लघुकथा भद्दा मजाक
छोटा बच्चा गोद में लेकर क्लर्क की परीक्षा देने जाती ही युवती ने जब बस की ओर देखा तो पैर रखने तक की जगह नहीं थी। परीक्षा केंद्र भी 300 किमी दूर है। युवती की सहसा नजर ट्रेन पर पड़ी जिसके ऊपर भी युवा यात्रा कर रहे थे। युवती सोच में डूब गई कि 15 लाख परीक्षार्थियों में महज पांच हजार क्लर्क लगेंगे। कितनी बड़ी स्पर्धा होगी। किंतु अपनी गोद में बच्चे को लेकर 300 किमी दूरी तय करना और वो भी खड़े खड़े यह दूसरी परीक्षा होगी। युवती सोचती ही जा रही थी सायंकालीन परीक्षा शाम छह बजे छूटेगी तो घर तक कैसे पहुंचा जाएगा? सरकार बेरोजगारों के साथ भद्दा मजाक कर रही है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
छोटा बच्चा गोद में लेकर क्लर्क की परीक्षा देने जाती ही युवती ने जब बस की ओर देखा तो पैर रखने तक की जगह नहीं थी। परीक्षा केंद्र भी 300 किमी दूर है। युवती की सहसा नजर ट्रेन पर पड़ी जिसके ऊपर भी युवा यात्रा कर रहे थे। युवती सोच में डूब गई कि 15 लाख परीक्षार्थियों में महज पांच हजार क्लर्क लगेंगे। कितनी बड़ी स्पर्धा होगी। किंतु अपनी गोद में बच्चे को लेकर 300 किमी दूरी तय करना और वो भी खड़े खड़े यह दूसरी परीक्षा होगी। युवती सोचती ही जा रही थी सायंकालीन परीक्षा शाम छह बजे छूटेगी तो घर तक कैसे पहुंचा जाएगा? सरकार बेरोजगारों के साथ भद्दा मजाक कर रही है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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