Tuesday, March 31, 2020

 चूल्हा नौत
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दूसरे प्रदेशों से आए श्रमिकों को खाना खिलाया जा रहा था। खाना खिलाते खिलाते आज चार दिन बीत गए थे। श्रमिकों के लिए गर्मागर्म पूड़ी, हलवा, दाल, सब्जी, कढ़ी और न जाने क्या क्या दिए जा रह थे। सुबह से शाम तक चूल्हा चलता रहता था। अभी खाना खिलाया जा रहा था कि एक परिवार के आठ सदस्य जिसमें बच्चों के हाथ पकड़े महिलाएं खाना खाने के लिए आई तो पास खड़े एक सज्जन से मुंह से निकला-वाह, सरकार ने चूल्हा नौत सभी श्रमिकों को खाने का न्यौता दिया है। कोरोना बीमारी का काज किया जा रहा है। सुनकर ठहाका लगाया। सभी मौन एकटक देखते रह गए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा***

          रोटी 

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रोटी खातिर  हाथ ओटे
कैसा यह देश हमारा है
पैसे के लिए  प्राण दे दे
पैसा लगे अति प्यारा है,
मेहनत से जो जी चुराते
भूखों प्यासे  वो मरते हैं
कठोर परिश्रम करते रहे
वो जग के कष्ट हरते हैं,
मुफ्त का  खाने बढ़ गए
दिनभर चाहे मुफ्त माल
दुनिया में धोखा देते जो
वो बजाते हैं व्यर्थ गाल,
लो मेहनत  फर्ज बनाए
नाम कमाएंगे  फिर सारे
देखना एक दिन आएगा
लक्ष्मी पहुंचे अपने द्वारे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा** 

ताई ताऊ संवाद 

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ताई बोली ताऊ से......
क्या मौज हुई श्रमिकों की
बारातियों जैसी हो खातिर
कुछ लफंगे खाना खा जाते
रखते  दिमाग अति शातिर।
ताऊ बोला ताई से..........
बड़ी मुसीबत आई देश में
फूंक फूंक रख  रहे कदम
एक बार कोरोना  छू जाए
न जाने कब निकलेगा दम,
पूरा देश जुटा  हुआ  अब
दे रहा दान  दक्षिणा अपार
खाना खाए गरीब के बच्चे
जन जन का यह है आभार।
**होशियार सिंह,लेखक,कनीना,हरियाणा**


      दूरी 

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दूरी बढ़ी जन जन में
ऐसी कोरोना बीमारी
बहुत कष्ट दे डाले है
दुनिया मौन हुई सारी,
कभी कभी डर लागे
कब तक ये सताएगा
कितने लोगों ले जान
कब भारत से जाएगा,
सोच सोच परेशान हैं
भारत की व्यथा भारी
करोड़ों का नुकसान है
दर्द में बच्चे, नर-नारी,
आओ देश से भगा दे
मिलके सारे देशवासी
घरों में छुपकर रहना
बनकर सारे मृदुभाषी।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**






Monday, March 30, 2020


ठहाका

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कोरोनावायरस के चलते श्रमिकों एवं गाडिय़ा लुहारों को समाजसेवी प्रतिदिन खाना खिला रहे थे। रोजाना अदल बदल कर खाना दे रहे थे। आज जब युवक खाना खिलाने गाडिय़ा लुहारों में पहुंचे तो एक लुहारी ने ठेठ हरियाण्वी अंदाज में कहा-अरे ओ जिंगड़ो, सरकार तुमको हमारे खाणा के भारी पैसे दे रही है। तुम हमको कभी म्हारा हिस्से का हलवा तक नहीं खिलाते, फल नहीं लाकर दे रहे। लेकर सब्जी पूड़ी आ खड़े होते हो, खा लो खाना। जाओ हम तुम्हारा घटिया खाणा हीं खावांगे। कल तुम हलवा और पल लेकर आना फिर ही खाएंगे। और हलवा नहीं लाए तो तुम्हार शिकायत भी करणी जाणा सा।
इतना सुनकर खाना खिलाने वालों ने ठहाका लगाया और उनकी पूरे दिन की थकान पल में मिट गई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




