Thursday, April 30, 2020



लालटेन
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तिमिर को मिटा देती
दिखलाती जन रास्ता
अंधेरे में चलना पड़े
पथिक का है वास्ता,
पुराने वक्त से चलती
चाहिए तेल व बाती
मित्र है एक दूजे के
गहरे हैं संगी-साथी,
इंसान की ये जिंदगी
लालटेन सी खिलती
तेल खत्म बाती बूझे
हस्थी माटी में मिलती,
रात अंधेरा दूर करती
लालटेन रखना साथ
रास्ता दिखला देती है
लालटेन की क्या बात।
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स्वरचित मौलिक रचना।
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*होशियार सिंह यादव

देश/ तिरंगा
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सब देशों में है न्यारा
लहराता तिरंगा प्यारा
इसलिए कहाए महान
जन-जन इसकी शान,
शहीदों का भारत देश
नहीं बचेगा गद्दार शेष
हर बच्चे  की कुर्बानी
याद रहे उनकी जवानी,
देश मेरे की यह कहानी
भारतवासी की  जुबानी
शहीदों ने खून से सींची
याद दिलाती है कुर्बानी,
अंग्रेजों से लड़ते लड़ते
कितनी फांसी खाई थी
दे देकर कुर्बानी अपनी
तब ये आजादी पाई थी,
आजादी है बहुत पुरानी
कहती है ये देश कहानी
आजादी खातिर वीरों ने 
कुर्बान की निज जवानी,
दुश्मन थर-थर कांपते हैं 
सामने जब वो आ जाते
उनकी रूह कांप उठती है
छाती पर तिरंगा फहराते,
भारत के तिरंगे को नमन
सब देशों में भारत महान
तन मन को अर्पित कर दे
भारत विश्व की एक शान।
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पनघट,घड़ा
विधा- छंदमुक्त
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कुंभकार
निज हाथों से
मुश्किल से इसे
बनाता
गाड़ी में रख कर
गांव गांव बेचने
 जाता,
दिन भर
मिट्टी लाकर
काट पीट घड़ा
बनाता
आवे में गर्म कर
खूब पका उससे
धन पाता,
मेहनत के
बेचकर घड़ा
100 रुपए पाता
इस राशि से
निज बच्चों के लिए
वह खाना लाता,
शिक्षक भी
ठोक पीठकर
विद्यार्थी जीवन
बनाता
पढ़ लिखकर विद्यार्थी
जीवन में सफल हो
जाता,
इंसान की
जिंदगी भी ऐसी
मिट्टी से आती मिट्टी में
 जाती,
हाय मिट्टी
जन-जन की
ऐसी एक यह कथा
सुनाती।

आओ थोड़ा जी लेते हैं
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कष्ट भरा होता है बचपन
घर से स्कूल जाना आना
टंकी का पानी पी लेते हैं
आओ थोड़ा जी लेते हैं....
धूप छांव पड़ती है सहनी
ओढ़कर कभी वृक्ष टहनी
कष्ट होता मुंह सी लेते हैं
आओ थोड़ा जी लेते हैं......
ठंड में कांपते हाथ व पैर
जाना पड़ता स्कूल-शहर
सर्दी पड़ती वो पी लेते है
आओ थोड़ा जी लेते हैं......
कभी बसंत बहार मिलती
घर आंगन कली खिलती
भंवरे कली रस पी लेते हैं
आओ थोड़ा जी लेते हैं.....
भाग दौड़ कर नहाते धोते
पढ़कर देर रात तक सोते
दूध और छाछ पी लेते हैं
आओ थोड़ा जी लेते हैं....
जीवन के होते लंबे रास्ते
काटने पड़ते हैं हंसते गाते
जहर गमों का पी लेते हैं
आओ थोड़ा जी लेते हैं......
तराने जीवन में याद रहेंगे
अपनी कहानी खुद कहेंगे
खुशी,गम, दर्द भी लेते हैं
आओ थोड़ा जी लेते हैं....
आओ थोड़ा जी लेते हैं।।
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पानी बचाओ
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ताई बोली ताऊ से.......
यूं बर्बादी जल की हुई
तो जल एक दिन खत्म
तो जन कैसे बच पाएगा
सूखा और अकाल  पड़े
जन मृत्युलोक में जाएगा,
लाख बताओगे बुरा लगे
नहीं समझ रहा यह जन
पाताल में जा चुका जल
दिनरात जल बर्बाद करो
फिर नहीं इसका है हल।
ताऊ बोला ताई से........
कहने को है 71 फीसदी
पीने योग्य नहीं यह सारा
वर्षा दिनोंदिन घटती जाए
काट डाले पेड़ पौधे फल
यही दुर्भाग्य होगा हमारा,
आएगा वो दिन जल्द ही
पानी खातिर हो फिर युद्ध
राशन दुकान  पर मिलेगा
नहाना, धोना भूल  जाएंगे
गलती का एहसास पलेगा,
देश जल का आयात होगा
पेट्रोल की भांति डलवाएंगे
सोच सोचकर करेंगे प्रयोग
घर में मेहमान लाया करेंंगे
प्यासे जन में होंगे कई रोग।
ताई बोली फिर ताऊ से.....
छीना झपटी होगी पानी की
हत्या करेंगे जल छीनने को
रात को घरों से  होगा चोरी
जल वाले जन धनवान होंगे
पर गंदे जल की न हो मोरी,
घोर कलियुग  आएगा फिर
विवाह शादी में दहेज पानी
जल खातिर मचे त्राहि त्राहि
जान के लाले पड़े हर कदम
जल खातिर लड़ेंगे भाई भाई।
ताऊ ने दिया अंतिम जवाब.....
जान बचाते फिरेंगे जन जन
सूखकर कांटा बनेगा बदन
भूख प्यास बनेगी महामारी
सृष्टि का लोप निश्चित होगा
पाषाण युग की होगी तैयारी,
वक्त अभी बचालो जल को
वरना भूल जाओगे कल को
जल दे जीवन जल ही रोटी
जल है तो  जन की कल्पना
जल अमृत, यही हीरा मोती।

जन्म दिन मुबारक
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विपत्तियां आए हजार
जीना हो जाए दुश्वार
मिले नहीं जगत प्यार
दोस्त हो जाए दो चार,
17 वर्ष पूरे  कर लिए
खुशी खुशी बिताना है
कांटों भरे रास्ते मिलेंगे
उन कांटों को हटाना है,
गम और खुशी आएंगी
जीवन में लख नजारे हैं
जीवन हमारा चार दिन
आप चमकते सितारे हैं,
आएंगे गर्मी के दिन भी
बीत जाएंगी यूं सर्द रात
बेशक जहां में हम न हो
आशीर्वाद रहे तेरे साथ।।








जरा सुनो

ज्ञान उस आभूषण के समान होता है जो सोने सी चमक भी रखता है, लोगों को आकर्षित भी करता है और धारण करने वाले जन को लाभ प्रदान करता है।



ध्यान
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ध्यान ज्ञान का सार है, ज्ञान गंगा की धार।
पढ़े ध्यान से मन लगा, कभी नहीं हो हार।।

नीर
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नीर नहीं जिन आंखों में, वो आंखें बेकार।
बसता आंखों में सदा, देश जहां का प्यार।।



 




Wednesday, April 29, 2020

कविता
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कोरोना का भय लगे
बोलती नारी हर-हर
पशु को खाना देना है
चारा काटके लाए घर,
निज पेट भर लिया है
पशुओं से दूध लेना है
भूखे पशु दूध नहीं देंगे
उन्हें हरा चारा देना है,
हरियाली दे खुशहाली
देश को उन्नत बनाना है
गोपाल देश बनाकर के
श्रीकृष्ण नाम कमाना है,
चारा गाय को है प्यारा
चारे का मान बढ़ाना है
गाय हमारी मां कहाती
गाय को गले लगाना है।
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*होशियार सिंह यादव




।। हम /तुम ।।
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दो दिलों की यह कहानी
कहलाते है हम और तुम
एक गर नहीं  मिलता तो
झटपट होए मुस्कान गुम,
गाड़ी के मिलते दो पहिये
दोनों का हो काम समान
एक अगर टूट जाएगा तो
निश्चित होगा काम तमाम,
दो फूलों की होती बगिया
दोनों महकते चहकते रहे
एक अगर मुरझा जाए तो
माली इसे बाग नहीं कहे,
सदा सदा मुस्कराते रहिये
यह जीवन की निशानी है
न जाने कब वक्त बदलता
बुलबुले सम जिंदगानी है।
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स्वरचित मौलिक रचना।
*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01


