बदनाम
नेता राजू दूसरे नेता तोंदू को माला पहनाता देख राम ने महेश से कहा-अरे यह क्या? राजू तो तोंदू को कल गाली दे रहा था। आज यह उसे ही माला पहनाकर स्वागत कर रहा है। विगत वर्ष तो यह राजू किसी और नेता के गुण गा रहा था। एक ही साल में तीन-तीन नेताओं के गुण गा चुका है।
महेश ने जवाब दिया-भाई राजनीति है। दल बदलने से ही तो नाम होता है। चाहे नाम बदनाम ही क्यों न हो? नेताओं के लिए सब कुछ जायज है। आजकल उन्हीं को नेता माना जाता है जो ज्यादा बार दल बदले।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
नेता राजू दूसरे नेता तोंदू को माला पहनाता देख राम ने महेश से कहा-अरे यह क्या? राजू तो तोंदू को कल गाली दे रहा था। आज यह उसे ही माला पहनाकर स्वागत कर रहा है। विगत वर्ष तो यह राजू किसी और नेता के गुण गा रहा था। एक ही साल में तीन-तीन नेताओं के गुण गा चुका है।
महेश ने जवाब दिया-भाई राजनीति है। दल बदलने से ही तो नाम होता है। चाहे नाम बदनाम ही क्यों न हो? नेताओं के लिए सब कुछ जायज है। आजकल उन्हीं को नेता माना जाता है जो ज्यादा बार दल बदले।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
तो बैठ जाओ......
हेलो, हेलो। फोन उठाने पर नेता ने महिला से कहा-बहन जी, कहां हो? उत्तर मिला-खेत मेे।
नेता ने कहा-पता होगा कि मैं खड़ा हूं। तो फिर पैरों से बैर है क्या? बैठ क्यों नहीं जाते-महिला ने आवाज लगाई।
नेता ने फिर से कहा-मैं चुनावों में खड़ा हूं। तो फिर साफ साफ यूं क्यों नहीं बोलते-महिला ने जवाब दिया।
तो इस बार मुझे ही वोट देना-नेता बोला।...
See More
हेलो, हेलो। फोन उठाने पर नेता ने महिला से कहा-बहन जी, कहां हो? उत्तर मिला-खेत मेे।
नेता ने कहा-पता होगा कि मैं खड़ा हूं। तो फिर पैरों से बैर है क्या? बैठ क्यों नहीं जाते-महिला ने आवाज लगाई।
नेता ने फिर से कहा-मैं चुनावों में खड़ा हूं। तो फिर साफ साफ यूं क्यों नहीं बोलते-महिला ने जवाब दिया।
तो इस बार मुझे ही वोट देना-नेता बोला।...
See More
शल्य चिकित्सा
आपका हर काम बिगड़ जाता है क्योंकि तुम अपनी जिह्वा से खरी खोटी सुना देते हो। तुम्हारे दोस्त भी कम होते जा रहे हैं। राजन ने राघव को समझाते हुए कहा।
राघव ने जोश भरे लहजे में जवाब दिया-बेशक, भविष्य में यूं ही मेरे काम बिगड़े, दोस्त नाराज हो किंतु मैं तो यूं ही सत्य का बखान करता रहूंगा।
राजन ने राघव को समझाया कि भविष्य में थोड़ा ख्याल रखे तो तुम्हें लाभ होगा। इतना सुन राघव ने जवाब दिया-इस जिह्वा की शल्य चिकित्सा भी तो संभव नहीं। अगर इसे कटवा दूं तो बोल नहीं पाऊंगा किंतु ऐसा कर भी लूं तो मां सरस्वती के सबसे सुंदर प्रसाद वाणी से वंचित हो जाऊगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
आपका हर काम बिगड़ जाता है क्योंकि तुम अपनी जिह्वा से खरी खोटी सुना देते हो। तुम्हारे दोस्त भी कम होते जा रहे हैं। राजन ने राघव को समझाते हुए कहा।
राघव ने जोश भरे लहजे में जवाब दिया-बेशक, भविष्य में यूं ही मेरे काम बिगड़े, दोस्त नाराज हो किंतु मैं तो यूं ही सत्य का बखान करता रहूंगा।
