त्रिपदी लेखन
शब्द-अमृत/अमिय/पीयुष
**********************************
***********************************
फूल का अमृत पीने को है आतुर भंवरा।
कलियों को रिझाने को है आतुर भंवरा।
गीतों से हंसाने को है आतुर भंवरा।
***************
*होशियार सिंह यादव
-प्यार की पाठशाला
विधा-गद्य
*************************************



*****************************
प्यार शब्द बड़ा सरल, होते रूप हजार,
दुनिया की यह दौलत,मिले नहीं उधार,
पाठशाला न प्यार की, कहते हैं सुजान,
प्यार की कीमत बड़ी, यह है जन शान।
जब से सृष्टि बनी है, तब लबों पे आया,
बड़ी अजीब चीज है,इसने खूब रुलाया,
कभी हंसाया जन को, पाया न कोई पार,
ये हैं ऐसे पल दो पल, खुशी मिले हजार।
सबसे सरल शब्द है,कहनेे में लगता डर,
लबों पर धारण कर,कितने हुये है अमर,
नहीं बनी अभी तक, प्यार की पाठशाला,
अगर यह बन जाये, जगत में हो उजाला।
हीर रांझा हुये और हुये, सोहनी महिवाल
कितने युगल जान दी, प्यार हुआ था खास,
शीरी और फरियाद हुये, और लैला मजनू,
प्यार परिभाषा सीखी, जग आया नहीं रास।
प्यार की पाठशाला बने, सीखाये नया पाठ,
खुशियों का सवेरा हो, हो जाये जन के ठाठ,
आयेगा वो दिन भी जब,पढेंग़े शिक्षा ये प्यार,
इसके बिन जीवन निरस, है जग का आधार।
***************
*होशियार सिंह यादव
सुनो
******************************
*******************************
******************************
पाप के यौवन पर जाने के बाद पुण्य, दुख की पराकाष्ठा के बाद सुख, हानि के बाद लाभ की पुनर्वावृत्ति होती है।
*************************
-होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा
दोहा
****************************
धर्म, कर्म जग से घटे, पाप, दोष का शोर।
जनहित की जो सोचते, वे जन के सिरमोर।।
****************************
-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
नमन दोहा ****************************
बहुत दर्द में जी रहा, इस जग का इंसान।
अपने घर में कैद है, रोग, दोष पहचान ।।
****************************
धर्म, कर्म जग से घटे, पाप, दोष का शोर।
जनहित की जो सोचते, हर जन के सिरमोर।।
-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
शब्द-दादुर
****************************
दादुर जल, थल पर मिले, छेड़े सुंदर तान।
बारिश की पहचान है, इनका सुंदर गान।।
****************************
-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
नमन दोहा धुरंधर
शब्द-संजीवनी
****************************
द्रोण अचल जगमग करे, सुन मारुति अरदास।
संजीवनी समझ गिरी, लाये प्रभु के पास।।
****************************
-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
मेरा दर्द
विधा-पद्य(कविता)
*******************************
******************************
***************************
बुढ़ापा बैरी आ गया,खूब बढ़ गया दर्द,
खाना पीना कठिन हुआ, कभी मारे सर्द,
बच्चों की चिंता बढ़ी, हो गये हैं खुदगर्ज,
आज असहाय लग रहा, हट्टा कट्टा मर्द।
दांत काम नहीं करते, मन करता मीठे का,
नहाना धोना मुश्किल, शैंपू मिले रीठे का,
पत्नी खुद दर्द में रहती, कोई न जाने मर्ज,
ज्यों ज्यों बुढ़ापा आया,बढ़ गया मेरा दर्द।
याद आता बचपन सुहाना,याद है जवानी,
क्या लुत्फ उठाते थे, किया करते मनमानी,
हाथों पर रखे मां बाप, निभाया निज फर्ज,
बेटे, पोते किसके होते, जनते ना मेरा दर्द।
आती हैं पुरानी यादें, क्या क्या करते खेल,
दोस्त,साथी,सगे रहते, होता था सुंदर मेल,
अब बुढ़ापा बैरी आया, लगे जैसे हो जेल,
कोट पेंट पहनते थे, भूल गये खुशबू तेल।
ये दर्द किसी में न आये, सता रहा हजार,
घर में कैद रहकर अब, जीवन है बेकार,
चाहते हुये प्रभु न उठाये, दर्द का खुमार,
जैसे भी जीवन अब बीते,सुविधा दो चार।।
मनुज सवैया
****************************
**************************





*******************************
रहते-रहते सहते सहते, सबको भवपार उतार उतारे वह,
धरती पर जो न सुखी जन हो, जग में दुख काम कराते वह,
जग को खुश वो करते रहते, सबके मन को बहलाते वह,
जन कारण है कुछ खास बने, छवि धोकर नाम कमाते वह।
************************
*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
फोन 09416348400
दोहा
****************************
1.
