Saturday, December 21, 2019

                              न्यौता
शक्ल सूरत से बिहार या उत्तर प्रदेश के लगने वाले दो युवक शादी समारोह के पंडाल में घुसने लगे तो द्वार पर खड़े मालिक ने पूछा- तुम कहां के हो और कौन हो? दोनों ने अपना परिचय बताया और कहा कि वे गांव के ही रहने वाले हैं। गेट पर खड़े बेहतरीन कपड़ों में सजे जन ने पूछा- क्या तुम्हें न्यौता दिया गया है? दोनों का एक साथ उत्तर दिया कि न्यौता तो नहीं मिला लेकिन खाने का जी करता है। इसलिए हम दोनों चल कर आ गए। गेट पर खड़े जन ने कड़ककर कहा-जब तुम्हें न्यौता ही नहीं मिला तो आए तो माल चट करने को क्यों आए? चलो भागो यहां से? आते हैं और खाना खा जाते हैं जिसका भुगतान शादी करने वाले लोगों को भुगतना पड़ता है। दोनों युवक वापस चले गए लेकिन पास खड़े लोगों ने कहा कि जब शादी समारोह में इतना खर्च किया जाता है और भारी मात्रा में खाना बेकार होता है तो जब ये दो युवक खाने की लालसा लेकर आ ही गए तो इन्हें खाने की आज्ञा देनी चाहिए थी। लोग कई तरह की बातें करते हुए आगे बढ़ गए। कोई कंजूस कह रहा था तो कोई कह रहा था कि इनके तो शादी में आना भी बुरा है जो खाना खाने आने वालों से समस्त जानकारी हासिल करते हैं।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

No comments: