अनपढ़
एक बड़ी सी पत्ता गोभी अपनी पत्नी को देते हुए राजू ने कहा-लो, यह गोभी है। इसकी सब्जी बनाकर खिलानी है। तुम गांव से आई हो तुम्हारे हाथों की सब्जी खाकर देखेंगे।
रमनी ने पत्ता गोभी के एक पत्ते को हटाया कुछ भी नजर नहीं आया तो दूसरा पत्ता हटाया किंतु कुछ भी नजर नहीं आया। तत्पश्चात एक के बाद एक पत्ता हटाए गई किंतु कुछ भी अंदर नहीं निकला। सारे पत्तों का ढेर लगाकर रमनी चटनी रोटी बनाकर बैठी ही थी कि राजू ने आकर रोटी सब्जी मांगी। रमनी ने बताया कि पत्ता गोभी में तो कुछ भी नहीं मिला। सब्जी किस चीज की बनती? ऐसे में मैने चटनी रोटी बना दी है। लो खाओ। और यह देखो तुम्हारी गोभी के छिलके जिसमें कुछ भी नहीं मिला।
राजू ने सिर पर हाथ मारते हुए कहा कि सचमुच तुम तो अनपढ़ हो। पत्ता गोभी में भला पत्ते के अलावा और भी कुछ मिलेगा? तुम कितनी भोली हो।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
एक बड़ी सी पत्ता गोभी अपनी पत्नी को देते हुए राजू ने कहा-लो, यह गोभी है। इसकी सब्जी बनाकर खिलानी है। तुम गांव से आई हो तुम्हारे हाथों की सब्जी खाकर देखेंगे।
रमनी ने पत्ता गोभी के एक पत्ते को हटाया कुछ भी नजर नहीं आया तो दूसरा पत्ता हटाया किंतु कुछ भी नजर नहीं आया। तत्पश्चात एक के बाद एक पत्ता हटाए गई किंतु कुछ भी अंदर नहीं निकला। सारे पत्तों का ढेर लगाकर रमनी चटनी रोटी बनाकर बैठी ही थी कि राजू ने आकर रोटी सब्जी मांगी। रमनी ने बताया कि पत्ता गोभी में तो कुछ भी नहीं मिला। सब्जी किस चीज की बनती? ऐसे में मैने चटनी रोटी बना दी है। लो खाओ। और यह देखो तुम्हारी गोभी के छिलके जिसमें कुछ भी नहीं मिला।
राजू ने सिर पर हाथ मारते हुए कहा कि सचमुच तुम तो अनपढ़ हो। पत्ता गोभी में भला पत्ते के अलावा और भी कुछ मिलेगा? तुम कितनी भोली हो।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
तड़का
कमली ने अपने पति रामू को कहा-काम से लौटते वक्त प्याज लेकर आना। रामू ने उत्तर दिया-प्याज तो 150 रुपये किलो पहुंच गई हैं। ऐसे में प्याज खाना बंद कर दो तथा।
...तो लहसुन लेकर आना ताकि सब्जी में तड़का लगाया जा सके? रामू ने फिर से उत्तर दिया-वो भी तो 300 रुपये किलो हैं। कैसे उन्हें खरीदकर लाऊं?
...तो तड़के के लिए थोड़ा जीरा ले आना। रामू ने उत्तर दिया-जीरा, जो आठ सौ रुपये किलो है, उसे कैसे खरीद सकता हूं। मुझे दिनभर में मेहनत मजदूरी के 600 रुपये मिलते हैं जिसमें तो एक किलो जीर...
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कमली ने अपने पति रामू को कहा-काम से लौटते वक्त प्याज लेकर आना। रामू ने उत्तर दिया-प्याज तो 150 रुपये किलो पहुंच गई हैं। ऐसे में प्याज खाना बंद कर दो तथा।
...तो लहसुन लेकर आना ताकि सब्जी में तड़का लगाया जा सके? रामू ने फिर से उत्तर दिया-वो भी तो 300 रुपये किलो हैं। कैसे उन्हें खरीदकर लाऊं?
