Saturday, December 21, 2019

                             तेल
....इस बार कैरोसीन नहीं आया। अगली बार आना। राशन डिपो होल्डर ने गरीब बूढ़ी से जवाब दिया।
...लेकिन विगत माह भी आपका यही उत्तर था। तब भी आपने अगली बार आने को कहा था। दो माह से घर में खाना पकाने के लिए इधर उधर से लकड़ी इक_ी करनी पड़ रही है। सर्दी का मौसम है। मैं कहा जाऊं? बुजुर्ग महिला ने निराशा भरे शब्दों में कहा।
...तो फिर कहीं भी जाइये। चलो यहां से फूटो। आ जाते हैं सुबह सुबह समय बर्बाद करने। डिपो होल्डर ने क्रोधपूर्ण कहा।
महिला ने फिर हिम्मत करके कहा-लेकिन रामू तो तेल लेकर गया है। उसके हिस्से का तेल आया था?
...हां, हां। उसके हिस्से का तेल आया सो मैंने दे दिया। डिपो होल्डर ने कड़ककर कहा।
टूटे कदमों से आगे बढ़ते हुए बुजुर्ग महिला ने निराशा में कहा-यह सरकार भी गरीबों के साथ अन्याय करती है जिसे तेल की जरूरत है उसके हिस्से का तेल नहीं भेजती और जिन्हें जरूरत नहीं है उनके हिस्से का तेल हर माह आता है। न जाने कहीं डिपो होल्डर तेल को बेचकर ही तो नहीं खा जाते हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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