आशा,जन,विश्वास पर, टिका हुआ संसार।
हिम्मत के बल जो बढ़े, मिलता जग का प्यार।
2.
जन उम्मीदों पर टिका, ये जीवन आधार।
नेक नियत से जो बढ़े, मिले जहॉँ का प्यार।।
3.
अपेक्षा हो आसमॉं, रखना दृढ़ विश्वास।
फेल कभी जन हो नहीं, हिम्मत पर हो आश।।
4.
दिल में हो गर हौसला, आशा से हो काम।
जीत कदम तब चूमती, जग में होगा नाम।।
5.
आशा, हिम्मत साथ हो, बढ़ता जन में जोश।
हारे जब जन हौसला, तो प्रभु का क्या दोष।।
जलन
**********************
बात कौन सी दर्द करे, जलन कइयों को होती है,
ईष्र्या और द्वेष में जीते, उनकी किस्मत खोटी है।
धन पर पैठ मारकर बैठे,यह नहीं कोई बपौती है,
निर्धन हो या अमीर हो, दोनों को मिलती रोटी हैं।
गरीब जन रूखी सूखी खाये,दर्द एक यह रोटी है
बिना बात की बात करे वो,बुद्धि उनकी मोटी है।
एक बेचारा भूखा सोये, एक खाता मुर्गा बोटी है,
वो क्यों सोया आराम से, देख दर्द आत्मा रोती है
पेंट पहनते अमेरिकन भी,एक बांधे कुर्ता धोती है
भूल गये वो अधम नीच, गुरु नर रूप में मोती है।।
***************
*होशियार सिंह यादव
गीत
*************
अफवाह मत फैला, दुख पाएगा
एक दिन तू ,फंस जाएगा......
अफवाह जो फैलाते,वो दुख पाते,
एक दिन तू इस झंझट में फंस जाएगा।
अफवाह..............
जिसने भी, अफवाह फैलाई
वो धरा पर, दुख पाया है, कोई ना साथ देगा, तू पछताएगा
अफवाह......
धर्म कर्म की नैया होती, खड़े किनारे मैया रोती
अफवाह मत फैला, दिल ना कभी दुख
अफवाह मत................
कभी-कभी तो अफवाह होती, दे जाती है दर्द पुराना,
जग सारा छोड़ेगा, पड़े तुझे इसको मनाना।
अफवाह......................
अफवाह मत फैला, दुख पाएगा
एक दिन तू ,फंस जाएगा......***************
अंकुर
*********************************
************************ *********
***********************
मन में अंकुर ज्ञान का, लेता यथार्त रूप।
पूरे जग में फैलता,प्रकाश पुंज स्वरूप।।
***************************
*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
अंकुर
***************************
अंकुर जब है फूटता, तरुवर आये बहार।
फूल,कली को चूमता,भॅँवरा सौ-सौ बार।।
***************************
*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
मुसीबत
***********
दर्द मुसीबत झेलते, श्रमिक नहीं आराम।
दर-दर ठोकर खा रहे, नहीं मिलेगा काम।
***************************
*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
शब्द-मुसीबत
***********
दर्द मुसीबत झेलते, श्रमिक नहीं आराम।
दर-दर ठोकर खा रहे, नहीं मिलेगा काम।
***************************
*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
-मुसीबत
***********
बुरे वक्त में चल रहा, गरीब,जन,मजदूर।
बड़ी मुसीबत दौर है,हुआ अन्न,जल, दूर।।
दर्द मुसीबत झेलते,नहीं मिले फिर काम।
दर-दर ठोर खा रहे, श्रमिक नहीं आराम।
***************************
*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
चतुष्पदी ***********************
धोखा देता चीन, वो रखे नाता नही।
भारत परेशान, उसे वो सुहाता नहीं।।
बासठ लड़ाई में धोखा दिया था उसे।
अब बुलावे पर कोई, चीन जाता नहीं।
***************************
*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
कुंडलियां-01
***********
घर से बाहर देखते, झगड़े जगत हजार।
मॉँ बेटे में है नहीं, पहले वाला प्यार।।
पहले वाला प्यार, नहीं समझा जग पाये।
मुश्किल है विश्वास, किसे यह बात बताये।
धर्म की बैठ छॉँव, नहीं है माता पिता डर।
ऐसी जब हालात, कहे जग में कैसा घर।।
****************
स्वरचित मौलिक रचना।
*****************
*होशियार सिंह यादव
विषय-आदमी
विधा-चौका