...तो तड़के के लिए थोड़ा जीरा ले आना। रामू ने उत्तर दिया-जीरा, जो आठ सौ रुपये किलो है, उसे कैसे खरीद सकता हूं। मुझे दिनभर में मेहनत मजदूरी के 600 रुपये मिलते हैं जिसमें तो एक किलो जीर...
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मुसीबत (सच्ची घटना पर आधारित)
आप मुझे 40 हजार रुपये दे सकते हैं? मेरी बच्चियों की फीस भरनी है। मैं चंद दिनों बाद लौटा दूंगी। रमनी ने कहा।
रामू ने औरत की हालात पर तरस खाते हुए पैसे देने का वादा कर लिया। अगले दिन रमनी ने कहा-आप ये पैसे मेरी बच्ची के खाते में भेज दे तो बेहतर होगा क्योंकि उसे फीस भरनी है। रामू ने उनकी बच्ची के खाते में 40 हजार रुपये डाल दिए किंतु कुछ माह बाद पैसे मांगे तो औरत ने जवाब दिया-कैसे पैसे, मेरी बच्ची के खाते में डालकर तुम उन पर बुरी नजर रखते हो? अभी थाने में जाकर तुझे सीधा करवाती हूं। इतना सुन रामू के माथे पर पसीना छूट पड़ा। उसने तो हाथ जोड़कर आई मुसीबत को टाला। सिने भी कहानी सुनी वो अवाक रह गया।
**होशियार सिंह लेखक,कनीना,हरियाणा**
आप मुझे 40 हजार रुपये दे सकते हैं? मेरी बच्चियों की फीस भरनी है। मैं चंद दिनों बाद लौटा दूंगी। रमनी ने कहा।
रामू ने औरत की हालात पर तरस खाते हुए पैसे देने का वादा कर लिया। अगले दिन रमनी ने कहा-आप ये पैसे मेरी बच्ची के खाते में भेज दे तो बेहतर होगा क्योंकि उसे फीस भरनी है। रामू ने उनकी बच्ची के खाते में 40 हजार रुपये डाल दिए किंतु कुछ माह बाद पैसे मांगे तो औरत ने जवाब दिया-कैसे पैसे, मेरी बच्ची के खाते में डालकर तुम उन पर बुरी नजर रखते हो? अभी थाने में जाकर तुझे सीधा करवाती हूं। इतना सुन रामू के माथे पर पसीना छूट पड़ा। उसने तो हाथ जोड़कर आई मुसीबत को टाला। सिने भी कहानी सुनी वो अवाक रह गया।
**होशियार सिंह लेखक,कनीना,हरियाणा**
सम्मानित
बंधुवर, जंगली कुल्थी के बारे में मेरी समस्त जानकारी निम्र ब्लॉग के लिंक
को दबाकर देखे। होशियार सिंह ब्लाग लिंक को दबाना न भूले। धन्यवाद
होशियार सिंह, लेखक कनीना
होशियार सिंह, लेखक कनीना
भगवान भला करे
अभी ट्रेन चलने ही वाली थी कि डब्बे में एक महिला सवार हुई और सीट पर बैठते ही उनकी नजर सिगरेट पी रहे जन पर पड़ी। महिला ने उक्त व्यक्ति को सिगरेट बंद करने की प्रार्थना की। व्यक्ति मान गया किंतु अभी पास में बैठे एक अन्य व्यक्ति ने बीड़ी सुलगा ली। महिला ने उससे प्रार्थना की किंतु व्यक्ति ने गुस्से में कहा-तुम कहीं और बैठ जाओ। बीड़ी पर पैसे लगे हैं वो तो प्रयोग करूंगा। महिला ने पास के डब्बे में बैठना चाहा किंतु वहां भी एक व्यक्ति सिगरेट पी रहा था। महिला ने उनकी सिगरेट बंद करवाई तो दूसरे ने सुलगा ली। परेशान महिला डब्बे से नीचे उतरते हुए कहने लगी-खूब पीओ, भगवान तुम लोगों का भला करें।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
