घमंड
विदेश से शिक्षा पाकर आए राजू को सिर इतना चढ़ गया कि वो किसी से मिलना तो दूर बात करना भी शान के विरुद्ध समझता था। आलम यह हुआ कि कोई उससे बात नहीं करता। उसके घर भी आना जाना छोड़ दिया। एक दिन वो आ गया कि उनके घर के पास से गुजरने वालों को वह अपने घर बुलाने का प्रयास करता किंतु लोग यह कहकर आगे बढ़ जाते-छोड़ो, इसे यह तो पागल है। अब तो वो समय आ गया कि वह एकांत में पड़ा रहता। कुछ दिनों तक दिखाई न देने पर घर से बदबू आने लगी। लोगों ने घर में झांककर देखा तो वो राजू मरा पड़ा था और लाश सड़कर कीड़े पड़ गए। जिसने भी मौत के बारे में सुना बस मुंह से निकला-यह तो घमंडी था, अंत तो होना ही था।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
विदेश से शिक्षा पाकर आए राजू को सिर इतना चढ़ गया कि वो किसी से मिलना तो दूर बात करना भी शान के विरुद्ध समझता था। आलम यह हुआ कि कोई उससे बात नहीं करता। उसके घर भी आना जाना छोड़ दिया। एक दिन वो आ गया कि उनके घर के पास से गुजरने वालों को वह अपने घर बुलाने का प्रयास करता किंतु लोग यह कहकर आगे बढ़ जाते-छोड़ो, इसे यह तो पागल है। अब तो वो समय आ गया कि वह एकांत में पड़ा रहता। कुछ दिनों तक दिखाई न देने पर घर से बदबू आने लगी। लोगों ने घर में झांककर देखा तो वो राजू मरा पड़ा था और लाश सड़कर कीड़े पड़ गए। जिसने भी मौत के बारे में सुना बस मुंह से निकला-यह तो घमंडी था, अंत तो होना ही था।
***होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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