राजन ने राघव को समझाया कि भविष्य में थोड़ा ख्याल रखे तो तुम्हें लाभ होगा। इतना सुन राघव ने जवाब दिया-इस जिह्वा की शल्य चिकित्सा भी तो संभव नहीं। अगर इसे कटवा दूं तो बोल नहीं पाऊंगा किंतु ऐसा कर भी लूं तो मां सरस्वती के सबसे सुंदर प्रसाद वाणी से वंचित हो जाऊगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
घमंड
विदेश से शिक्षा पाकर आए राजू को सिर इतना चढ़ गया कि वो किसी से मिलना तो दूर बात करना भी शान के विरुद्ध समझता था। आलम यह हुआ कि कोई उससे बात नहीं करता। उसके घर भी आना जाना छोड़ दिया। एक दिन वो आ गया कि उनके घर के पास से गुजरने वालों को वह अपने घर बुलाने का प्रयास करता किंतु लोग यह कहकर आगे बढ़ जाते-छोड़ो, इसे यह तो पागल है। अब तो वो समय आ गया कि वह एकांत में पड़ा रहता। कुछ दिनों तक दिखाई न देने पर घर से बदबू आने लगी। लोगों ने घर में झांककर देखा तो वो राजू मरा पड़ा था और लाश सड़कर कीड़े पड़ गए। जिसने भी मौत के बारे में सुना बस मुंह से निकला-यह तो घमंडी था, अंत तो होना ही था।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
विदेश से शिक्षा पाकर आए राजू को सिर इतना चढ़ गया कि वो किसी से मिलना तो दूर बात करना भी शान के विरुद्ध समझता था। आलम यह हुआ कि कोई उससे बात नहीं करता। उसके घर भी आना जाना छोड़ दिया। एक दिन वो आ गया कि उनके घर के पास से गुजरने वालों को वह अपने घर बुलाने का प्रयास करता किंतु लोग यह कहकर आगे बढ़ जाते-छोड़ो, इसे यह तो पागल है। अब तो वो समय आ गया कि वह एकांत में पड़ा रहता। कुछ दिनों तक दिखाई न देने पर घर से बदबू आने लगी। लोगों ने घर में झांककर देखा तो वो राजू मरा पड़ा था और लाश सड़कर कीड़े पड़ गए। जिसने भी मौत के बारे में सुना बस मुंह से निकला-यह तो घमंडी था, अंत तो होना ही था।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघुकथा रावण
कमल ने रमन को दौड़ते हुए देख सहसा पूछा-आप कहां भागे जा रहे हो? रमन ने प्रत्युत्तर में कहा-आज दशहरा पर्व है, रावण को फूंका जा रहा है। आओ देखे उस रावण को जिसने सीता मां का हरण किया था। वो पापी अब खत्म हो जाएगा।
कमल ने लंबी सांस लेते हुए कहा-हूं, वो पापी कभी नहीं मरेगा। अपने गांव में भी तो चार रावण है जिन्होंने बलात्कार तक किया है। उनको भी तो इस रावण संग फूंक दो। रमन अवाक, सोच में डूब गया और सोच रहा था कि राम के वक्त तो एक रावण का जिक्रा आता है और वर्तमान में तो रावणों का अंबार है। कैसे इनका अंत होगा?
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
कमल ने रमन को दौड़ते हुए देख सहसा पूछा-आप कहां भागे जा रहे हो? रमन ने प्रत्युत्तर में कहा-आज दशहरा पर्व है, रावण को फूंका जा रहा है। आओ देखे उस रावण को जिसने सीता मां का हरण किया था। वो पापी अब खत्म हो जाएगा।
कमल ने लंबी सांस लेते हुए कहा-हूं, वो पापी कभी नहीं मरेगा। अपने गांव में भी तो चार रावण है जिन्होंने बलात्कार तक किया है। उनको भी तो इस रावण संग फूंक दो। रमन अवाक, सोच में डूब गया और सोच रहा था कि राम के वक्त तो एक रावण का जिक्रा आता है और वर्तमान में तो रावणों का अंबार है। कैसे इनका अंत होगा?
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
अगर सच कह दिया तो....