अभी ट्रेन चलने ही वाली थी कि डब्बे में एक महिला सवार हुई और सीट पर बैठते ही उनकी नजर सिगरेट पी रहे जन पर पड़ी। महिला ने उक्त व्यक्ति को सिगरेट बंद करने की प्रार्थना की। व्यक्ति मान गया किंतु अभी पास में बैठे एक अन्य व्यक्ति ने बीड़ी सुलगा ली। महिला ने उससे प्रार्थना की किंतु व्यक्ति ने गुस्से में कहा-तुम कहीं और बैठ जाओ। बीड़ी पर पैसे लगे हैं वो तो प्रयोग करूंगा। महिला ने पास के डब्बे में बैठना चाहा किंतु वहां भी एक व्यक्ति सिगरेट पी रहा था। महिला ने उनकी सिगरेट बंद करवाई तो दूसरे ने सुलगा ली। परेशान महिला डब्बे से नीचे उतरते हुए कहने लगी-खूब पीओ, भगवान तुम लोगों का भला करें।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
सम्मानित बंधुवर, बाथू/ बथुआ के बारे में मेरी समस्त जानकारी निम्र ब्लॉग के लिंक को दबाकर देखे। धन्यवाद
होशियार सिंह, लेखक कनीना
होशियार सिंह, लेखक कनीना
बदलाव
डीजे के सामने जहां हरियाणवीं गाना 'पानी ने चालीÓ गाना बज रहा था और महिलाएं घूंघट हटाकर वो नृत्य कर रही थी कि देखने से ही बनता था। उधर से गुजरने वाला प्रत्येक राहगीर नृत्य को देखकर खोया खोया सा नजर आ रहा था। नृत्य देखने वालों में बाबा रामचंद्र भी एक था जिसकी उम्र 90 वर्ष से अधिक थी। नृत्य को देखकर रामचंद्र के मुख से निकला-वाह! बदलाव आ गया। कभी महिलाएं घूंघट के चक्कर में बड़ों के सामने बोलती तक नहीं थी किंतु अब तो वो नृत्य करती हैं कि बड़ी से बड़ी हीरोइन भी गच्चा खा जाए। सचमुच देश बदल रहा है। बुजुर्ग खुशी खुशी आगे बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
डीजे के सामने जहां हरियाणवीं गाना 'पानी ने चालीÓ गाना बज रहा था और महिलाएं घूंघट हटाकर वो नृत्य कर रही थी कि देखने से ही बनता था। उधर से गुजरने वाला प्रत्येक राहगीर नृत्य को देखकर खोया खोया सा नजर आ रहा था। नृत्य देखने वालों में बाबा रामचंद्र भी एक था जिसकी उम्र 90 वर्ष से अधिक थी। नृत्य को देखकर रामचंद्र के मुख से निकला-वाह! बदलाव आ गया। कभी महिलाएं घूंघट के चक्कर में बड़ों के सामने बोलती तक नहीं थी किंतु अब तो वो नृत्य करती हैं कि बड़ी से बड़ी हीरोइन भी गच्चा खा जाए। सचमुच देश बदल रहा है। बुजुर्ग खुशी खुशी आगे बढ़ गया।
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समस्त
फेसबुक साथियों से निवेदन हैं कि निम्र ब्लोग को जरूर देखे जिसमें पेड़
पौधों से संबंधित लेख एवं पेड़ पौधों की जानकारी दी गई है। झुंडा के विषय
में जानकारी के लिए मेरे निम्र ब्लोग को देखे।
धन्यवाद होशियार सिंह कनीना
धन्यवाद होशियार सिंह कनीना
भूख
नन्हें नन्हें दो बच्चे गोद में लिए एक युवती लंबी लाइन में खाने का इंतजार कर रही थी। कढ़ी चावल बांटे जा रहे थे। बच्चे भूख के मारे युवती का जीना हराम कर रहे थे। लाइन में खाने के आने का इंतजार कर रहे सभी लोगों की नजरें उस युवती पर टिकी हुई थी। सेठ अपने हाथों से खाना बांटते हुए महिला के पास आया तो खाना डालते ही बच्चे ऐसे टूट पड़े जैसे कई दिनों से भूखों हो। जो खाना मिला वो बच्चों ने साफ कर दिया किंतु युवती को एक दाना भी नसीब नहीं हुआ। लाइन में आगे पीछे बैठे लोगों को तरस आ गई औ...
