फूल
फूल देखकर रामू बोला
क्या कुदरत की माया है
कहीं खुशबू बिखेरी है
कहीं पेड़ों की छाया है,
तितली देख राम बोला
क्या सुंदर संसार बसाया
कहीं जीवों को देख देख
दिल को बहुत हर्षाया,
पक्षी उड़ता देख राजू ने
कहा कुदरत की माया है
मालिक प्रभु जहान का
जिसने जगत सजाया है,
कभी खुशी कभी गम है
कहीं धूप कहीं छांव है
कहीं पक्षी चहचहा रहे
कहीं कौवों की कांव है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जल
नभ, धरा,पाताल में
होती मांग जल की
आज नहीं सुधरे तो
हाल सोच कल की,
घटता ही जा रहा है
बढ़ती जा रही मांग
जल अगर ना बचा
फिर निकलेगा सांग,
जल जीवन कहलाए
फिर तो इसे बचाए
भविष्य की धरोहर
सोच भविष्य बनाए,
जल बिन जन नहीं
जल बिन नहीं मीन
जल को नष्ट करोगे
दर्द की बजेगी बीन।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
आंसू
अनमोल होते हैं आंसू
पवित्र ये कहलाते हैं
जब आंखों में आते तो
गम की याद दिलाते हैं,
कभी कभी ये आंसू तो
खुशियों से आ जाते हैं
कभी कभी आंसू बहा
रोगों से बच जाते हैं,
आंसू दिल का बयां करे
आंसू गम खुशी इजहार
कभी एक आंसू न आए
कभी गिरे ये कई हजार,
आंसू का मोल नहीं है
पता कर लो बाजार से
अगर धोखा देना बस है
संजोकर रख लो प्यार से।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
आंसू
पहली बार मां से तीनों भाइयों ने मेले में चलने तथा कुछ मनपसंद चीज खरीदने की बात कही तो मां की आंखों में आंसू थे। उनके पति का देहांत हो चुका था। घर में खाने के लिए वो किसी के घर से बर्तन भांडे मांजकर कमाकर लाती थी जिससे पेट भर देती थी। किंतु मां की ममता ने उसे झकोरकर रख दिया। उसे याद आया कि कुछ बिछिया उनके पास हैं जिन्हें बेचकर पैसों का प्रबंध कर मेले में अपने पुत्रों को लेकर चल दी। तीनों ही भाइयों से उनकी मनपसंद चीज दिलाने की बात कही। एक ने बांसुरी तो दूसरे ने खाने की चीजें तो तीसरे ने पूजा के लिए मूर्तियां खरीदी। आगे चलकर एक बांसुरी वादक तो दूसरा होटल मैनेजर वहीं तीसरा मूर्तिकार नाम से प्रसिद्ध हुआ। मां उन्हें देखकर उस दिन को याद कर प्रसन्न हो जाती थी। उनकी कला देखकर आज खुशी के आंसू झलक रहे थे।
** होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से...
आंसू की कीमत नहीं
बहाते रहो संसार में
कोई सुनता कभी नहीं
रोते रहो गर प्यार में।
ताऊ बोला ताई से....
अपनी करनी भुगतते है
संसार का हरेक जीव
अच्छे कर्म अगर करे
तब मिट जाती है पीव,
बुरे कर्मों का फल बुरा
करके देख जरा इंसान
पल में जीवन अंत हो
झटपट मिट जाए शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
फूल देखकर रामू बोला
क्या कुदरत की माया है
कहीं खुशबू बिखेरी है
कहीं पेड़ों की छाया है,
तितली देख राम बोला
क्या सुंदर संसार बसाया
कहीं जीवों को देख देख
दिल को बहुत हर्षाया,
पक्षी उड़ता देख राजू ने
कहा कुदरत की माया है
मालिक प्रभु जहान का
जिसने जगत सजाया है,
कभी खुशी कभी गम है
कहीं धूप कहीं छांव है
कहीं पक्षी चहचहा रहे
कहीं कौवों की कांव है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
जल
नभ, धरा,पाताल में
होती मांग जल की
आज नहीं सुधरे तो
हाल सोच कल की,
घटता ही जा रहा है
बढ़ती जा रही मांग
जल अगर ना बचा
फिर निकलेगा सांग,
जल जीवन कहलाए
फिर तो इसे बचाए
भविष्य की धरोहर
सोच भविष्य बनाए,
जल बिन जन नहीं
जल बिन नहीं मीन
जल को नष्ट करोगे
दर्द की बजेगी बीन।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
आंसू
अनमोल होते हैं आंसू
पवित्र ये कहलाते हैं
जब आंखों में आते तो
गम की याद दिलाते हैं,
कभी कभी ये आंसू तो
खुशियों से आ जाते हैं
कभी कभी आंसू बहा
रोगों से बच जाते हैं,
आंसू दिल का बयां करे
आंसू गम खुशी इजहार
कभी एक आंसू न आए
कभी गिरे ये कई हजार,
आंसू का मोल नहीं है
पता कर लो बाजार से
अगर धोखा देना बस है
संजोकर रख लो प्यार से।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
आंसू
पहली बार मां से तीनों भाइयों ने मेले में चलने तथा कुछ मनपसंद चीज खरीदने की बात कही तो मां की आंखों में आंसू थे। उनके पति का देहांत हो चुका था। घर में खाने के लिए वो किसी के घर से बर्तन भांडे मांजकर कमाकर लाती थी जिससे पेट भर देती थी। किंतु मां की ममता ने उसे झकोरकर रख दिया। उसे याद आया कि कुछ बिछिया उनके पास हैं जिन्हें बेचकर पैसों का प्रबंध कर मेले में अपने पुत्रों को लेकर चल दी। तीनों ही भाइयों से उनकी मनपसंद चीज दिलाने की बात कही। एक ने बांसुरी तो दूसरे ने खाने की चीजें तो तीसरे ने पूजा के लिए मूर्तियां खरीदी। आगे चलकर एक बांसुरी वादक तो दूसरा होटल मैनेजर वहीं तीसरा मूर्तिकार नाम से प्रसिद्ध हुआ। मां उन्हें देखकर उस दिन को याद कर प्रसन्न हो जाती थी। उनकी कला देखकर आज खुशी के आंसू झलक रहे थे।
** होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से...
आंसू की कीमत नहीं
बहाते रहो संसार में
कोई सुनता कभी नहीं
रोते रहो गर प्यार में।
ताऊ बोला ताई से....
अपनी करनी भुगतते है
संसार का हरेक जीव
अच्छे कर्म अगर करे
तब मिट जाती है पीव,
बुरे कर्मों का फल बुरा
करके देख जरा इंसान
पल में जीवन अंत हो
झटपट मिट जाए शान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**





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