रंगीला बचपन
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चेहरे पर मुस्कान हो
दिल में भरा हो जोश
खेलते निज इच्छा से
चाहे बताए इसे दोष,
सावन सी ले अंगड़ाई
मुख से करे फिर शोर
घूमा करते गलियों में
जैसे नाच रहा हो मोर,
उन्मुक्त गगन नीचे रह
दिखलाते कई करतब
दिनभर नहीं थकते हैं
शाम हो घर आए तब,
कभी हंसते कभी रोते
आनंद आता छेड़छाड़
कभी पड़ोसी तंग करे
कभी बापू देता लताड़,
खेलकूद में हो चोटिल
फिर भी हंसते रहते हैं
अपने पराये में ना भेद
जन हमें बच्चे कहते हैं,
जीवनभर रहे यह याद
कोई नहीं हो फरियाद
पढऩे में जी नहीं करता
नहीं करते कोई इमदाद,
रंगीला बचपन' होता है
यौवन  मस्ताना होता है
वानप्रस्थ में ईश्वर भजन
बुढ़ापा देख जन रोता है।
*होशियार सिंह यादव



रंगीला बचपन
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चेहरे पर मुस्कान हो
दिल में भरा हो जोश
खेलते निज इच्छा से
चाहे बताए इसे दोष,
सावन सी ले अंगड़ाई
मुख से करे फिर शोर
घूमा करते गलियों में
जैसे नाच रहा हो मोर,
उन्मुक्त गगन नीचे रह
दिखलाते कई करतब
दिनभर नहीं थकते हैं
शाम हो घर आए तब,
कभी हंसते कभी रोते
आनंद आता छेड़छाड़
कभी पड़ोसी तंग करे
कभी बापू देता लताड़,
खेलकूद में हो चोटिल
फिर भी हंसते रहते हैं
अपने पराये में ना भेद
जन हमें बच्चे कहते हैं,
जीवनभर रहे यह याद
कोई नहीं हो फरियाद
पढऩे में जी नहीं करता
नहीं करते कोई इमदाद,
बचपन सुहाना होता है
यौवन  मस्ताना होता है
वानप्रस्थ में ईश्वर भजन
बुढ़ापा देख जन रोता है।



Tuesday, April 28, 2020

 वीरभूमि 
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संस्कृति का द्योतक देश
कोरोना बीमारी आई है
लड़ लड़के मर गए कई
कितनों ने जान बचाई है,
हाथ जोड़  प्रणाम करते
हाथ मिलाना बुरा मानते
हाथ मिलाकर बातें करे
रोग यूं फैलते  जानते हैं,
ऋषि मुनियों की धरा है
शांत रहकर करते है तप
रोगों को दूर भगा देता है
भारतीयों का तप व जप,
खाना खाते हाथ धोते है
पुरानी संस्कृति कहलाती
साबुन से हाथ धोते रहो
तो कोई बीमारी न आती,
शिक्षा क्षेत्र में प्रसिद्ध देश
शिक्षाविदों की है ये खान
शिक्षा का प्रचार करते हैं
मेरे देश की बढ़ती शान।
**होशियार सिंह, कनीना,हरियाणा**




 लघु कथा   मास्क

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  राजू ने जमकर प्रचार किया कि वो 500 मास्क बांटेगा ताकि लोग रोग से बच सके। उन्होंने अधिकारियों को भी बुलावा भेजा। निर्धारित स्थान पर भारी भीड़ हो गई। भारी संख्या में लोग आकर इकट्ठे हो गए। अधिकारियों के सामने हल्के दर्जे के मास्क लेकर राजू सहित करीब दस व्यक्ति पहुंचे। अधिकारियों के हाथों मास्क बांटने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों को एक एक मास्क दिया गया और फिर आया आम जन को मास्क देने का मौका।
  राजू ने अपने नजदीकी को दो मास्क दिए ही थे कि राजू के दोस्त चिल्लाए-एक एक व्यक्ति को दो दो मास्क कैसे दे रहे हो? इससे छीनो एक मास्क।
दो मास्क लेने वाले व्यक्ति ने स्वयं ही एक मास्क वापस कर दिया किंतु तभी उसके दिमाग में आया कि जब ये लोग बांटने वाली चीज को भी वापस ले रहे हैं मास्क बांटने का दिखावा कर रहे हैं। व्यक्ति ने दुखी मन से लिया हुआ शेष एक मास्क भी वापस करते हुए कहा-लो, अपना यह मास्क भी ले लो। मुझे जरूरत नहीं। मैं तो मुंह पर साफ कपड़ा ही ढक लूंगा। इसकी जरूरत जिसे हो दे दो।
मास्क बांटने वालों ने लपककर मास्क व्यक्ति से लिया और बुड़बुड़ाए कि यह मास्क किसी ओर को देंगे। खड़ी भीड़ तमाशा देख रही थी कि जिस व्यक्ति से दो मास्क देकर दोनों छीन लिए उससे रहा न गया और कहा-भाइयों, तुम तो महज मास्क बांटने का दिखावा कर रहे हो ताकि तुम्हारा समाचार छप जाए और तुम प्रसिद्धि पा सको। अच्छा हो एक ही मास्क ले आते और सभी को एक बार देकर वापस ले लेते। तुम्हारा नाम भी होता और लोग मास्क को देखकर मन भर लेते। इतना सुनकर मास्क बाटने वालों की आंखें खुुल गई। उन्होंने मास्क वापस व्यक्ति को देना चाहा किंतु वो अति जिद्दी था। उसने कहा-हर किसी का स्वाभिमान होता है। स्वाभिमान पर ठेस करना उचित नहीं है। तुम तो दिखावा करने वाले लगते हो। इतना कहकर व्यक्ति आगे बढ़ गया। भीड़ उस व्यक्ति को एकटक देखती रही।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

 जन्म

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नौ माह गर्भ में पड़ा रहा
सहने पड़े थे कितने कष्ट
इंतजार रहा जग देख लूं
इच्छा से हुए थे दर्द नष्ट,
मां को पेट में मारी लात
प्रसन्न हो मां दे रही साथ
मां की ममता होती अमर
मां -ममता की क्या बात,
कभी ना वो खाया मां ने
जिसका हो मुझे नुकसान


मां की वेदना मां ही जाने
यूं है मां की निराली शान,
आखिरकार जन्म पाया मैं
आया इस स्वार्थभरे संसार
मां की ममता कम ना हुई
मिलता रहा स्वर्ग सा प्यार,
जन्म देकर मां धन्य हुई है
अब मैं मां का हूं आभारी
ऋण कभी नहीं चुका पाऊं
ये ऋण सदा रहेगा उधारी।
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घुड़मचगाड़ी
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ग्राम्य जीवन सुंदर था
चला करती बैलगाड़ी
बैलों से हल चलते थे
सवारी में घुड़मचगाड़ी,
जनहितैषी प्यारी भाषा
सहयोग पूर्ण रवैया था
टीवी,फोन नहीं होते थे
गांव-गांव में गवैया था,
हट्टे कट्टे गबरू होते
घी,दूध, दही का खाना
रोटी सिर रख ले जाती
शाम ढले लौटके आना,
घी,शक्कर हाली खाते थे
मेहनत करते थे दिनरात
पूरा परिवार करे लावणी
बटाते एक दूजे का हाथ,
लुप्तप्राय हुई है बैलगाड़ी
निभाती थी किसान साथ
लौटकर आएगा फिर युग
यादव कहता सुन लो बात।
**होशियार सिंह,कनीना,हरियाणा**