कार्यालय में एक दिन भी पूरे समय नहीं रुकना और रोब ऐसा कि जैसे राष्ट्रपति लगा हो। अधिकारी ने अपने अधीनस्थ कर्मी को कहा-मेरी मंत्री से पहुंच है। अगर मेरे विरुद्ध एक शब्द भी बोला तो नौकरी चली जाएगी।
इतना सुनकर कर्मी आग बबूला हो गया और अधिकारी से कहा-अगर मंत्री तक कह दिया कि तुम नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से पैसे ऐंठते हो, घर के सामने की गली किसी नेता से बनवाई साथ किसी के रहने का ढोंग रचाते हो और काम किसी मंत्री के एवज में करवाते हो। उस पर लय के कार्याकाम के जानकार भी नहीं तो क्या होगा? अधिकारी ने जब ये शब्द सुने तो चुपचाप वहां से निकलना ंगवारा समझा। अधिकारी का रोब पल में झड़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
कार्यालय में एक दिन भी पूरे समय नहीं रुकना और रोब ऐसा कि जैसे राष्ट्रपति लगा हो। अधिकारी ने अपने अधीनस्थ कर्मी को कहा-मेरी मंत्री से पहुंच है। अगर मेरे विरुद्ध एक शब्द भी बोला तो नौकरी चली जाएगी।
इतना सुनकर कर्मी आग बबूला हो गया और अधिकारी से कहा-अगर मंत्री तक कह दिया कि तुम नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से पैसे ऐंठते हो, घर के सामने की गली किसी नेता से बनवाई साथ किसी के रहने का ढोंग रचाते हो और काम किसी मंत्री के एवज में करवाते हो। उस पर लय के कार्याकाम के जानकार भी नहीं तो क्या होगा? अधिकारी ने जब ये शब्द सुने तो चुपचाप वहां से निकलना ंगवारा समझा। अधिकारी का रोब पल में झड़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
देश के दुश्मन
सर्प सम धुआं निकलते हारे को देखकर राम से रुका नहीं गया और रमन से कहा-तुम देश के दुश्मन हो। जिस आक्सीजन की कमी होती जा रही है उसे इस धुआं से और घटा रहे हो। जिन हरे पेड़ों को काटकर सूखा रहे हो वो तो जीवन बचाने वाले होते हैं। धरती पर गंदगी फैलाकर इसे प्रदूषित कर रहे हो तो भविष्य कैसा होगा?
रमन तमतमा कर बोला-ये हरे पेड़ मेरे खेत के हैं और हारा मेरे घर में चल रहा है। धुआं दे रहा है तो मेरे घर में? तुम क्यों क्रोध में आ रहे हो?
राम ने अश्रु पूर्ण नेत्रों से कहा-तुम...
See More
सर्प सम धुआं निकलते हारे को देखकर राम से रुका नहीं गया और रमन से कहा-तुम देश के दुश्मन हो। जिस आक्सीजन की कमी होती जा रही है उसे इस धुआं से और घटा रहे हो। जिन हरे पेड़ों को काटकर सूखा रहे हो वो तो जीवन बचाने वाले होते हैं। धरती पर गंदगी फैलाकर इसे प्रदूषित कर रहे हो तो भविष्य कैसा होगा?
रमन तमतमा कर बोला-ये हरे पेड़ मेरे खेत के हैं और हारा मेरे घर में चल रहा है। धुआं दे रहा है तो मेरे घर में? तुम क्यों क्रोध में आ रहे हो?
राम ने अश्रु पूर्ण नेत्रों से कहा-तुम...
See More
प्रचार
मुख्याध्यापक ने रोब झाड़ते हुए शिक्षक से कहा-मैं अब 20 दिन स्कूल नहीं आऊंगा। नेता का चुनाव प्रचार करूंगा। तुम सभी नियमित स्कूल आना नहीं तो खैर नहीं होगी?