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नन्हें नन्हें दो बच्चे गोद में लिए एक युवती लंबी लाइन में खाने का इंतजार कर रही थी। कढ़ी चावल बांटे जा रहे थे। बच्चे भूख के मारे युवती का जीना हराम कर रहे थे। लाइन में खाने के आने का इंतजार कर रहे सभी लोगों की नजरें उस युवती पर टिकी हुई थी। सेठ अपने हाथों से खाना बांटते हुए महिला के पास आया तो खाना डालते ही बच्चे ऐसे टूट पड़े जैसे कई दिनों से भूखों हो। जो खाना मिला वो बच्चों ने साफ कर दिया किंतु युवती को एक दाना भी नसीब नहीं हुआ। लाइन में आगे पीछे बैठे लोगों को तरस आ गई औ...
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शुभ रात्रि
कड़ाके की ठंड एवं धुंध पड़ रही थी। गाड़ी के सामने कुछ भी नहीं दिखाई पड़ रहा था। अभी रामू कुछ ही दूर चला था कि धुंध सघन होने से उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था। घोंघे की चाल से गाड़ी चल रही थी कि सुनसान की जगह पर अर्धनग्र बुजुर्ग सड़क के किनारे खड़ा नजर आया जिसे देखकर रामू दंग रह गया। उसने झटपट अपनी गाड़ी को ब्रेक लगाया तो बुजुर्ग ललचाई निगाहों से रामू को निहारने लगा। रामू को समझने में देर हीं लगी और अपने शरीर पर ओढ़ा हुआ कंबल उतारकर बाबा को झटपट देते हुए कहा-बाबा, मैं ...
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कड़ाके की ठंड एवं धुंध पड़ रही थी। गाड़ी के सामने कुछ भी नहीं दिखाई पड़ रहा था। अभी रामू कुछ ही दूर चला था कि धुंध सघन होने से उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था। घोंघे की चाल से गाड़ी चल रही थी कि सुनसान की जगह पर अर्धनग्र बुजुर्ग सड़क के किनारे खड़ा नजर आया जिसे देखकर रामू दंग रह गया। उसने झटपट अपनी गाड़ी को ब्रेक लगाया तो बुजुर्ग ललचाई निगाहों से रामू को निहारने लगा। रामू को समझने में देर हीं लगी और अपने शरीर पर ओढ़ा हुआ कंबल उतारकर बाबा को झटपट देते हुए कहा-बाबा, मैं ...
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मां
एक एक पैसे का मोहताज रानी का रोग देखकर डाक्टर ने कहा-आप कुछ दिनों की मेहमान हो। अगर तुम चाहो तो बेहतर दवाओं से कुछ दिनों की जिंदगी पा सकती हो। रानी ने हाथ जोड़कर डाक्टर से कहा-डाक्टर साहब, पहले ही मेरा परिवार भूखो मर रहा है। उस पर लाखो रुपये का इलाज करवाना मेरे बस की बात नहीं है। अगर कही हो सके तो मुझे एक लाख रुपये दे दो और मेरा शरीर खरीद लो। मेरे शरीर से विभिन्न अंग निकालकर बेच दो। मेरे बच्चे के लिए यह राशि काम आएगी। वो बेचारा उच्च शिक्षा पाना चाहता है किंतु पैसों का अभाव है। डाक्टर ने जब मरीज की बात सुनी तो हक्का बक्का रह गया। मरते मरते भी अपने बच्चे का हित चाहे वो मां ही हो सकती है। डाक्टर की आंखें भर आई। वह कुछ बोल नहीं सका और आगे बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