Monday, April 27, 2020

योद्धा
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कोरोना से लड़े लड़ाई
जान को लगाते बाजी
पूरा सम्मान मिल रहा
राज जनता खूब राजी,
एक वक्त आएगा जब
इनके गुण लोग गाएंगे
ऊंचा  सम्मान मिलेगा
सारे योद्धा ढूंढे जाएंगे,
सीमा पर पहरा दे रहे
उनकी भांति ये योद्धा
चप्पे चप्पे सेवा करते
कहलाते धरती पुरोधा,
नाम कमाना  है अगर
कर लो  देश की सेवा
नाम अमर  हो जाएगा
मिलेगी एक दिन मेवा,
हर वीर सीमा पर हो
गांवों में कोरोना योद्धा
देश के काम ना आए
वो धरती पर है बोझा।

भगवान/ईश्वर
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दुख भंजन नाम तुम्हारा
सुना ले एक अर्ज हमारी
दिल में हमारे बस जाना
लगे तुम्हारी सूरत प्यारी,
जंगल, वन, पहाड़ में तू
तुमसा न कोई बलशाली
हर दुख और सुख में तू
करता जग की रखवाली,
कभी कभी तो लगे ऐसा
आस पास कहीं रहते हो
कभी सुख के आंसू बनते
कभी तन पे दर्द सहते हो,
आना कभी मन मंदिर में
बस ये अरदास हमारी है
कभी तो दर्शन दे दो ईश्वर
ये दर्शन प्यास तुम्हारी है।

जय जवान-जय किसान
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बार-बार नभ को तकता
घनघोर घटा कब आएगी
रिमझिम रिमझिम बारिश
कब आकर मन हर्षाएगी,
दो बैलों की जोड़़ी पाकर
सुबह हल चलाने आऊं
रूखी सूखी बासी भोजन
खाकर निज प्राण बचाऊं,
जब खेती अच्छी होती है
कर्जा साहूकार उतर जाए
मौसम की अगर मार पड़े
दिन डूबे, कर्जा बढ़ जाए,
टूटी चप्पल फटेहाल तन
भूख में परिवार अकुलाए,ु
इतने बुरे दिन देकर दाता
तेरा कलेजा ना फट जाए,
सौ गज जमीन का टूकड़ा
उबड़ खाबड़ कहलाती है
दिनभर खेत में काम करूं
वो तन पे पसीना लाती है,
हर वर्ष अनाज खत्म होए
झोली फैलाता अनाज की
बस दो जून की रोटी मिले
नहीं इच्छा तख्त ताज की,
प्रभु मेरी ये लाज बचाओ
अच्छी सी पैदावार दे देना
पांच रुपये का प्रसाद बांटू
छोटी एक  अर्ज सुन लेना,
सबसे बुरे दिन बीते कृषक
धरती पुत्र जगत में कहाए
कितना दुष्कर जीवन होता
कोई सुनने सामने ना आए।
*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01


गंगा/प्रवाह/नदियां
विधा-कविता

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सलिल पावनी गंगा जी
धरती पर जब से आई
कितने पापी उतार दिए
लाखों जन महिमा गाई,
नदियों में सबसे पवित्र
भागीरथ इसे लाया था
सगर के पुत्र पौत्रों को
भव से पार लगाया था,
प्रवाह तेज पाताल धंसे
समस्या बनी विकराल
शिवभोले ने वेग रोका
उलझाया  अपने बाल,
जाहनम ऋषि ने पीकर
धरा पर इसे उतारा था
असुरों का उद्धार किया
देवों का बस सहारा था,
मां का दर्जा दिया हुआ
देती है धन, अन्न, जल
सदियों से बहता आया
जल करता है कलकल।
 *होशियार सिंह यादव

Sunday, April 26, 2020

वीरभूमि 
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देश हमारा वीरों की भूमि
यहां वीर गजब निराले हैं
जान की बाजी लगा देते हैं
कहलाते जगत रखवाले हैं,
नहीं मांगते मोल जीवन का
दुश्मन छाती पर करते वार
झटपट प्राण आहुति दे देेंगे
नहीं रखते कोई चीज उधार,
नेताजी,भगत, गुरु ,सुखदेव
दुश्मन समक्ष ललकारते थे
सीने में घोंपकर एक खंजर
भारत माता को निहारते थे,
स्वतंत्रता सेनानी जब चलते
दुश्मन दुम छुपाकर दौड़ते थे
मांद में उन्हें गीदड़ से पकड़
एक झटके से गर्दन तोड़ते थे,
वीरों की भूमि  देश है भारत
नमन वीरों को अब शत बार
जब-जब उनको  याद करेंगे
देशवासी के दिल उमड़े प्यार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**  रखे

स्वतंत्रता
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तोता तोती उड़ चले
हुए आज स्वतंत्र
पिंजरे में वो कैद थे
कहाते थे परतंत्र,
**
पिंजरबंद व्यथा थी
हो देश पराधीन
खुली हवा में सांस
जैसे देश स्वाधीन,
***
आजाद हुए अब तो
खुशी मिली आज
भारत भी पराधीन था
दिन अब भी याद,
**
अत्याचारी पिंजरे वाले
जो रखते हमें बंद
मूक कहलाते हम तुम
आवाज न हो बुलंद,
**
आजादी का सुख होता
कराए स्वर्ग आभास
स्वतंत्र रहना सीख लो
तन में जब हो सांस।

***
 जागा इंसान 

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जाग गया इंसान अब
बीमारी नहीं सताएगी
मुंह पर मास्क लगाना
रोगों से यह बचाएगी,
हाथों पर  रोगाणु बैठे
साबुन से धोना सीख
अगर कोरोना हो गया
जीवन की मांगे भीख,
दूर दूर से बात करना
हाथ नहीं  मिलाना है
मुंह पर कपड़ा ढ़कके
रोगों से बच  जाना है,
घर में बैठ बातेें करना
जीवन सफल हो जाए
एक पंथ दो काज बने
रोगों से फिर बच जाए।
 *होशियार सिंह यादव


वो जीवन डोर को खिंचता, हो खुश दिनरात,
साथी भाई और भार्या, कभी रहे न साथ।
मोह माया का खेल बुरा, सदा देते कष्ट,
ईश्वर को अगर पाना है, इनको करो नष्ट।
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**होशियार सिंह, कनीना,हरियाणा 0916348400



लगा ले मास्क आजा, कोरोना का शोर
रोग अगर लग गया तो,डगमग जीवन डोर।

राजा बड़ा दयाल हो, प्रजा करे विश्वास
अहित करे राजा अगर,नरक में होत वास।

Saturday, April 25, 2020

  कोरोना बीमारी
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हिम्मत से काम लेना
देख रही दुनिया सारी
एक ना एक दिन यह
भागेगी जरूर बीमारी,
सारा जगत  देख रहा
किसकी है जिम्मेदारी
किसने वायरस बनाया
पता लगाने की तैयारी,
कितना आर्थिक लोस
बहुतों की गईजनजान
ना जाने कौन दुष्ट इसे
समझ रहा  निज शान,
भारत की शान निराली
जगमगाती इसकी शान
सारे जग में शान इसकी
देशों में देश यह महान।
**होशियार सिंह, कनीना, हरि 09416348400





 खिलौना
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रानी चिल्लाई-पिता जी, मेरा जन्म दिन है और आप यह कैसी गुडिय़ा लेकर आए हो। यह तो हवा भी नहीं उड़ रही है। इसके पंख सही नहीं है। उड़ती है तो पंख आपस में छू जाते हैं और यह गिर जाती है। मेरे दोस्तों को मैं क्या मुंह दिखाऊंगी। पाप इसको जल्दी ठीक करो वरना मैं नाराज हो जाऊंगी। इतना सुनकर सन्नाटा छा गया।
उनके पिता रमलू जल्दी से एक कैंची उठाकर लाया और कहा-रानी एक मिनट ठहरों नाराज मत ना होना। अभी मैं इसके पंख ठीक कर देता हूं।  सभी बच्चे एकटक गुडिय़ा को देख रहे थे कि रमलू ने उसके पंख काटे और गुडिय़ा लुढ़क गई। अब तो रानी रोने लगी। सन्नाटा बढ़ता ही चला गया। तभी रमलू ने  कहा देखो रानी एक ओर प्रयास करता हूं और उन्होंने गुडिय़ा के पंख कैंची से ठीक से काटे और जोर से एक आवाज आई और गुडिय़ा कमरे में उडऩे लगी। उदास चेहरों पर मानों मुस्कान छा गई। रानी जोर से हंसी और सारा कमरा तालियों की गडग़ड़ाहट के संग 'हैप्पी बर्थ डे टू यू रानी' कहने लगा।