 
ताई ताऊ संवाद 
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ताई बोली ताऊ से.....
मुसीबत का पहाड़ टूटा
कोरोना कहां  से आया
हंसते गाते जा  रहे हम
कोरोना ने खूब रुलाया।
ताऊ बोला ताई से.......
कोरोना एक नया वायरस
दुष्ट दिमाग ने इसे बनाया
मिट्टी में एक दिन मिलेगा
जिसने भी जन को रुलाया,
शांतभाव से घर में बैठे हैं
चौपट हो गया सारा धंधा
सेंसेक्स गिरता ही जा रहा
हर क्षेत्र  में  मंदा ही मंदा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


       पलायन

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भाग चले प्रदेशी लोग
पता नहीं कैसा ये रोग
खाना पीना भूल गए हैं
बायो अस्त्र हो अमोघ,
धैर्य सबसे  बड़ी पूंजी
बस कर लो कुछ जमा
लुट गई यह दौलत तो
सब कुछ देंगे तुम गवां,
सावधानी बरतते रहना
संतों का यही है कहना
चाहे कैसा धन मिलता
निज घरों में ही  रहना,
पुकार रहा परिवार भी
अब मिलकर एक रहो
शांति से घर में बैठकर
कोरोना को टाटा कहो।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

   मदद 

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मदद जमकर करते आए
हरियाणा की रित कहाए
यहां से होकर कोई जाए
उसे भूखो  कभी ना पाए,
तन,मन और धन कहाता
हरियाणा की बड़ी  पूंजी
मेहनत से नहीं जी चुराते
यही हो  सफलता कुंजी,
खाना पीना और आवास
देते रहेंगे जब  तक सांस
दूर से चलकर  वो आते
होती उनको बड़ी  आश,
दूर कहीं नहीं जाना बस
चलकर यहां  पर आओ
कष्ट सारे खत्म हो जाए
हरेक यहां सुविधा पाओ।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

Sunday, March 29, 2020

सपना 
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आता रहता एक सपना
जग में ना  कोई अपना
एक पते की बात कहीं
राम नाम सदा ही रटना,
शांत  बैठकर अपने घर
हाथ जोड़ नमन कर लो
फैला है वायरस  खतरा
अपनों के  लिए डर लो,
कभी एकांत रहके  मिले
आंतरिक शक्ति  व शांति
खुराफात मन  की उपज
पल में कर बैठते  क्रांति,
लो आज विश्वास जगाए
याद में उनके दिये जलाए
रो रहे कितने जन जग में
बस एक बार उन्हें हंसाए।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




जैव युद्ध 

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मलयुद्ध भूले भूले तीर
घटते जा रहे है शूरवीर
परमाणु से लड़ाई होती
जैव युद्ध ने बढ़ाई पीर,
कहीं  नक्सली  घात है
कहीं डर है आतंकवाद
कहीं भाई  भाई दुश्मन
कहीं छेड़ रहे है जेहाद,
जनसंख्या बढ़ती  जाए
डार्विन आता बड़ा याद
रोटी,भोजन और जमीन
कहाए झगड़े की फसाद,
रोग,रोगाणु और विषाणु
कब तक लेंगे जन जान
शांति से रहना नहीं चाहे
राक्षसों की यही पहचान।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 


ताई ताऊ संवाद

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ताई बोली ताऊ से.....
देश हुआ  है लॉकडाउन
एक ओर कोरोना का डर
अपने वतन पैदल जा रहे
दूर बहुत हैं  श्रमिक  घर।
ताऊ बोला ताई से.........
दौड़ चला यूपी  व बिहार
मध्यप्रदेश और राजस्थान
पूरा परिवार चला जा रहा
हिम्मत है कदमों  में जान,
कोई नहीं कोरोना की मौत
हरियाणा मेरा हरि का घर
ऐतिहात बरत रहे मिलकर
ऐसे में नहीं कोई हमें डर।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



