लघु कथा बारिश
पूरा गरीब परिवार फटे पुराने कपड़ों में दिनरात एक किए बंटाई में जोती गई बाजरे की फसल कटाई में लग रहा था कि बारिश ने लगातार काम बाधित कर दिया। रम ने अश्रुपूरित नेत्रों से आसमान की ओर देखते हुए कहा-लगता इस वर्ष भी हमें आधा भूखो सोना पड़ेगा। इस बार कपड़े खरीदने थे वो भी नहीं खरीद पाएंगे। राम कभी अर्धनग्न पत्नी को देखता तो कभी बच्चों की ओर देखता। बारिश में भीगकर बच्चे कांप रहे थे। राम की पत्नी एवं बच्चे हाथ जोड़कर रुआसे चेहरे से इंद्र देव को याद कर बारिश रोकने की गुहार लगा रहे थे। पर क्या देखते ही देखते सारा बाजरा बारिश में बह गया। अब तो कोई इस परिवार की सुनने वाला नहीं दिखाई पड़ रहा था। राम की पत्नी ने कहा-भगवान भी गरीबों की नहीं सुनता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
पूरा गरीब परिवार फटे पुराने कपड़ों में दिनरात एक किए बंटाई में जोती गई बाजरे की फसल कटाई में लग रहा था कि बारिश ने लगातार काम बाधित कर दिया। रम ने अश्रुपूरित नेत्रों से आसमान की ओर देखते हुए कहा-लगता इस वर्ष भी हमें आधा भूखो सोना पड़ेगा। इस बार कपड़े खरीदने थे वो भी नहीं खरीद पाएंगे। राम कभी अर्धनग्न पत्नी को देखता तो कभी बच्चों की ओर देखता। बारिश में भीगकर बच्चे कांप रहे थे। राम की पत्नी एवं बच्चे हाथ जोड़कर रुआसे चेहरे से इंद्र देव को याद कर बारिश रोकने की गुहार लगा रहे थे। पर क्या देखते ही देखते सारा बाजरा बारिश में बह गया। अब तो कोई इस परिवार की सुनने वाला नहीं दिखाई पड़ रहा था। राम की पत्नी ने कहा-भगवान भी गरीबों की नहीं सुनता।
**होशियार सिंह, लेखक,कनीना,हरियाणा**
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