********************
डर लगता
खा जाये कभी शेर
परंतु जग
भेडिय़ों से है भरा
बचना अब
मुश्किल लगता है
इंसान हर
कहीं पर मिलता
कैसे बचेंगे
कदम कदम ये
भेड़ खाल में
शेर काट लेगा तो
मर जाएंगे
इनका काटा नहीं
मर सकता
तड़पे दिन रात
बचके बस रहो
****************
स्वरचित मौलिक रचना।
*****************
*होशियार सिंह यादव
चित्राधारित सृजन
विधा-कविता
*********************************




तिरंगा देश का प्यारा है, रखें इसकी लाज,
तन मन से लगाकर रखे, यही है सिरताज,
जान दी,फांसी खाई, इसकी लाज बचाई,
दुश्मन को मार गिराया, मेंहदी खून रचाई।
गांधी की विचारधारा, अपनाता देश महान,
बुरा न कहे बुरा न सुनता, है यही पहचान,
सादगी पसंद वीरों को, भरा हुआ मन ज्ञान,
सभ्यता और संस्कृति, भारत की होती शान।
वीर सपूत सीना ताने, सीमा पर रहते खड़े,
गबरू जवान,सीना चौड़ा, लगते हैं बड़े बड़े,
चेहरे पर सोने सी चमक लगे मणि जड़े हुये,
देश की खातिर देते जान,सोच पर रहते अड़े।
पाक-चीन पड़ोसी ऐसे,करते रहते सदा घात,
अपना कोई जोर चले ना, दुष्ट राष्ट्र देते साथ,
जोर अजमाईश करते हैं, खाते हैं लातमलात,
बाज नहीं आते कभी, जब तक ना टूटे हाथ।
कई बार हार चुका है, नहीं इरादे कहे पाक,
केवल तब ही मानेगा, जब हो जायेगा खाक,
चमगादड़ खा रोग फैलाये, कहलाता है चीन,
सामने जब ये आयेगा,बज जाये इसकी बीन।
चतुष्पदी
************************************
***********************************
********************************
धोखा देता चीन, वो रखे नाता नही।
भारत परेशान, उसे वो सुहाता नहीं।।
बासठ लड़ाई में धोखा दिया था उसे।
अब बुलावे पर कोई, चीन जाता नहीं।
***************************
जरा सुनो
*******
एकांत में रहने की बजाय घुल मिलकर रहने वाले रोगों विशेषकर अवसाद से बच सकते हैं जो एक समस्या बनकर उभर रही है।
--------------------
पृथा
**************************
मात रूप में पूजते, पृथा पड़ा है नाम।
अन्न,फूल,जल,धान देे, जनहित इसका काम।।
****************************
-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा





विश्वास
******************
डोर अटल विश्वास की, टिका हुआ संसार।
रिश्ते ,बंधन में बसा, प्रीत, रीत ,परिवार।।
****************************
*होशियार सिंह यादव
पेड़
विधा-कविता
*************
कर दो शृंगार धरा,
लगाओ पेड़ हजार,
पेड़ जीवन देते हमें,
कर लो इनसे प्यार।
लो मिलकर लगाये,
धरा पर बहुत पेड़,
बड़े हो गये पेड़ तो
करो न उनसे छेड़।
प्रयास अगर सफल,
आये सुनहरा दिन,
वरना इंसान से ही,
धरती जायेगी छीन।
***************
*******************
*होशियार सिंह यादव,
कविता
***********************
अपने को बड़ा समझे,
दूसरे का समझे हीन,
वो है पाप की मशीन,
उसे कहे पाक व चीन।
खुद तो हंसता रहता है,
दूसरों को बस रुलाये,
धूर्त वो इंसान कहलाये,
वो सीधा नरक में जाये।
जो दूसरे को माने मूर्ख,
खुद को माने होशियार,
वो जन धूर्त होता सदा,
करे ना किसी से प्यार।
जो मीठी बातेें करता,
पीछे से भरता है कान,
वो नर कुकरात सम है,
उसकी करो पहचान।
***************************
*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
विषय-पेड़
विधा-कविता
*************************************
*************************************
************************************




कर दो शृंगार धरा,
लगाओ पेड़ हजार,
पेड़ जीवन देते हमें,
कर लो इनसे प्यार।
लो मिलकर लगाये,
धरा पर बहुत पेड़,
बड़े हो गये पेड़ तो
करो न उनसे छेड़।
प्रयास अगर सफल,
आये सुनहरा दिन,
वरना इंसान से ही,
धरती जायेगी छीन।
***************
*होशियार सिंह यादव,
क्षणिकाये
*************
1.