मानवता 

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सरकार के आदेशानुसार श्रमिकों के लिए खाने का प्रबंध किया गया था जिसमें कोरोनावायरस के डर सेभीड़ जमा न करने का आदेश था। बंद पैकेट खाने के वितरित किए जा रहे थे। लावणी करने वाले लोग लावणी किसी के करते और खाने के पैकेट लने आ जाते। एक ही परिवार के दस दस जन लाइन में खड़े होकर पैकेट ले जाते और जितना खाए जाए खाते शेष को फेंक देते। और तो और शराबियों को घर में खाना न मिलने से वे भी लाइन में आ खड़े होते। प्रतिदिन दो हजार श्रमिक खाने के लिए सुबह और इतने ही शाम को टूट पड़ते। आखिरकार एक अधिकारी ने कहना पड़ा-समाज में मानवता कहां है? हाथ ओटने में आगे और देने में पीछे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


Saturday, March 28, 2020





दुर्घटनाएं
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दुर्घटनाएं घट गई है
जब से   लॉकडाउन
कोरोना  से बचना है
सेहत ना   हो डाउन,
इमून अगर कमजोर
कोरोना पर  ना जोर
जन हानि हो सकती
बेशक मचा लो शोर,
परिवार  इकट्ठा  बैठे
जब से कोरोना आया
दोष किसी का झेलके
कइयों ने प्राण गंवाया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



क्या होगा 

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बंद हुए मजदूर आना
लावणी  हुई मुश्किल
जर्दा,पान मसाला बंद
घर से  नहीं रहे हिल,
बीड़ी सिगरेट बंद हुई
शराब के ठेके भी बंद
सड़के भी  विरान हुई
किसान मिले बस चंद,
खाना पीना और सोना
खूब नसीब  में  आया
वाह रे  वाह! कोरोना
तूने खूब हमें  रुलाया,
बसें नहीं, नहीं हैं ट्रेन
पैदल ही  जाना होता
देख-देखकर  हालात
इंसान धरती पर रोता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


ताई ताऊ संवाद 

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ताई बोली ताऊ से.......
बुरी बीमारी फैल रही है
बाहर नहीं तुम्हें है जाना
ताश खेलने  पर प्रतिबंध
छुपकर घर में  सो जाना।
ताऊ बोला ताई से.......
कैद से कम घर नहीं लगे
घर भी अब लगता उबाऊं
बाहर पुलिस का पहरा है
कैसे चलकर  बाहर जाऊ,
एक ओर कोरोना का भय
दूसरी ओर  फसल बर्बाद
कैसा माहौल बना दिया है
आपातकाल की आई याद।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
 



भूखों 

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न ट्रेन न कोई बस फिर भी पीठ पर सामान लादकर सड़क मार्ग से छुपते छुपाते बिहारी जैसे लोगों को रोकते हुए पुलिस ने पूछा-कहा जा रहा है?
जनाब मैं तो बिहर जा रहा हूं। उत्तर मिला
बिहार.....यह तो 500 किमी से कम नहीं है। फिर कैसे जाओगे?
पैदल।
तो फिर खाना वाना खाया है?
चार दिनों से भूखों हूं।
पुलिस ने आश्चर्य से-चार दिनों से भूखों और उस पर 500 किमी दूरी कैसे तय होगी?
इधर आओ, कम से कम खाना तो खा लो। फिर चले जाना।
बिहारी ने राहत की सांस ली और खाना खाने लगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

Friday, March 27, 2020

कोरोना कांवड़ 
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रास्ते में युवाओं को रोकते हुए समाजसेवी ने कहा-भाइयो, खाने का प्रबंध है। खाना खाकर ही जाना। युवाओं ने कहा-नहीं, नहीं। हमें तो दूर जाना है। 600 किमी दूर अपने गांव को जाना है।
........पर कोई साधन तक नहीं है फिर आप कैसे जाएंगे?
पैदल ही एकमात्र विकल्प बचा है। हम....
बीच में ही रोकते हुए समाजसेवी ने कहा-परंतु इतनी दूरी पैदल कैसे तय करोगे, कई दिन लग जाएंगे?
युवाओं ने रोनी सूरत बनाते हुए कहा-यूं समझेंगे कि कांवड़ लेकर आए हैं? लोग 600 किमी दूर से कांवड़ भी तो लाते हैं। हम शिवरात्रि नहीं कोरोना कांवड़ नाम देंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

