शुभ रात्रि
कड़ाके की ठंड एवं धुंध पड़ रही थी। गाड़ी के सामने कुछ भी नहीं दिखाई पड़ रहा था। अभी रामू कुछ ही दूर चला था कि धुंध सघन होने से उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था। घोंघे की चाल से गाड़ी चल रही थी कि सुनसान की जगह पर अर्धनग्र बुजुर्ग सड़क के किनारे खड़ा नजर आया जिसे देखकर रामू दंग रह गया। उसने झटपट अपनी गाड़ी को ब्रेक लगाया तो बुजुर्ग ललचाई निगाहों से रामू को निहारने लगा। रामू को समझने में देर हीं लगी और अपने शरीर पर ओढ़ा हुआ कंबल उतारकर बाबा को झटपट देते हुए कहा-बाबा, मैं घर पर दूसरा कंबल ले लूंगा। आप यह कंबल ओढ़ लो और देखो मेरे इस पैकेट में मेरा खाना है। आप खाना खाकर कंबल ओढ़कर रात बिताना। भगवान ने चाहा तो मैं कल फिर मिलूंगा। बुजुर्ग एक सौ आशीष देते हुए आंखों में आंसू ले आया। रामू को हाथ जोड़कर नमन कहा तो रामू ने भी हंसकर कहा-बाबा, शुभ रात्रि। रामू सोचता जा रहा था कि आज की रात कितनी शुभ है जब एक गरीब और जरूरतमंद की मदद की। रामू अपने को धन्य समझ रहा था और सोच रहा था कि देश में अभी भी लोग गरीब हैं। सभी इनकी मदद करे तो कोई सर्दी से नहीं मरेगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
कड़ाके की ठंड एवं धुंध पड़ रही थी। गाड़ी के सामने कुछ भी नहीं दिखाई पड़ रहा था। अभी रामू कुछ ही दूर चला था कि धुंध सघन होने से उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था। घोंघे की चाल से गाड़ी चल रही थी कि सुनसान की जगह पर अर्धनग्र बुजुर्ग सड़क के किनारे खड़ा नजर आया जिसे देखकर रामू दंग रह गया। उसने झटपट अपनी गाड़ी को ब्रेक लगाया तो बुजुर्ग ललचाई निगाहों से रामू को निहारने लगा। रामू को समझने में देर हीं लगी और अपने शरीर पर ओढ़ा हुआ कंबल उतारकर बाबा को झटपट देते हुए कहा-बाबा, मैं घर पर दूसरा कंबल ले लूंगा। आप यह कंबल ओढ़ लो और देखो मेरे इस पैकेट में मेरा खाना है। आप खाना खाकर कंबल ओढ़कर रात बिताना। भगवान ने चाहा तो मैं कल फिर मिलूंगा। बुजुर्ग एक सौ आशीष देते हुए आंखों में आंसू ले आया। रामू को हाथ जोड़कर नमन कहा तो रामू ने भी हंसकर कहा-बाबा, शुभ रात्रि। रामू सोचता जा रहा था कि आज की रात कितनी शुभ है जब एक गरीब और जरूरतमंद की मदद की। रामू अपने को धन्य समझ रहा था और सोच रहा था कि देश में अभी भी लोग गरीब हैं। सभी इनकी मदद करे तो कोई सर्दी से नहीं मरेगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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