कलियुग
बेटों ने बुजुर्ग को सताने में कसर नहीं छोड़ी। चूंकि पेंशन लेकर आता था। ऐसे में सभी बेटे पेंशन का अधिक हिस्सा चाहते थे जिसके चलते उसे पीट पीटकर पेंशन पाना चाहते। कई बार उसे डराया धमकाया गया किंतु पेंशन दे देगा तो बेचारे का महीने भर का छोटा मोटा काम ही रुक जाएगा। किंतु बेटे कब मानने वाले थे। उन्होंने तो उसे इतना पीटा कि पेंशन देने को मजबूर होना पड़ा। पेंशन छीनकर बुजुर्ग को घर से बाहर धकेल दिया। ठंड में कांप रहा था। तभी उनकी पुत्री को सूचना मिली तो दौड़कर ससुराल से आई। अपने पिता की दुर्गति देख आंसू टपकाने लगी। पिता को अपना शाल ओढ़ाकर उसे अविलंब अपने ससुराल ले गई और उसकी सेवा में जुट गई। बुजुर्ग ने बेटी को देखा तो आंखों में आंसू आ गए और कहा-सचमुच बेटों से कहीं अधिक बेटी अपने पिता को चाहती है। सच ही कहा है कि बेटी एक नहीं अपितु दो घरों की देखभाल करती है। कलियुग में बेटे बाप के हत्यारे हो सकते हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाण**
बेटों ने बुजुर्ग को सताने में कसर नहीं छोड़ी। चूंकि पेंशन लेकर आता था। ऐसे में सभी बेटे पेंशन का अधिक हिस्सा चाहते थे जिसके चलते उसे पीट पीटकर पेंशन पाना चाहते। कई बार उसे डराया धमकाया गया किंतु पेंशन दे देगा तो बेचारे का महीने भर का छोटा मोटा काम ही रुक जाएगा। किंतु बेटे कब मानने वाले थे। उन्होंने तो उसे इतना पीटा कि पेंशन देने को मजबूर होना पड़ा। पेंशन छीनकर बुजुर्ग को घर से बाहर धकेल दिया। ठंड में कांप रहा था। तभी उनकी पुत्री को सूचना मिली तो दौड़कर ससुराल से आई। अपने पिता की दुर्गति देख आंसू टपकाने लगी। पिता को अपना शाल ओढ़ाकर उसे अविलंब अपने ससुराल ले गई और उसकी सेवा में जुट गई। बुजुर्ग ने बेटी को देखा तो आंखों में आंसू आ गए और कहा-सचमुच बेटों से कहीं अधिक बेटी अपने पिता को चाहती है। सच ही कहा है कि बेटी एक नहीं अपितु दो घरों की देखभाल करती है। कलियुग में बेटे बाप के हत्यारे हो सकते हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाण**
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