Saturday, April 30, 2022

                                मितव्ययता
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विधा-छंदमुक्त कविता

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जितनी लंबी चादर हो, उतने पैर पसार,

अधिक खर्च कर डालोगे तो होगी हार,
मितव्ययता रूप हो इस जगत में भली,
करो मितव्ययता करेंगे जग वाले प्यार।।

आदत बन गई कुछ लोगों की जहां में,
अनावश्यक रूप से करते देखे हैं व्यय,
तुर्रा नीचे नहीं होने पर उनका जहां में,
होता है उनका बस मन में यही ध्येय।।

मितव्ययता हो देशहित, पाए जन नाम,
आर्थिक बोझ से बच जाये,सुंदर काम,
बेकार में व्यय करते रहने से बढ़ता है,
आर्थिक बोझ और हो जाएगा बदनाम।।

मितव्ययता की आदत डाल लेना जग,
देखों फिर जहां में होगा जन विकास,
जन परिवार सदा प्रसन्न मिलेंगे तुमसे,
हर जन को मितव्ययता आएगी रास।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400




विवाह/शादी
विधा-कविता
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शादी बंधन दिलों का, खुशी करे इजहार,
आपस में दो दिल बंधे, दिल में हो प्यार।
सदियों से चली आई, परंपरा निभाते हैं,
एक एक दिन बंध जाते जोड़े कई हजार।।

शादी हो दिलों का प्यार, मिले नहीं उधार,
हर जन उम्र आने पर, शादी को हो तैयार।
जब दिल बंधन बंधते, रिश्ता बने अनमोल,
दोनों मुख से निकले सदा, मधुर मधुर बोल।।

मात पिता इस दिन का, करते आये इंतजार,
एक दिन रिश्ता बंध जाये, आये तब बहार।
विवाह में मिलती हैं खुशी, जाने सारा जहां,
अलग रूप में मिलता है, अलौकिक हो प्यार।।

विवाह को विवाह मानते, होते हैं वो मानव,
विवाह में खलल डालते जो, कहलाते दानव।
विवाह रूप जग से अलग, होती बड़ी परंपरा,
पवित्र बंधन को निभाना, सुन ले है मानव।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव

























मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400


Friday, April 29, 2022

 
                        प्रेम
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विधा-कविता

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प्रेम प्रतीक्षा, बड़ा दर्द दे जाती,
तब जाके मिलन घडिय़ा आती,
किस्मत का सेब खेल दिखाती,
खुशियां मिले फिर लौट जाती।

प्रेम प्रतीक्षा, कड़वा होता बाण,
घटती दृष्टि, घट जाती है घ्राण,
प्रेम मिलन में कभी बसे प्राण,
प्रेम बिना लगता जन निष्प्राण।

प्रेम प्रतीक्षा, सदियों से पुरानी,
कहीं हीर हुई कहीं राजा जानी,
प्रेम प्रतीक्षा नहीं, करे मनमानी,
मिलन होता कभी,नहीं हैरानी।

प्रेम मार्ग बहुत कठिन बताया,
चलकर गया उसने कुछ पाया,
मौत को जिसे गले से लगाया,
वो प्रेम में डुबकी लगा पाया।

प्रेम किया जब शीरी फरियाद,
उन्हें हसीं जमाना याद आया,
प्रेम प्रतीक्षा, मीरा ने किया था,
प्रभु श्रीकृष्ण का, प्यार पाया।

लैला मजनूं की जोड़ी जग आई,
दुनिया हँसी,छवि दिल में बसाई,
पर अपने जब बन जाते हैं कसाई,
नाम रह जाता है,कि प्रीत निभाई।

विष का प्याला, जब पी डाला,
मीर बन गई श्रीकृष्ण की प्यारी,
प्रतीक्षा करके जग में पाया नाम,
देखो फिर मिलन घड़ी की तैयारी।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


कविता
नशा
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पीते हैं बीड़ी सिगरेट,
बनाते हैं निज पहचान,
क्या हाल हो एक दिन,
मिलते हैं वो अनजान।।

खा जाती है तन को,
हो जाती तन खांसी,
लगता है तन को तो,
लगा डाली है फांसी।।

धुआं जो उड़ाता हो
एक दिन उड़ जाता,
दुनिया देखती रहती,
उसका बस तमाशा।

आता है एक दिन वो,
हो जाता है जन अंत,
छोड़ दो जहर को अब,
कह गये कितने संत।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400

Thursday, April 28, 2022

                      दिक्कत होती है
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विधा-कविता   
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दिक्कत होती है कभी जब अपना छोड़े साथ,
अपनों के सहयोग का बहुत बड़ा होता हाथ।
बिना साथ के जिंदगी होती है जन की बेकार
जैसे बिन मात पिता के बच्चा मिलता अनाथ।।

दिक्कत होती है कभी जब जाते कभी सुदूर देश,
बोली भाषा बदल जाती बदल जाता जन वेष।
आज के इस जगत में कोई किसी का नहीं मिले,
भाई भाई व भाई बहन में बढ़ता जा रहा है द्वेष।।

दिक्कत होती है कभी जब घट जाते हैं संसाधन,
रोते बिलखते देखा जाता जब ना मिलते साधन।
कलियुग के इस दौर में,इंसान रहता सदा उदास,
सुबह शाम दुपहर में रहता है जन मन से उदास।

दिक्कत होती है कभी,जब नहीं बैठ पाता है मेल,
जिंदगी चार दिनों की होती है, यह होती है खेल।
जीना चाहिए जी भर के चाहे आए सुख व दुख,
एक पिंजरे की पंछी है जैसी हो जाती कोई जेल।।


दिक्कत होती है कभी जब लेता जन कोई उधार,
अपने सारे रूठ जाते हैं, रूठ जाते हैं अपने यार।
पर कभी नहीं सोचना दाता सबके साथ मिलता,
 एक दिन जीत होगी जरूर, जिसको कहते हैं हार।।

दिक्कत होती है कभी, जिसका खो जाता है प्यार,
एक चीज होती है ऐसी नहीं मिलती कभी उधार।
प्यार की जिंदगी होती छोटी पर मिलता है आनंद,
कहते हैं जिंदगानी से बेहतर होते दिन प्यार चार।।

दिक्कत होती है कभी, जब ना मिल पाता है गुरु,
गुरु वो देव होता करवाता है शिक्षा अमृत शुरू।
 बिना गुरु के इंसान मिलता है अंधेरे में ही डूबा,
हर कष्ट में जो साथ निभाए, होता है वो सतगुरु।।

दिक्कत होती है कभी, पकड़े पाप कर्म जन रोज,
सत्कर्मों के बल पर केवल, कर सकता है मौज।
अधर्म और अन्याय से, निश्चित मानों होगा अंत,
सही राह चलने की अब तो कर लो कोई खोज।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
  फोन 09416348400


 


   समन्वयता
 विधा- दोहा मुक्तक
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देख समन्वयता लगा, प्रीत भरा संसार,
हर जन मिलता आज भी, अनमिट दिल में प्यार।।
पाप कर्म इंसान को, ले जाता जग दूर,
मिलकर जन से चालिये, वरना होगी हार।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* डा होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा