Friday, December 27, 2019




खुशी में गम
बस खचाखच भरी अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। बारी बारी बस में बैठे सभी व्यक्ति अपनी अपनी बारी आने पर गीत गुनगुनाकर समस्त जनों को प्रसन्न कर रहे थे कि तभी एक फोन आया और  बस में बैठे एक युवक ने उठाया। फोन उठाते ही चीखने लगा। पूछे जाने पर बताया कि उनकी मां कैंसर से पीडि़त थी और उनकी मौत हो गई। सारा माहौल खुशी से गम में बदल गया। सभी की नजरें उस सज्जन एवं उसकी पत्नी पर टिक गई थी। उसे जाना था सम्मान समारोह में किंतु नियति के चलते वापस अपने घर जाने की तैयारियों में जुट गया। बस अपने गंतव्य स्थान पर पहुंची किंतु सभी रास्ते घटना को याद कर खोए खोए लग रहे थे किंतु जिसकी मां चली गई वो दुखी मन से वापस अपने घर की ओर रवाना हो रहा था।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


 




ताई ताऊ संवाद
ताई बोली ताऊ से.......
सर्दी कड़ाके की पड़ती है
ले आओ कुछ शकरकंदी
भूनकर खाते रहेेंगे दिनभर
तबियत हो जा भली चंगी।
ताऊ बोला ताई से........
मूंगफली, गजक ला दूंगा
लाऊं तेरे लिए किशमिश
दिनभर सर्दी खराश लगी
मिट जाएगी ये खिचखिच,
आग सेकते  रहेंगे बैठकर
ओढ़ लेंगे मोटी एक रजाई
मनमर्जी निज  काम करेंगे
नहीं होगी जगत में हंसाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

 




शांत
कोहरे की चादर छाई
पड़ती कड़ाके की ठंड
सूरज डूबा बादलों में
पवन चलती  मंद मंद,
अलसाए लगते तरुवर
घास पर जमे हैं मोती
कोई ठंड में कांप रहा
बच्चियां दूर दराज रोती,
पंछी छुपे बैठे पेड़ों पर
शांत लगता सारा जगत
आग तप रहे यहां वहां
लगे हो  रहे हैं हताहत,
सर्दी और  जुकाम बढ़ी
लिपटे बैठे  रजाइयों में
बुजुर्ग वर्ग अति परेशान
पाला जमा है खाइयों में।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
पुकार
सुन पुकार इन पेड़ों की
हिला हिला पत्ते कहते
मत नहीं हमको सताओ
हम तुम्हारे संग में रहते,
जब-जब कष्ट आता है
रक्षक बनकर आते हम
फिर भी  काटते हो हमें
बस इतना सा  लगे गम,
जीवन दिया हमको भी
जीने का  हमें अधिकार
कभी प्यार से  देख हमें
हम देंगे तुमको भी प्यार,
एक राह के मुसाफिर हैं
संग संग  चलते  जाएंगे
अगर हमारी रक्षा करोगे
हम प्राण तुम्हारे बचाएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा*
 


दूध
सर्दी सता रही मां
पिला दो गर्म दूध
बन जाएंगे इंसान
हम भी तेरे हैं पूत,
सर्दी में अच्छा घी
सेहत बन जाएगी
किशमिश  खाएंगे
बुद्धि बढ़  जाएगी,
स्कूल जाना पड़ता
होता है  कष्ट बड़ा
जिसको भी देखते
लगता  सुस्त  पड़ा,
मां मेरी प्यारी होती
दे मुझे प्यार  दुलार
हर क्षेत्र  में अग्रणी
कभी नहीं हो हार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

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