Saturday, December 21, 2019

                              फीस
भीड़ में बच्ची हर इंसान से महज एक एक रुपया मांग रही थी। कोई दो देना चाहे तो नहीं लेती था। पास खड़े एक बुजुर्ग ने पूछा कि वो एक रुपया ही क्यों ले रही है?
बच्ची ने जवाब दिया-उनकी एक दोस्त अति गरीब है किंतु पढऩे में अति चतुर है। उनके माता पिता फीस भरने में असमर्थ हैं किंतु मेरे माता पिता भी गरीब है। ऐसे में मैंने सोचा कि हर इंसान से एक एक रुपया लेकर दोस्त की फीस भरी जा सकती है। एक रुपये सभी ले सकते हैं किंतु दो रुपये या अधिक लेना असमानता को दर्शाता है। बच्ची का जवाब सुनकर बुजुर्ग की आंखों में आंसू आ गए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**

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