सुनहरी होती हैं यादें,
कभी हंसाती तो कभी रुलाती,
कभी पास आती,कभी दूर जाती,
किसी को पास बुलाती,
कभी दिलों को तड़पाती।।
2.
दिल में बसाते कोई,
कोई उन्हें दूर भगाते,
दर्द कभी न खत्म हो
यादों में खो जाते,
यादें कभी तो,
दे जाती हैं जुदाई,
रो रोकर दिन बीते,
जग में हो हंसाई।
***************
-दुख/तकलीफ/गम
विधा-क्षणिकाये
*************
1.
कभी कभी दुख,
कर जाते हैं वो काम,
नहीं करे जीनेे को मन,
पर दे जाते पैगाम,
दुख के बाद सुख आते,
आये सुबह के बाद शाम।
2.
गम एक दरिया है,
बहकर चला जाये,
पर सुख भी तो कभी,
रुक नहीं पाये,
दुख रुलाये
तो सुख जग हंसाये।
***************
सास और बहू
विधा- पद्य
****************
सास बहू का झगड़ा छिड़ गया,
माइक की भांति वो जोर-जोर,
लोग इक_े हुए,मचा जब शोर,
सास ने पकड़ा झट बहू का कान,
घटा दी बस उसकी ही शान,
बोली-तुझे शर्म नहीं आती,तूझे
लगती हो जैसे बड़ी नादान,
बहू बोली- सासू जी, तुम भी तो नहीं कम,
मेरा कान पकड़ लिया, तूझ में बड़ा है दम,
सास ने कहा- सुधर जा अभी मौका है,
मैंने कितनी बार तुम्हें टोका है,
फिर भी नहीं मानी तो जड़ दूंगी एक थाप,
बेशक उल्टा सीधा हो कुछ आये तेरा बाप,
कहा- बहू ने सासू जी क्यों करती मुझको तंग,
तेरा बेटा काम नहीं करता रहता पड़ा मलंग,
उसको काम धाम नहीं तोड़ दिया है पलंग।
सुन ले सासू आज मेरी, मैं आ चुकी बड़ी तंग,
या तो मेरी बात मान ले वरना छेड़ दूंगी जंग।
सास बहू के बातों की लोगों ने हंसी उड़ाई
देख देख दोनों का झगड़ा सबने मौज उड़ाई,
फिल्मी दुनिया से कम नहीं करती दोनों हंसाई
बाहर तक भी बात फैली खूब चर्चा,
सास बहू के झगड़े का छपवा दिया पर्चा,
सास अगर उन्नीस थी तो बहू थी बीस,
बेटा उनका तेज था वो था इक्कीस,
झगड़ा खूब चला फिर भी नहीं मिटी टीस।
*******************
*होशियार सिंह यादव
सुनो
****************************
*****************************
**********************
दमदार इंसान ऊंचे वृक्ष की भांति आसमान छू लेता है किंतु कमजोर व्यक्ति बेल की भांति किसी सहारे से ही ऊपर चढ़ सकते हैं। सहारा छूटते ही बेल धड़ाम से गिर जाती है।
*************************
*होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़ हरियाणा
दोहा
***********************************
****************************
************************
1.
पानी,ऑँधी रोक दे, मेड़ खेत की जान।
किसका कितना खेत है,होती है पहचान।
2.
*******
दया, धर्म दिल में बसे, और दान हो हाथ।
जनहित में कुछ काम कर, मिलेंगे प्रभु साथ।।
3.
*******
सैन्य शक्ति से देश की, दुनिया में पहचान।
जन गण मन महके जहॉँ, है भारत की शान।।
कविता
***************
बढ़ती जा रही अब,
देशों के बीच द्वंद्व,
करना होगा एक दिन,
जीत का उद्घोष बुलंद।
युद्ध हो या तूफान हो
हम न किसी से कम
हिम्मत के हौसले हैं
जीत ही जाएंगे हम।
आसमान पकड़ लेंगे
हवा को जकड़ लेंगे,
समुद्र को पी जाएंगे
दुश्मन न बच पाएंगे।
हमारी उड़ान ऊंची
हमारे पंख निराले हैं
काल हमारा नाम है
हम देश रखवाले हैं।
आएगा हमारे सामने
मिला देंगे मिट्टी में,
सीने पर मार कटार
लिख देंगे चिट्ठी में।
************************
***
*होशियार सिंह यादव
भ्रम
******************************
********************************
काट रहा क्यों पेड़ों को?
तेरे ये नहीं अ'छे कर्म,
पेड़ काट जग बच जाये,
मान ले,यह तेरा है भ्रम।
बहुत हो चुका अब तो,
कर ले थोड़ी बहुत शर्म,
रोक दे अंधाधुंध कटाई,
बस थोड़ा सा बन नरम।
खूब पेड़ लगा धरा पर,
इंसान का यह है धर्म,
पर्यावरण दूषित हो रहा,
क्यों बन गया है बेशर्म।
*******************
समर्पण
*********************************
******** ******************
********************************
1.
करे समर्पण देश को,करो देह बलिदान।
जीवन होगा तब सफल,बढे जगत में मान।।
2.
देश धर्म पर आ पड़े, विपत्ति बढ़े हजार।
रहो समर्पण भाव से, मिले जगत का प्यार।।
3.
सदा भले के काम कर, देश समर्पण भाव।
दान पुण्य कर ले सदा, हो भव नैया पार।।
4.
भाव समर्पण मन रहे, देश धर्म की बात।
जब कुर्बानी मांगता, भारत का दो साथ।।
5.
चिंता मन में हो कभी, चले देश की बात।
अपना जीवन त्याग कर, चल समाज के साथ।
****************
*होशियार सिंह यादव
द्विपदी लेखन
************************************
***************************************
1
पावस के दिन याद हैं, खेतों में हो धान।
पानी चारों ओर हो, हरित धरा पहचान।।
2
नभ पर बादल छा रहे, बादल गरजे साथ।
मोर वनों में नाचते, होती तब बरसात।।
************************
आंसू
***************************
*****************************
कविता
*****************
आंसू कहते हैं,
दिल की बात,
दर्द कभी न दे,
प्रभु ना दे साथ।
गरीब के आंसू,
बन जाते आग,
नहीं बहाओ ये,
वरना लगे दाग।
आंसू की जगह,
दो कुछ मुस्कान,
खुशियां जो देता,
जग में है महान।
इंसान बन जाओ,
आंसू जरा हटाओ,
गरीब जन मिलते
दिल से लगाओ।।
************
*होशियार सिंह यादव
कविता
*****************
नफरत का बाजार
मिलता है उधार,
खरीद ले लाला,
ढूंढना फिर प्यार।
मानव मानव में,
फैलती है बुराई,
बुरा अंजाम हो,
होगी जग हंसाई।
इंसानों में रोग,
कहाये नफरत,
जग में कुछेक,
रखते हसरत।
हटाओ जन से,
फैला दे उजाला,
नफरत का जहर
क्यों मन पाला।
************
दोहा मुक्तक-
*********************************
***********************************
****************************
धरा आज यूं रो रही, खूब बढ़े है पाप।
अधम लोग मिलके करे, भोग बुराई जाप।।
साधु लोग भी डर रहे, जीना है दुष्वार,
अब तो प्रभु पर आश है, वो ही देते श्राप।।
************************
*होशियार सिंह यादव
दोहा,
**************************



/***********************
जन की सेवा हो बड़ी, कर लो यह उपकार।
प्रभु का जन में वास है, मिलते पुण्य हजार।।
***************************
*होशियार सिंह यादव
वैराग्य
**************************
गृहस्थ जीवन छोड़ कर, लेता जो वैराग्य।
माफी लायक नर नहीं, जन का है दुर्भाग्य।।
***************************
*होशियार सिंह यादव
क्षमा
*******************
क्षमा दान दिल में रहे, बने जगत पहचान।
माफ किया ऋषि देव को, विष्णु बढ़ी थी शान।।
************************
*होशियार सिंह यादव
जरा सुनो
*********
दूध का कर्ज, सैनिक का फर्ज, मरीज की मर्ज इंसान,सैनिक और डाक्टर ही अच्छी प्रकार से जानते हैं। उन्हें अपना अपना कत्र्तव्य अच्छी प्रकार निभाना चाहिए।
******************
--होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
कविता
*******************
चली नहीं, किसी की मर्जी,
अपना है देश, अपनी धरती,
गर्मी पड़े या, फिर पड़े सर्दी,
बलिदानों की, लगती अर्जी।
दुश्मन जब भी आंख उठाये,
मार मारकर, उसको भगाये,
तिरंगे ऊंचा, नभ में फहराये,
मातृभूमि देखे, मन को हर्षाये।
सब देशों में, निराला है देश,
गद्दार कोई भी, नहीं है शेष,
सभ्यता,संस्कृति, की है गूंज,
विविधताएं हैं, अभी विशेष।
बापू, नेहरू, सुभाष, शास्त्री,
भगत सिंह, सुखदेव राजगुरु,
सोने की चिडिय़ा कहलाता
योग, शिक्षा में देशों का गुरु।
सैनिक योद्धा,वीर जवान है,
भरत मां के कहलाते लाल,
दुश्मन देखकर दम भरता है,
देश धरा करते ऊंचा भाल।।
************************
*होशियार सिंह यादव
कविता
*******************
तपन सूरज सिर पर ले,
करना पड़े कठोर काम,
बच्चों का है पेट पालना
मेहनत करे सुबह शाम।
भाग्य में जो लिखा हो,
वो तो जग में निभाएंगे,
तब भी भूखे प्यासे रहे,
किसको कैसे बतायेंगे।
गर्मी जब भीषण पड़ती,
गिरते हैं पसीने तड़ तड़,
मन ही मन रोते भाग्य पे,
नयन करते तब पड़ पड़।
जब सर्दी का मौसम हो,
ठिठुर उठे धरा आकाश,
न मिले दो जून की रोटी,
देख देख मन हो उदास।
कठोर काम थोड़ा लाभ,
घर तब पहुंचे हो शाम,
कोई मजदूर नहीं साथी,
आये मुसीबत में काम।।
************************
सायली
*****************
*********************
**************************
1.
