लघुकथा आधुनिकता
रमेश कैसे हो? चुनावों की तैनाती रिहर्सल में भीड़ में पीछे से आवाज आई। एक युवक हाथ में कागज लिए 54-55 वर्षीय शिक्षक रमेश को पुकार रहा था।
रमेश ने एकटक युवक को देखा और आत्मीयता से पूछा-भाई मैंने आपको पहचाना नहीं? आप अपना परिचय देंगे कि किस प्रकार मुझे जानते हो? युवक ने रमेश की आंखों में आंखें मिलाकर कहा-'तुम' मुझे भूल गए। मैं कभी 'तुम्हारे' पास सातवीं कक्षा में पढ़ता था।
...तुम पढ़ते थे, यह नामुमकिन लगता है। मेरी तो जीवन भर शिक्षण रूपी तपस्या आज शून्य हो गई। एक मेरा विद्यार्थी रहा और वह मुझे नाम से ऐसे पुकार रहा हो जैसे बच्चे को पुकार रहा हो। उस पर आदर की बजाय तुम और तुम्हारे जैसे तुच्छ शब्द प्रयोग करे? रमेश सोच में पड़ गया कि हम अपने से दो चार साल बड़े जन को भी आदर से पुकारते हैं और आधुनिक पीढ़ी के ये शिष्य अपने गुरु को नाम से संबोधित करते हैं? हमारी सभ्यता और संस्कृति कहां जा रही है? क्या युवा पीढ़ी की यही सोच बन गई? कई अनुत्तरित प्रश्नों के जंजाल में खोया रमेश आगे बढ़ गया।
(उपरोक्त कहानी हकीकत पर आधारित है)
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
रमेश कैसे हो? चुनावों की तैनाती रिहर्सल में भीड़ में पीछे से आवाज आई। एक युवक हाथ में कागज लिए 54-55 वर्षीय शिक्षक रमेश को पुकार रहा था।
रमेश ने एकटक युवक को देखा और आत्मीयता से पूछा-भाई मैंने आपको पहचाना नहीं? आप अपना परिचय देंगे कि किस प्रकार मुझे जानते हो? युवक ने रमेश की आंखों में आंखें मिलाकर कहा-'तुम' मुझे भूल गए। मैं कभी 'तुम्हारे' पास सातवीं कक्षा में पढ़ता था।
...तुम पढ़ते थे, यह नामुमकिन लगता है। मेरी तो जीवन भर शिक्षण रूपी तपस्या आज शून्य हो गई। एक मेरा विद्यार्थी रहा और वह मुझे नाम से ऐसे पुकार रहा हो जैसे बच्चे को पुकार रहा हो। उस पर आदर की बजाय तुम और तुम्हारे जैसे तुच्छ शब्द प्रयोग करे? रमेश सोच में पड़ गया कि हम अपने से दो चार साल बड़े जन को भी आदर से पुकारते हैं और आधुनिक पीढ़ी के ये शिष्य अपने गुरु को नाम से संबोधित करते हैं? हमारी सभ्यता और संस्कृति कहां जा रही है? क्या युवा पीढ़ी की यही सोच बन गई? कई अनुत्तरित प्रश्नों के जंजाल में खोया रमेश आगे बढ़ गया।
(उपरोक्त कहानी हकीकत पर आधारित है)
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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