*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

साथी/हमसफर
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दूर बहुत बैठे हुए
मेरा हमदर्द साथी
मन में खुश बहुत
लिखती एक पाती,
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जब पाती को पढ़े
होगा बहुत प्रसन्न
तन-मन पुल्लकित
यही है सच्चा धन,
***
बहुत दिन बीते है
आया नहीं संदेश
किसे पता जिंदगी
कितने बदले वेष,
***
एक बार आ जाए
मन में भरके उमंग
बातें कई हजार हो
हरदम करूं मैं तंग।
*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा


दोहा कुडलियां
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भूख लगी जोर की, शेल्टर होम जान
खाना मिलेगा मुफ्त में, रोज सुबह शाम
रोज मिले सुबह शाम, लगती है लाइन
खड़े सभी लाइन में, बरतते है ऐतिहात
कभी कभी ऐसा हो, मिले भी नहीं सूप
पी पी पानी गुजरे, बढ़ जाती तब भूख।
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खाना बटता सरकारी, लगा लो कतार
लाइन अगर ना लगे, पड़ जाएगी मार
पड़ जाएगी मार, कई दिन रहता दर्द
रोज पीटे लाइन में, क्यों बने खुदगर्ज
मजबूरी गरीब की, पड़ता जरूर जाना
बेेहतर हो व्रत रखे, अच्छा नहीं खाना।
*होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400
 


मन की डोर को बांधे रखना
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जीवन लंबा जैसे कोई धागा
सुख दुख देख हर जन जागा
सभी को पड़ता इन्हें चखना
मन की डोर को बांधे रखना,
कभी कभी मधुर बेला आए
कभी सुख देखके भाग जाए
कभी कड़वा तो कभी मखना
मन की डोर को बांधे रखना,
कभी जिंदगी ने खूब रुलाया
कभी कभी तो बहुत हर्षाया
दुख पड़े तो सुख को तकना
मन की डोर को बांधे रखना,
प्रभु करते सदा जग में न्याय
दिखाई दे बेशक ही अन्याय
प्रभु को शब्द बुरा ना बकना
मन की डोर को बांधे रखना।
*होशियार सिंह यादव

Friday, April 24, 2020

मलेरिया
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मच्छर ऐसा कीटा है
पीता मानव का खून
बदले में देकर जाता
रोगाणु एक प्रोटोजून,
रोगरोधक क्षमता हो
अगर बहुत कमजोर
रोग जरूर हो जाएगा
लगा लो कितना जोर,
अपने अंडों खातिर ये
मादा मच्छर पीती रक्त
मच्छरों को भगा डालो
मत बनों नहीं अंधभक्त,
मच्छरों से बच जाएगा
रोग नहीं  हो मलेरिया
जहां पानी खड़ा होता 
डालों तेल उस एरिया
**होशियार सिंह, कनीना

लघु कथा  मलेरिया
राजू को पानी पर तेल छिड़कते हुए देख मैंने -पूछा क्या तुम पागल हो गए? महंगे भाव का तेल पानी पर डाल रहे हो।
राजू ने रमन से उत्तर दिया- मैं मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को मार रहा हूं जो पानी में अंडे देते हैं। ये अंडे बच्चे में बदलते तो हवा से सांस लेते हैं। तेल डालने से सांस नहीं ले पाते और मर जाएंगे। रमन ने उत्तर दिया- बेहतर विधि है। पूरे जग को मलेरिया से बचा सकते हैं।
 होशियार सिंह कनीना


ताऊ ताई संवाद
कल मलेरिया दिवस है
मच्छरों से दो छुटकारा
अगर मच्छर जीवित है
जीवन दूभर हो हमारा,
ताऊ बोला ताई से...
मच्छर नहीं खत्म होंगे
ये होते अति पापी घोर
ये खत्म नहीं हो सकते
चाहे मचाओ खूब शोर,
मच्छर अगर ना भगाए
खुद भी न बच पाओगे
मछरदानी के प्रयोग से
मच्छरों से भग जाओगे।
भाग कोरोना
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भाग कोरोना अब भाग
आगे कोरोना पीछे हम
लाख यत्न  करे कोरोना
जीत निश्चित हममें दम,
लील ले कुछ जनों को
फिर तेरा निकलेगा दम
अधिक तेवर दिखलाए
हम बन जाएं सब बम,
खेल-खेल  चुका है तू
छुपाया तुमने निज मुंह
संभल जा वरना पीटेंगे
कांप उठे तेरी  भी रूह,
कम दिन का है मेहमान
परेशान है समस्त जहान
नहीं दाल अब गल पाए
भारत की ऊंची  है शान,
कोरोना की बुरी बीमारी
निपटने की हुई है त्यारी
चला जा  मौका है अभी
दयाशील आदत  हमारी।
*होशियार सिंह यादव

**होशियार सिंह, कनीना।

Thursday, April 23, 2020


-जिजीविषा
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कभी हंसे कभी रुलाए
जीवन ने खेल दिखाए
नहीं थके आगे ही बढ़े
कभी अपने राह दिखाए,
मन में उमंग लिए बढ़ते
कभी गिरते, कभी चढ़ते
बड़ी अब भी एक उमंग
निज कर्मों को खुद गढ़ते,
दिन ढले कभी रात ढ़ले
सुंदर सपने मन में पलते
कभी भविष्य को सोचते
यादों के भी फूल खिलते,
दिल में अभी भी है जोश
नहीं पलता किसी से रोष
आगे बढ़ते रहेंगे सदा ही
जब तक दिल में है जोश।
* होशियार सिंह यादव


याद बहुत आते हो पापा
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जीवन में अंधेरा छा जाता
याद बहुत आते हो पापा
याद जब सुबह शाम करूं
यादों का समा बंध जाता
ढूंढ तुम्हें अपने मन कोने
दृृष्टि पटल पर फिर लाता
तब याद बहुत आते पापा,
हाथ पकड़ सिखलाया था
खुशी का गांव बसाया था
पापा की गोदी आंगन को
निज शयनकक्ष बनाया था
अब वो यादें सम्मुख पाता
अब याद बहुत आते पापा,
बड़ा हुआ खुशियां दे सारी
दर्द मिटाके दूर की बीमारी
गजब मनोहर सूरत तुम्हारी
अब याद आती सूरत प्यारी
दुख सुख को कभी ना मापा
याद बहुत आते बहुत पापा,
जब हुए नाराज तुरंत मनाया
कष्ट मिले तो तुमने सहलाया
परिवार का रखते  थे ख्याल
कभी नहीं पूछा कोई सवाल
हुई शादी जमकर तब  नाचा
अब याद बहुत आते हैं पापा,
सदा मिला तुम्हारा आशीर्वाद
रो रोकर अब आती बस याद
कैसे मिलूं पाऊं नहीं है उपाय
क्रूर होती मृत्यु कहाए जल्लाद
स्वर्ग समान रहा तुम संग नाता
याद बहुत अब आते हो पापा,
कांटों भरा था जीवन का डगर
धन धान्य से भरें आपने घर
करते रहेंगे सदा तुम्हें याद यूं
जीवन हो गया  आपका अमर
सिर पर ओढ़ा करते थे साफा
याद आते हो बहुत अब पापा,
दूर हुए तुम बन गए स्वर्गवासी
कुछ ना सुहाता मन में उदासी
याद सदा आती रहेगी तुम्हारी
दुर्भाग्य है फूटी किस्मत हमारी
सदियों तक मैं नहीं भूल पाता
याद बहुत आते रहोगे यूं पापा।
* होशियार सिंह यादव




जनजीवन, तबाही
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महामारी जब जब आती
लेकर आती बड़ी तबाही
जनजीवन अस्त व्यस्त हो
जनों के बीच बढ़ती खाई,
कोई बचाव में लग जाता
स्वार्थ से भरे कुछ स्वार्थी
समाज सेवा के काम करे
वो कहलाते जन परमार्थी,
कितने बिछुड़ जाते अपने
रह जाते हैं बनकर सपने
जोश यत्न सब काम करेंगे
जीवन दिया सबको रब ने,
जन जीवन तबाह होता है
प्रकृति का होता खिलवाड़
रौद्र रूप धारण  कर लेती
शहर व कस्बे बने उजाड़।