निद्रालु
काम नहीं
सोते से प्यार
समय बर्बाद
बेहाल।
2.
सोते
निद्रा प्यारी
किसी ना यारी
करे आराम
निद्रालु
3.
थकान
निद्रालु जन
नींद में मस्त
चाहिये बस
आराम
*************************
--होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा-
जरा सुनो
********************
*****************************
मां का दर्द, धरती की प्यास, चातक की आश, बम का नाश, दुष्ट के दास की थाह मां,धरा,चातक, वैज्ञानिक और दुष्ट ही जान सकते हैं।
*******
-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
दोहा दिवस
शीर्षक-मौका/अवसर
*****************
*************************
1.
************************** *
मौका हाथ से चूकता, मिले नहीं आराम।
बस उस उलझन में रहे, पड़े भूल सब काम।।
***************************
2.
निकले अवसर हाथ से, छूटे जब भी काम।
बेशक कोशिश खूब कर, जग में हो बदनाम।
****************************
3.
*************************
वक्त बहुत है कीमती, बनाये जन महान।
मौके का जो लाभ ले , बढ़ जायेगी शान।।
***************************
4.
****************************
मौका कभी न चूकना, कीमत वक्त की जान।
युगों युगों से मानते, वक्त बड़ा बलवान।।
**************************
5.
**************
नहीं बचे जब जान भी, दोषी अवसर मान।
अपनी गलती मान ले, जीवन बने महान।
विषय-संसार/दुनियां
*********************
***************************
पूरा जग योग में डूबा
जन-जन करता प्यार,
कितने रोगी ठीक हुए,
नतमस्तक अब संसार।
हरियाणा का महेंद्रगढ़
गांव सैदअलिपुर नाम,
बाबा रामदेव निवासी
योग करवाना है काम।
पूरे संसार में नाम हुआ
भारत देश है मेरा प्यारा,
सभ्यता संस्कृति अनोखी
भाल ऊंचा हुआ हमारा।
भारत में पिता दिवस है
माता पिता ले आशीर्वाद,
कभी विफल नहीं जाये
आती रहेगी उनकी याद।
बड़ा दिन देश में मना
गर्मी का मच गया शोर,
सावन को पुकार रहे हैं
पीहू पीहू करते हैं मोर।
अपना साया साथ छोड़े
वो कहलाता बड़ा दिन
14 घंटे सूरज चमका,
बीता है पल गिन गिन।
***************
**होशियार सिंह यादव, लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**
जरा सुनो
****************************
*****************************



************************
मातृभूमि की रक्षा का दायित्व सैनिकों के कंधों पर होता है जो कुर्बानी देकर मातृभूमि के साथ साथ देश एवं लोगों की सेवा करते हैं।
*************
-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा--
नमन दोहा दर्पण
विधा-कुंडलियां
**************************
योग से रोग दूर हो, रहे शरीर निरोग,
सुबह शाम करते रहे, पास न आये रोग।
पास न आये रोग, मन के हटेगा विकार,
महिमा इसकी जान, करते लोग हजार।
खाना पीना हो उचित, करो शाकाहार भोग,
नहीं बचेगा रोग, करते रहना योग।।
****************************
-होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
दोहा
****************************
1.
दिल में अपार जोश है, शौर्य गजब मिसाल।
दुश्मन की नजरें टिके, समझे अपना काल।।
2.