शिक्षक ने प्रत्युत्तर में कहा-वाह जी!,वेतन बच्चों को पढ़ाने का लेते हो और प्रचार नेता का करते हो। उस पर रोब झाड़ते हो। धिक्कार है तुम्हें इस प्रकार का घृणित कार्य करते हुए। तुम जैसेे इक्का दुक्का शिक्षक ही समस्त शिक्षक जाति को बदनाम कर देते हैं। इतना सुन मुख्याध्यापक के होश उड़ गए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
मुख्याध्यापक ने रोब झाड़ते हुए शिक्षक से कहा-मैं अब 20 दिन स्कूल नहीं आऊंगा। नेता का चुनाव प्रचार करूंगा। तुम सभी नियमित स्कूल आना नहीं तो खैर नहीं होगी?
शिक्षक ने प्रत्युत्तर में कहा-वाह जी!,वेतन बच्चों को पढ़ाने का लेते हो और प्रचार नेता का करते हो। उस पर रोब झाड़ते हो। धिक्कार है तुम्हें इस प्रकार का घृणित कार्य करते हुए। तुम जैसेे इक्का दुक्का शिक्षक ही समस्त शिक्षक जाति को बदनाम कर देते हैं। इतना सुन मुख्याध्यापक के होश उड़ गए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघु कथा बारिश
पूरा गरीब परिवार फटे पुराने कपड़ों में दिनरात एक किए बंटाई में जोती गई बाजरे की फसल कटाई में लग रहा था कि बारिश ने लगातार काम बाधित कर दिया। रम ने अश्रुपूरित नेत्रों से आसमान की ओर देखते हुए कहा-लगता इस वर्ष भी हमें आधा भूखो सोना पड़ेगा। इस बार कपड़े खरीदने थे वो भी नहीं खरीद पाएंगे। राम कभी अर्धनग्न पत्नी को देखता तो कभी बच्चों की ओर देखता। बारिश में भीगकर बच्चे कांप रहे थे। राम की पत्नी एवं बच्चे हाथ जोड़कर रुआसे चेहरे से इंद्र देव को याद कर बारिश रोकने की गुहार लगा रहे थे। पर क्या देखते ही देखते सारा बाजरा बारिश में बह गया। अब तो कोई इस परिवार की सुनने वाला नहीं दिखाई पड़ रहा था। राम की पत्नी ने कहा-भगवान भी गरीबों की नहीं सुनता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
पूरा गरीब परिवार फटे पुराने कपड़ों में दिनरात एक किए बंटाई में जोती गई बाजरे की फसल कटाई में लग रहा था कि बारिश ने लगातार काम बाधित कर दिया। रम ने अश्रुपूरित नेत्रों से आसमान की ओर देखते हुए कहा-लगता इस वर्ष भी हमें आधा भूखो सोना पड़ेगा। इस बार कपड़े खरीदने थे वो भी नहीं खरीद पाएंगे। राम कभी अर्धनग्न पत्नी को देखता तो कभी बच्चों की ओर देखता। बारिश में भीगकर बच्चे कांप रहे थे। राम की पत्नी एवं बच्चे हाथ जोड़कर रुआसे चेहरे से इंद्र देव को याद कर बारिश रोकने की गुहार लगा रहे थे। पर क्या देखते ही देखते सारा बाजरा बारिश में बह गया। अब तो कोई इस परिवार की सुनने वाला नहीं दिखाई पड़ रहा था। राम की पत्नी ने कहा-भगवान भी गरीबों की नहीं सुनता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
देशभर के 101 साहित्यकारों में सम्मानित हुए होशियार सिंह कनीना
निर्मला स्मृति साहित्यिक समिति द्वारा 29 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मान समारोह लोहारू रोड़ स्थित सरस्वती विद्या विहार सभागार चरखी दादरी में आयोजित सम्मान समारोह में कनीना के लेखक एवं साहित्यकार होशियार सिंह को उनकी कृति बाल कहानियां बुद्धिमता के लिए सम्मानित किया गया। इस समारोह में देशभर के समिति के 101 साहित्यकार सम्मानित होंगे। इससे पूर्व 15 सितंबर को भी होशियार सिंह हिसार में आयोजित राह ग्रुप फाउंडेश...