     ताई ताऊ संवाद 

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ताई बोली ताऊ से.........
घरों में छिपकर बैठे हैं
जैसे कोई  डाकू आया
कितनों की जान गई है
हंसते जनों  को रुलाया।
ताऊ बोला ताई को......
अदृश्य दुश्मन कहलाता
कोरोनावायरस है दुश्मन
कितने ही  भयभीत हुए
कितनों के  दर्द तन-मन,
करोड़ों रुपये की है हानि
खराब हुआ है  संसाधन
यूं ही अगर  चलता रहा
खत्म होंगे धरती के जन।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

  जागो 

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बार बार चेताया है
क्यों सोया है इंसान
कोरोना का आतंक
क्यों घूम  रहा जन,
घर में छुुपकर रहो
हांड रहे सड़कों पर
खुद मरना अगर है
होंगे कई बर्बाद घर,
ताश पीटते रहते हो
हुक्के बिना तसल्ली ना
व्यर्थ गाल बजाते हो
घर में होंगे बच्चे मां,
शांत बैठ जाओ अब
कदम नहीं बढ़ाना है
सभी के  प्रयासों  से
रोग मार  भगाना  है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 

  दो साथ

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देश पुकार  रहा अब
अब तो बढ़ाओ हाथ
निज ताकत दिखाओ
कुछ तो बढ़ाओ हाथ,
मानवता यही कहती
गरीबों की सेवा करो
गरीब खून  ना पीओ
कुछ प्रभु से भी डरो,
तरस रहे  भोजन को
उनको खिलाए खाना
चार दिन जीवन तेरा
जन बुलबुला है माना,
अब कुछ समझ  लो
ना समझे वो नर नहीं
गया समय नहीं आए
सत्य बात संत  कही।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

Thursday, March 26, 2020

ताई ताऊ संवाद 
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ताई बोली ताऊ से....
कोरोना की भेंट चढ़ गए
नवरात्रे और नव संवत्सर
घर में छुपे  बैठे सब जन
लॉकडाउन प्रभाव घर घर।
ताऊ बोला ताई से...........
बेशक कोरोना का डर हो
कृषक करें खेत में लावणी
सरसों के बाद आएगी गेहूं
शहर - कस्बा बने छावनी,
कोरोना को हराकर दम ले
भारत देश का  यह नारा है
मिलकर मदद करे एक दूजे
फर्ज व ईमान यह हमारा है।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**



कोरोना की भेंट 

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रानी एक माह पहले से ही नवरात्रे एवं नव संवत्सर की तैयारी में जुटी थी। उनके सभी काम सफल हुए थे जिससे वो अति प्रसन्न थी और इस बार व्रत कर मंदिरों में जाना चाहती थी। ज्यों ज्यों समय पास आया कि कोरोनावायरस का रोग फैल गया। सरकार ने लॉकडाउन कर दिया। घर से बाहर निकलना कठिन हो गया। ऐसे में घर के अंदर ही नवरात्रे मनाए गए। व्रत भी किए किंतु मां के दर्शन के लिए मंदिर नहीं जा सकी। वो सोच रही थी कि इस बार तो नवरात्रे कोरोनावायरस की भेंट चढ़ गए। अगली बार फिर देखा जाएगा। यही सोच में में डूबी रहती थी कि पहली बार नवरात्रे मनाने का सोचा वो भी नहीं मन पाया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


  हिम्मत 

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हार रहा है अब कोरोना
हिम्मत से लेना  है काम
मार मारकर भगा देना ये
तब होगा भारत का नाम,
चाल किसी राक्षस की है
भुगत रहा सारा ही संसार
बलिदान दे देकर लोगों ने
सीखा है बस देश से प्यार,
जो हिम्मत  हार  जाता है
वो कहलाएगा सदा कायर
अदृश्य  दुश्मन को कारना
घर में बैठना बड़ा है फायर,
जीत जाए  बाजी एक दिन
उस दिन  मनाएंगे  दीवाली
तब तक शांत भाव से देखो
दिन अंधियारे रातें हैं काली।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
             
              बेखबर 

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लेता है हिम्मत से काम
नहीं करता कभी आराम
रा