*******
रू
*******
सीने पर खा गोलियां, करे जान कुर्बान।
वीर जवानों से बढ़े, भारत मॉँ की शान।।
************************
*होशियार सिंह यादव
ग्रहण
विधा-सोदोका
********************
लगे ग्रहण
इंसान परेशान
खो देता बुद्धिबल
बुरा बीतता
कोई नहीं दे साथ
मंजिल पर चलता
************************
*होशियार सिंह यादव
एकांत और अकेलापन
विधा- कविता(पद्य)
************************
ऋषि मुनि और तपस्वी,
किया करते एकांत वास,
पाप दोष सभी नष्ट करते
लेते थे शुद्ध हवा- सांस।
लंबी उम्र पा लेते थे वो,
जप तप में रहते थे लीन,
अपने पुण्य कर्मों के बल,
हित करते थे दीन व हीन।
अकेलापन उन्हें भाता था,
वर्षों तक तप में बीत जाए,
अपने सांसों को रोक लेते
बुद्धि और बल खूब पाये।
वर्तमान में चरवाहे भी अब,
घूमते रहते हैं वन जंगलों में,
खेतों में बैठकर खाना खाते
नहीं रुचि उनकी बंगलों में।
एकांत और अकेलापन जन,
पा जाते हैं जग का ही प्यार,
घूम घूमकर जग के खेतों में,
खुद पकाते हैं उतारते है हार।।
************************
स्वयं रचित, नितांत मौलिक रचना
************************
*होशियार सिंह यादव
जीत ही जायेंगे हम
विधा- कविता
***************
युद्ध हो या तूफान हो
हम न किसी से कम
हिम्मत के हौसले हैं
जीत ही जाएंगे हम।
आसमान पकड़ लेंगे
हवा को जकड़ लेंगे,
समुद्र को पी जाएंगे
दुश्मन न बच पाएंगे।
हमारी उड़ान ऊंची
हमारे पंख निराले हैं
काल हमारा नाम है
हम देश रखवाले हैं।
आएगा हमारे सामने
मिला देंगे मिट्टी में,
सीने पर मार कटार
चिट्ठी में लिख देंगे।
************************
*होशियार सिंह यादव
दोहा
*******************
*******************************
***********************
झुका दिया है चीन को, न झुका भारत वीर।
कीड़े जैसे मारते, शत्रु गला दे चीर।।
जरा सुनो-
**************************
हकीकत को कल्पनाओं से नहीं बुना जाता अपितु सच्चाई के धागों से बुना जाता है जिसमें प्रत्येक धागा हीरे की भांति खरा और कठोर होता है।
************
-होशियार सिंह यादव, कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
नमन मंच,
****************************
1.
करो खूब जग में योग, होगा तनाव दूर।
मन से प्रसन्न जो रहे, खिलता आनन नूर।।
2.
*******
मन पर धुंध कभी पड़े, करता उल्टे काम।
धुंध करे हर साल ही, बहु जन काम तमाम।।
3.
*******
कण कण माटी में भरा, भारत वीर जवान।
तब ही कहते हैं सभी, लगता देश महान।।
************************
चलचित्र काव्य सृजन
******************
दिल से दिल की राह है,
यह दो दिलों की चाह है,
मुरझाये चेहरे हंॅँस उठते,
यूं दिलों में प्रेम अथाह है।
कभी हंसते हैं तो रोते हैं,
कभी सपने देख सोते हैं,
कभी तनहाइयों में गुजरते,
कभी प्रेम बीज बोते हैं।
रक्त दिलों में संचार करे,
सोये चिरनिद्रा से जाग,
दिलों को छोटा न मानो,
बहुत लंबा होता है राग।
एक रोता दूजा भी रोता
एक सोता दूजा भी सोता,
दर्द देखकर नैन भिगोता,
हृदय को हृदय नेह होता।।
****************************




होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
*************************
1. मापनी- 21 22 22 22 22,22,22
चलते हैं जब देशभक्त, उनकी अपनी शान है।
पूरे जग में देश की, अपनी एक पहचान है।।
क्या झुका सकेगा तूफान, ऐसे इन वीरों को ,
चलते दुश्मन छाती पर,लगते वे तूफान हैं।।
2.मापनी 21 22 22 22 22 22 22 2
तूफानों से लड़ते ही रहते, येे हैं भारत वीर।
दुश्मन सामने आ डटे, पल में देते उनको चीर।।
भरे हुए भावों से , देशभक्ति जज्बा भरा होता,
फौलाद बन खड़े होते हैं,समझो ना इन्हें फकीर।।
**************************** **
*होशियार सिंह यादव
मुक्तक
