Tuesday, March 31, 2026



     ओलावृष्टि
जमकर हुई ओलावृष्टि,
कृषक पड़ी मार कसूती।
मुआवजे की मांग करेंगे,
किस्मत भी लगती रूठी।।
कितनी मार सहन करके,
उगाई थी अपनी फसल।
आज कल पैदावार लेंगे,
वर्षा में फसल गई गल।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


   बादल
बादल छाते आकाश में,
दर्द सीने में हो किसान।
अंधड़, ओलावृष्टि को,
मानते कृषक के शैतान।।
गर्मी,सर्दी सहकर सींचे,
खेत में चलाता रहे हल।
मुश्किल से फसल उगा,
मिले आधा अधूरा फल।।
*डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

Sunday, March 29, 2026


    

      बिछुडऩा
पता नहीं कब कौन बिछुड़ता,
अपने तन मन में प्रीत जगा ले।
पाप,अहित का छोड़कर चोला,
परहित धर्म की प्रीत सजा ले।।
कितने पापी आये गये जग से,
उनको कोई भी नहीं याद करे।
आगे पीछे न कोई याद करेगा,
लाखों कीड़ों की भांति वो मरे।।
**होशयार सिंह यादव,कनीना
जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा***

          डीजे
डीजे बजते चहुं ओर अब,
जमकर फोड़ रहे है कान।
डीजे बजाकर इंसान जहां,
समझ रहा बढ़ गई है शान।।
बहरे होंगे कितने ही लोग,
बढ़ जाएंगे पेट के भी रोग।
गिर सकते जन मकान भी,
करनी का फल पड़ता भोग।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, महेंद्रगढ़, हरियाणा


Friday, March 27, 2026

 
         महिमा



राम नाम की महिमा देखो,
पत्थर भी जल में जाते तैर।
नजरों से उसकी गिर जाए,
तीन जहान में नहीं हो खैर।।
पापी कितने जग पार उतारे,
निज भक्तों का भाग्य संवारे।
उसके आगे नहीं एक चले,
सोच समझकर तब उच्चारे।।
** होशियार सिंह कनीना,
जिला-महेंद्र्रगढ़, हरियाणा*
         मार
बरसात झमाझम हो रही है,
निकली है किसान की जान।
फसल तो बर्बाद हो जाएगी,
इंद्र को हो गया अभिमान।।
सरसों भीगी,गेहूं खराब हो,
कैसी वृष्टि की पड़ी है मार।
देख देखकर मायूस हैं जन,
मेहनत हो रही अब बेकार।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***

Wednesday, March 25, 2026

 
        संकट



छा गये संकट के बादल,
परमाणु युद्ध की आगाज।
ईरान-अमेरिका युद्ध का,
किसके सिर बंधेगा ताज।।
महंगाई की ये मार पड़ेगी,
दुनियां भर में गर्मी बढ़ेगी।
समझ नहीं ये आएगी तो,
सारी दुनिया युद्ध लड़ेगी।
डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा*


        नवरात्रि
नवरात्रि संपन्न को आये,
कंजकों का होगा सम्मान।
कढ़ाई करें,कंजक जिमाए,
माता अंबे की बढ़ेगी शान।।
जवारे को मत नहीं फेंकना,
जूस बनाकर जरूर पी लेना।
कैंसर को भी रोक देती यह,
ये सच्ची शिक्षा सबको देना।।
**डा. होशियार सिंह यादव
वनस्पति शास्त्री,कनीना,हरि.


Monday, March 23, 2026

     


   फांसी
नहीं झुके और नहीं डिगे वो,
आगे बढ़कर फांसी खाई थी।
हजारों वीरों ने दी थी कुर्बानी,
तब देश की आजादी आई थी।।
फांसी खाकर दिया था पैगाम,
वीरों की भूमि भारत है नाम।
अधूरा सपना पूरा हो चुका है,
करना याद आजादी की शाम।।
**होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***

        कढ़ाइयां
नवरात्रों को शुभ मानकर,
कढ़ाई और हो रहे हैं रोट।
अपने मन को शुद्ध करते,
मार रहे हैं पापों को चोट।।
जीवन का हो एक मकसद,
परहित, भलाई करना काम।
अहित,पाप में डूबे आकंठ,
एक दिन हो जाते बदनाम।।
** होशियार सिंह यादव
कनीना, महेंद्रगढ़,हरियाणा

Saturday, March 21, 2026

 
    चैत्र नवरात्रे
सर्द नवरात्रे अति सुहाने,
मां की पूजा होती 9 रूप।



भक्त खुशी से आते धाम,
रंक, नर,नारी या हो भूप।।
जप,तप,व्रत के दिन होते,
कर लो पूजा दिन व रात।
दीन हीन सब दूर मिलेंगे,
शुभ बनेंगे घर के हालात।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**
         बदलाव
नहीं बदले, कुछ नहीं बदलेंगे,
पता न क्या क्या कर दिखाएंगे।
आदत से मजबूर हो गये लोग,
कुछ मर गये, कुछ मारे जाएंगे।।
कुत्ते भांति टांग उठाकर मूतते,
हगते हुए भी कुछ गीत गाएंगे।
अच्छे जन को दूर भगा देंगे वो,
नीच,पापी को गले से लगाएंगे।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना
महेंद्रगढ़, हरियाणा*******

