भैया दूज
पिता जी-मैं अपनी बहन से मिलने जाना चाहता हूं। हमारे शिक्षक बता रहे थे कि भैया दूज के दिन बहन अपने भाई का इंतजार करती है और भैया दूज पर्व सचमुच बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को बढ़ावा देता है, रामू ने पूछा।
रमेश ने उत्तर दिया-बेटा, तुम्हारे तो बहन ही नहीं है।
....तो फिर मुझे मौत से डरना होगा, रामू ने रुआसे चेहरे से कहा।
रमेश ने बड़े अचरज से पूछा-ऐसा क्या कह रहे हो बेटा।
रामू ने उत्तर दिया-हमारे शिक्षक कह रहे थे कि जो भैया दूज को अपनी बहन के दर्शन करके यमुना नदी में गोता लगाता है उसे यमराज एवं मौत की कोई चिंता नहीं है किंतु अब समझ आया कि बहन अभाव में तो मेरा जीवन एवं प्राण संकट में पड़ सकते हैं।
पिता पुत्र को दिलासा दे रहा था कि ऐसा कुछ नहीं है। देखना तेरी जिंदगी में अनेकों खुशियां आएंगी। ....पर पिता की बात उनके गले से नहीं उतर रही थी।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
पिता जी-मैं अपनी बहन से मिलने जाना चाहता हूं। हमारे शिक्षक बता रहे थे कि भैया दूज के दिन बहन अपने भाई का इंतजार करती है और भैया दूज पर्व सचमुच बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को बढ़ावा देता है, रामू ने पूछा।
रमेश ने उत्तर दिया-बेटा, तुम्हारे तो बहन ही नहीं है।
....तो फिर मुझे मौत से डरना होगा, रामू ने रुआसे चेहरे से कहा।
रमेश ने बड़े अचरज से पूछा-ऐसा क्या कह रहे हो बेटा।
रामू ने उत्तर दिया-हमारे शिक्षक कह रहे थे कि जो भैया दूज को अपनी बहन के दर्शन करके यमुना नदी में गोता लगाता है उसे यमराज एवं मौत की कोई चिंता नहीं है किंतु अब समझ आया कि बहन अभाव में तो मेरा जीवन एवं प्राण संकट में पड़ सकते हैं।
पिता पुत्र को दिलासा दे रहा था कि ऐसा कुछ नहीं है। देखना तेरी जिंदगी में अनेकों खुशियां आएंगी। ....पर पिता की बात उनके गले से नहीं उतर रही थी।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
महान
मलिन कपड़े पहने युवक मंदिर के बाहर उस जगह खड़ा था जहां लोग मंदिर के अंदर गोवर्धन पर्व पर चल रहे प्रसाद वितरण में पत्तल पर खाना छोड़कर बाहर फेंक रहे थे। वो हर पत्तल को साफ करता और उसका खाना एक चौड़े बर्तन में इकट्ठा कर रहा था। पत्तलों को तरतीब से इक_ा करते देख कोई उसे भिखारी तो कोई कंजूस तो कोई पागल कह रहा था। जब तक प्रसाद वितरण चला उसने वैसा ही किया। जब प्रसाद वितरण बंद हुआ युवक पत्तलों को इक_ी करके बांधकर एक हाथ में लेकर चल दिया वहीं पत्तलों से इक_ा किया खाना सिर पर रख ...
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मलिन कपड़े पहने युवक मंदिर के बाहर उस जगह खड़ा था जहां लोग मंदिर के अंदर गोवर्धन पर्व पर चल रहे प्रसाद वितरण में पत्तल पर खाना छोड़कर बाहर फेंक रहे थे। वो हर पत्तल को साफ करता और उसका खाना एक चौड़े बर्तन में इकट्ठा कर रहा था। पत्तलों को तरतीब से इक_ा करते देख कोई उसे भिखारी तो कोई कंजूस तो कोई पागल कह रहा था। जब तक प्रसाद वितरण चला उसने वैसा ही किया। जब प्रसाद वितरण बंद हुआ युवक पत्तलों को इक_ी करके बांधकर एक हाथ में लेकर चल दिया वहीं पत्तलों से इक_ा किया खाना सिर पर रख ...
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दीपावली
दस रुपये देना बेटा,बाबानुमा शख्स ने हाथ पसारते हुए आवाज लगाई।
सब्जी पूड़ी बेचने वाले ने कहा-बाबा, आओ। अभी बोहनी बट्टा भी नहीं हुआ है किंतु बाबा आज दीपावली है, आपको भरपेट खाना खिलाऊंगा।
नहीं, नहीं, मुझे तो दस रुपये ही चाहिए-बाबानुमा शख्स ने कहा।
तो फिर आपको पैसे से क्या करना है? आखिरकार हम कमाते हैं तो बस रोटी के लिए। अगर बच्चे भूखे हैं तो उन्हें भी ले आओ, मैं आज उन्हें भी भरपेट खाना खिलाऊंगा। कपड़े नहीं है तो पुराने वस्त्र मेरे बच्चों के हैं जो तुम्हें दे दिए जाएं...