See More
निर्मला स्मृति साहित्यिक समिति द्वारा 29 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मान समारोह लोहारू रोड़ स्थित सरस्वती विद्या विहार सभागार चरखी दादरी में आयोजित सम्मान समारोह में कनीना के लेखक एवं साहित्यकार होशियार सिंह को उनकी कृति बाल कहानियां बुद्धिमता के लिए सम्मानित किया गया। इस समारोह में देशभर के समिति के 101 साहित्यकार सम्मानित होंगे। इससे पूर्व 15 सितंबर को भी होशियार सिंह हिसार में आयोजित राह ग्रुप फाउंडेश...
See More
Hoshiar Singh Yadav is with Jitender Kumar.
लघु कथा प्याज
रमन ने फोन पर अपनी पत्नी से कहा-एक माह की छुट्टी लेकर आ रहा हूं। बताओ, अपने कमल एवं जानकी के लिए क्या लेकर आऊं?
रमनी ने खुश होकर जवाब दिया-बड़ी खुशी की बात है कि एक साल के बाद आप घर आ रहे हैं। आज का दिन कितना अच्छा है। लेकिन घर की खुशी बढ़ानी है तो हम सभी के लिए दो किलो प्याज लेकर आना। विगत कई दिनों से सब्जी के तड़का नहीं लगा पाए हैं। 80 रुपये किलो प्याज के भाव पहुंच चुके हैं। दाल प्याज का तड़का लगाकर खाएंगे तो बड़ा मजा आएगा। एक तो आप घर आओगे उस पर प्याज का तड़का लगा दाल खाएंगे तो मजा मिठाई से भी अधिक आएगा।
रमन ने जब यह सुना तो कहा-दुर्भाग्य है कि जिस देश में अधिक जन किसान और वहां प्याज की कीमत 80 रुपये किलो।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
रमन ने फोन पर अपनी पत्नी से कहा-एक माह की छुट्टी लेकर आ रहा हूं। बताओ, अपने कमल एवं जानकी के लिए क्या लेकर आऊं?
रमनी ने खुश होकर जवाब दिया-बड़ी खुशी की बात है कि एक साल के बाद आप घर आ रहे हैं। आज का दिन कितना अच्छा है। लेकिन घर की खुशी बढ़ानी है तो हम सभी के लिए दो किलो प्याज लेकर आना। विगत कई दिनों से सब्जी के तड़का नहीं लगा पाए हैं। 80 रुपये किलो प्याज के भाव पहुंच चुके हैं। दाल प्याज का तड़का लगाकर खाएंगे तो बड़ा मजा आएगा। एक तो आप घर आओगे उस पर प्याज का तड़का लगा दाल खाएंगे तो मजा मिठाई से भी अधिक आएगा।
रमन ने जब यह सुना तो कहा-दुर्भाग्य है कि जिस देश में अधिक जन किसान और वहां प्याज की कीमत 80 रुपये किलो।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
तुलसी
तुलसी का पौधा पवित्र माना जाता है। इसे वृंदा या पवित्र तुलसी, तुलसी आदि नामों से जाना जाता है। घर आंगन में उगाई जाती है जो गुणों की खान है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ओसिमम सेंक्टम कहा जाता है। वैसे तो तुलसी के कई प्रकार हैं किंतु राम तुलसी एवं श्याम तुलसी प्रमुख दो प्रकार की घरों में उगाई जाती है। दोनों ही गुणकारी हैं किंतु श्याम तुलसी अधिक गुणकारी मानी जाती है। यह सर्दी, जुकाम, खांसी, दंत रोग, श्वास रोग, गले में कफ को खत्म में अहं भूमिका निभाती है वहीं अनेकों दवाओं में काम आती है। रोग भगाने हो तो घर में जरूर उगाओ। पूर्वज इसके गुणों के बारे में जानते थे इसलिए इसकी पूजा करते आए हैं। इसके पत्तों में पारा पाया जाता है तथा यह पवित्र पौधा है इसलिए पत्तों को दांतों से नहीं चबाना चाहिए वरना दांतों को नुकसान होगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