Thursday, March 19, 2026


  बेमौसमी वर्षा
किसानों की फसल पकी है,
ओले,अंधड़, वर्षा का कहर।
तबाह होती है जब मेहनत तो,
पीना पड़ता तब कड़वा जहर।।
गेहूं की खड़ी फसल गिर गई,
इकट्ठी की हुई सरसों उड़ गई।
सर्दी और जाड़े की मार सहके,
सारी आशाएं मिट्टी में मिल गई।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना

             एहसास
गर्मी में सर्दी का हुआ एहसास,
बैमौसमी वर्षा नहीं आती रास।
ओलावृष्टि देख अटक गई सांस,
गेहूं, सरसों में हुआ है कुछ नाश।।
ईश्वर देता और वो ही अब लेता,
कभी भर देता कभी रख दे रीता।
करते रहना अथक प्रयास जगत,
जो सफल हुआ समझ लो जीता।।
डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़,हरि

Tuesday, March 17, 2026

 
          गौसेवा
पाप दोष सब दूर मिलेंगे,



कर लेना गायों की सेवा।
जग की उत्तम सेवा कहते,
मिल जाते जग फल मेवा।।
श्रीकृष्ण गोपाल बने कभी,
दूध-मक्खन लगाया भोग।
सुदर्शन चक्र धारण किया,
अजब गजब का ये संजोग।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,हरि. विश्वरिकार्डधारक
    चेहरा
गुणों को नहीं देखते अब,
चेहरा सब कुछ मानते हैं।
धोखा खाते सरेआम जन,
सचाई नहीं पहचानते हैं।।
उजला चेहरा देखके माने,
यह तो है गुणों की खान।
अज्ञानी,मूर्ख,अधम बेशक
बस उसे समझते है महान।।
**होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

Sunday, March 15, 2026

 
   आग



सबसे विनाशक आग कहो,
मन ही मन जलते जब लोग।
कतई राख बन जाती पल में,
कैसी सोच जन कैसा है रोग।।
कलुषित मानसिकता रखते हैं,
समाज के दुश्मन कहलाते हैं।
जन जन की खुशियां देखकर,
उनकी आंखों से आंसू बहते हैं।।
**डा. होशियार सिंह यादव,
विश्व रिकार्डधारक, कनीना**





           ख्वाब
कर्म बुरे इंसान के, चाहत ऊंचे ख्वाब,
साधारण गडरिया, बनना चाहे नवाब।
पिटाई का पात्र भी,चाहे पगड़ी धारण,
आशु कवि ख्वाब में देखे भाठ चारण।।
कद्र नहीं जो जानता,चाहे खूब सलाम,
गुलामी की जिंदगी,चाहत कई गुलाम।
धर्म,कर्म,परहित को मिले स्वर्ग धाम,
ऐसे पवित्र जन को करें लोग सलाम।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़, हरियाणा







Friday, March 13, 2026

 

           ख्वाब
कर्म बुरे इंसान के, चाहत ऊंचे ख्वाब,
साधारण गडरिया, बनना चाहे नवाब।
पिटाई का पात्र भी,चाहे पगड़ी धारण,
आशु कवि ख्वाब में देखे भाठ चारण।।
कद्र नहीं जो जानता,चाहे खूब सलाम,
गुलामी की जिंदगी,चाहत कई गुलाम।
धर्म,कर्म,परहित को मिले स्वर्ग धाम,
ऐसे पवित्र जन को करें लोग सलाम।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़, हरियाणा


सिलिंडर की मारामारी
युद्ध छिड़ा कई देशों में,
विश्वयुद्ध की है तैयारी।
तेल, गैस की कमी हुई,
सिलिंंडर की मारामारी।।
धांसे,उपले काम आएंगे,
लकड़ी जला बने रोटी।
समझ न पाये वक्त मार,
उसकी अक्ल है मोटी।।
**डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरि.


Thursday, March 12, 2026


    जग चक्र
कितने आये कितने ही गये,




जन का चक्र बहुत पुराना है।
कौन किसी को याद करेगा,
पूरे जग ने भी यह माना है।।
सोच समझके काम करो यूं,
जन-जन में नाम कमाना है।
पाप,अहित यहां छोड़ जाना,
धर्म ,कर्म संग ले जाना है।।
*डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा






Tuesday, March 10, 2026

 
        खाने के ढेर
बासौड़ा के नाम पर लगे हैं,
चौराहों पर खाने के ही ढेर।
कुत्ते,सुअर छक गये खाकर


,
बुधवार को डालेंगे जन फेर।।
तीन सप्ताह चलता बासौड़ा,
अजब गजब हैं रीति रिवाज।
संस्कृति को देख देखकर के,
होता हर जन को ही नाज।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़,हरि.