पृथ्वी दिवस
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भार बढ़ गया धरा पर
नहीं रहे पेड़ रखवाले
पानी, पेड़ समाप्त होंगे
मृतप्राय हो धरा वाले,
प्रदूषण बढ़ा रहे खूब
वृक्षों पर चले कुल्हाड़ा
नहीं है रक्षक इस धरा
जन जन ने पेड़ उखाड़ा,
रो रही आज धरा सारी
काट पिट किया विकृृत
कब तक जीवित रहेगी
एक दिन होगी यह मृत,
बचा लो अब धरती को
वरना हो जाओगे बर्बाद
पुस्तकों में छपेगी कहानी
बहुत आएगी धरती याद,
धरती मां  कहलाती आई
देती हमें  धन्य और अन्न
धरती मां  की पूजा करके
खुश होएगा तन और मन।
* होशियार सिंह यादव







-आँख/नजरें
विधा-गजल

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नजरें इनायत होंगी तो
बन जाते बिगड़े काम
नजरें धोखा खा जाए
सारे होते काम तमाम,
आंखों की तराजू को
रखना होता सदा सम
असमान नजरें हो तो
बन जाएगा बड़ा बम,
नजरें गिरे तो सम्मान
नजरें उठे तो अपमान
नजरें ही कयामत हो
नजरों से बनती शान,
आंखों के इशारे करे
मन में बसे गर खोट
समाज में घटेगा मान
पड़ सकते जगत टोंट,
नजरों को संभाल ले
फिर अपना यह जहां
नहीं कोई कुछ कहेगा
घूम लो मन करे वहां।

प्रभाती
*****
घर में शोभा देते हैं ये, करते प्राणों की रक्षा
तांबे के बर्तन में जल, करे शरीर की सुरक्षा।

विषय-आंधी
****
झूठ फुर हो जाता है, चले सच की आंधी
झूठ के आगे न झूके, सच के सेवक गांधी।

***
सच झूठ की द्वंद्व चले, बहकते  हैं जन चंद
जब चले सच की आंधी, सच ही हो बुलंद।


Wednesday, April 22, 2020

पृथ्वी दिवस
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भार बढ़ गया धरा पर
नहीं रहे पेड़ रखवाला
पानी, पेड़ समाप्त होंगे
मृत हो जाएं धरा वाले,
प्रदूषण बढ़ा रहे जमके
पेड़ों पर चले कुल्हाड़ा
नहीं है रक्षक इस धरा
रक्षक ही करते उजाड़ा,
रो रही आज धरा सारी
काट पिट किया विकृृत
कब तक जीवित रहेगी
एक दिन होगी यह मृत,
बचा लो अब धरती को
वरना हो जाओगे बर्बाद
पुस्तकों में छपेगी कहानी
बहुत आएगी धरती याद।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरि

कोरोना योद्धा
काम में रुचि अधिक ना बोले
मुंह पर मास्क हाथों में दस्ताने
दिन रात सेवा में जुटे रहते वो
कोरोना योद्धा उनको ही जाने,
देश एक खड़ा अब विपत्ति में
कितने समाजसेवी करते काम
उनको भी हम याद करेंगे अब
उनसे ही देश का होता है नाम,
डाक्टर, स्वास्थ्यकर्मी व कर्मी
जो दे रहे तैनाती मिलकर सारे
वो कोरोना से भी नहीं डरते हैं
वो देश के हितैषी आदर्श हमारे,
नहीं हारेंगे लगा दे बाजी जान
करे सेवा  और निज अभिमान
वो ही सच्चे योद्धा कहलाते हैं
वो जन जन की होते बड़ी शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 
फोन 0916348400
कोरोना योद्धा
काम में रुचि अधिक ना बोले
मुंह पर मास्क हाथों में दस्ताने
दिन रात सेवा में जुटे रहते वो
कोरोना योद्धा उनको ही जाने,
देश एक खड़ा अब विपत्ति में
कितने समाजसेवी करते काम
उनको भी हम याद करेंगे अब
उनसे ही देश का होता है नाम,
डाक्टर, स्वास्थ्यकर्मी व कर्मी
जो दे रहे तैनाती मिलकर सारे
वो कोरोना से भी नहीं डरते हैं
वो देश के हितैषी आदर्श हमारे,
नहीं हारेंगे लगा दे बाजी जान
करे सेवा  और निज अभिमान
वो ही सच्चे योद्धा कहलाते हैं
वो जन जन की होते बड़ी शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 
फोन 0916348400





लॉकडाउन
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लॉकडाउन का वक्त बुरा है
शिक्षक पर पड़ रही है मार
कभी हलवाई बन जाता वो
कभी करता नाई वाला कार,
आनलाइन पढ़ाई करवाता है
घर में डालवाए तूड़े की पोट
क्या बुरा जमाना आ गया है
शिक्षक में ही निकालते खोट,
बाजार में जब सब्जी खरीदे
बताते उस  दुकानदार लोभी
भारी वेतन ले, कहता सुना है
दुगने रेट में मिले आलू गोभी,
स्कूल में जाए तो बच्चे सताए
घर में चिंता हो  बच्चे-औरत
राम जाने कब जागेगा जगत
क्यों बैरी बन बैठा घट-घट।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

 फोटो का चक्कर

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फोटो सुंदर आए पत्रकार ने मास्क न पहना
कौन कहे पत्रकार को सब कुछ पड़े सहना
सब कुछ पड़े सहना मास्क रोगों से बचाता
समाज में यह इंसान निज को बड़ा कहाता
कहें यादव निर्बाण कोई अगर करता गलती
देख अखबार में खबर पोंक पेंट  में चलती।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 



Tuesday, April 21, 2020

ताई ताऊ संवाद 
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ताई बोली ताऊ से.....
गर्मी का मौसम आया
सताने लगी अब गर्मी
कोरोना से डरे हुए थे
बैठे थे  घर शर्माशर्मी,
ताऊ बोला ताई से.....
एसी, कूलर पर  रोक
पंखे से चलाओ काम
पौधो के  नीचे बैठेंगे
शुद्ध वायु दें हर शाम,
एक दिन इन पेड़ों से
फल फ्रूट मिल जाएंगे
पेड़ की छांव में बैठके
मजे से दोनों ही खाएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


योद्धा
****

डाक्टर दिनरात कोरोना पीडि़तों की सेवा में लगा रहता। सुबह शाम बस एक ही काम, कोरोना से युद्ध। मरीज उसे लंबी उम्र का आशीश देते और डाक्टर प्रसन्नचित अधिक वेग से लग जाता। इतना काम किया कि एक दिन अचानक बीमार हो गए। बुखार आया और जुकाम लगा। डाक्टर की हालात बिगडऩे लगी किंतु वो अभी भी मरीजों की सेवा में लगा हुआ था। आखिरकार वो बेहोश होकर गिर गया। अब तो उन्हें अविलंब सहायता की जरूरत थी। उन्हें भर्ती किया गया और वे और अधिक बीमार पड़ गए। उन्हें अंबुलेंस से बड़े अस्पताल भेजा गया किंतु अफसोस उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। एक साथी डाक्टर ने आंसु बहाते हुए कहा-वो सच्चा योद्धा था जब अब चला गया। 
**होशियार सिंह,  लेखक,कनीना,हरियाणा**

श्रद्धांजलि 

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बहुत सताया कोरोना
नीरु,रजनी व अंजली
क्रियाकर्म हो चुका है
अब दे दो श्रद्धांजली,
पापी था यह कोरोना
सेन सुनके आया रोना
भारत में आकर फंसा
बना दिया ये खिलौना,
चला गया ना आएगा
कोरोना का अति डर
मास्क लगा  मुंह पर
छुपे रहे है अपने घर,
बहुत हो चुका है जा
अधिक मत अब सता
क्यों पीछे  पड़ा हुआ
हमारी क्या हुई खता।
* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400









Monday, April 20, 2020

ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से....
बहुत दिन बीत गए है
पानी के बतासा खाएंगे
दो चार समोसा  लाकर
खूब मजे से हम खाएंगे।
ताऊ बोला ताई से.......
कल हम बतासे बनाएंगे
और बनाएंगे हम समोसा
बेहतर समोसे  बना लोगी
मुझे आज तुम यह भरोसा,
तेल, मैदा, आलू व सब्जी
और रखे हैं टमाटर अचार
कुछ मीठा सोडा डाल लेंगे
खाकर बनेंगे  शुद्ध विचार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