तुलसी का पौधा पवित्र माना जाता है। इसे वृंदा या पवित्र तुलसी, तुलसी आदि नामों से जाना जाता है। घर आंगन में उगाई जाती है जो गुणों की खान है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ओसिमम सेंक्टम कहा जाता है। वैसे तो तुलसी के कई प्रकार हैं किंतु राम तुलसी एवं श्याम तुलसी प्रमुख दो प्रकार की घरों में उगाई जाती है। दोनों ही गुणकारी हैं किंतु श्याम तुलसी अधिक गुणकारी मानी जाती है। यह सर्दी, जुकाम, खांसी, दंत रोग, श्वास रोग, गले में कफ को खत्म में अहं भूमिका निभाती है वहीं अनेकों दवाओं में काम आती है। रोग भगाने हो तो घर में जरूर उगाओ। पूर्वज इसके गुणों के बारे में जानते थे इसलिए इसकी पूजा करते आए हैं। इसके पत्तों में पारा पाया जाता है तथा यह पवित्र पौधा है इसलिए पत्तों को दांतों से नहीं चबाना चाहिए वरना दांतों को नुकसान होगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघु कथा नैतिक पतन
ओ हो, एक बैंक मैनेजर ने रिश्वत के एक लाख रुपये मांगे और वो भी भैंसों का लोन दिलाने के नाम पर। अरे यह क्या, एक प्रोफेसर ने थीसिस जमा करने के नाम के दस हजार रुपये रिश्वत मांगी। समाचार पढ़ते हुए राम ने अपनी मां से पूछा-मां, यह समाज में क्या बीमारी फैल रही है?
मां ने उत्तर दिया-बेटा, यह वो बीमारी है जिसका कोई धरा पर इलाज नहीं है। यह तो कैंसर और एड्स से भी घातक बीमारी होती है। इस बीमारी का नाम है नैतिक पतन। एक बार पतन शुरू हो गया वो जन को नष्ट करके ही दम लेता है। चाहे कितनी बड़ी डिग्री चिकित्सा के क्षेत्र में हासिल कर लो, इस रोग का इलाज नहीं मिलेगा। इस रोग की कोई दवा अभी तक ईजाद नहीं हो पाई है।
मां की बात सुनकर राम ने लंबी सांस ली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ओ हो, एक बैंक मैनेजर ने रिश्वत के एक लाख रुपये मांगे और वो भी भैंसों का लोन दिलाने के नाम पर। अरे यह क्या, एक प्रोफेसर ने थीसिस जमा करने के नाम के दस हजार रुपये रिश्वत मांगी। समाचार पढ़ते हुए राम ने अपनी मां से पूछा-मां, यह समाज में क्या बीमारी फैल रही है?
मां ने उत्तर दिया-बेटा, यह वो बीमारी है जिसका कोई धरा पर इलाज नहीं है। यह तो कैंसर और एड्स से भी घातक बीमारी होती है। इस बीमारी का नाम है नैतिक पतन। एक बार पतन शुरू हो गया वो जन को नष्ट करके ही दम लेता है। चाहे कितनी बड़ी डिग्री चिकित्सा के क्षेत्र में हासिल कर लो, इस रोग का इलाज नहीं मिलेगा। इस रोग की कोई दवा अभी तक ईजाद नहीं हो पाई है।
मां की बात सुनकर राम ने लंबी सांस ली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघु कथा स्वार्थी
राम,राम, कृष्ण कुमार। हाथ जोड़कर खेत में लावणी कर रहे कृष्ण कुमार एवं उनके परिजनों को नेता ने कहा। कृष्ण कुमार ने नमस्ते करते हुए मुड़कर देखा तो कम से कम दस व्यक्ति, नेता के साथ खड़े थे। कृष्ण कुमार ने बड़े इत्मीनान से पूछा-आज, खेत में कैसे आना हुआ? नेता ने जवाब दिया-विधानसभा के चुनाव लड़ रहा हूं। मुझे ही वोट देना। कृष्ण कुमार ने सिर पर हाथ मारते हुए कहा-टिकट अभी मिली नहीं है किंतु सुबह से चार नेता खेत में आ चुके हैं। मेरा काम ही थका दिया है। न जाने शाम तक और कितने नेता आएंगे और कितना काम थका देंगे। नेता कितने स्वार्थी हैं। वोट के लिए खेत तक पहुंच जाएंगे और जीत जाएंगे तो दर्शन दुर्लभ हो जाएंगे। यह सोचते हुए कृष्ण काम में जुट गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