एक एक पैसे का मोहताज रानी का रोग देखकर डाक्टर ने कहा-आप कुछ दिनों की मेहमान हो। अगर तुम चाहो तो बेहतर दवाओं से कुछ दिनों की जिंदगी पा सकती हो। रानी ने हाथ जोड़कर डाक्टर से कहा-डाक्टर साहब, पहले ही मेरा परिवार भूखो मर रहा है। उस पर लाखो रुपये का इलाज करवाना मेरे बस की बात नहीं है। अगर कही हो सके तो मुझे एक लाख रुपये दे दो और मेरा शरीर खरीद लो। मेरे शरीर से विभिन्न अंग निकालकर बेच दो। मेरे बच्चे के लिए यह राशि काम आएगी। वो बेचारा उच्च शिक्षा पाना चाहता है किंतु पैसों का अभाव है। डाक्टर ने जब मरीज की बात सुनी तो हक्का बक्का रह गया। मरते मरते भी अपने बच्चे का हित चाहे वो मां ही हो सकती है। डाक्टर की आंखें भर आई। वह कुछ बोल नहीं सका और आगे बढ़ गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
कलियुग
बेटों ने बुजुर्ग को सताने में कसर नहीं छोड़ी। चूंकि पेंशन लेकर आता था। ऐसे में सभी बेटे पेंशन का अधिक हिस्सा चाहते थे जिसके चलते उसे पीट पीटकर पेंशन पाना चाहते। कई बार उसे डराया धमकाया गया किंतु पेंशन दे देगा तो बेचारे का महीने भर का छोटा मोटा काम ही रुक जाएगा। किंतु बेटे कब मानने वाले थे। उन्होंने तो उसे इतना पीटा कि पेंशन देने को मजबूर होना पड़ा। पेंशन छीनकर बुजुर्ग को घर से बाहर धकेल दिया। ठंड में कांप रहा था। तभी उनकी पुत्री को सूचना मिली तो दौड़कर ससुराल से आई। अपने पिता की दुर्गति देख आंसू टपकाने लगी। पिता को अपना शाल ओढ़ाकर उसे अविलंब अपने ससुराल ले गई और उसकी सेवा में जुट गई। बुजुर्ग ने बेटी को देखा तो आंखों में आंसू आ गए और कहा-सचमुच बेटों से कहीं अधिक बेटी अपने पिता को चाहती है। सच ही कहा है कि बेटी एक नहीं अपितु दो घरों की देखभाल करती है। कलियुग में बेटे बाप के हत्यारे हो सकते हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाण**
बेटों ने बुजुर्ग को सताने में कसर नहीं छोड़ी। चूंकि पेंशन लेकर आता था। ऐसे में सभी बेटे पेंशन का अधिक हिस्सा चाहते थे जिसके चलते उसे पीट पीटकर पेंशन पाना चाहते। कई बार उसे डराया धमकाया गया किंतु पेंशन दे देगा तो बेचारे का महीने भर का छोटा मोटा काम ही रुक जाएगा। किंतु बेटे कब मानने वाले थे। उन्होंने तो उसे इतना पीटा कि पेंशन देने को मजबूर होना पड़ा। पेंशन छीनकर बुजुर्ग को घर से बाहर धकेल दिया। ठंड में कांप रहा था। तभी उनकी पुत्री को सूचना मिली तो दौड़कर ससुराल से आई। अपने पिता की दुर्गति देख आंसू टपकाने लगी। पिता को अपना शाल ओढ़ाकर उसे अविलंब अपने ससुराल ले गई और उसकी सेवा में जुट गई। बुजुर्ग ने बेटी को देखा तो आंखों में आंसू आ गए और कहा-सचमुच बेटों से कहीं अधिक बेटी अपने पिता को चाहती है। सच ही कहा है कि बेटी एक नहीं अपितु दो घरों की देखभाल करती है। कलियुग में बेटे बाप के हत्यारे हो सकते हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाण**
हलाल
सड़क निर्माण के लिए ईंटें डलवाई गई थी। कुछ लोगों की नजरें इन्हीं ईंटों पर टिकी थी। शाम ढलते ढलते कुछ लोग सक्रिय हो गए और ईंट उठा उठाकर अपने घर में रखने लगे। कोई चारपाई के चारों पैरों के नीचे लगा रहा था ताकि सफाई करते वक्त परेशानी न हो तो कोई अपने घर में डाल रहा था। रात बीती और सुबह होते होते ठेकेदार की सैकड़ों ईंटों को लोगों ने अपने घर में डाल लिया। सड़क निर्माण के समय जब ईंटें कम पड़ी तो हकीकत सामने आई कि मुफ्त की शराब काजी को भी हलाल होती हैं। ठेकेदार की आंखें खुल गई किंतुु वो किसे कहे? किस पर ईंट चोरी का इल्जाम लगाए? आखिरकार ठेकेदार भी चोर और कुछ लोग भी चोर? इसे कहते हैं चोर के घर मोर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