1. मापनी- 21 22 22 22 22,22,22
चलते हैं जब देशभक्त, उनकी अपनी शान है।
पूरे जग में देश की, अपनी एक पहचान है।।
क्या झुका सकेगा तूफान, ऐसे इन वीरों को ,
चलते दुश्मन छाती पर,लगते वे तूफान हैं।।
2.मापनी 21 22 22 22 22 22 22 2
तूफानों से लड़ते ही रहते, येे हैं भारत वीर।
दुश्मन सामने आ डटे, पल में देते उनको चीर।।
भरे हुए भावों से , देशभक्ति जज्बा भरा होता,
फौलाद बन खड़े होते हैं,समझो ना इन्हें फकीर।।
विषय-चित्रलेखन
******************
अपना पथ आप बनाऊ,
खेलकूद घर पर में आऊं,
आसमान सतरंगी बादल,
अपनी कहानी मैं सुनाऊं।
हम छोटे पर हिम्मत है,
खुद की राह बनाते है,
अपनी बुद्धि के बल से,
सारे जगत को हंसाते हैं।
आसमान को छू लेंगे,
वो भी आये एक दिन,
शिक्षा, दीक्षा में निपुण,
जानते कला भिन्न भिन्न।
विज्ञान उन्नति करता है
हम बैठे नहीं मूक बन,
दो ज्ञान की शिक्षा भी,
उन्नति करे देश व जन।
दोहा सृजन
शब्द-वीर जवान
*****************************
*********************************
*****************************
1.
कण कण माटी में भरा, भारत वीर जवान।
तब ही कहते हैं सभी, लगता देश महान।।
2.
बहा बहा निज खून वो, बना रहे पहचान।
सदा नाम से रोशनी, भारत वीर जवान।।
3.
सीने पर खा गोलियां, करे जान कुर्बान।
वीर जवानों से बने, भारत मॉँ की शान।।
4.
पूरा जग है पूजता, होते भारत शान।
हरदम सेवा में रहे, भारत वीर जवान।।
************************
स्वयं रचित, नितांत मौलिक रचना
************************
*होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
09416348400
जरा सुनो
***************************
*************************
आदर भाव से घर आये मेहमान की सेवा करके समस्त पुण्य अर्जित किये जा सकते हैं। यूं मेहमान नवाजी पुण्य का काम है।
****************************
-
दोहा
************************************
******************************
1.
रहे सदा ही पेड़ पर, नाम पड़ा है मोर।
पीहू पीहू शोर को, सुने सदा चितचोर।।
2.
*******
दिल में जिसके जोश है, रखे काम से प्यार।
हिम्मत रखता पास में, कहे जग कलाकार।।
3.
*******
करता आया चीन भी, भारत से ही घात।
देखे मौका देश अब, करना है प्रतिघात।।
नमन राष्ट्र
******************************
***************************
दे गये कुर्बानी ना मांगा मोल,
जीवन वीरों का है अनमोल,
मातृभूमि पर लुटाते जान भी
रह जाते हैं बस उनके बोल।
कभी नहीं झुका उनका शीश,
बस दिल में बसा था जगदीश,
यादें उनकी बहुत तड़पाती हैं
दिल में आ नभ में छा लाती हैं।
शत-शत नमन वीरों को आज,
भारत मां के होते वो सरताज,
जब तक जहां दिल परे है राज,
हर देशवासी को उन पर नाज।।
************************
*होशियार सिंह यादव
शहीदों को नमन
*****************************
*******************************
दे गये कुर्बानी ना मांगा मोल,
जीवन वीरों का है अनमोल,
मातृभूमि पर लुटाते जान भी
रह जाते हैं बस उनके बोल।
कभी नहीं झुका उनका शीश,
बस दिल में बसा था जगदीश,
यादें उनकी बहुत तड़पाती हैं
दिल में आ नभ में छा लाती हैं।
शत-शत नमन वीरों को आज,
भारत मां के होते वो सरताज,
जब तक जहां दिल परे है राज,
हर देशवासी को उन पर नाज।।
************************
*होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
विषय-मीत
विधा-गजल
**********************************
***********************************
आ जाओ पुकारे मीत मेरे
होठों पर सजे हैं गीत तेरे।
जब भी पुकारा बसे मन में
एक एक जाये दिन बीत मेरे,
राह कब तक तकता रहूं यूं
दिल में बसो बन संगीत मेरे,
तेरे बिन नहीं रहा जाये कभी
आ जाओ बन के प्रीत मेरे।
*****
************************