चोर के घर मोर

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दो नकली पत्रकार एक अधिकारी के पास जाकर रोब झाडऩे लगे कि उनकी खबर छाप देंगे। वो सरसों खरीद में घोटाला कर रहा है। खुद भी खाता है और अधिकारियों को भी खिलाता है। अधिकारी के अंदर खोट था। वो डर गया और मारे डर के उन्हें 20 हजार रुपये देने स्वीकार कर लिए। फिर तो वो नकली पत्रकार हर किसी को धोंस दिखाने लगे। एक सज्जन ने सारी बात सुनी और उसके मुख से निकला-वाह,  अधिकारी भी बेईमान है  और नकली पत्रकार भी। इसे कहते हैं चोर के घर मोर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
 


जोश

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खूब कोरोना ने बिगाड़ा
नहीं हुआ ये कम जोश
कोरोना मौका है जाओ
वरना कर देंगे खामोश,
कितनी जान तूने ली हैं
कर देंगे हिसाब चूकता
ऐसे देश से आया है तू
उनका है जहाज डूबता,
महामारी तूने फैलाई है
तुझे  शर्म नहीं आई  है
समेट ले अब तो दुकान
वरना तेरी कर देंगे शाम,
जग बेशक  हार जाएगा
पर जीत होगी भारत की
तू मिट्टी में मिल जाएगा
नींव कच्ची है इमारत की।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

Sunday, April 19, 2020

ताऊ ताई संवाद
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ताई बाली ताऊ से......
लॉकडाउन में ढील मिली
कल से चलेंगे काम करेंगे
पता नहीं मौसम कैसा हो
मौसम तेेेवर से दोनों डरेंगे।
ताऊ बोला ताई से.........
जब से किसान फसल बांए
मौसम की  पड़ती कई मार
कभी कभी तो  इतनी हानि
किसान भी जाता  सब हार,
मंडियों में लाइन लगी रहती
नहीं पता कब आएगा नंबर
कभी आंधी कभी तूफान है
न जाने कब बरस पड़े अंगर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

महामारी 

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फैल गई एक महामारी
इससे लडऩे की तैयारी
कड़ा मुकाबला कर लो
यह जग में नई बीमारी,
कोविड-19 नाम दिया
जन जन का खून पिया
जरूर  मिटेगी महामारी
विदाई की करो तैयारी,
कांप उठता नाम लेकर
हर जन  का यह शरीर
जब यह जग से जाएगा
तब ही मिटेगी जग पीर,
कभी नहंी हिम्मत हारो
ऐतिहात का करो उपाय
कट देखकर नहीं करना
जीवन में कभी हाय हाय।
होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

लघुकथा   लॉकडाउन

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लॉकडाउन का वक्त चल रहा था कि एक शिक्षक अपने पुत्र को कुर्सी पर बैठाकर उसके बाल काट रहा था कि उधर से गुजरने वाले रामू ने पूछा-मास्टरजी, आज आप क्या कर रहे हो?
उत्तर मिला-आज हज्जाम बना हुआ हूं। बच्चे के बाल काट रहा हूं।
रामू ने घर में झांककर देखा तो दंग रह गया-शिक्षक सचमुच अपने बच्चे के बाल काट रहा था। बस फिर तो रामू ने मौका देखा और शिक्षक से कहा-मैं तो आपके पास एक काम से आया हूं, अगर आप कर दे तो बड़ी मेहरबानी होगी।
शिक्षक ने पूछा-वो काम कौन सा है?
रामू झटपट कुर्सी पर बैठ गया और कहा-आप जानते हो लॉकडाउन के वक्त हज्जाम की दुकानें बंद पड़ी है। मेरी दाढ़ी एवं मूछें बढ़ गई है। आप हज्जाम का काम तो कर ही रहे हो। कुछ देर लगेगी, मेरी भी शेव कर दो तथा बाल छोटे कर दो।
इतना सुनकर शिक्षक ने कहा-वाह, क्या खूब कही। आपने तो मौका देख लिया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**







Saturday, April 18, 2020

जग में नाम कमाएगा
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वक्त बहुत बुरा बीता है
अच्छा वक्त भी आएगा
देश उन्नति करेगा इतनी
जगत में  नाम कमाएगा,
बुरा वक्त सदा ना रहता
छट जाते दुख के बादल
ये नभ जरूर मुस्कराएगा
जग में ये नाम कमाएगा,
कोरोना के  बादल छाए
जगत जन हंसी  भुलाए
कोरोना भारत से जाएगा
जग में ही नाम कमाएगा,
नहीं रुका है कृषक कार्य
नहीं रुके हैं देश  के वीर
हर जन कमाल दिखाएगा
जग में  ही नाम कमाएगा।
-होशियार सिंह यादव
     कनीना-123027

ताऊ ताई संवाद 

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ताई बोली ताऊ से..........
एक मीटर दूरी बना रहना
मुंह पर ढकना एक मास्क
हाथों में दस्ताने पहनना है
फिर करना जरूरी  टास्क।
ताऊ बोला ताई से...........
साबुन से बस हाथ धोऊंगा
सेनिटाइजर का प्रयोग करूं
लोगों से दूरी बनाकर रहूंगा
फिर  इस रोग से क्यों डरूं,
घर में दिनभर आराम करूं
शाकाहार  भोजन  खाऊंगा
अगर कोरोना चला जाएगा
फिर हरिद्वार  नहा आऊंगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

जेब भराई 

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रामू को बार बार शेल्टर होम बुलाया जा रहा था किंतु वो नहीं आ रहा था। एक दिन राजू शेल्टर होम आया तो उसके समक्ष प्रदेशियों को खाना खिलाने के लिए सहायतार्थ धन मांगा। राजू ने स्पष्ट कहा-मैं तो 21 हजार रुपये आपके पास बैठे गजेंद्र सिंह को दे चुका हूं। इतना सुनकर गजेंद्र सिंह का मुंह झुक गया। शेल्टर होम संचालक ने गजेंद्र सिंह से कहा-आख्रिकार तुम पैसे ले आए और होम में जमा नहीं किए? वो पैसे कहां गए।
राजू के मुख से अनायास ही निकला-वो तो जेब भराई में चले गए। सुनकर सन्नाटा छा गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


दर्द
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खूब हंसाओ दर्द ना देना
बुजुर्गों का यही है कहना
इंसानों का दिल दुखाकर
जीवन भर पड़ता है रोना,
जब श्रीकृष्ण जन्म लिया
पूरे जगत का कष्ट हटाया
महा अभिमानी कंस मार
जन जन को रूप दिखाया,
श्रीराम भी आए जगत में
धरती के सब पाप हटाये
राक्षस चहु   ओर  खड़े थे
पल में सबके नाम मिटाए,
ऋषि, मुनि और इंसानों ने
बस मन में एक बात ठानी
दर्द किसी  को  नहीं दिया
मिटा दिए जो करे मनमानी।
-होशियार सिंह यादव

 

Friday, April 17, 2020

ताऊ ताई संवाद
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ताई बोली ताऊ से........
बीमारी नहीं मिटी जग से
लो दुआ  करे अब रब से
जल्दी से बीमारी मिटा दो
कुछ बोल ना पाए लब से।
ताऊ बोला ताई से............
हद कर दी है इस बीमारी
पर न हारी सरकार हमारी
मिलकर रोग को भगाना है
घर में बैठकर करो तैयारी,
एक आवाज पर चलना है
हिम्मत ये जन नहीं हारेंगे
माना घातक बहुत बीमारी
हारेगी ये कोरोना महामारी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


 बिगाड़ा हाल 

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खान पान दूषित हो गया
और बिगड़ी है जन चाल
फास्ट फूड पसंद इतना है
जिसने बिगाड़ दिया हाल,
मीट मांस दिनभर खाते हैं
भूल गए भोजन शाकाहार
चाऊमीन,बर्गर,तेज मसाले
बस इनसे अधिक है प्यार,
चाट पकौड़ा, पानी बतासा
उस पर पीते है चाय शराब
मरियल कांचल शरीर हुए
चेहरों की उड़  चुकी आब,
दूध,दही का खाना होता है
पी लो राबड़ी और देशी घी
दही, छाछ, जूस और म_ा
खूब चाव और  मजे से पी।
-होशियार सिंह यादव
पता -मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
     कनीना-123027
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400