सड़क निर्माण के लिए ईंटें डलवाई गई थी। कुछ लोगों की नजरें इन्हीं ईंटों पर टिकी थी। शाम ढलते ढलते कुछ लोग सक्रिय हो गए और ईंट उठा उठाकर अपने घर में रखने लगे। कोई चारपाई के चारों पैरों के नीचे लगा रहा था ताकि सफाई करते वक्त परेशानी न हो तो कोई अपने घर में डाल रहा था। रात बीती और सुबह होते होते ठेकेदार की सैकड़ों ईंटों को लोगों ने अपने घर में डाल लिया। सड़क निर्माण के समय जब ईंटें कम पड़ी तो हकीकत सामने आई कि मुफ्त की शराब काजी को भी हलाल होती हैं। ठेकेदार की आंखें खुल गई किंतुु वो किसे कहे? किस पर ईंट चोरी का इल्जाम लगाए? आखिरकार ठेकेदार भी चोर और कुछ लोग भी चोर? इसे कहते हैं चोर के घर मोर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
रिक्षा चालक
वो शिक्षक के नाम पर कलंक था। कभी कक्षा में जाकर पढ़ाया नहीं। यहीं कारण था कि विद्यार्थियों की नजरों से गिरा हुआ था। एक दिन शिक्षक दिल्ली शहर में एक ट्रेन से उतरकर बाहर की ओर बढऩे लगा तो दौड़कर एक युवक ने शिक्षक के पैर छुए। शिक्षक फूलकर कुप्पा हो गया और पूछा-बेटे अपना परिचय दो और यहां दिल्ली में आप क्या कर रहे हो?
युवक ने उत्तर दिया कि आपके पास आमूक स्कूल में पढ़ता था किंतु आप कक्षा में आकर कभी पढ़ाते नहीं थे जिसके चलते मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई। कहीं नौकरी नहीं मिली और फिर रिक्षा चलाकर पेट भरने को मजबूर होना पड़ा है। आपकी मेहरबानी से मैं अब दिल्ली में दस वर्षों से रिक्षा चला रहा हूं। शिक्षक ने जब युवक की बात सुनी तो सिर शर्म से झुक गया। मन ही मन सोच रहा था कि सचमुच विद्यार्थियों के साथ घोर अन्याय किया है। अगर मेहनत से पढ़ाता तो आज यह युवक मुझे पलकों पर बिठा लेता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
वो शिक्षक के नाम पर कलंक था। कभी कक्षा में जाकर पढ़ाया नहीं। यहीं कारण था कि विद्यार्थियों की नजरों से गिरा हुआ था। एक दिन शिक्षक दिल्ली शहर में एक ट्रेन से उतरकर बाहर की ओर बढऩे लगा तो दौड़कर एक युवक ने शिक्षक के पैर छुए। शिक्षक फूलकर कुप्पा हो गया और पूछा-बेटे अपना परिचय दो और यहां दिल्ली में आप क्या कर रहे हो?
युवक ने उत्तर दिया कि आपके पास आमूक स्कूल में पढ़ता था किंतु आप कक्षा में आकर कभी पढ़ाते नहीं थे जिसके चलते मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई। कहीं नौकरी नहीं मिली और फिर रिक्षा चलाकर पेट भरने को मजबूर होना पड़ा है। आपकी मेहरबानी से मैं अब दिल्ली में दस वर्षों से रिक्षा चला रहा हूं। शिक्षक ने जब युवक की बात सुनी तो सिर शर्म से झुक गया। मन ही मन सोच रहा था कि सचमुच विद्यार्थियों के साथ घोर अन्याय किया है। अगर मेहनत से पढ़ाता तो आज यह युवक मुझे पलकों पर बिठा लेता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
दरिंदा
शोर मचा हुआ था। कोई कह रहा था इसे मारो तो कोई कह रहा था कि आज बचने न पाए। कोई लाठी तो कोई डंडों से धुनाई करने में लगा हुआ था। आखिरकार उसे अधमरा करके पटक दिया। उसके कपड़े डंडों की मार के कारण फट चुके थे। शरीर से खून बह रहा था। किंतु लोगों का रोष अभी बाकी था। तभी भीड़ से एक सज्जन ने पूछा कि यह कौन है तथा इसे क्यों पीटा जा रहा है?