राम,राम, कृष्ण कुमार। हाथ जोड़कर खेत में लावणी कर रहे कृष्ण कुमार एवं उनके परिजनों को नेता ने कहा। कृष्ण कुमार ने नमस्ते करते हुए मुड़कर देखा तो कम से कम दस व्यक्ति, नेता के साथ खड़े थे। कृष्ण कुमार ने बड़े इत्मीनान से पूछा-आज, खेत में कैसे आना हुआ? नेता ने जवाब दिया-विधानसभा के चुनाव लड़ रहा हूं। मुझे ही वोट देना। कृष्ण कुमार ने सिर पर हाथ मारते हुए कहा-टिकट अभी मिली नहीं है किंतु सुबह से चार नेता खेत में आ चुके हैं। मेरा काम ही थका दिया है। न जाने शाम तक और कितने नेता आएंगे और कितना काम थका देंगे। नेता कितने स्वार्थी हैं। वोट के लिए खेत तक पहुंच जाएंगे और जीत जाएंगे तो दर्शन दुर्लभ हो जाएंगे। यह सोचते हुए कृष्ण काम में जुट गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघु कथा चालान
चालान काटकर हाथ में थमाते हुए पुलिस अधिकारी ने कहा-लो अपना चालान अब भुगतते रहना।
....परंतु मेरे कागज तो पूरे हैं, फिर चालान काटने वाला कौन हो सकता है?
हो सकता है नहीं अपितु मैं हूं। तुमने बार बार मेरे विरुद्ध समाचारपत्र में उल्टे सीधे समाचार प्रकाशित किए और मेरा जीना हराम कर दिया है। तुझे मौका लगा तो तुमने मुझे नहीं बख्शा और अब मेरा मौका लगा है तो तुम्हें नहीं बख्शूंगा।
इतना कहकर पुलिस अधिकारी आगे बढ़ गया और पत्रकार तैश में आ गया और कहने लगा-अब द...
See More
चालान काटकर हाथ में थमाते हुए पुलिस अधिकारी ने कहा-लो अपना चालान अब भुगतते रहना।
....परंतु मेरे कागज तो पूरे हैं, फिर चालान काटने वाला कौन हो सकता है?
हो सकता है नहीं अपितु मैं हूं। तुमने बार बार मेरे विरुद्ध समाचारपत्र में उल्टे सीधे समाचार प्रकाशित किए और मेरा जीना हराम कर दिया है। तुझे मौका लगा तो तुमने मुझे नहीं बख्शा और अब मेरा मौका लगा है तो तुम्हें नहीं बख्शूंगा।
इतना कहकर पुलिस अधिकारी आगे बढ़ गया और पत्रकार तैश में आ गया और कहने लगा-अब द...
See More
लघुकथा भद्दा मजाक
छोटा बच्चा गोद में लेकर क्लर्क की परीक्षा देने जाती ही युवती ने जब बस की ओर देखा तो पैर रखने तक की जगह नहीं थी। परीक्षा केंद्र भी 300 किमी दूर है। युवती की सहसा नजर ट्रेन पर पड़ी जिसके ऊपर भी युवा यात्रा कर रहे थे। युवती सोच में डूब गई कि 15 लाख परीक्षार्थियों में महज पांच हजार क्लर्क लगेंगे। कितनी बड़ी स्पर्धा होगी। किंतु अपनी गोद में बच्चे को लेकर 300 किमी दूरी तय करना और वो भी खड़े खड़े यह दूसरी परीक्षा होगी। युवती सोचती ही जा रही थी सायंकालीन परीक्षा शाम छह बजे छूटेगी तो घर तक कैसे पहुंचा जाएगा? सरकार बेरोजगारों के साथ भद्दा मजाक कर रही है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
छोटा बच्चा गोद में लेकर क्लर्क की परीक्षा देने जाती ही युवती ने जब बस की ओर देखा तो पैर रखने तक की जगह नहीं थी। परीक्षा केंद्र भी 300 किमी दूर है। युवती की सहसा नजर ट्रेन पर पड़ी जिसके ऊपर भी युवा यात्रा कर रहे थे। युवती सोच में डूब गई कि 15 लाख परीक्षार्थियों में महज पांच हजार क्लर्क लगेंगे। कितनी बड़ी स्पर्धा होगी। किंतु अपनी गोद में बच्चे को लेकर 300 किमी दूरी तय करना और वो भी खड़े खड़े यह दूसरी परीक्षा होगी। युवती सोचती ही जा रही थी सायंकालीन परीक्षा शाम छह बजे छूटेगी तो घर तक कैसे पहुंचा जाएगा? सरकार बेरोजगारों के साथ भद्दा मजाक कर रही है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
लघु कथा
शिक्षक ने फटे पुराने कपड़े पहने छात्र से पूछा-तुम रोजाना लेट आते हो। क्या कारण है? यदि तुम समय पर स्कूल आओगे तो एक दिन पास हो जाओगे, नौकरी मिल जाएगी?