महामारी 

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भारत ने हिम्मत नहीं हारी
बेशक फैली खूब बीमारी
जिसने दुष्ट हरकत कर दी
उसे कभी ना नमन हमारी,
एक एक भारतवासी लड़ा
सहायता खातिर आगे बढ़ा
जन पर जिसने किया प्रहार
उसने अपना खोदा है कढ़ा,
बेशक जाति पाती अलग हैं
मिलकर लड़ते महामारी से
वीर बहादुर मैदान में डटे हैं
पार उतारेंगे  इस बीमारी से,
कभी हिम्मत नहीं कारा करे
जिसके मन में इच्छा फौलाद
जो जन बीमारी  से लड़ रहा
याद करेगा उसको ये जहान।
-होशियार सिंह यादव
पता -मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
     कनीना-123027
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा


  महामारी

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पिता अपने पुत्र को ज्ञान की बातें समझा रहे थे कि तभी उन्हें खांसी आने लगी। चारपाई पर लिटा दिया। अभी दो घंटे बीते थे कि सर्दी और जुकाम का रोग लग गया। पुत्र राजन अति परेशान हुआ। अभी उसकी उम्र कम थी किंतु उसने झटपट अस्पताल में संपर्क किया। लॉकडाउन का समय होने के कारण घर से बाहर निकलना भी कठिन था। एंबुलेंस घर द्वारे आई और राजन के पिता अमृत को अस्पताल ले गई। राजन भी अस्पताल पहुंचा। डाक्टर अब कोरोना की बीमारी के कयास लगा रहे थे।सैंपल भेजे गए। तब तक दवा चलती रही किंतु राजन को अपने पिता से दूर रखा गया। तीन दिनों में रिपोर्ट आई और भगदड़ मच गई। अमृत कोरोना पीडि़त था। अब तो राजन की आंखों में आंसू आ गए। उनके पिता की उम्र अधिक होने के कारण जीवन को भी खतरा बन गया। दस दिनों तक इलाज चला किंतु अमृत की हालात बदतर होती चली गई। एक शाम को राजन अपने पिता को दूर बैठा निहार रहा था कि अमृत ने एक बार राजन को इशारा किया और चल बसा।
चारों ओर सन्नाटा छा गया। राजन रो रोकर बुरा हाल कर बैठा। अमृत का अंतिम संस्कार अस्पताल के कर्मियों ने ही किया जिसमें अमृत एवं उसके घर के किसी जन को पास नहीं आने दिया। इतनी घटिया मौत पर लोग स्तब्ध थे। दिन रात प्रभु भक्ति में बीताने वाला जन ऐसी बुरी मौत मरेगा, कभी सोचा ही नही था?
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



 






Thursday, April 16, 2020

ताऊ ताई संवाद 
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ताई बोली ताऊ से.......
कोरोना ने दर्द कई दिए है
कब यह पीछा छोड़ जाए
दिनरात भय का साया रहे
खाना तक लोग नहीं खाए।
ताऊ बोला ताई से.......
कोरोना का जल्द अंत होगा
भारत से जरूर भाग जाएगा
कुछ दिन की बात  अभी है
फिर यह नाक रगड़ जाएगा,
प्रभु श्रीकृष्ण आए हरियाणा
भरत का देश  कहाए भारत
ऋषि तपस्वियों का यह देश
कोरोना की ढह जाए इमारत।
**होशियार सिंह,लेखक,
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड एक
कनीना-123027
जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400


लघुकथा       ठीकरी पहरा

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ठीकरी पहरा देते हुए चार पांच युवकों को कोई आधी रात बीत गई कि सहसा एक अधिकारी की गाड़ी आकर रुकी। अधिकारी की गाड़ी से उतरकर एक जनने जोर से कहा-तुम इतने इकट्ठे क्यों हो? तुम्हारे पास दिखाओ। युवकों ने जवाब दिया कि वे पहली बार आए हैं उन्हें तो पास का ज्ञान तक नहीं था।
अच्छा तुम पहली बार आए हो और लॉकडाउन के नियमों का ज्ञान नहीं है। तुम इकट्ठे खड़े हो और हुक्का पी रहे थे।
युवकों ने जवाब दिया-रात्रि का समय बीताना कठिन होता है। ऐसे में हुक्का पी लिया होगा।
हुक्का पी लिया होगा। नियमों का ज्ञान नहीं। अधिकारी की गाड़ी से उतरे व्यक्ति ने एक एक कर सभी को डंडों से धुन दिया। और तो और हुक्का तोड़ दिया और हुक्के में डाला जाने वाला तंबाकू भी उठा ले गए। चलते चलते चेतावनी दे गए कि सुबह होने पर पुलिस थाने में आ जाना।
बेचारे युवक कभी दर्द को सहला रहे थे तो कभी टूटे हुक्के को देखकर परेशान हो रहे थे। आए थे ठीकरी पहरा देने और मार खाकर घर चल दिए। कोई बोलने वाला नहीं। बोले भी कैसे देश के रक्षक हैं ना।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

Wednesday, April 15, 2020

कोरोना 
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वाह-वाह!  रे कोरोना
कइयों का दिल दुखा दिया
दूर दूर बैठते थे परिवार
उन्हें पास रहना सीखा दिया,
वाह-वाह!  रे कोरोना
धन दौलत को बर्बाद किया
साफ हवा के झोंकों में
पक्षी को रहना सीखा दिया,
वाह-वाह!  रे कोरोना
तूने शांत रहना  सीखा दिया
बहुत शोर शराबा करते
अमनचैन का घुट पिला दिया,
वाह-वाह!  रे कोरोना
तूने पान मसाला बंद करवाया
शराब के ठेके बंद हुए
बिन पिये  पियक्कड़ घर आया,
वाह-वाह!  रे कोरोना
अब मत फैलाना अधिक जहर
भारत को छोड़ निकल
वरना भविष्य में नहीं तेरी खैर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना


        घटा खर्चा

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लॉकडाउन के समय में रामू ने श्याम से पूछा-आखिरकार कितने जनों की जान ले ली,आर्थिक नुकसान भी हुआ है किंतु कोई एक लाभ हुआ है तो बताओ।
श्याम ने जवाब दिया-प्रतिदिन देश में सैकड़ों लोग दुर्घटनाओं में मर रहे थे किंतु कोरोना के वक्त पूरे लॉकडाउन के वक्त मरने वालों की संख्या बहुत कम होगी और यही नहीं सबसे बड़ा लाभ उस गरीब को हुआ है जिसके घर में कोई मौत हो जाती है।
रामू ने बीच में रोकते हुए कहा-गरीब को लाभ कैसे?
श्याम ने उत्तर दिया-देखो मरना सभी को पड़ता है किंतु जब गरीब के घर कोई बुजुर्ग मरता है तो चाय पानी का खर्चा वहीं काज करने में भारी खर्चा आता था उससे बच जाएगा।
रामू उनके उत्तर से प्रसन्न हुआ।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

ताऊ ताई संवाद

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ताई बोली ताऊ से......
आधुनिक तकनीक गजब की
हगते, मूतते की डालते फोटो
गाय भैंस की रखवाली करता
धांसे फाड़ता तो डालते फोटो।
ताऊ बोला ताई से..............
चोरी,जारी जब कोई करता है
या जन गड्ढे में पड़ा हालता है
जब कहीं हो  जाती धुनाई तो
उस वक्त फोटो ना डालता है,
अखबारों में  नाम  कमाना हो
बासी  रोटी बांट  कमाते नाम
कुछ लोग जगत को देते धोखा
उनको बस बुराई से है काम।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

  पोज

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एक खड़ा मार रहा धार
दूसरा बना रहा है पोज
आधुनिक विज्ञान की ये
कहाती तकनीकी खोज,
गोबर उठा उपले बनाए
हाथों में दस्तानें पहनाए
फिर भी बड़ाई  खातिर
आगे आ फोटो खिंचाए,
खा रहा छाछ संग रोटी
या पी रहा है कोई चाय
जब तक फोटो न बनती
करता रहे वो हाय हाय,
सिर पर पोट  तूड़ी रखे
निकल रहा हो  कचूमर
फोटो बनवाकर खुश हो
फोटो देख रहे है घर घर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