पास खड़े सज्जन ने जवाब दिया कि यह दरिंदा है। इसने अपने दोस्त की लड़की के साथ मुंह काला कर डाला है। एक ओर तो यह उसे अपना दोस्त कहता था किंतु दो...
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शोर मचा हुआ था। कोई कह रहा था इसे मारो तो कोई कह रहा था कि आज बचने न पाए। कोई लाठी तो कोई डंडों से धुनाई करने में लगा हुआ था। आखिरकार उसे अधमरा करके पटक दिया। उसके कपड़े डंडों की मार के कारण फट चुके थे। शरीर से खून बह रहा था। किंतु लोगों का रोष अभी बाकी था। तभी भीड़ से एक सज्जन ने पूछा कि यह कौन है तथा इसे क्यों पीटा जा रहा है?
पास खड़े सज्जन ने जवाब दिया कि यह दरिंदा है। इसने अपने दोस्त की लड़की के साथ मुंह काला कर डाला है। एक ओर तो यह उसे अपना दोस्त कहता था किंतु दो...
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दुर्घटना
बस स्टैंड पर भीड़ भरा क्षेत्र था। एक युवक अपनी एक बैल वाली गाड़ी को ले जा रहा था। वाहनों का भारी शोर सुनकर बैल ने दौड़ लगानी शुरू कर दी। बैल गाड़ी को लेकर बैल एक सौ की स्पीड से सड़क पर दौडऩे लगा। देखते ही देखते शोर मच गया-बचो, बचो,बचो। तभी आगे से आ रहे एक बाइक पर अधेड़ को चपेट में ले लिया और बाइक को रौंदते हुए बैलगाड़ी आगे बढ़ी। एक अन्य बाइक पर आगे से आ रहे दो सवारों को चपेट में लिया और उनकी बाइक को भी रौंद डाला। यद्यपि तीनों ही जन चोटिल हो गए किंतु सौभाग्यवश अधिक चोट नहीं आई। बेचारे घायल कभी बैलगाड़ी को देखते तो कभी अपनी टूटी बाइक को किंतु करे क्या बिना नंबर की बैलगाड़ी थी। ऐसे में किसके विरुद्ध मामला दर्ज करवाए। परंतु लोगों की हंसी का का ठिकाना नहीं रहा। लोग हंसे जा रहे थे और बैल अपनी उसी रफ्तार से दौड़ते हुए सड़क के किनारे खेतों में जा घुसा। इस दुर्घटना की हर किसी की जुबान पर चर्चा थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
बस स्टैंड पर भीड़ भरा क्षेत्र था। एक युवक अपनी एक बैल वाली गाड़ी को ले जा रहा था। वाहनों का भारी शोर सुनकर बैल ने दौड़ लगानी शुरू कर दी। बैल गाड़ी को लेकर बैल एक सौ की स्पीड से सड़क पर दौडऩे लगा। देखते ही देखते शोर मच गया-बचो, बचो,बचो। तभी आगे से आ रहे एक बाइक पर अधेड़ को चपेट में ले लिया और बाइक को रौंदते हुए बैलगाड़ी आगे बढ़ी। एक अन्य बाइक पर आगे से आ रहे दो सवारों को चपेट में लिया और उनकी बाइक को भी रौंद डाला। यद्यपि तीनों ही जन चोटिल हो गए किंतु सौभाग्यवश अधिक चोट नहीं आई। बेचारे घायल कभी बैलगाड़ी को देखते तो कभी अपनी टूटी बाइक को किंतु करे क्या बिना नंबर की बैलगाड़ी थी। ऐसे में किसके विरुद्ध मामला दर्ज करवाए। परंतु लोगों की हंसी का का ठिकाना नहीं रहा। लोग हंसे जा रहे थे और बैल अपनी उसी रफ्तार से दौड़ते हुए सड़क के किनारे खेतों में जा घुसा। इस दुर्घटना की हर किसी की जुबान पर चर्चा थी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
केला
केला मूसा बलबिसियाना नाम से जाना जाता है। यह दुनिया का सबसे अधिक पेट भरने वाला फल है। कच्चा एवं पक्का दोनों रूपों में प्रयोग में लाया जाता है। घास जाति का पौधा होता है जो गलती पेड़ माना जाता है। यह एक झाड़ी होती है जिसका घास जाति में सबसे बड़ा फूल लगता है। भारत केले के उत्पादन में नंबर एक पर है।
इसमें 75 फीसदी पानी, 23 फीसदी कार्बोहाइड्रेट, तत्पश्चात प्रोटीन, वसा, पोटाशियम, विटामिन बी-6, विटामिन-सी, मैंगनीज इत्यादि पाए जाते हैं। कच्चा केला जहां सब्जी बनाने के काम आता ह...
