियार सिंह यादव

सुनो

झूठ के सहारे बेड़ा पार नहीं होता
झूठ का सहारा अपनों से खो देता।
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-होशियार सिंह यादव, लेखक,कनीना,हरियाणा





विषय-बादल
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सावन माह जब आये, बारिश करे विभोर।
बिजली चमके गगन में, वन में नाचे मोर।।
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    *होशियार सिंह यादव
आहत
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चाहत जब कभी उभरे, मिले नहीं आराम।
आहत दिल को दर्द दे, लगे नहीं मन काम।।
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    क्षणिकाएं
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   एक
कोरोना की पड़ी मार
बंद हो गए द्वार,
बीमारी की मार झेल कर
खूब हुए बीमार।
          दो
भाई, कोरोना का डर
अच्छा हो रहो घर
रास्ता बंद हो चुका है
कठिन है अब डगर।

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*होशियार सिंह यादव



अभिलाषा
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हर इंसान की होती है
एक नई अभिलाषा
इसी सहारे चले जिंदगी
कहलाती है आशा।
अभिलाषा जब पूरी हो
मन होता प्रसन्न
जब अभिलाष अधूरी
दुखी हो तन मन।
हर इंसान की इच्छा होती
सारे बन जाए काम
जहां भी जाऊं दिल प्रसन्न 
जग में हो जा नाम।
जीते जी पूरी हो जाती
कुछ रहे अधूरी
अभिलाषाएं कुछ ऐसी हो
सपने हो ज्यों नूरी।

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*होशियार सिंह यादव
नवल काव्य
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मैंने पूछा
चांद तुम गोल हो
वर्षों से देख रहे
तुम अनमोल हो।
तेरी शीतलता
और सुंदरता
मन को लुभाती
धड़कन बढ़ाती।
एक दिन
तुम तक आऊंगा
तेरे कंधों पर बैठ
गीत गाऊंगा।
लगता है
एक दिन बोलेगा
सारे सुराग खोलेगा।
तेरे पर
बनाके बस्तियां
दुनिया रहेगी
सुंदर है यह कहेगी।
13 मई 2020



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विषय-स्वतंत्र 
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जीवन सफल मानव का, जग में आये काम ।
लख बुराई सिर लेता, होगी एक दिन शाम।।
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कोरोना के युद्ध में, भारत की है जीत।
फर्ज और ईमान ही,बनते इसके मीत।।

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