Tuesday, April 14, 2020



कर दिया कमाल
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कभी ताली बजवाकर
तो कभी थाली बजवा
बदली देश  की चाल
मोदी ने किया कमाल,
कोरोना से बचा डाला
खुश है लोग हर हाल
कभी दीया जलवाकर
मोदी ने किया कमाल,
महामारी की चपेट में
पूरा संसार है बदहाल
लॉकडाउन करवाकर
मोदी ने किया कमाल,
मोदी की सूझबूझ यह
महामारी से  बचाएंगे
फिर हो देश खुशहाल
मोदी ने किया कमाल।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा
फोन 09416348400


   भामाशाह

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लो भाइयों खाना खा लो। बनाने में कुछ देर हो गई थी। इसलिए देरी से आया हूं।
गरीब तबके के लोग रामू का बार बार आभार जताते। रामू एक थैली में सब्जी और पूड़ी लेकर आता और 5-7 व्यक्तियों को खिलाकर नाम कमा रहा था। गरीब जन रामू को देवता मानते। समाचारपत्रों में रामू की उदारता एवं लगातार खाना खिलाने की चर्चाएं चलने लगी।
एक दिन जब रामू होम शेल्टर से थैली में खाना लेकर चला तो एक गरीब तबके का व्यक्ति वहां खड़ा था। उसने रामू को देखा और दंग रह गया कि रामू समाजसेवियों द्वारा शेल्टर होम के खाने को डालकर 5-7 गरीबों में बांटकर वाही वाही लूट रहा था। धीरे धीरे बात क्या फूटी रामू को शर्मिंदगी सहनी पड़ी। लोग कह रहे थे वाह भामाशाह! खाना किसी का और लेबल अपना लगाना। लोग आधुनिक भामाशाह पर थू-थू कर रहे थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


ताऊ ताई संवाद 

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ताई बोली ताऊ से........
गरीबों का खाना खा रहे
अमीर कहलाते जो लोग
अधिकारी भी  कम नहीं
शराब का लगा रहे भोग।
ताऊ बोला ताई से..........
रसूख वाले लोग आ गए
लोगों को पास बिठाते हैं
दारू दप्पड़ उन्हें पिलाके
गरीबों को बलि चढ़ाते हैं,
आवाज कोई जब उठाता
रसूख की धौंस दिखाते हैं
अपना स्वार्थ सबसे ऊपर
अपराध कर बच जाते हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


  पढ़ाई 

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मुन्ना मुन्नी बैठे 




घर पर करे पढ़ाई
मोबाइल क्रांति ने
यह विधि बतलाई,
शिक्षक आनलाइन
देते बैठे घर शिक्षा
मन लगाकर  पढ़ो
वरना मांगना भीक्षा,
ज्ञान भरा  जगत में
उठाना हमको लाभ
प्राचार्य कक्ष में बैठे
बता रहे  हैं उकाब,
लॉकडाउन बढ़ा हैं
सोच सोच घबराए
लॉकडाउन खुलेगा
तभी कक्षा में जाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

Monday, April 13, 2020

योद्धा 
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कोरोना से लड़ चुके
वो जीत चुके हैं जंग
सारे जगत में फैला है
कोरोना कर  रहा तंग,
कई-कई योद्धा खड़े
कोरोना को हराने को
कई कई सेवक खड़़े
करके गुजर जाने को,
नहीं हारे  नहीं हारेंगे
उन्हें कहे सच्चे योद्धा
कोरोना ऐसी महामारी
करना है जिंदगी सौदा,
आओ हरा दे  देश से
कोरोना का क्या काम
आत्मबल से खड़े रहो
होगी कोरोना की शाम।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़
हरियाणा 0916348400

आनलाइन 

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आनलाइन  बढ़ाई होती
आओ पढ़े मिलकर सारे
अच्छे अच्छे शिक्षक भी
आनलाइन बैठे है तुम्हारे,
व्हाटसप,फेसबुक,यूटय़ूब
और कई आ गए हैं ऐप
ध्यान लगाकर  पढ़ा करो
छोड़ दो सारे अब गपशप,
कोरोना ने आफत कर दी
चौपट कर डाली है पढ़ाई
सारे विषय करके  धारण
करो अब पढ़ाई पर चढ़ाई,
आनलाइन  पढ़ाई  करके
कठिन समय बिताना होता
अब ध्यान लगा  ले  प्यारे
मत नहीं  रहना अब सोता।
**होशियार सिंह,लेखक,कनीना,हरियाणा**

ताऊ ताई संवाद 

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ताई बोली ताऊ से........
अब तो लॉकडाउन बढ़ा
करना होगा और आराम
घर में बैठकर करेंगे बातें
सुबह शाम भज लेंगे राम।
ताऊ बोला ताई से.........
घर की देसी  सब्जी बना
खाते रहेंगे दाल और भात
जब तक आगे बढ़ते जाएं
जब तक जिंदगी दे  साथ,
कोरोना से  बचकर  रहेंगे
बाहर नहीं जाएंगे बे-बात
प्रभु से यही  अरदास करें
सदा रहे हाथों में ही हाथ।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


Sunday, April 12, 2020

जीत 
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हार अगर हाथ लगे
बन जाएगी वो जीत
हार नहीं  दुश्मन हो
जीत सदा नहीं मीत,
बार बार झुकाए तो
हार भी  झुक जाती
बार बार  बुलाएं तो
जीत चल द्वारे आती,
कोरोना को हराते रहे
जरूर वो हार जाएगा
सारा जग प्रसन्न होगा
नव प्रभात छा जाएगा,
सदा आगे बढ़ते जाना
रुक गए अंत हो जाए
तन मन धन सेवा करे
प्रदेश आसमां छू जाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना
महेंद्रगढ़,हरियाणा
मोबाइल 09416348400


  बैसाखी 

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13 अप्रैल वर्ष 1919
रोलेट भारत में आया
बैसाखी का  दिन था
सैकड़ों ने प्राण गंवाया,
जनरल डायर नीच ने
लोगों पर गोली चलाई
शांति से बैठे  लोगों ने
गोला खाके जान गंवाई,
शर्मनाक था  वह दिन
लिखा यही कैमरान ने
एलिजाबेथ भी रोई थी
आजादी बीज बोई थी,
उद्यमसिंह ने बदला ले
ऋण चुकता कर डाला
जनरल डायर  को मार
फांसी की पहनी माला।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

   ताऊ ताई संवाद 

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ताई बोली ताऊ से.....
बैसाखी को  याद कर
आंखें हो जाती हैं नम
जलियांवाला बाग सुन
दिल से होता बड़ा गम।
ताऊ बोला ताई से.......
रोलेट एक्ट भारत आना
लेकर आया मौत पैगाम
379 लोग मारे गए जब
डायर का था नीच काम,
नमन करो उन वीरों को
जिन्होंने दी  यह कुर्बानी
इतिहास में सदा अमर है
जनरल डायर की मनमानी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 


  लघु कथा     मयखाना 

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(इस लघुकथा के पात्र एवं घटना चित्रण काल्पनिक है,किसी सजीव या निर्जीव से मिलना या घटना किसी पर सटीक बैठना महज संयोग कहा जाएगा)
कहने को तो शेल्टर होम था किंतु महज चंद लोग यहां ठहरे हुए थे। किंतु इनकी आड़ में अधिकारी और कर्मचारी शराब में झूमते देखे जा सकते थे। और तो और अधिकारियों के लिए खाना यहां से जाता था। शेल्टर होम में ठहरे लोग भी मदिरा का मजा लेते। कहने को ठेके बंद थे किंतु ठेके खुलवाकर शराब की सप्लाई होती। एक दिन उच्चाधिकारी को शिकायत मिली तो अचानक छापा मारकर हकीकत का पता लगाया। जो भी सुनता बस थू थू करता। शेल्टर संचालक की भी किरकिरी हुई। जो भी सुनता बस कहता-यह कोई शेल्टर होम नहीं यह तो मयखाना है, मयखाना।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**