        घड़े
देसी फ्रिज नाम पड़ा घड़ा,
गर्मी में जन कर दे मलंग।
फ्रीज का ये रूप कहलाते,
अंग अंग में भर देते उमंग।।
बीमार नहीं हो सकते लोग,
दूर कर देते हैं जन के रोग।
हर जगह मिल जाएंगे सोच,
तन मन को कर देंगे निरोग।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***

Sunday, March 08, 2026


 


           बासौड़ा
बासी भोजन खाने वाले जन
चेचक रोग से बच जाते हैं।
बासौड़ा का पर्व बताता अब,
बासी से निज भाग्य जगाते हैं।
बुजुर्गों का पर्व बहुत सुहाना,
परिवार खाता है बासी खाना।
एकता,भाईचारे का मिसाल है,
जन-जन से बस इतना माना।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**

        साथी
निर्धन का साथी कोई नहीं,
बस केवल ऊपर वाला है।
जिस किस पर विश्वास करे,
फेरे निज हित की माला है।।
स्वार्थ भरा संसार कहलाए,
पाप,अहित में डूबे हैं लोग।
पीठ पे बुराई करने का यह,
बहुत बुरा लगा जन रोग।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**

Saturday, March 07, 2026

 

        साथी
निर्धन का साथी कोई नहीं,
बस केवल ऊपर वाला है।
जिस किस पर विश्वास करे,
फेरे निज हित की माला है।।
स्वार्थ भरा संसार कहलाए,
पाप,अहित में डूबे हैं लोग।
पीठ पे बुराई करने का यह,
बहुत बुरा लगा जन रोग।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**

     ताले
नहीं मानते हार कभी हम,
वो हिम्मत रखने वाले हैं।
सीधी सादी वेशभूषा लगे,
सच्चे मन के नहीं काले हैं।।
सोच लिया कर दिखलाते,
पीछे हटना फिर बात नहीं।
दुष्टों को सबक सिखा देते,
नहीं खुल पाये वो ताले हैं।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**




Thursday, March 05, 2026

 

           पाप
पाप बढ़ाये धरती पर, कहते हमने उपकार किया,
दान नाम की आड़ ली, कितने ही निर्धन खून पिया।
कुतरूं बनकर आये जग, मेहनतकश को दर्द दिया,
चंद पैसों की लालच दे,नारी का चरित्र हरण किया।।
ढोंग रचाया मंदिर बैठे, धन दौलत को साफ किया,
असली रूप छिपा रखा, ऐसा क्या वो जीवन जीया।
झूठ बोलकर लोगों से, धन ऐंठा और इंसाफ किया,
सता आत्मा लोगों की, अधर्म, पाप,अभिशाप लिया।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा

           लावणी
होली तो अब हो ली,लावणी की कर तैयारी,
दिन रात मेहनत की,किसान को फसल प्यारी।
गेहूं,सरसों खड़ी हुई, सरसों पक कर है तैयार,
करोड़ों का पेट भरे,कृषि जीवन का है आधार।।
मार्च-अप्रैल लावणी चले,मिले किसान व्यस्त,
जाते हैं खेतों में, आते हैं जब सूर्य होता अस्त।
फटेहाल में जीता है,किसान की सुन लो पुकार,
कभी पाले की मार तो कभी ओलावृष्टि की मार।
**डा. होशियार सिंह यादव, कनीना, महेंद्रगढ़
विश्व रिकार्डधारक , हरियाणा**********


Tuesday, March 03, 2026

     होली दहन



होलिका अब जल चुकी,
जन गीत खुशी के गाते हैं।
भक्त प्रह्लाद बचाने खातिर,
बस प्रभु को शीश नवाते हैं।।
नरसिंह अवतार लिया जब,
हिरण्याकश्यप संहार किया।
दाता-भक्त के बीच प्रेम का,
अनमिट सकल उपहार दिया।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,जिला-महेंद्रगढ़,हरि.

रंगों का पर्व
रंगों में रंग गये जन,होली का है त्योहार,
रंग डाले, पिचकारी मारे,उभरे रंग हजार।
नाराजगी गायब मिलती,रंग भरा है प्यार,
गम छोड़ खुशी मिले,जीवन का आधार।।
सप्तरंगी चेहरे बने,काले, पीले या लाल,
हाथ मिले, गले मिले,पूछ रहे सब हाल।
कुछ भांग के नशे में डूबे,बदली है चाल,
आपस के प्रेम को देख ऊंचा होता भाल।।
**डा. होशियार सिंह यादव, कनीना



Monday, March 02, 2026


 

       कसम
कसम उठाते लाख जहां में,
फिर इक दिन जाना होता है।
इतने दिन जो साथ रहा था,
बस उनकी यादों में खोता है।।
मौत जहां में सबको मिलती,
भेदभाव नहीं कभी करती है।
कितने दर्द में डूबा इंसान हो,
एक झटके से सभी हरती है।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

    होली दहन
होलिका अब जल चुकी,
जन गीत खुशी के गाते हैं।
भक्त प्रह्लाद बचाने खातिर,
बस प्रभु को शीश नवाते हैं।।
नरसिंह अवतार लिया जब,
हिरण्याकश्यप संहार किया।
दाता-भक्त के बीच प्रेम का,
अनमिट सकल उपहार दिया।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,जिला-महेंद्रगढ़,हरि.