सीना चीर अन्न दे
बस उसे  काम ही काम,
बेखबर है कोरोना से वो
कर रहा  जमकर  कटाई
हर जन को  सहारा मिले
उसने तो राह  खुद बनाई,
कभी बच्चे भूखों व प्यासे
कभी पैरों  में टूटी चप्पल
सदा भाव के लिए लड़ता
सरकार लगती बे-अक्कल,
कोई रोग फैले या  लड़ाई
उसने जान  खेत में लगाई
अगर खेत में फसल नहीं
होगी बहुत  जग में हंसाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


Wednesday, March 25, 2020

मिर्गी दिवस 
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अपस्मार या मिर्गी कहो
या फिर कहो एपिलेप्सी
तंत्रिका संबंधित  रोग है
बातें करे वो   बहकी सी
अनुवंशिकी  रोग नहीं है
खो देता है मानव चेतना
बेहोश, वो  झाग गिराता
पाया अभी  तक भेद ना,
सबसे  पुराना रोग होता
दौरा चले दो तीन मिनट
सर्जरी से कुछ इलाज है
फैली है बीमारी घट घट,
व्रत, उपवास  नहीं करो
कह दो मिर्गी  वालों से
कोई भी पीडि़त हो जाए
यह ज्ञात हुआ सालों से।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


ताई ताऊ संवाद 

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ताई बोली ताऊ से....
लॉकडाउन चल रहा है
घर से निकलना कठिन
खेत में लो करे लावणी
बीत जाए  पूरा ही दिन।
ताऊ बोला ताई से........
दरांती,रोटी साथ ले लो
बोतल भर लो पानी की
एक डोली छाछ भर लो
थैली भर  लो धाणी की,
सरसों की करेंगे लावणी
पानी व छाछ हम पीएंगे
मेहनत करके खेतों में यूं
मजे से ये जीवन जीएंगे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना, हरियाणा**

थप्पड़ 

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कारोना का भय सता रहा था कि एक फल बेचने वाला जवान जब फल बेच रहा था तो उसने मास्क नहीं पहनी। तभी उधर से गुजर रहे अधिकारी के सिक्योरिटी गार्ड की नजर पड़ी। गाड़ी से उतरकर वो सीधा जवान तक आया और उसे एक जोर का थप्पड़ जड़ दिया। तब उसे समझाते हुए कहा-कि कम से कम स्वयं तो मरो किंतु दूसरों को न मारो। हाथों में दस्ताने एवं मुख पर मास्क जरूर पहनो। समय समय पर हाथों को धोते रहो। युवक एक टक कभी रोटी रोजी को देखता तो कभी उस सिक्योरिटी गार्ड को पर कहते हैं कि सामर्थ को नहीं दोष गुसाई। बेचारा अपने मुंह को सहलाता रहा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


नवरात्रे 

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घर में बंद इंसान आज
मना रहा विक्रमी संवत
नवरात्रे घर में मना रहा
कोरोना ने  कर दी गत,
फैल रहा रोग एकाएक
दुनिया आ गई चपेट में
कइयों का रोजगार गया
रोटी नहीं  मिले पेट में,
जीवों का जो खून पीते
खाते चूहे  व चमगादड़
कोरोना का रोग फैलता
दिल करता  है धड़धड़,
मर रहे  कितने ही जन
घर में बंद  कितने जन
मृत्युशैया पर बैठे बहुत
रो रहे हैं वे मन ही मन।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

Tuesday, March 24, 2020

नवरात्रे 
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नौ रूपों में पूजी जाए
दुर्गा मां के ये नौ रूप
कहीं स्वर्ण  सी सुंदर
कहीं काली है कुरूप,
व्रत और पूजा के पर्व
जप तप के ये आधार
पुराना अन्न छोड़ कर
तब नव से करो प्यार,
मां की शरण में आए
हो जाता है  बेड़ा पार
हर क्षेत्र में जीत मिले
कभी नहीं  होगी हार,
कंजक जिमाते पर्व में
मेले और आए त्योहार
संकट  सारे  टल जाते
जो करता मां से प्यार।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

