ताऊ ताई संवाद
ताई बोली ताऊ से.......
कहां गए श्रवण कुमार पूत
मां-बाप के आज्ञाकारी थे
हर कष्ट को सहने वाले वो
पितामह से प्रतिज्ञा कारी थे।
ताऊ बोला ताई से.........
संस्कार अब लुप्त हो गए हैं
आपस में बंटे सभी परिवार
आज्ञा अवज्ञा में बदल चुकी
नहीं रहा राम भरत सा प्यार,
संस्कार विहीन जमाना हुआ
कोई किसी की नहीं सोचता
वक्त बुरा आज आ चला है
जन की रोटी इंसान खोसता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
चले गए
चले गए वो दिन अब
संस्कारवान बच्चे होते
संस्कारविहीन हो गए
बात बात पर जन रोते,
मां बाप देते थे संस्कार
देते दुत्कार और प्यार
बड़ों को नमन करते थे
आशीष देते कई हजार,
गिरावट में आज सभी
मां बाप हो या नर नारी
स्वार्थ भरा युग आ गया
बस रही मतलबी यारी,
आपस का प्यार नहीं है
हो गया इंसान कमजोर
माता पिता और गुरू को
मिलता नहीं बेहतर ठोर,
आएगा लौटकर फिर से
इतिहास स्वयं दोहराएगा
सोया हुआ इंसान जरूर
जागकर नया युग लाएगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
संस्कार
संस्कार वे जगाओ
पास में आ जाओ
दूर नहीं रहे कोई
मंद मंद मुस्कराओ,
मां-बाप और गुरु
होते हैं ईश्वर समान
सेवा करो बड़ों की
बन जाओगे महान,
पाप,अत्याचार बढ़े
और बढ़े हैं लूटपाट
संस्कार घट गए यूं
अपने छोड़ देते साथ,
कब आएगा वो युग
राम भरत जैसा प्यार
एक एक बच्चे में हो
संस्कार कई हजार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
मां
मां दे दो संस्कार अब
समय बदलने वाला है
सारे जग का एक दाता
वो जग का रखवाला है,
कहां हैं भीष्म पितामह
पितृ खातिर करे प्रतिज्ञा
कहां गए वो प्रभु रामजी
संयम से रहना है सीखा,
कहां गए वो श्रवण पुत्र
माता पिता के सेवनहार
मरते दम तक साथ दिया
मानी नहीं कभी भी हार,
कहां गए अब वो बुजुर्ग
देते थे नित्य ही संस्कार
कहां गए वो गुरु हमारे
पहले जैसे नहीं संस्कार।
** होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
ताई बोली ताऊ से.......
कहां गए श्रवण कुमार पूत
मां-बाप के आज्ञाकारी थे
हर कष्ट को सहने वाले वो
पितामह से प्रतिज्ञा कारी थे।
ताऊ बोला ताई से.........
संस्कार अब लुप्त हो गए हैं
आपस में बंटे सभी परिवार
आज्ञा अवज्ञा में बदल चुकी
नहीं रहा राम भरत सा प्यार,
संस्कार विहीन जमाना हुआ
कोई किसी की नहीं सोचता
वक्त बुरा आज आ चला है
जन की रोटी इंसान खोसता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
चले गए
चले गए वो दिन अब
संस्कारवान बच्चे होते
संस्कारविहीन हो गए
बात बात पर जन रोते,
मां बाप देते थे संस्कार
देते दुत्कार और प्यार
बड़ों को नमन करते थे
आशीष देते कई हजार,
गिरावट में आज सभी
मां बाप हो या नर नारी
स्वार्थ भरा युग आ गया
बस रही मतलबी यारी,
आपस का प्यार नहीं है
हो गया इंसान कमजोर
माता पिता और गुरू को
मिलता नहीं बेहतर ठोर,
आएगा लौटकर फिर से
इतिहास स्वयं दोहराएगा
सोया हुआ इंसान जरूर
जागकर नया युग लाएगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
संस्कार
संस्कार वे जगाओ
पास में आ जाओ
दूर नहीं रहे कोई
मंद मंद मुस्कराओ,
मां-बाप और गुरु
होते हैं ईश्वर समान
सेवा करो बड़ों की
बन जाओगे महान,
पाप,अत्याचार बढ़े
और बढ़े हैं लूटपाट
संस्कार घट गए यूं
अपने छोड़ देते साथ,
कब आएगा वो युग
राम भरत जैसा प्यार
एक एक बच्चे में हो
संस्कार कई हजार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
मां
मां दे दो संस्कार अब
समय बदलने वाला है
सारे जग का एक दाता
वो जग का रखवाला है,
कहां हैं भीष्म पितामह
पितृ खातिर करे प्रतिज्ञा
कहां गए वो प्रभु रामजी
संयम से रहना है सीखा,
कहां गए वो श्रवण पुत्र
माता पिता के सेवनहार
मरते दम तक साथ दिया
मानी नहीं कभी भी हार,
कहां गए अब वो बुजुर्ग
देते थे नित्य ही संस्कार
कहां गए वो गुरु हमारे
पहले जैसे नहीं संस्कार।
** होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




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