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केला मूसा बलबिसियाना नाम से जाना जाता है। यह दुनिया का सबसे अधिक पेट भरने वाला फल है। कच्चा एवं पक्का दोनों रूपों में प्रयोग में लाया जाता है। घास जाति का पौधा होता है जो गलती पेड़ माना जाता है। यह एक झाड़ी होती है जिसका घास जाति में सबसे बड़ा फूल लगता है। भारत केले के उत्पादन में नंबर एक पर है।
इसमें 75 फीसदी पानी, 23 फीसदी कार्बोहाइड्रेट, तत्पश्चात प्रोटीन, वसा, पोटाशियम, विटामिन बी-6, विटामिन-सी, मैंगनीज इत्यादि पाए जाते हैं। कच्चा केला जहां सब्जी बनाने के काम आता ह...
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प्याज
होटल पर खाने में सलाद में मूली, सेब, खीरा परोसी जा रही थी। बड़े स्वाद से लोग खाना खा रहे थे। खाना खा रहे एक व्यक्ति ने वेटर से कहा-थोड़ी प्याज का सलाद लाना। वेटर झट से सेब काटकर सलाद के लिए लाया तो ग्राहक ने चकित होकर पूछा-भाई प्याज मांगी तो तुम सेब दे रहे हो? वेटर ने सामने लगे पोस्टर की ओर इशारा करते हुए कहा-देखो, होटल के बाहर पोस्टर पर स्पष्ट लिखा है कि होटल में प्याज सलाद में खाने वाले भोजन न करे। अदब से सेब का सलाद परोसा जाएगा।
वेटर ने कहा-एक किलो प्याज में तीन किलो सेब आ सकते हैं तो फिर प्याज खाकर क्या अधिक बलवान बनना है? सेब खाने से मुंह से बदबू भी नहीं आएगी और सम्मान भी बढ़ेगा, ऐसे में सलाद मेें सेब खाओ। कहो तो ओर ला दू?
वेटर की बात सुनकर ग्राहक मौन हो गया।
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होटल पर खाने में सलाद में मूली, सेब, खीरा परोसी जा रही थी। बड़े स्वाद से लोग खाना खा रहे थे। खाना खा रहे एक व्यक्ति ने वेटर से कहा-थोड़ी प्याज का सलाद लाना। वेटर झट से सेब काटकर सलाद के लिए लाया तो ग्राहक ने चकित होकर पूछा-भाई प्याज मांगी तो तुम सेब दे रहे हो? वेटर ने सामने लगे पोस्टर की ओर इशारा करते हुए कहा-देखो, होटल के बाहर पोस्टर पर स्पष्ट लिखा है कि होटल में प्याज सलाद में खाने वाले भोजन न करे। अदब से सेब का सलाद परोसा जाएगा।
वेटर ने कहा-एक किलो प्याज में तीन किलो सेब आ सकते हैं तो फिर प्याज खाकर क्या अधिक बलवान बनना है? सेब खाने से मुंह से बदबू भी नहीं आएगी और सम्मान भी बढ़ेगा, ऐसे में सलाद मेें सेब खाओ। कहो तो ओर ला दू?
वेटर की बात सुनकर ग्राहक मौन हो गया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**











































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