विद्यार्थी ने अश्रुपूरित नेत्रों से उत्तर दिया-सर, आपको कक्षा में आने और पढ़ाई की पड़ी है और मुझे रोटी की चिंता सता रही है। एक माह तक लावणी चलेंगी। अगर मैं लावणी करके रोटी रोजी नहीं कमा पाऊंगा तो मेरा भाई और मैं भूखो सोएंगे। शिक्षक ने जब यह सुना तो सोच में पड़ गया और पूरी कहानी ध्यान से सुनी। शिक्षक को पता चला कि अनाथ युवक लावणी करके रोटी रोजी कमा रहा है जिसके चलते प्रतिदिन स्कूल से लेट हो जाता है। शिक्षक के मुंह से निकला-बेटा, तुम प्रतिदिन बेशक स्कूल से लेट हो आगे से मैं कुछ नहीं कहूंगा? शिक्षक की आंखें भी नम थी।
-होशियार सिंह, लेखक,कनीनाा,हरियाणा**
शिक्षक ने फटे पुराने कपड़े पहने छात्र से पूछा-तुम रोजाना लेट आते हो। क्या कारण है? यदि तुम समय पर स्कूल आओगे तो एक दिन पास हो जाओगे, नौकरी मिल जाएगी?
विद्यार्थी ने अश्रुपूरित नेत्रों से उत्तर दिया-सर, आपको कक्षा में आने और पढ़ाई की पड़ी है और मुझे रोटी की चिंता सता रही है। एक माह तक लावणी चलेंगी। अगर मैं लावणी करके रोटी रोजी नहीं कमा पाऊंगा तो मेरा भाई और मैं भूखो सोएंगे। शिक्षक ने जब यह सुना तो सोच में पड़ गया और पूरी कहानी ध्यान से सुनी। शिक्षक को पता चला कि अनाथ युवक लावणी करके रोटी रोजी कमा रहा है जिसके चलते प्रतिदिन स्कूल से लेट हो जाता है। शिक्षक के मुंह से निकला-बेटा, तुम प्रतिदिन बेशक स्कूल से लेट हो आगे से मैं कुछ नहीं कहूंगा? शिक्षक की आंखें भी नम थी।
-होशियार सिंह, लेखक,कनीनाा,हरियाणा**
होशियार
सिंह को मिला एक्सीलेंस अवार्ड जिला महेंद्रगढ़ के कनीना निवासी
लेखक. साहित्यकार एवं शिक्षक होशियार सिंह यादव को राह ग्रुप फाउंडेशन की
ओर से एक्सीलेंस वर्क इन बुक राइटिंग अवार्ड दिया गया। यह अवार्ड उन्हें
एमजी एडवेंचर एंड पार्क हिसार में रविवार को दिया गया। अवार्ड देते वक्त
राह ग्रुप फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश सेलपाड, डॉक्टर कमल गुप्ता
चेयरमैन ब्यूरो आफ पब्लिक एंटरप्राइज हरियाणा, सुनीता दुग्गल एमपी,
बिजेंद्र चौहान सचिव हरियाणा ओलंपिक एसोसिएशन,डॉ अनु...
See More
See More































































No comments:
Post a Comment