 मौत 

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संपूर्ण अस्पताल मरीजों के दर्द से गूंज रहा था। डाक्टर दंपति हवाई जहाज से पहुंचे और बचाओ, बचाओ की गूंज सुनाई पडऩे लगी। जल्दी जल्दी में डाक्टर दंपति मरीजों के बीच कूद पड़ा और देखते ही देखते करीब 150 लोगों का जीवन बचा दिया किंतु यह क्या दंपति खुद वायरस से पीडि़त हो गया। उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था। अफरा तफरी मच गई। आनन फानन में कुछ प्रबंध तो किए किंतु असफल रहे। दंपति ने एक दूसरे की ओर देखा और मुस्कुराकर दम तोड़ दिया। किसी ने उन्हें भगवान कहा तो किसी ने उन्हें देवी देवता कहा किंतु सभी की आंखों में आंसु थे।वो आज सभी से सदा सदा के लिए अलविदा हो रहा था। आंसु रोके भी नहीं रुक रहे थे।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

ताई ताऊ संवाद 

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ताई बोली ताऊ से.......
नवरात्रे और नव संवत
एक साथ दस्तक दे रहे
कोरोना से बचकर रहो
देवी देवता यह कह रहे।
ताऊ बोला ताई से........
लील रहा कोरोना जीवन
यह है मेरे दिल  का दर्द
चिल्ला रहे बच्चे व बच्ची
खामोश हुए  औरत-मर्द,
पूजा अर्चना बाकी बची
वो भी  पूरी कर  जाऊंगा
अगर जगत से चला गया
वापस लौटकर न आऊंगा।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा**

         2077 

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विक्रमी संवत 2077
दे रहा आज दस्तक
नप विक्रमादित्य को
नमन करो  शत शत,
हूणों को  हराकर के
टेक्सास  नदी पहुंचा
घोड़ों को जल पिला
मातृभूमि  को  सींचा,
इसी खुशी में उन्होंने
विक्रमी संवत चलाया
कर लो राजा को याद
आज वो दिन  आया,
पीले वस्त्र धारण कर
पीले पकवान बनाओ
हिंदू नव वर्ष आया है
जमकर खुशी मनाओ।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा** 




Monday, March 23, 2020

छुपे बैठे 
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घर में छुपे  बैठे सारे
कहीं कोरोना न आए
जब कोई  खांसता है
कोरोना का डर सताए,
खांसी,जुकाम अगर है
लोग डर डर दूर भागे
कोरोना ने गत बना दी
ये जग  रात दिन जागे,
छूत की महामारी फैली
न जाने कब ले ले जान
चाहे कोई कितना बड़ा
नहीं करती  ये पहचान,
कभी लाकडाउन  होता
कभी है निज घर में बंद
कितने अस्पताल में जूझे
मौत हुई है  देश में चंद।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**




 खाना 
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सरकार ने लोकडाउन कर दिया। उसे खाने की चिंता सता रही थी। पैरों से शत प्रतिशत अपंग था और सिर पर दे बेटियों का बोझ भी था।  बुजुर्ग अपनी बच्चियों के सामने बैठा सोच में डूब रहा था कि एक नन्हीं बिटिया की नजर पड़ी तो उसने पिता से पूछा-आज आपकी आंखों में आंसू हैं और खाना भी नहीं खा रहे हैं, आखिरकार क्या कारण है?
पिता ने उत्तर दिया-मुझे कल के खाने की चिंता खाएं जा रही है।
बेटी ने हंसकर एक ग्रास अपने पिता के मुंह में देते हुए कहा-कल की चिंता कल करेंगे। आज जब खाना सामने हैं तो उसे खाना चाहिए। कल मंगलवार है और तुम्हारा व्रत होता है वहीं फिर परसों से नवरात्रे लग जाएंगे। दुर्गा मां सभी का भला करेगी। इतना कहते ही बुजुर्ग के मुख से निकला-वाह, क्या सच बात कही। मैं अज्ञानी बना बैठा था। मैं कल का खाना प्रभु एवं माता पर छोड़ता हूं। इतना कहकर खाना शुरू कर दिया।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


ताई ताऊ संवाद

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ताई बोली ताऊ से.....
लाकडाउन कर दिया है
ले आओ आटा व दाल
तबियत  खराब हो रही
घर पर  करना देखभाल।
ताऊ बोला ताई से.......
कल जनता का कर्फ्यू था
और आज गये थे खेत में
लाकडाउन अब किया है
सरसों बिखरे अब खेत में,
एक ओर कोराना का डर
दूसरी ओर फसल कटाई
यदि हमें कुछ हो गया तो
होगी जग में खूब हंसाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


  शहीदी दिवस 

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फांसी का फंदा चूमा
दे गए अपनी कुर्बानी
देश तब आजाद हुआ
मिटी थी गोरे मनमानी,
भगत सिंह, राजगुरु थे
कहलाता एक सुखदेव
राक्षस राज  यौवन पर
तब आए ये  तीनों देव,
कांपते थे  गोरे थर-थर
भगत सिंह यूं चलते थे
कितने ही वीर सिपाही
उनको  बहुत खलते थे,
नमन उन देशभक्तों को
करवाया  देश  आजाद
धरती मिटे या आकाश
सदा रहेंगे जग में याद।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


   छुपे बैठे 

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घर में छुपे  बैठे सारे
कहीं कोरोना न आए
जब कोई  खांसता है
कोरोना का डर सताए,
खांसी,जुकाम अगर है
लोग डर डर दूर भागे
कोरोना ने गत बना दी
ये जग  रात दिन जागे,
छूत की महामारी फैली
न जाने कब ले ले जान
चाहे कोई कितना बड़ा
नहीं करती  ये पहचान,
कभी लाकडाउन  होता
कभी है निज घर में बंद
कितने अस्पताल में जूझे
मौत हुई है  देश में चंद।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

Sunday, March 22, 2020

ताली एवं थाली 
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बच्चा उन संस्थाओं और वीरों के लिए ताली तथा उसके साथी ताली बजा रहे थे जो कोरोनावायरस से लड़ रहे हैं। बच्चे का पिता भी कोरोनावायरस से पीडि़त था तथा अस्पताल में भर्ती है। बच्चे की आंखों में आंसू थे किंतु वो चाह रहा था कि ऐसे लोग जो उनके पिता की सेवा कर रहे हैं, के लिए ताली या थाली बजाई जाए। वो देशभक्ति और एकता की मिसाल कायम कर रहा था। जिसने दृश्य देखा बस यही कहा-वाह, बच्चे के कितने हौसले बुलंद हैं।
  **होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**


ताऊ ताई संवाद

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ताई बोली ताऊ से.....
एकता की मिसाल बनी
अपनी ताली और थाली
हौसले  कर  दिए बुलंद
जो करते  देश रखवाली।
ताऊ बोला ताई से......
कोरोना की मार बुरी है
कितने लोग किए स्वाह
कितने लोग जूझ रहे हैं
दो दो हाथ  करता जहां,
भारत देश का जन कर्फ्यू
जग के लिए है मिसाल
अनुसरण करेंगे देश सारे
भारत है जग में विशाल।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**

     जन कर्फ्यू

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वाह वाह, मेरा देश
जहां करते हैं प्रयोग
जग के ही शीर्ष पर
छाया  हुआ है योग,
कोरोना से लडऩे की
नई खोजी एक विधि
जन कर्फ्यू  लगाकर
कोरोना बहा दी नदी,
महामारी को काटा है
नयी विधि अपनाकर
रोग को रोक दिया है
जनता को  समझाकर,
सदियों तक  याद रहे
यह एक अजीब पल
देश अनुसरण  करेंगे
रोगों निदान  का हल।
**होशियार सिंह,लेखक,कनीना,हरियाणा**

जल दिवस

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भूल गए जल दिवस
कोरोना के  कहर में
जन चुपचाप बैठे थे
कफ्र्यू लगा शहर में,
बहुत शांत व महान
एक कार्य कर दिया
कोरोना वार पड़ा था
बस मुंह  मोड़ दिया,
करोड़ों  जुटे हुए  थे
वीर धीर  की भांति
बस निशाना एक था
भूल गए जाति पाती,
रो रहा पड़ा कोरोना
ऐसी सबक सिखाई
कोरोना दफन किया
नहीं दे रहा दिखाई।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**