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दस रुपये देना बेटा,बाबानुमा शख्स ने हाथ पसारते हुए आवाज लगाई।
सब्जी पूड़ी बेचने वाले ने कहा-बाबा, आओ। अभी बोहनी बट्टा भी नहीं हुआ है किंतु बाबा आज दीपावली है, आपको भरपेट खाना खिलाऊंगा।
नहीं, नहीं, मुझे तो दस रुपये ही चाहिए-बाबानुमा शख्स ने कहा।
तो फिर आपको पैसे से क्या करना है? आखिरकार हम कमाते हैं तो बस रोटी के लिए। अगर बच्चे भूखे हैं तो उन्हें भी ले आओ, मैं आज उन्हें भी भरपेट खाना खिलाऊंगा। कपड़े नहीं है तो पुराने वस्त्र मेरे बच्चों के हैं जो तुम्हें दे दिए जाएं...
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दीवाला
एटीएम समक्ष लंबी कतार लग रही थी। सभी दीपावली के दिन पैसे निकालने की फिराक में कतारबद्ध खड़े थे। आधे घंटे से एक पागल सा दिखने वाला युवक एटीएम में पैसे पर पैसे निकाल रहा था। कभी एक जेब में डाले एटीएम कार्ड प्रयोग कर रहा तो कभी दूसरी जेब के एटीएम प्रयोग कर रहा था। लाइन में खड़े लोग तंग आ चुके थे। बार बार उससे जल्दी करने की बात कह रहे थे किंतु वो कब मानने वाला था। लाइन में खड़े एक अधेड़ से रहा नहीं गया और कहा-भाई, यह पर्व दीवाली का है। इस पर्व का दीवाला मत निकाल। देख पीछे भी कितने लोग दीपावली मनाने वाले पैसे निकालने के चक्कर में है। तेरे एक के कारण कितने लोग परेशान हो रहे हैं। युवक ने रोष में आकर कहा-मेरा एटीएम कार्ड, मेरे पैसे मैं जितनी देर निकालूं, तुम्हें क्या? अधेड ने कहा-अच्छा भाई, जब तक एटीएम से पैसे खत्म न हो जाए तब तक निकालते रहो।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
एटीएम समक्ष लंबी कतार लग रही थी। सभी दीपावली के दिन पैसे निकालने की फिराक में कतारबद्ध खड़े थे। आधे घंटे से एक पागल सा दिखने वाला युवक एटीएम में पैसे पर पैसे निकाल रहा था। कभी एक जेब में डाले एटीएम कार्ड प्रयोग कर रहा तो कभी दूसरी जेब के एटीएम प्रयोग कर रहा था। लाइन में खड़े लोग तंग आ चुके थे। बार बार उससे जल्दी करने की बात कह रहे थे किंतु वो कब मानने वाला था। लाइन में खड़े एक अधेड़ से रहा नहीं गया और कहा-भाई, यह पर्व दीवाली का है। इस पर्व का दीवाला मत निकाल। देख पीछे भी कितने लोग दीपावली मनाने वाले पैसे निकालने के चक्कर में है। तेरे एक के कारण कितने लोग परेशान हो रहे हैं। युवक ने रोष में आकर कहा-मेरा एटीएम कार्ड, मेरे पैसे मैं जितनी देर निकालूं, तुम्हें क्या? अधेड ने कहा-अच्छा भाई, जब तक एटीएम से पैसे खत्म न हो जाए तब तक निकालते रहो।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
सलाह
पूरे बस स्टैंड से अनाज मंडी तक मार्ग पर अतिक्रमण का बोलबाला देख देख लोग परेशान थे। कहीं से भी रास्ते से निकलने की जगह नहीं थी। एक पुलिस की वैन जिसमें एक चालक तथा एक मरियल कांचल सा पुलिस का एएसआई अपनी वर्दी के रोब में जा रहे थे कि एक शरीफ सा अधेड़ सिर पर साफा बांधकर तिराहे पर एक साइड में खड़ा था। पुलिस की वैन व्यक्ति के पास से गुजरने लगी तो मरियल सा पुलिस का वो एएसआई अपनी वर्दी के रोब में अधेड़ से कहने लगा-अरे, ओ! पीछे होकर खड़े हुआ कर। अधेड़ ने एक बार पीछे देखा तो रेहडि...
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पूरे बस स्टैंड से अनाज मंडी तक मार्ग पर अतिक्रमण का बोलबाला देख देख लोग परेशान थे। कहीं से भी रास्ते से निकलने की जगह नहीं थी। एक पुलिस की वैन जिसमें एक चालक तथा एक मरियल कांचल सा पुलिस का एएसआई अपनी वर्दी के रोब में जा रहे थे कि एक शरीफ सा अधेड़ सिर पर साफा बांधकर तिराहे पर एक साइड में खड़ा था। पुलिस की वैन व्यक्ति के पास से गुजरने लगी तो मरियल सा पुलिस का वो एएसआई अपनी वर्दी के रोब में अधेड़ से कहने लगा-अरे, ओ! पीछे होकर खड़े हुआ कर। अधेड़ ने एक बार पीछे देखा तो रेहडि...
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