Saturday, December 21, 2019

                              लघुकथा आस्था
संत लालदास महाराज ने अपने भक्तों को शरद पूर्णिमा की विभिन्न मेवे एवं औषधियों वाली खीर अपने हाथों से परोस दी। अब कोई खीर शेष नहीं बची थी। अभी मंत्र जाप करके खीर का स्वाद चखने ही वाले थे कि अति व्यथिथ कुष्ठ रोग से पीडि़त एक व्यक्ति ने हाथ पसारते हुए कहा-मुझे भी कुछ खीर दो। सुना है कि आपके हाथों से बनी शरद पूर्णिमा की खीर खाकर कुष्ठ रोग भी दूर हो जाते हैं। प्रसाद चखने वालों ने रोगी को देखा तो उनकी आंखें भर आई और झटपट सभी ने अपने अपने हिस्से की खीर में से एक एक अंश दिया। रोगी ने त्वरित गति से खीर को चखा और पूरे जोश से खुश होकर पुकारा-अब मैं ईश्वर और बाबा लालदास की कृपा से स्वस्थ हो जाऊंगा। रोगी प्रसन्नचित मुद्रा में अपने गंतव्य मार्ग पर बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

No comments: